बिलासपुर/जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पति ने पत्नी पर उसे सांवला और मोटा कहकर अपमानित करने समेत कई आरोप लगाए। इन्हें मानसिक क्रूरता बताते हुए तलाक की मांग की। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन आरोपों को तलाक देने के लिए पर्याप्त नहीं माना और पति की अपील खारिज कर दी।
जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने जांजगीर फैमिली कोर्ट के 28 अगस्त 2024 के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि पत्नी की ओर से की गई कथित क्रूरता और परित्याग को साबित करने के लिए पति पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
हाईकोर्ट ने आरोपों को तलाक देने के लिए पर्याप्त नहीं माना और पति की अपील खारिज कर दी।
2019 में हुई थी शादी, कुछ महीने बाद अलग रहने लगे
चांपा निवासी आकाश घोष की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ निवासी पूजा सीत से हुई थी। पति का कहना था कि, शादी के करीब दो-तीन महीने बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। उसके अनुसार पत्नी बार-बार मायके चली जाती थी और ठीक से व्यवहार नहीं करती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया कि उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती थी।
पति के मुताबिक, पत्नी एक रिश्तेदार की शादी में राजस्थान गई थी और करीब 25 दिन बाद लौटी। इसी दौरान उसे गर्भ में जुड़वां बच्चों के गर्भपात की जानकारी मिली। बाद में पत्नी की मां उसे इलाज के लिए रायगढ़ ले गई और इसके बाद वह वापस चांपा नहीं आई।
पति ने कहा- वापस लाने की कई कोशिशें कीं
पति ने कोर्ट को बताया कि, उसने पत्नी को वापस लाने के लिए कई प्रयास किए। 5 नवंबर 2019 को जांजगीर काउंसिलिंग सेंटर में संपर्क किया गया। इसके बाद 16 दिसंबर 2019 को समाज के लोगों के साथ रायगढ़ जाकर भी पत्नी को वापस लाने की कोशिश की गई।
वहीं, पत्नी की ओर से पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा की कार्यवाही शुरू कर दी गई, जो रायगढ़ न्यायालय में लंबित है।
पत्नी का आरोप- पति का दूसरी महिला से संबंध था
पत्नी ने पति के आरोपों को खारिज करते हुए अलग कहानी कोर्ट के सामने रखी। उसका कहना था कि पति के दूसरी महिला से संबंध थे। इसकी जानकारी लगने के बाद वह शराब पीने लगा और उसके साथ दुर्व्यवहार करता था।
पत्नी के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान भी पति ने उसकी पर्याप्त देखभाल और इलाज नहीं कराया। बीमारी बढ़ने पर उसकी मां उसे इलाज के लिए रायगढ़ ले गई। ठीक होने के बाद उसने पति और ससुराल वालों से वापस ले जाने के लिए कहा, लेकिन वे उसे लेने नहीं आए।
पत्नी की मां ने 24 फरवरी 2020 को रायगढ़ एसपी से शिकायत भी की थी। इसके बाद घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत न्यायालय में कार्यवाही शुरू की गई।
20 लाख रुपए देने पर तलाक की बात भी सामने आई
इस मामले की सुनवाई के दौरान पति की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस का भी रिकॉर्ड में उल्लेख हुआ। इसमें 20 लाख रुपए दिए जाने पर पत्नी के तलाक के लिए तैयार होने की बात कही गई थी।
हालांकि पत्नी ने इसे तलाक की कीमत बताए जाने से इनकार किया। उसका कहना था कि उसने यह रकम एकमुश्त भरण-पोषण के तौर पर मांगी थी।
‘काला-मोटा’ कहने के आरोप पर कोर्ट ने क्या कहा?
पति की ओर से पत्नी पर उसे सांवला और मोटा कहकर अपमानित करने का आरोप भी लगाया गया था। पति ने इसे मानसिक क्रूरता का हिस्सा बताते हुए तलाक का आधार बनाया।
हाईकोर्ट ने मामले के पूरे तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखने के बाद कहा कि इस मामले की परिस्थितियों में इस तरह के कथित व्यवहार को तलाक देने के लिए पर्याप्त क्रूरता नहीं माना जा सकता।
राजस्थान जाने और गर्भपात की घटना पर भी कोर्ट ने देखे तथ्य
कोर्ट ने यह भी पाया कि, पत्नी राजस्थान अकेले नहीं गई थी। वह पति, सास और अपनी मां के साथ रिश्तेदार की शादी में गई थी। पत्नी ने कोर्ट में बताया कि वह वहां करीब 10-11 दिन रही थी।
कोर्ट ने रिकॉर्ड से यह भी देखा कि बीमारी के दौरान पति पत्नी को चांपा लेकर आया था और अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके बाद उसकी मां उसे रायगढ़ ले गई।
पत्नी ने यह भी कहा कि पति के शराब पीकर मारपीट करने की कोई तत्काल पुलिस रिपोर्ट उसने दर्ज नहीं कराई थी। कोर्ट ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों से पति की ओर से लगाए गए आरोप निर्णायक रूप से साबित नहीं होते।
अलग रहना परित्याग नहीं, मंशा भी साबित करनी होगी
पति ने पत्नी पर उसे छोड़कर अलग रहने का आरोप भी लगाया था। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि, सिर्फ पत्नी का अलग रहना अपने आप में ‘परित्याग’ नहीं माना जा सकता।
पति को यह साबित करना जरूरी था कि पत्नी ने बिना उचित कारण वैवाहिक जीवन से खुद को अलग किया और उसके पीछे वैवाहिक संबंध खत्म करने की स्पष्ट मंशा थी।
कोर्ट ने पत्नी और उसकी मां के बयानों का भी परीक्षण किया। उनके अनुसार गर्भपात के समय पति के परिवार के सदस्यों ने ही उसे उसकी मां के साथ भेजा था। पत्नी का कहना था कि इसके बाद पति ने उसे वापस लाने के लिए कोई वास्तविक प्रयास नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया उल्लेख
डिवीजन बेंच ने मानसिक क्रूरता से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के समर घोष बनाम जया घोष मामले का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने माना कि मानसिक क्रूरता तय करने के लिए कोई एक तय फॉर्मूला नहीं हो सकता। हर मामले को उसके अलग तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर देखना होता है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने पाया कि पति की ओर से लगाए गए आरोप पर्याप्त ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित नहीं हुए। इसलिए तलाक देने का आधार नहीं बनता। कोर्ट ने परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की याचिका खारिज कर दी।
रायपुर, 20 सितंबर 2026। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जापान में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे भारतीय दल के सभी खिलाडि़यों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
श्री चौधरी ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना प्रत्येक खिलाड़ी के लिए गौरव का विषय है। भारतीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और खेल भावना के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भारतीय दल के सभी खिलाडि़यों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लें और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करें।
BMC छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 में वित्त मंत्री ने कहा-विकसित भारत के लक्ष्य के लिए स्वस्थ युवा आबादी सबसे बड़ी ताकत
नवा रायपुर में देशभर से आए कैंसर विशेषज्ञों का किया स्वागत, चिकित्सा क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञ सेवाओं को बढ़ावा देने पर दिया जोर
रायपुर, 20 सितम्बर 2026। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी आज नवा रायपुर में बाल्को मेडिकल सेंटर, eCancer तथा टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा आयोजित चतुर्थ वार्षिक BMC छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 में शामिल हुए। कॉन्क्लेव की थीम “Restoring Balance to Cancer Care” पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कैंसर केयर, स्वास्थ्य सेवाओं की भविष्य की चुनौतियों और देश की युवा आबादी को स्वस्थ बनाए रखने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। देश की औसत आयु करीब 29 वर्ष है, जबकि छत्तीसगढ़ की औसत आयु करीब 24 वर्ष है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह युवा आबादी भारत की आर्थिक प्रगति की सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस युवा शक्ति का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि आने वाले 10-20 वर्षों में भारत की जनसांख्यिकी में तेजी से बदलाव होगा और आबादी की औसत आयु बढ़ेगी। ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती होगी कि देश आर्थिक रूप से विकसित होने से पहले अस्वस्थ न हो जाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मानव संसाधन किसी भी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। इसलिए स्वास्थ्य क्षेत्र में समय रहते तैयारी, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ सेवाओं और शोध को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
स्वस्थ आबादी विकसित भारत की आधारशिला
श्री चौधरी ने कहा कि आर्थिक विकास की गति के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की आर्थिक विकास यात्रा की रीढ़ है, लेकिन इस आबादी को स्वस्थ रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के साथ-साथ जागरूकता, समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर निरंतर काम किया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के शुरुआती वर्षों में पूरे प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। उन्होंने बताया कि लगभग 25-26 वर्ष पहले राज्य पीएमटी में करीब 50वीं रैंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी मेडिकल सीट प्राप्त करना कठिन होता था, क्योंकि पूरे राज्य में रायपुर में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। उन्होंने कहा कि उस स्थिति से आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया है और आने वाले दो वर्षों में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 20 से अधिक होने की दिशा में राज्य आगे बढ़ रहा है।
नवा रायपुर में देशभर से आए विशेषज्ञों का स्वागत
श्री चौधरी ने बाल्को मेडिकल सेंटर और सर्जिकल रिसर्च फाउंडेशन की ओर से छत्तीसगढ़ तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों और संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. यशवंत कश्यप, डॉ. दिवाकर पांडे, डॉ. आलोक कुमार स्वाइन और डॉ. अभिनव इंगले सहित आयोजन से जुड़े चिकित्सकों को धन्यवाद दिया तथा देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों का नवा रायपुर में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर छत्तीसगढ़ की ग्रीन कैपिटल सिटी है और यह एक ग्रीनफील्ड सिटी के रूप में विकसित की जा रही है। नवा रायपुर के नियोजित विकास, हरित क्षेत्र और मनोरंजन सुविधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने देशभर से आए चिकित्सकों से कॉन्क्लेव के साथ-साथ शहर को भी देखने और समझने का आग्रह किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि नवा रायपुर के विकास में स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन प्रदेश में चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करते हैं तथा कैंसर उपचार के क्षेत्र में नई तकनीकों और बेहतर उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं।
कॉन्क्लेव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए चिकित्सक, कैंसर विशेषज्ञ और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र में कैंसर केयर को अधिक प्रभावी, संतुलित और मरीज-केंद्रित बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रशिक्षक सौरभ कुमार जैन एवं कल्पना सिंह ने शिक्षकों को सिखाए प्रभावी कक्षा प्रबंधन के गुण
कोरबा, 20 सितंबर 2026। खरहरकुड़ा, मडवारानी स्थित नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), भुवनेश्वर के उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 19 और 20 सितंबर को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य विषय ‘प्रभावी कक्षा प्रबंधन’ (Classroom Management) रहा, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में सैनिक स्कूल अंबिकापुर के संस्कृत शिक्षक सौरभ कुमार जैन एवं डीपीएस की प्राचार्या श्रीमती कल्पना सिंह ने मुख्य स्रोत व्यक्ति (Resource Persons) के रूप में शिरकत की। दोनों विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभवों और गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण और कक्षा प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया।
सौरभ कुमार जैन ने विभिन्न गतिविधियों और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए बताया कि कक्षा प्रबंधन केवल अनुशासन बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक अनुकूल और सकारात्मक वातावरण तैयार करने की सतत प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों, समय प्रबंधन और संसाधनों के सही उपयोग के गुर सिखाए।
वहीं, श्रीमती कल्पना सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कक्षा में सकारात्मक वातावरण निर्मित करने, विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के व्यावहारिक उपाय साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के चेयरमैन पीएमजेएफ़ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल तथा प्राचार्या शोमा सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस तरह के आयोजनों को शिक्षकों के पेशेवर विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और आए हुए स्रोत व्यक्तियों व प्रतिभागी शिक्षकों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न interactive गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और कक्षा प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किए। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।