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Atal Bihari Vajpayee’s 100th Birth Anniversary: राष्ट्र निर्माण के ‘अटल’ आदर्श की शताब्दी
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1 year agoon
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Divya Akash
नरेंद्र मोदी :भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की 100 वीं जयंती पर विशेष लेख
पीएम पद पर रहते हुए उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब हमेशा बेहतरीन तरीके से दिया। वो ज्यादातर समय विपक्षी दल में रहे, लेकिन नीतियों का विरोध तर्कों और शब्दों से किया। एक समय उन्हें कांग्रेस ने गद्दार तक कह दिया था, उसके बाद भी उन्होंने कभी असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं…लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं? अटल जी के ये शब्द कितने साहसी हैं…कितने गूढ़ हैं। अटल जी, कूच से नहीं डरे…उन जैसे व्यक्तित्व को किसी से डर लगता भी नहीं था। वो ये भी कहते थे… जीवन बंजारों का डेरा आज यहां, कल कहां कूच है..कौन जानता किधर सवेरा…आज अगर वो हमारे बीच होते, तो वो अपने जन्मदिन पर नया सवेरा देख रहे होते। मैं वो दिन नहीं भूलता जब उन्होंने मुझे पास बुलाकर अंकवार में भर लिया था…और जोर से पीठ में धौल जमा दी थी। वो स्नेह…वो अपनत्व…वो प्रेम…मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है।
आज 25 दिसंबर का ये दिन भारतीय राजनीति और भारतीय जनमानस के लिए एक तरह से सुशासन का अटल दिवस है। आज पूरा देश अपने भारत रत्न अटल को, उस आदर्श विभूति के रूप में याद कर रहा है, जिन्होंने अपनी सौम्यता, सहजता और सहृदयता से करोड़ों भारतीयों के मन में जगह बनाई। पूरा देश उनके योगदान के प्रति कृतज्ञ है। उनकी राजनीति के प्रति कृतार्थ है।
21वीं सदी को भारत की सदी बनाने के लिए उनकी एनडीए सरकार ने जो कदम उठाए, उसने देश को एक नई दिशा, नई गति दी। 1998 के जिस काल में उन्होंने पीएम पद संभाला, उस दौर में पूरा देश राजनीतिक अस्थिरता से घिरा हुआ था। 9 साल में देश ने चार बार लोकसभा के चुनाव देखे थे। लोगों को शंका थी कि ये सरकार भी उनकी उम्मीदों को पूरा नहीं कर पाएगी। ऐसे समय में एक सामान्य परिवार से आने वाले अटल जी ने, देश को स्थिरता और सुशासन का मॉडल दिया। भारत को नव विकास की गारंटी दी।
वो ऐसे नेता थे, जिनका प्रभाव भी आज तक अटल है। वो भविष्य के भारत के परिकल्पना पुरुष थे। उनकी सरकार ने देश को आईटी, टेलीकम्यूनिकेशन और दूरसंचार की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ाया। उनके शासन काल में ही, एनडीए ने टेक्नॉलजी को सामान्य मानवी की पहुंच तक लाने का काम शुरू किया। भारत के दूर-दराज के इलाकों को बड़े शहरों से जोड़ने के सफल प्रयास किये गए। वाजपेयी जी की सरकार में शुरू हुई जिस स्वर्णिम चतुर्भुज योजना ने भारत के महानगरों को एक सूत्र में जोड़ा वो आज भी लोगों की स्मृतियों पर अमिट है। लोकल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए भी एनडीए गठबंधन की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसे कार्यक्रम शुरू किए। उनके शासन काल में दिल्ली मेट्रो शुरू हुई, जिसका विस्तार आज हमारी सरकार एक वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में कर रही है। ऐसे ही प्रयासों से उन्होंने ना सिर्फ आर्थिक प्रगति को नई शक्ति दी, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों को एक दूसरे से जोड़कर भारत की एकता को भी सशक्त किया।
जब भी सर्व शिक्षा अभियान की बात होती है, तो अटल जी की सरकार का जिक्र जरूर होता है। शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानने वाले वाजपेयी जी ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था, जहां हर व्यक्ति को आधुनिक और गुणवत्ता वाली शिक्षा मिले। वो चाहते थे भारत के वर्ग, यानि ओबीसी, एससी, एसटी, आदिवासी और महिला सभी के लिए शिक्षा सहज और सुलभ बने।
उनकी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े आर्थिक सुधार किए। इन सुधारों के कारण भाई-भतीजावाद में फंसी देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली। उस दौर की सरकार के समय में जो नीतियां बनीं, उनका मूल उद्देश्य सामान्य मानवी के जीवन को बदलना ही रहा।
उनकी सरकार के कई ऐसे अद्भुत और साहसी उदाहरण हैं, जिन्हें आज भी हम देशवासी गर्व से याद करते है। देश को अब भी 11 मई 1998 का वो गौरव दिवस याद है, एनडीए सरकार बनने के कुछ ही दिन बाद पोकरण में सफल परमाणु परीक्षण हुआ। इसे ‘ऑपरेशन शक्ति’ का नाम दिया गया। इस परीक्षण के बाद दुनियाभर में भारत के वैज्ञानिकों को लेकर चर्चा होने लगी। इस बीच कई देशों ने खुलकर नाराजगी जताई, लेकिन तब की सरकार ने किसी दबाव की परवाह नहीं की। पीछे हटने की जगह 13 मई को न्यूक्लियर टेस्ट का एक और धमाका कर दिया गया। 11 मई को हुए परीक्षण ने तो दुनिया को भारत के वैज्ञानिकों की शक्ति से परिचय कराया था। लेकिन 13 मई को हुए परीक्षण ने दुनिया को ये दिखाया कि भारत का नेतृत्व एक ऐसे नेता के हाथ में है, जो एक अलग मिट्टी से बना है।
उन्होंने पूरी दुनिया को ये संदेश दिया, ये पुराना भारत नहीं है। पूरी दुनिया जान चुकी थी, कि भारत अब दबाव में आने वाला देश नहीं है। इस परमाणु परीक्षण की वजह से देश पर प्रतिबंध भी लगे, लेकिन देश ने सबका मुकाबला किया।
वाजपेयी सरकार के शासन काल में कई बार सुरक्षा संबंधी चुनौतियां आईं। करगिल युद्ध का दौर आया। संसद पर आतंकियों ने कायरना प्रहार किया। अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले से वैश्विक स्थितियां बदलीं, लेकिन हर स्थिति में अटल जी के लिए भारत और भारत का हित सर्वोपरि रहा।
जब भी आप वाजपेयी जी के व्यक्तित्व के बारे में किसी से बात करेंगे तो वो यही कहेगा कि वो लोगों को अपनी तरफ खींच लेते थे। उनकी बोलने की कला का कोई सानी नहीं था। कविताओं और शब्दों में उनका कोई जवाब नहीं था। विरोधी भी वाजपेयी जी के भाषणों के मुरीद थे। युवा सांसदों के लिए वो चर्चाएं सीखने का माध्यम बनतीं।
कुछ सांसदों की संख्या लेकर भी, वो कांग्रेस की कुनीतियों का प्रखर विरोध करने में सफल होते। भारतीय राजनीति में वाजपेयी जी ने दिखाया, ईमानदारी और नीतिगत स्पष्टता का अर्थ क्या है।
संसद में कहा गया उनका ये वाक्य… सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी मगर ये देश रहना चाहिए…आज भी मंत्र की तरह हम सबके मन में गूंजता रहता है।
वो भारतीय लोकतंत्र को समझते थे। वो ये भी जानते थे कि लोकतंत्र का मजबूत रहना कितना जरुरी है। आपातकाल के समय उन्होंने दमनकारी कांग्रेस सरकार का जमकर विरोध किया, यातनाएं झेली। जेल जाकर भी संविधान के हित का संकल्प दोहराया। NDA की स्थापना के साथ उन्होंने गठबंधन की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित किया। वो अनेक दलों को साथ लाए और NDA को विकास, देश की प्रगति और क्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधि बनाया।
पीएम पद पर रहते हुए उन्होंने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब हमेशा बेहतरीन तरीके से दिया। वो ज्यादातर समय विपक्षी दल में रहे, लेकिन नीतियों का विरोध तर्कों और शब्दों से किया। एक समय उन्हें कांग्रेस ने गद्दार तक कह दिया था, उसके बाद भी उन्होंने कभी असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।
उन में सत्ता की लालसा नहीं थी। 1996 में उन्होंने जोड़-तोड़ की राजनीति ना चुनकर, इस्तीफा देने का रास्ता चुन लिया। राजनीतिक षड्यंत्रों के कारण 1999 में उन्हें सिर्फ एक वोट के अंतर के कारण पद से इस्तीफा देना पड़ा। कई लोगों ने उनसे इस तरह की अनैतिक राजनीति को चुनौती देने के लिए कहा, लेकिन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी शुचिता की राजनीति पर चले। अगले चुनाव में उन्होंने मजबूत जनादेश के साथ वापसी की।
संविधान के मूल्य संरक्षण में भी, उनके जैसा कोई नहीं था। डॉ. श्यामा प्रसाद के निधन का उनपर बहुत प्रभाव पड़ा था। वो आपात के खिलाफ लड़ाई का भी बड़ा चेहरा बने। इमरजेंसी केबाद 1977 के चुनाव से पहले उन्होंने ‘जनसंघ’ का जनता पार्टी में विलय करने पर भी सहमति जता दी। मैं जानता हूं कि ये निर्णय सहज नहीं रहा होगा, लेकिन वाजपेयी जी के लिए हर राष्ट्रभक्त कार्यकर्ता की तरह दल से बड़ा देश था, संगठन से बड़ा, संविधान था।
हम सब जानते हैं, अटल जी को भारतीय संस्कृति से भी बहुत लगाव था। भारत के विदेश मंत्री बनने के बाद जब संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण देने का अवसर आया, तो उन्होंने अपनी हिंदी से पूरे देश को खुद से जोड़ा। पहली बार किसी ने हिंदी में संयुक्त राष्ट्र में अपनी बात कही। उन्होंने भारत की विरासत को विश्व पटल पर रखा। उन्होंने सामान्य भारतीय की भाषा को संयुक्त राष्ट्र के मंच तक पहुंचाया।
राजनीतिक जीवन में होने के बाद भी, वो साहित्य और अभिव्यक्ति से जुड़े रहे। वो एक ऐसे कवि और लेखक थे, जिनके शब्द हर विपरीत स्थिति में व्यक्ति को आशा और नव सृजन की प्रेरणा देते थे। वो हर उम्र के भारतीय के प्रिय थे। हर वर्ग के अपने थे।
मेरे जैसे भारतीय जनता पार्टी के असंख्य कार्यकर्ताओं को उनसे सीखने का, उनके साथ काम करने का, उनसे संवाद करने का अवसर मिला। अगर आज बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है तो इसका श्रेय उस अटल आधार को है, जिसपर ये दृढ़ संगठन खड़ा है।
उन्होंने बीजेपी की नींव तब रखी, जब कांग्रेस जैसी पार्टी का विकल्प बनना आसान नहीं था। उनका नेतृत्व, उनकी राजनीतिक दक्षता, साहस और लोकतंत्र के प्रति उनके अगाध समर्पण ने बीजेपी को भारत की लोकप्रिय पार्टी के रूप में प्रशस्त किया। श्री लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों के साथ, उन्होंने पार्टी को अनेक चुनौतियों से निकालकर सफलता के सोपान तक पहुंचाया।
जब भी सत्ता और विचारधारा के बीच एक को चुनने की स्थितियां आईं, उन्होंने इस चुनाव में विचारधारा को खुले मन से चुन लिया। वो देश को ये समझाने में सफल हुए कि कांग्रेस के दृष्टिकोण से अलग एक वैकल्पिक वैश्विक दृष्टिकोण संभव है। ऐसा दृष्टिकोण वास्तव में परिणाम दे सकता है।
आज उनका रोपित बीज, एक वटवृक्ष बनकर राष्ट्र सेवा की नव पीढ़ी को रच रहा है। अटल जी की 100वीं जयंती, भारत में सुशासन के एक राष्ट्र पुरुष की जयंती है। आइए हम सब इस अवसर पर, उनके सपनों को साकार करने के लिए मिलकर काम करें। हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जो सुशासन, एकता और गति के अटल सिद्धांतों का प्रतीक हो। मुझे विश्वास है, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के सिखाए सिद्धांत ऐसे ही, हमें भारत को नव प्रगति और समृद्धि के पथ पर प्रशस्त करनें की प्रेरणा देते रहेंगे।
नरेंद्र मोदी
लेखक भारत के प्रधानमंत्री हैं।
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महाराष्ट्र नगर निगम रिजल्ट:29 में 23 निगमों में बीजेपी+ आगे, मुंबई-नागपुर-पुणे में बढ़त
Published
2 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashलातूर में कांग्रेस ने 70 में से 43 सीटें जीतीं
मुंबई,एजेंसी। महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में भाजपा गठबंधन एकतरफा जीत की ओर है। रुझानों में 29 नगर निगमों में से 23 में भाजपा गठबंधन को बढ़त है।
मुंबई के बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में भाजपा+शिवसेना (शिंदे) अलायंस कुल 227 सीटों में से 118 सीटों पर आगे चल रहा है।
इसके अलावा नागपुर, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई, पिंपरी चिंचवाड और नासिक में भी भाजपा गठबंधन को बढ़त है। लातूर में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। 70 में से 43 सीटें जीतीं।
चंद्रपुर में भी कांग्रेस लीड कर रही है। परभणी नगर निगम में शिवसेना (उद्धव) को बढ़त है। वसई विरार में बहुजन विकास अगाड़ी (VBA) और मालेगांव में शिवसेना (शिंदे) आगे चल रही है।
शुक्रवार को नगर निगम चुनाव की सुबह 10 से काउंटिंग जारी है। राज्य में निगम चुनाव के लिए 15 जनवरी को वोटिंग हुई थी।
893 वार्डों में कुल 15,931 उम्मीदवार मैदान में हैं। नगर निगम की कुल 2869 सीटें हैं। इनमें से 68 उम्मीदवार निर्विरोध जीत हासिल कर चुके हैं।
महाराष्ट्र की 5 प्रमुख नगर निगम के चुनाव का रुझान
मुंबई: कुल सीटें- 227, बहुमत: 114
| BJP+ | उद्धव शिवसेना+ | कांग्रेस | NCP (अजित) |
| 118 | 70 | 12 | 00 |
पुणे: कुल सीटें- 165, बहुमत: 83
| BJP+ | NCP+ | कांग्रेस+ UBT | शिवसेना | अन्य |
| 90 | 20 | 10 | 02 | 00 |
ठाणे: कुल सीटें- 131, बहुमत:66
| BJP+ | NCP (अजित) | उद्धव शिवसेना+ | कांग्रेस | अन्य |
| 49 | 08 | 02 | 02 | 09 |
नागपुर: कुल सीटें- 151, बहुमत: 76
| BJP+ | कांग्रेस | उद्धव शिवसेना+ | NCP (अजित) | NCP (शरद) | अन्य |
| 113 | 30 | 01 | 01 | 00 | 06 |
नासिक: कुल सीटें- 122, बहुमत: 62
| BJP | MVA+MNS | शिवसेना- शिंदे+ NCP | अन्य |
| 50 | 12 | 41 | 05 |
देश
BJP को 20 जनवरी को नया अध्यक्ष मिलेगा:चुनाव नोटिफिकेशन जारी
Published
2 hours agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का चुना जाना लगभग तय
नई दिल्ली,एजेंसी। भाजपा को 20 जनवरी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। पार्टी ने इसके लिए शुक्रवार को नोटिफिकेशन जारी किया। इसके मुताबिक 19 जनवरी को नामांकन भरा जाएगा। 20 जनवरी को नए पार्टी अध्यक्ष का ऐलान होगा।
अभी नितिन नबीन पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। पार्टी उन्हें ही निर्विरोध अध्यक्ष चुन सकती है।
न्यूज एजेंसी ANI ने 13 जनवरी को सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि नितिन नबीन 19 जनवरी को नामांकन भरेंगे। नितिन नबीन को 14 दिसंबर 2025 को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया था।
भाजपा ने साल 2020 में जेपी नड्डा को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। 2024 में उनका कार्यकाल खत्म हुआ था। तब से वे एक्सटेंशन पर थे। नड्डा अभी केंद्र में स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल रहे हैं।

BJP के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर ने शेड्यूल जारी किया
बीजेपी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर के लक्ष्मण ने चुनाव का शेड्यूल जारी किया। इसके मुताबिक, पार्टी प्रमुख के चुनाव के लिए नॉमिनेशन 19 जनवरी को दोपहर 2 बजे से 4 बजे के बीच भरे जाएंगे और उम्मीदवार उसी दिन शाम 5 बजे से 6 बजे के बीच अपना नॉमिनेशन वापस ले सकते हैं।
लक्ष्मण ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो 20 जनवरी को वोटिंग होगी और उसी दिन नए चुने गए राष्ट्रीय अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। पूरी चुनाव प्रक्रिया दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में ही होगी।
खेल
IND-NZ T-20; ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग शुरू:₹800 से ₹25,000 तक कीमत, ₹50 में मिलेगा समोसा, रायपुर में 23 जनवरी को मैच
Published
22 hours agoon
January 15, 2026By
Divya Akashरायपुर,एजेंसी। रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 23 जनवरी को भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 मैच खेला जाएगा। इसके लिए आज गुरुवार शाम 7 बजे से टिकट विंडो ओपन हो गई है। छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) ने Ticketgenie को ऑफिशियल टिकटिंग पार्टनर नियुक्त किया गया है।
वेबसाइट ticketgenie.in पर या मोबाइल ऐप जाकर टिकट बुक की जा सकती है। टिकट के दाम 800 रुपए से शुरू है। वहीं सबसे महंगी टिकट 25 हजार की है। एक यूजर अधिकतम 4 टिकट ही खरीद सकेगा। 16 से 22 जनवरी तक फिजिकल टिकट लिए जा सकेंगे।
स्टेडियम के अंदर दर्शकों के लिए खाने-पीने की चीजों के रेट भी तय किए गए हैं। 100 ग्राम समोसा 50 रुपए, सिंगल पीस सैंडविच 60, बर्गर 80 में मिलेगा। पॉपकॉर्न कोन 60 रुपए, पॉपकॉर्न टब 100 और पिज्जा 250 में मिलेगा, जबकि आइसक्रीम और वेफर्स MRP पर ही उपलब्ध कराए जाएंगे।
मैदान के अंदर फूड बेचने वाले लोगों को अपने कर्मचारियों की टी-शर्ट पर खाने की कीमत लिखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्टेडियम परिसर में भी फूड मेन्यू और उनके दाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे।

पिछले बार मैच के बीच एंट्री को लेकर विवाद उपजा था।
13 गेट पर लोहे की रेलिंग लगाई गई
CSCS ने आम जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी सूचना पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर चल रही भ्रामक और अपुष्ट जानकारियों से दूर रहें। वहीं मैच को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। इस बार छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ किसी भी तरह की सुरक्षा में चूक से बचने के लिए सख्त कदम उठा रहा है।
संघ ने साफ किया है कि फर्स्ट इनिंग खत्म होने के बाद किसी भी दर्शक को स्टेडियम में एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 350 से ज्यादा प्राइवेट बाउंसर्स भी तैनात किए जाएंगे। इस दौरान क्रिकेट संघ के 45 अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौजूद रहेंगे। 13 गेट पर लोहे की रेलिंग लगा दी गई है।
800 रुपए से 25 हजार रुपए तक की टिकट
आयोजकों की ओर से जारी सूचना के अनुसार, इस मैच के जनरल टिकट के दाम पिछले वनडे मुकाबले के लगभग समान रखे गए हैं। टिकट 800 रुपए से शुरू होकर 25 हजार रुपए तक उपलब्ध होंगे।
एक ही फेज में शुरू होगी टिकट बिक्री
आयोजकों के मुताबिक, टिकट एक ही फेज में ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। दर्शक टिकटों की खरीद Ticketgenie की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए कर सकेंगे। वहीं, एक यूजर अधिकतम 4 टिकट ही खरीद सकेगा। इससे ज्यादा टिकट एक अकाउंट से बुक नहीं किए जा सकेंगे।
खाने-पीने की चीजों पर भी सख्ती
इस बार खाने-पीने के प्रोडक्ट्स को लेकर भी सख्त नियम लागू होंगे। पिछली बार भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका मैच के दौरान स्टेडियम में खाने-पीने की चीजें महंगे दामों पर बिकने की शिकायतें सामने आई थीं, जहां 100 रुपए का एक चिप्स का पैकेट बेचा गया था।
पिछली बार खाने-पीने के प्रोडक्ट्स महंगे दाम में बिके थे। इसे देखते हुए संघ ने फूड प्रोडक्ट्स की रेट लिस्ट भी जारी कर दी है। वहीं, स्टेडियम के अंदर टी-शर्ट्स और अन्य मर्चेंडाइज की बिक्री भी की जाएगी, जिनके रेट बड़े साइन बोर्ड पर प्रदर्शित किए गए हैं।

पिछले मैच में खाने-पीने के आइटम महंगे दामों पर बेचे गए थे। इसे रोकने के लिए भी CSCS ने इस बार रेट तय किए हैं।
टीम इंडिया और न्यूजीलैंड का स्क्वॉड
टीम इंडिया का स्क्वॉड: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल (उपकप्तान), रिंकू सिंह, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती, वॉशिंगटन सुंदर, ईशान किशन (विकेटकीपर) होंगे।
न्यूजीलैंड का स्क्वॉड: मिचेल सैंटनर (कप्तान), माइकल ब्रेसवेल, मार्क चैपमैन, डेवोन कॉनवे, जैकब डफी, जैक फॉल्क्स, मैट हेनरी, काइल जैमीसन, बेवन जैकब्स, डेरिल मिचेल, जेम्स नीशम, ग्लेन फिलिप्स, रचिन रवींद्र, टिम रॉबिन्सन, ईश सोढ़ी।
एंट्री गेट्स पर तिहरी निगरानी
स्टेडियम के सभी एंट्री गेट्स पर पुलिस, प्राइवेट गार्ड्स और क्रिकेट संघ के कर्मचारियों की संयुक्त ड्यूटी लगाई जाएगी। जिससे किसी तरह का विवाद या अव्यवस्था न हो। पिछले ODI में 2 दर्शक रेलिंग जंप करते हुए मैदान के बीच खिलाड़ियों तक पहुंच गए थे।
इस बार बाउंसर्स को बाउंड्री पर तैनात किया जाएगा, ताकि दर्शक दीर्घा से कोई जंप कर खिलाड़ियों तक न पहुंच पाएं।
पिछले मैच में खिलाड़ियों के बीच पहुंचे थे दर्शक

मैच के दौरान एक युवक अचानक ग्राउंड के बीच में घुस गया। सुरक्षा टीम ने उसे तुरंत उठाकर स्टेडियम से बाहर कर दिया था।
CSCS ने बनाई 45 लोगों की टीम
छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (CSCS) के अध्यक्ष विजय शाह ने बताया कि पिछली बार सुरक्षा को लेकर कुछ चूक हुई थी। BCCI ने भी इस पर संज्ञान लिया था। पूरी तरह से आश्वस्त किया गया है कि इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा। CSCS ने 45 लोगों की टीम गठित की है। वे पुलिस प्रशासन के साथ स्टेडियम में मौजूद रहेंगे।
अवैध एंट्री रोकने कड़े इंतजाम
पिछले मैच में बिना टिकट दर्शकों की भीड़ स्टेडियम में कूदकर घुस गई थी, जिससे कई स्टैंड ओवरफ्लो हो गए थे। इस घटना से सबक लेते हुए इस बार 13 गेटों पर लोहे की रेलिंग लगाई जा रही है।
मैच और टीमों का शेड्यूल
भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 सीरीज का पहला मुकाबला 21 जनवरी को नागपुर में खेला जाएगा। इसके बाद दोनों टीमें 22 जनवरी को रायपुर पहुंचेंगी। जानकारी के मुताबिक, टीमें सुबह और दोपहर में रायपुर आएंगी और शाम को स्टेडियम में प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लेंगी।

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