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पाक के नूर खान एयरबेस पर अमेरिका का नियंत्रण! पाकिस्तानी विशेषज्ञ के दावे से मचा बवाल

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नई दिल्ली /रावलपिंडी, एजेंसी। पाकिस्तान में एक नया सुरक्षा विवाद उस समय खड़ा हो गया जब देश के प्रसिद्ध सुरक्षा विश्लेषक इम्तियाज गुल ने यह सनसनीखेज दावा किया कि  रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस  पर अमेरिका का “नियंत्रण” है। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में भारत द्वारा  ऑपरेशन सिंदूर के तहत इसी एयरबेस को निशाना बनाया गया था।गुल का कहना है कि इस  रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील एयरबेस पर अमेरिकी विमानों की नियमित मौजूदगी देखी गई है, और पाकिस्तान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भी इस बेस में हस्तक्षेप की इजाजत नहीं है। यह स्थिति पाकिस्तान की संप्रभुता, पारदर्शिता और सैन्य स्वायत्तता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

क्या पाकिस्तान ने सौंप दिया अपना बेस? 
इम्तियाज गुल  द्वारा साझा किए गए एक वायरल वीडियो में उन्होंने यह दावा किया कि **नूर खान एयरबेस अब पाकिस्तान के नहीं, बल्कि अमेरिका के नियंत्रण में है। उनका आरोप है कि यह स्थिति किसी अघोषित समझौते का नतीजा है, और न तो संसद और न ही जनता को इस बारे में कोई जानकारी है। उनका यह बयान भारत के हालिया सैन्य जवाबी कार्रवाई  के बाद सामने आया, जिसने इस दावे को और अधिक राजनीतिक रूप से विस्फोटक बना दिया है। गुल के अनुसार, नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी विमानों की आवाजाही लगातार देखी जाती है  लेकिन उनके मिशन, उपकरण या कार्गो के बारे में कोई पारदर्शिता नहीं है । उन्होंने यह भी कहा कि यह सहयोग एक छुपे हुए रक्षा समझौते का हिस्सा हो सकता है, जिससे पाकिस्तान की सैन्य स्वतंत्रता पर गंभीर असर पड़ रहा है।

नूर खान एयरबेस की पाक सेना में अहमियत 

  •  यह एयरबेस इस्लामाबाद और रावलपिंडी  के बीच स्थित है
  •  पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय और  रणनीतिक योजना डिवीजन (एसपीडी) के बेहद करीब
  •  परमाणु हथियारों की कमान संभालने वाले डिवीजन से इसकी निकटता इसे और संवेदनशील बनाती है
  •   यहीं से हवाई गतिशीलता अभियानों का नियंत्रण भी होता है

 भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई कार्रवाई के दौरान,  भारतीय वायुसेना ने नूर खान एयरबेस को भी टारगेट किया। यह केवल सैन्य नहीं, बल्कि  राजनीतिक और प्रतीकात्मक तौर पर भी एक सशक्त संदेश था, क्योंकि यह एयरबेस पाक सेना के कमांड सेंटर्स के बेहद नजदीक  है।
 

सरकारी चुप्पी से और बढ़ा शक 
अब तक न पाकिस्तान सरकार और न सेना ने इम्तियाज गुल के आरोपों को  स्वीकार या खंडन किया है। लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गर्माया हुआ है, और पाकिस्तानी नागरिकों के बीच यह बहस चल रही है कि क्या  देश की संप्रभुता को विदेशी हाथों में सौंपा जा चुका है। यह घटना पाकिस्तान में अमेरिकी सैन्य प्रभाव की गहराई  और  स्थानीय पारदर्शिता की कमी  को लेकर गंभीर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में यदि इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, तो यह विवाद और भी व्यापक राजनीतिक संकट में बदल सकता है।

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

काठमांडू,

भारत और नेपाल के बीच यात्रा और व्यापार करने वालों के लिए अच्छी खबर है। नेपाल सरकार ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी रू.200 और रू.500 के भारतीय नोट अधिकतम रू.25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर इस संबंध में नियम स्पष्ट किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि 8 नवंबर 2016 से पहले जारी रू.500 और रू.1,000 के भारतीय नोट पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इन पुराने नोटों को नेपाल में लाने या ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

नेपाली नागरिकों के लिए विशेष नियम
नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से नेपाल ला सकेंगे। उन्हें भारतीय करेंसी नेपाल से किसी तीसरे देश में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को काफी सुविधा मिलेगी। इससे सीमा पार नकदी लेन-देन की प्रक्रिया भी सरल होगी। नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा बिना कस्टम घोषणा के नेपाल ला सकते हैं। यदि इससे अधिक राशि लाई जाती है तो कस्टम अधिकारियों के समक्ष इसकी घोषणा करना अनिवार्य होगा। एजेंसी।

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दिल्ली-एनसीआर में खुदरा स्थलों का पट्टा जनवरी-जून में 78% बढ़ा: रिपोर्ट

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दिल्ली-एनसीआर में खुदरा स्थलों का पट्टा जनवरी-जून में 78% बढ़ा: रिपोर्ट

नई दिल्ली,

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इस वर्ष जनवरी-जून के दौरान शॉपिंग मॉल और खुदरा बाजारों में खुदरा दुकानों की पट्टा गतिविधि 78 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख वर्ग फुट हो गई। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट कहती है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से फैशन दुकानों, खाद्य एवं पेय (एफएंडबी) कंपनियों और डिपार्टमेंटल स्टोर के विस्तार से हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में शॉपिंग मॉल में पट्टा गतिविधि मजबूत रही और इसमें सालाना आधार पर दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मुख्य सड़कों पर पट्टे में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कुल पट्टा गतिविधियों में फैशन खंड की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत रही, जबकि एफएंडबी का 16 प्रतिशत और डिपार्टमेंटल स्टोर का 12 प्रतिशत योगदान रहा।

कंपनी के अनुसार, बेहतर लोकेशन वाले मॉल और बाजार परिसरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से रिक्तता घटी है और किराया बढ़ा है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे, आवासीय विस्तार और उपभोक्ता मांग में वृद्धि के कारण एनसीआर देश के प्रमुख संगठित खुदरा बाजारों में तेजी से उभर रहा है। एजेंसी।

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

मुंबई,

वैश्विक निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसा निकालकर विदेशी फंड अब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों के बैंकिंग, आईटी और अन्य अपेक्षाकृत स्थिर सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह बदलाव एशियाई बाजारों का निवेश परिदृश्य बदलता दिख रहा है।

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिडेलिटी इंटरनेशनल, BNP Paribas और M&G Investments जैसे निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान के AI एवं सेमीकंडक्टर शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू किया है। विश्लेषकों का कहना है कि AI पर हो रहे भारी निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में फंड मैनेजर बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और अन्य अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी बिकवाली का असर दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर भी दिखा है। निवेशकों की निकासी से दोनों बाजारों में दबाव बना हुआ है और अस्थिरता बढ़ी है।

भारत और चीन विदेशी निवेशकों का केंद्र

दूसरी ओर, भारत और चीन विदेशी निवेशकों के लिए फिर आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। जुलाई के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे आईटी सहित कई प्रमुख सेक्टरों को समर्थन मिला। वहीं, चीन में इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके अलावा इंडोनेशिया और थाईलैंड के बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल तेज जोखिम वाले AI शेयरों की तुलना में बेहतर मूल्यांकन और स्थिर रिटर्न वाले बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एजेंसी।

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