75 workers honoured for exemplary contribution; sanitation workers also felicitated under Swachhata Hi Seva and Special Campaign 6.0
Bilaspur/Korba. On the occasion of Vishwakarma Jayanti and the birthday of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi, South Eastern Coalfields Limited (SECL) organised the second edition of the ‘SECL Vishwakarma Awards’ at its Headquarters in Bilaspur today. A total of 75 workers, who have made notable contributions to SECL’s mining and operational activities, were felicitated on the occasion.
The programme was attended by Shri Biranchi Das, Director (Human Resources), SECL; Shri Ramesh Chandra Mohapatra, Director (Technical/Operations); and Shri Nripendra Nath, Director (Technical/Projects & Planning), Additional Charge, along with members of the Steering Committee, Welfare Board, Safety Committee, representatives of trade unions, CISTEA, OBC, SC/ST and other associations, Heads of Departments, and officers and employees from SECL’s operating areas.
Organised on the occasion of Vishwakarma Jayanti, the ceremony recognised 75 regular and contractual employees for their exemplary contribution in operations, maintenance, supervisory and other technical activities at SECL’s mines. The second edition of the SECL Vishwakarma Awards reflects the company’s continued endeavour to recognise and appreciate the contribution of its frontline workforce.
Speaking on the occasion, Shri Biranchi Das, Director (HR), SECL, said that Lord Vishwakarma symbolises creation, skill and dedication to work. He said that the workers engaged in the mining industry are making a significant contribution to the nation’s energy security through their skill, hard work and commitment. He added that felicitating the workers on Vishwakarma Jayanti and the birthday of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi is a gesture of respect and gratitude for their contribution.
Message from the Union Minister for Coal and Mines
During the programme, a message conveyed by Hon’ble Union Minister for Coal and Mines Shri G. Kishan Reddy for the coal workers was also read out. The message highlighted the significant contribution of coal workers towards the country’s energy security and development, and expressed appreciation for their hard work, dedication and role in nation-building.
Sanitation Workers Also Felicitated under Swachhata Hi Seva Special Campaign 6.0
As part of the activities under Swachhata Hi Seva and Special Campaign 6.0, sanitation workers who contribute to maintaining cleanliness and ensuring clean and well-organised workplaces at SECL were also felicitated to acknowledge their efforts and encourage them.
On the occasion, the importance of making cleanliness an integral part of the daily work culture and maintaining workplaces that are clean, safe and well-organised was emphasised.
Under Special Campaign 6.0, various activities are being undertaken across SECL Headquarters and its operating areas, focusing on cleanliness, disposal of pending matters, optimum utilisation of space, records management and effective management of e-waste, among other initiatives.
The programme organised on Vishwakarma Jayanti and the birthday of Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi carried a message of respect for work, recognition of skill, commitment to cleanliness and dedication towards the nation’s energy security.
कुपोषण मुक्ति, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा आंगनबाड़ी गतिविधियों के प्रति करेगा जागरूक
कोरबा, 17 सितंबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के तहत आज जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर से सेवा संकल्प रथ को जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह, निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर, जनप्रतिनिधि गोपाल मोदी एवं डॉ. राजीव सिंह, कलेक्टर कुणाल दुदावत, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत प्रतीक जैन तथा नगर पालिक निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय,सहायक कलेक्टर विशाल जायसवाल, महिला एवं बाल विकास अधिकारी बसन्त मिंज सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
सेवा संकल्प रथ जिले के सभी पांचों विकासखंडों में विकासखंड मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेगा। रथ के माध्यम से ग्रामीण एवं आम नागरिकों को महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित विभिन्न गतिविधियों एवं जनकल्याणकारी प्रयासों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
सेवा संकल्प रथ के माध्यम से नागरिकों से बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र भेजने, कुपोषण को दूर करने के लिए आवश्यक प्रयास करने, गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल एवं पोषण पर ध्यान देने तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की जाएगी। साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा बच्चों के समुचित विकास के लिए शासन द्वारा संचालित कार्यक्रमों की जानकारी भी आमजन तक पहुंचाई जाएगी। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने सेवा संकल्प अभियान के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने तथा समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधिगण एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
बिजली उपभोक्ता से बिजली उत्पादक बने डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा, पीएम सूर्यघर योजना से बदली ऊर्जा की तस्वीर सूरज की रोशनी से रोशन हुआ घर, पीएम सूर्यघर योजना से बिजली बिल हुआ शून्य- डॉ कृष्ण कुमार
कोरबा 17 सितम्बर 2026। सूर्य की रोशनी को स्वच्छ ऊर्जा में बदलकर घर की जरूरतें पूरी करने की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना परिवारों को नई ऊर्जा व्यवस्था अपनाने का अवसर दे रही है। योजना के माध्यम से रूफटॉप सोलर लगाने पर मिलने वाली केंद्र एवं राज्य सरकार की सब्सिडी से परिवारों के लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान हो रहा है। इससे बिजली खर्च में कमी के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। कोरबा विकासखंड के ग्राम बेलाकछार निवासी सेवानिवृत्त प्रधानपाठक डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा ने भी परंपरागत ऊर्जा पर निर्भरता कम करते हुए अपने घर की छत पर सोलर प्लांट स्थापित कराया है। सूर्य के प्रकाश से प्राप्त हरित ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतें पूरी करने के साथ डॉ. चंद्रा परिवार ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी भागीदारी निभा रहा है। अपने घर में स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन कर उसका उपयोग कर पाने को लेकर पूरा परिवार गर्व और संतोष महसूस कर रहा है। डॉ. चंद्रा ने अपने मकान की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कराया है। लगभग 1.90 लाख रुपये की लागत से लगे इस संयंत्र के लिए उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया और स्वीकृति मिलने पर सोलर प्लांट स्थापित कराया। डॉ चंद्रा ने कहा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है, जो न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि आमजन की आर्थिक बचत का जरिया भी बन रही है। सोलर प्लांट लगने से पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल करीब 5 से 6 हजार रुपये तक आता था। बिजली के वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान होने की चिंता भी बनी रहती थी। अब सौर ऊर्जा से घर की बिजली की जरूरतें पूरी होने के कारण उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। पंखा, बल्ब, टीवी, एसी सहित घरेलू उपकरणों का उपयोग सोलर से उत्पादित बिजली से किया जा रहा है। डॉ. कृष्ण कुमार चंद्रा अपने अनुभव बताते हुए कहते हैं, “पहले हर महीने 5 से 6 हजार रुपये तक बिजली बिल देना पड़ता था। वोल्टेज ऊपर-नीचे होने से इलेक्ट्रॉनिक सामान खराब होने की चिंता भी रहती थी। अब सोलर प्लांट लगने के बाद बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। सूर्य के प्रकाश से मिलने वाली स्वच्छ ऊर्जा से घर की जरूरतें पूरी हो रही हैं। अपने घर में बिजली का उत्पादन कर पा रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है।” वे बताते हैं कि सौर ऊर्जा मिलने के बाद परिवार बिजली के उपयोग को लेकर पहले से अधिक सजग हुआ है। जरूरत के अनुसार बिजली का इस्तेमाल करते हुए ऊर्जा की बचत पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सोलर प्लांट से जरूरत से अधिक बिजली बनने पर उसे ग्रिड में प्रवाहित कर बिजली उत्पादन में योगदान देने की व्यवस्था भी है। डॉ. चंद्रा का परिवार अब केवल बिजली का उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि बिजली उत्पादन में भी भागीदारी कर रहा है। डॉ. चंद्रा कहते हैं, “पीएम सूर्यघर योजना से हमें बिजली खर्च में बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का अवसर मिला है। सूर्य की रोशनी से मिलने वाली हरित ऊर्जा स्वच्छ और प्रदूषण रहित है। केंद्र एवं राज्य सरकार से मिली सब्सिडी के कारण सोलर प्लांट लगाना हमारे लिए आसान हुआ। अब हमारा परिवार बिजली के मामले में अधिक आत्मनिर्भर महसूस करता है और अपने घर में बिजली का उत्पादन कर पाने पर गर्व भी है। इस योजना का लाभ उपलब्ध कराने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”
पीएम जनमन सड़क योजना ने मांझीपारा की राह आसान की, अस्पताल से स्कूल तक पहुंच हुई सुगम कोरबा 17 सितंबर 2026। कोरबा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम पंचायत मदनपुर के आश्रित ग्राम मांझीपारा में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए गांव तक पहुंचने वाली राह लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई थी। मदनपुर से मांझीपारा तक का करीब 2.2 किलोमीटर का रास्ता कच्चा था। गर्मी में धूल और बारिश में कीचड़ इस रास्ते की पहचान बन जाता था। गांव के लोगों के लिए यह केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली कई मुश्किलों की वजह था।
बारिश शुरू होते ही इस कच्चे रास्ते पर चलना मुश्किल हो जाता था। कीचड़ में पैर धंसते थे, कपड़े खराब हो जाते थे और वाहन चलाना भी जोखिम भरा हो जाता था। किसी को अस्पताल जाना हो, बच्चों को स्कूल पहुंचाना हो या जरूरी काम से शहर जाना हो, हर बार इसी रास्ते से गुजरना पड़ता था। कई बार जरूरी काम होने के बावजूद खराब रास्ते के कारण समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों की बसाहट वाले ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी गई। इसका सीधा लाभ मदनपुर के मांझीपारा में रहने वाले परिवारों को भी मिला। अब मांझीपारा की तस्वीर बदल चुकी है मदनपुर से मांझीपारा तक लगभग 2.2 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण कराया गया है। इसके लिए लगभग 129.65 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। सड़क निर्माण का कार्य 20 जनवरी 2025 को प्रारंभ हुआ और लगभग एक वर्ष में पूर्ण कर लिया गया। पक्की सड़क बनने के बाद मांझीपारा सीधे मदनपुर से जुड़ गया है और आगे मुख्य मार्ग के माध्यम से ग्रामीणों के लिए शहर तक पहुंचना भी आसान हो गया है। इस सड़क ने ग्रामीणों की केवल आवाजाही आसान नहीं की, बल्कि उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जरूरी सेवाओं तक पहुंच के नए रास्ते खोल दिए हैं। अब स्कूल जाने में नहीं रुकते कदम मदनपुर निवासी युवक अरूण कुमार राठिया बताते हैं कि पहले इस रास्ते पर आना-जाना बहुत मुश्किल था। बारिश के दिनों में कीचड़ के बीच से होकर स्कूल और दूसरे जरूरी कामों के लिए जाना पड़ता था। अब पक्की सड़क बन जाने से मोटरसाइकिल, साइकिल और दूसरे वाहन आसानी से चल रहे हैं। पहले जिस दूरी को तय करने में परेशानी होती थी, अब वही रास्ता कम समय में पूरा हो जाता है। कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले आदित्य के लिए भी सड़क बनने से स्कूल की राह आसान हुई है। वह बताते हैं कि पहले रास्ते में कीचड़ होने से आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। अब पक्की सड़क बनने के बाद स्कूल जाना आसान और सुविधाजनक हो गया है।
बीमारी में अस्पताल तक पहुंचना हुआ आसान गांव की वृद्धा नीरो बाई बताती हैं कि पहले सड़क की हालत खराब होने के कारण गांव से बाहर जाना बहुत मुश्किल था। खासकर जब कोई बीमार पड़ता था, तब परिवार की चिंता और बढ़ जाती थी। अब पक्की सड़क बनने से पैदल चलना भी आसान हो गया है और वाहन भी गांव तक आसानी से पहुंच जाते हैं। वह बताती हैं कि अब किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो तो वाहन और एंबुलेंस को गांव तक पहुंचने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती। समय पर इलाज मिलना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
गांव तक पहुंची विकास की राह
गांव के टीकाराम भी सड़क बनने के बाद आए बदलाव को महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब आने-जाने में बहुत सुविधा हो गई है। वहीं मांझीपारा निवासी लल्लूराम बताते हैं कि पहले मदनपुर से मांझीपारा तक का रास्ता तय करना मुश्किल होता था, लेकिन अब पक्की सड़क बनने के बाद दूरी आसानी से पूरी हो जाती है। मदनपुर पहुंचने के बाद मुख्य मार्ग से शहर की ओर जाना भी सरल हो गया है। पक्की सड़क ने मांझीपारा को केवल मदनपुर से नहीं जोड़ा, बल्कि ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और अन्य जरूरी सेवाओं से जोड़ने का काम किया है। अब गांव में बाहर से आने वाले लोगों और वाहनों की आवाजाही भी आसान हुई है। सरकारी योजनाओं और जरूरी सेवाओं की पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम हुई है।
सड़क बनी तो बदली गांव की रफ्तार
कभी बारिश में जिस रास्ते पर कुछ कदम चलना भी चुनौती था, आज उसी रास्ते पर मोटरसाइकिल और अन्य वाहन आसानी से दौड़ रहे हैं। बच्चों के स्कूल जाने की राह आसान हुई है, बुजुर्गों को आने-जाने में सहूलियत मिली है और बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने की चिंता कम हुई है। मांझीपारा की यह पक्की सड़क केवल सीमेंट और डामर से बनी सड़क नहीं है। यह दूरस्थ आदिवासी अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली राह है। इसने गांव के लोगों के लिए सुविधाओं तक पहुंच आसान की है और उनके भीतर आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया है। जहां कभी बारिश के दिनों में कीचड़ रास्ता रोक देता था, आज वहीं पक्की सड़क गांव के विकास की नई राह खोल रही है। पीएम जनमन के माध्यम से मांझीपारा तक पहुंची यह सड़क विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए सुविधा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में बढ़ता हुआ एक महत्वपूर्ण कदम है।