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छत्तीसगढ़

शिक्षकों के विरोध के बाद पाठयपुस्तक निगम ने बदला फैसला:किताबें अब सीधे स्कूलों तक भेजी जाएंगी, डिपो में स्कैनिंग की अनिवार्यता खत्म

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ पाठयपुस्तक निगम के किताब वितरण को लेकर हो रही परेशानी के बाद बड़ा बदलाव किया गया है। अब स्कूलों को डिपो में जाकर किताबों की स्कैनिंग नहीं करनी होगी। इसके बजाय किताबें सीधे स्कूल पहुंचेंगी और वहीं पर स्कैनिंग की जाएगी।

छत्तीसगढ़ पाठय पुस्तक निगम के अध्यक्ष ने बताया कि किताबों की स्कैनिंग को लेकर समस्या आ रही थी। इसे देखते हुए अब यह तय किया गया है कि स्कूल सीधे किताबें डिपो से ले जाएंगे और डिपो में जो स्कैनिंग चल रही थी उसकी जगह स्कूल में ही जाकर किताबों को स्कैन करके रिसीविंग का अपडेट देंगे।

अब तक व्यावहारिक समस्या यह आ रही थी कि शिक्षकों को किताबों को डिपो में स्कैन करना पड़ रहा था। और एक स्कूल को स्कैन करने में 6 से 7 घंटे का वक्त लग रहा था। जिसे चलते सही समय पर किताबें स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रहे थी। और इसी बात का यह समाधान निकाला गया है।

छत्तीसगढ़ स्कूल एसोसिएशन की अन्य मांगों को लेकर पांडे ने बताया की पिछली दफा पुस्तक वितरण के दौरान एक बड़ा घपला सामने आया था। बच्चों तक स्कूल बच्चों तक किताबें नहीं पहुंच पाई थी। इस बार हमें चेक करेंगे कि प्राइवेट स्कूलों में भी किताबों का जो वितरण हूं वह सही तरीके से हो और हर बच्चे तक निशुल्क किताबें पहुंच पाएं। इसलिए स्कैनिंग की व्यवस्था बनाई गई है ताकि यह पता चले कि किस स्कूल ने कितनी किताबें उठाई है और कितने बच्चों को किताबें वितरण हुई है।

शिक्षकों ने किया विरोध

इससे पहले छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने गुरुवार को पाठ्यपुस्तक निगम कार्यालय के बाहर किताब वितरण के दौरान हो रही अव्यवस्थाओं को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। दरअसल, हुआ ये है कि प्रदेश भर के प्राइवेट स्कूल वालों को टीचरों को सरकारी पुस्तक लेने के लिए रायपुर बुलाया जा रहा है।

1 जुलाई को गरियाबंद के प्राइवेट स्कूलों को डिपो में सरकारी किताब लेने के लिए बुलाया गया था। गोदाम में सुबह 8 बजे से ही 80 स्कूलों के शिक्षक पहुंच गए। यहां आने के बाद पता चला कि किताब ले जाने से पहले उन्हें सभी की स्कैनिंग करनी होगी।

प्रदर्शन करते एसोसिएशन के सदस्य।

प्रदर्शन करते एसोसिएशन के सदस्य।

काम शुरू होते ही सर्वर डाउन हो गया। हर स्कूल को स्कैनिंग करने में 7-8 घंटे लगे। इसके चलते शिक्षक परेशान होते रहे। फाइनली सिर्फ 30 स्कूलों को ही पुस्तकें दी जा सकीं। जिसके बाद डिपो के सामने ही शिक्षकों ने हंगामा शुरू कर दिया। पूरी समस्या को लेकर अब एसोसिएशन ने भी निगम को घेरा है।

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बताया कि स्कैन करने में इतनी देरी हो रही है कि ज्यादा छात्र संख्या वाले स्कूलों को अपने स्कूल बंद कर किताबें लेने आना पड़ रहा है।

  • एसोसिएशन की मांग है कि पाठ्य पुस्तक निगम किताबें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के जरिए जिलों में उपलब्ध करवाए।
  • सरकारी स्कूलों में किताबें संकुल में दी जाती है। प्राइवेट स्कूलों को किताबें अपने स्कूल में ले जाकर बारकोड स्कैन करने की सुविधा दी जाए। जोकि निजी स्कूलों में स्टूडेंट्स की संख्या बहुत ज्यादा है। 10-10 हजार किताबें मौके पर स्कैन कर पाना संभव नहीं है।
  • पिछले यू डाइस की दर्ज संख्या के हिसाब से किताबें दी जा रही हैं। जबकि निजी स्कूलों में विद्यार्थी की संख्या इस वर्ष से बढ़ गई है। मौजूदा दर्ज संख्या के हिसाब से किताबें प्राइवेट स्कूलों को दी जाए।
  • पाठ्यपुस्तक निगम डीपो में बुधवार को जमकर हंगामा हुआ
    गरियाबंद से पहुंचे शिक्षकों को पुस्तक बांटते-बांटते रात हो गई थी। उनके लिए ना तो वॉशरूम की व्यवस्था की गई, न ही रुकने की। पानी और खाने की व्यवस्था भी नहीं हुई थी। अगले दिन कांकेर जिले के स्कूल डीपो पहुंच गए। उन्हें भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
    कई स्कूल वापस लौट गए थे
    इस दौरान कई स्कूल वापस चले गए। वहीं जो लंबी दूरी तय कर पहुंचे थे, वो अपनी बारी का इंतजार करते रहे। अंत में शिक्षको‍ं के सब्र का बांध टूट गया। भूखे-प्यासे शिक्षकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। विवाद बढ़ता देख मौके पर तहसीलदार और पुलिस टीम पहुंच गई। काफी समझाइश देने के बाद वे शांत हुए।


    बुक डिपो के बाहर शिक्षकों ने किया था प्रदर्शन।
    बुक डिपो के बाहर शिक्षकों ने किया था प्रदर्शन।
    स्कूलों को बंद करना पड़ा
    फिर डिपो से पुस्तक ले जाने का सिलसिला रात तक जारी रहा। कांकेर और गरियाबंद के कई स्कूल इसी वजह से दो दिन बंद भी रहे। प्राइवेट स्कूल संचालक संघ के अध्यक्ष सुबोध राठी ने कहा कि सरकारी स्कूलों के लिए अलग नियम और प्राइवेट के लिए अगल नियम बनाया गया है। उनकी किताबें सीधे संकुल केंद्र में पहुंच रही हैं।
    पाठ्यपुस्तक निगम पर भेद-भाव का लगाया आरोप
    यहां से स्कूलों में भेजी जा रही हैं। स्कैनिंग के बाद बच्चों को बांटी जा रही हैं। हमें डीपो में बुलाकर यहां घंटों पुस्तकों को स्कैन करवाकर किताबें दी जा रही हैं। हमनें पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष और एमडी से बात की लेकिन वे कुछ सुनने को ही तैयार नहीं हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

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छत्तीसगढ़

सक्ती में खुलेगा कृषि विज्ञान केंद्र:छत्तीसगढ़ के लिए 3.65 लाख नए पीएम आवास मंजूर, 2 लाख परिवारों का एकसाथ गृह प्रवेश

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सक्ती। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आवास योजना को बड़ा विस्तार मिला है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ (पीएमएवाय-जी) के तहत 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की मंजूरी दी है। सक्ती जिले में आयोजित ‘प्रधानमंत्री आवास गृह प्रवेश’ और ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा की और स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा।

इस अवसर पर प्रदेश भर में नवनिर्मित 2 लाख आवासों में हितग्राहियों का एक साथ गृह प्रवेश कराया गया और उन्हें चाबियां सौंपी गईं। चौहान ने सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने तथा बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा भी की।

चौहान ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक पीएम आवास बनकर तैयार हो रहेहैं। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास के साथ सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

गरीब का पक्का घर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे: शर्मा

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य हो रहा है।

कका और कांग्रेस ने राज्य को तबाह किया: चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और ‘कक्का’(कका) ने मिलकर छत्तीसगढ़ को तबाह कर दिया। उन्होंने सक्ती जिले में शामिल होने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा के दौरान यह बात कही।

चौहान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के आवास के लिए भेजी गई राशि को कांग्रेस सरकार ने दबाकर रखा और प्रदेश के जरूरतमंदों को पक्के मकानों से वंचित किया। उन्होंने याद दिलाया कि गरीबों के हक के लिए भाजपा ने ‘मोर आवास मोर अधिकार’ आंदोलन चलाया था, जिसमें कार्यकर्ताओं ने लाठियां तक खाईं।

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छत्तीसगढ़

CGPSC केस, भूपेश के OSD रहे एडिशनल कलेक्टर गिरफ्तार:दावा- उत्कर्ष चंद्राकर के साथ वॉट्सऐप चैट मिली, ED को 6 दिन की रिमांड

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने चेतन बोरघारिया को 6 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है।

ED ने कोर्ट में CGPSC घोटाले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के साथ चेतन बोरघारिया की वॉट्सऐप चैट मिलने की जानकारी दी। इसी आधार पर कोर्ट ने पूछताछ के लिए ED को उनकी 6 दिन की रिमांड दी है। अब ED उनसे CGPSC गड़बड़ी मामले में पूछताछ करेगी। चेतन बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में काम कर चुके हैं।

बता दें कि 6 दिन पहले ED ने घोटाले में आरोपी कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को कोर्ट में पेश किया था। ED ने आरोपी उत्कर्ष की रिमांड बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं दिया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी उत्कर्ष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया।

ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 दिन पहले ही धमतरी और बलरामपुर में कार्रवाई की थी। धमतरी में एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया के अमलतास पुरम स्थित घर पर टीम ने छापा मारा गया, जबकि बलरामपुर में भी उनसे पूछताछ की गई थी।

इधर, CGPSC घोटाले की जांच में कैंडिडेट्स को परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपए लेने की बात सामने आई है। ED के वकील सौरभ पांडेय के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका अभ्यर्थियों तक प्रीलिम्स और मेन्स के पेपर पहुंचाने से जुड़ी थी।

10 दिन पहले ईडी ने एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया के ठिकानों पर रेड मारी थी।

10 दिन पहले ईडी ने एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया के ठिकानों पर रेड मारी थी।

नौकरी दिलाने का दावा, 3 करोड़ से ज्यादा वसूली

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क तैयार किया था।

अभ्यर्थियों को परीक्षा के अलग-अलग चरणों में मदद और प्री परीक्षा से इंटरव्यू तक सफलता की गारंटी देने का दावा किए जाने की बात सामने आई है। इसके बदले कैंडिडेट्स से 3 करोड़ रुपए से अधिक रकम वसूले जाने का दावा किया गया है।

ED ने इससे पहले कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को अरेस्ट किया गया था।

ED ने इससे पहले कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को अरेस्ट किया गया था।

पूर्व CM के PA और OSD के नाम का इस्तेमाल

जांच एजेंसी का दावा है कि, उत्कर्ष चंद्राकर ने कैंडिडेट्स से पैसे जुटाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक (PA) और अपने मामा के.के. चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे OSD के नाम और प्रभाव का भी इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को प्रभावित करने की बात सामने आई है।

जानिए क्या है CGPSC घोटाला

यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।

इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।

इस घोटाले में सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार किया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच में जुटी है।

एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट की पड़ताल के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के साथ एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम कहां से आई और किन लोगों तक पहुंचाई गई।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 3 नेताओं को दिल्ली बुलाया गया:राष्ट्रीय सचिव की रेस में कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा, तीनों का हुआ इंटरव्यू

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 3 नेता कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है। तीनों नेताओं के इंटरव्यू राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से लिए जा रहे हैं।

दिल्ली बुलाए जाने के बाद अब नजर इस बात पर है कि इनमें से किसे राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलती है। हालांकि अभी किसी नेता की नियुक्ति तय नहीं हुई है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

राहुल-प्रियंका समेत राष्ट्रीय नेतृत्व ले रहा इंटरव्यू

जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय सचिवों के चयन की प्रक्रिया में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की भूमिका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत राष्ट्रीय नेतृत्व इस प्रक्रिया से जुड़ा है।

छत्तीसगढ़ से 3 नेताओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रदेश के नेताओं की राष्ट्रीय संगठन में भूमिका बढ़ने की संभावना बनी है।

कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है।

कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है।

चयन हुआ तो प्रदेश से राष्ट्रीय संगठन में बढ़ेगी हिस्सेदारी

तीनों नेताओं के पास युवा कांग्रेस, प्रदेश कांग्रेस और राष्ट्रीय संगठन में काम करने का अनुभव है। ऐसे में राष्ट्रीय सचिव के लिए इंटरव्यू तक पहुंचना ही प्रदेश कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

अगर इनमें से किसी नेता का चयन होता है तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस को राष्ट्रीय संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ प्रदेश के युवा नेताओं की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका भी बढ़ सकती है। फिलहाल सभी की नजर दिल्ली में चल रही चयन प्रक्रिया और उसके नतीजे पर है।

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