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विदेश

ईरान के नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हमला:इस जंग में दूसरी बार निशाना बनाया गया, अभी रेडियोएक्टिव रिसाव की खबर नहीं

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 22वां दिन है। ईरान के तसनीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, आज सुबह अमेरिका और इजराइल ने ईरान के नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर हवाई हमला किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हमले में अभी तक किसी भी तरह का रेडियोएक्टिव (खतरनाक परमाणु) रिसाव नहीं हुआ है। इस इलाके के आसपास रहने वाले लोगों को कोई खतरा नहीं है।

इजराइल और अमेरिका ने इससे पहले 2 मार्च को भी इस प्लांट पर हमला किया था। यह ईरान का सबसे बड़ा न्यूक्लियर सेंटर है, यहां यूरेनियम इनरिचमेंट किया जाता है।

इसकी एक खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे बना हुआ है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसी हमले से इसे बचाया जा सके।

अमेरिका और इजराइल ने पिछले साल जून में भी इस न्यूक्लियर प्लांट पर हमला किया था।

अमेरिका और इजराइल ने पिछले साल जून में भी इस न्यूक्लियर प्लांट पर हमला किया था।

ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल की एक सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप ने शुक्रवार को लेबनान के दक्षिणी हिस्से की ओर गोले दागे।

इजराइल की एक सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप ने शुक्रवार को लेबनान के दक्षिणी हिस्से की ओर गोले दागे।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार को अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को निशाना बनाया था।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार को अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को निशाना बनाया था।

ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कई हवाई हमले किए।

ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कई हवाई हमले किए।

कतर के रास लाफान गैस प्लांट पर गुरुवार को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के दौरान भीषण आग लग गई।

कतर के रास लाफान गैस प्लांट पर गुरुवार को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के दौरान भीषण आग लग गई।

ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया आइलैंड पर ईरानी हमले की निंदा की

ब्रिटेन ने उसके डिएगो गार्सिया आइलैंड पर ईरानी हमले की निंदा की है। ब्रिटेन का कहना है कि ईरान की ऐसी हरकतें इलाके के लिए खतरा हैं। हालांकि ये हमला कामयाब नहीं हुआ।

ब्रिटेन इस लड़ाई में खुद सीधे शामिल नहीं है, लेकिन उसने अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने दिए हैं।

ईरान पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यह हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित एक बड़ा सैन्य ठिकाना है। यहां से अमेरिका दूर तक और तेजी से सैन्य ऑपरेशन चला सकता है।

यह ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 3,800 किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी होने के कारण अमेरिका यहां से बिना सीधे खतरे के दायरे में आए लंबी दूरी के मिशन लॉन्च कर सकता है।

ईरान का दावा- इजराइली एयरपोर्ट पर हमला किया

ईरान की सेना इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ड्रोन से हमला किया है।

उनका कहना है कि इस हमले से एयरपोर्ट का काम प्रभावित हुआ है। उड़ानें और सेना के विमानों में ईंधन भरने में दिक्कत आई है। हालांकि, अभी तक इस हमले की पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान के रामसर शहर में घर पर हमला, बच्चे और माता-पिता की मौत

ईरान के रामसर शहर में रात के वक्त एक घर पर हमला हुआ, जिसमें एक बच्चे और उसके माता-पिता की मौत हो गई।

अधिकारियों का कहना है कि यह हमला अमेरिका और इजराइल ने किया। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हमलों से ईरान के लोगों की एकता और मजबूत होगी।

बगदाद में ड्रोन हमले में अधिकारी की मौत

इराक की राजधानी बगदाद में एक ड्रोन हमले में एक अधिकारी की मौत हो गई है। यह हमला इराक की खुफिया एजेंसी के मुख्यालय के पास हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह करीब 10:15 बजे एक ड्रोन गिरा, जिससे यह घटना हुई। अधिकारियों का कहना है कि यह हमला कुछ गैरकानूनी लोगों ने किया। इस हमले के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

ईरान का हिंद महासागर में अमेरिकी बेस पर हमला

ईरान ने शुक्रवार सुबह हिंद महासागर में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के जॉइंट सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। CNN के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

उनके मुताबिक, ईरान ने 2 मिसाइलें दागीं, लेकिन कोई भी बेस को निशाना नहीं बना सकी। यह बेस ईरान के तट से लगभग 3810 किलोमीटर दूर है। तेहरान से इसकी दूरी 5 हजार किमी से भी ज्यादा है।

डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए बेहद अहम सैन्य ठिकाना है। इस बेस से अमेरिका अपने बॉम्बर प्लेन का इस्तेमाल करता है। यहां बड़े टैंकर विमान (जैसे KC-135) और निगरानी करने वाले विमान भी काम कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की, ईद की बधाई दी

पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से फोन बात की और उन्हें ईद और नवरोज की बधाई दी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस त्योहार के समय पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता आए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में जरूरी जगहों पर हो रहे हमले गलत हैं, क्योंकि इससे हालात खराब होते हैं और दुनिया के व्यापार पर असर पड़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री रास्ते (जहाजों के रास्ते) सुरक्षित और खुले रहने चाहिए।

साथ ही, भारत ने ईरान का धन्यवाद किया कि वहां रह रहे भारतीय लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है।

पुतिन ने ईरान को सच्चा दोस्त बताया, नवरोज की बधाई दी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के लोगों को नवरोज की बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में रूस, ईरान के साथ खड़ा रहेगा और उसका सच्चा दोस्त है।

रूस ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल के हमलों से मिडिल ईस्ट में हालात खराब हो गए हैं और दुनिया में तेल का संकट बढ़ सकता है।

साथ ही, रूस ने ईरान के नेता अली खामेनेई की हत्या को गलत बताया है।

ईरानी सेना के प्रवक्ता का शव कोम शहर लाया गया

ईरान के सेना प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी के शव को लोगों के श्रद्धांजलि देने के लिए कोम लाया गया है।

बाद में उनका अंतिम संस्कार काशान में किया जाएगा। इससे पहले तेहरान में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई थी। उनकी मौत कल अमेरिका और इजराइल के हमले में हुई थी।

ईरान के सेना प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी की इजराइल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी।
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बिज़नस

AliExpress पर EU का सख्त एक्शन, लगा रू.5,500 करोड़ का जुर्माना, जानें क्यों?

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ब्रसेल्स, एजेंसी। चीन की दिग्गज टेक कंपनी अलीबाबा के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीएक्सप्रेस पर यूरोपीय यूनियन (EU) ने 550 मिलियन यूरो (करीब 5,500 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर नकली, गैरकानूनी और असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में विफल रही।

यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों के अनुसार, अलीएक्सप्रेस पर ऐसे कई उत्पाद बेचे जा रहे थे जो यूरोप के सुरक्षा और पर्यावरण मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इनमें खिलौने, कॉस्मेटिक और अन्य उपभोक्ता उत्पाद शामिल हैं। जांच में यह भी पाया गया कि जिन उत्पादों को नियमों का उल्लंघन करने पर हटाया गया था, उनमें से कई बाद में दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो गए। कुछ मामलों में ऐसे उत्पादों की ग्राहकों को सिफारिश भी की गई।

मार्च 2024 में शुरू हुई थी जांच 

यह कार्रवाई यूरोपीय यूनियन के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत की गई है। वर्ष 2022 में लागू इस कानून का उद्देश्य बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करना है। अलीएक्सप्रेस के खिलाफ जांच मार्च 2024 में शुरू हुई थी। ईयू का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे अपने सिस्टम में मौजूद जोखिमों की पहचान करें और समय रहते उन्हें दूर करें, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना

बताया जा रहा है कि किसी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर लगाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है। इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 120 मिलियन यूरो और चीनी ई-कॉमर्स कंपनी Temu पर 200 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया था।

हालांकि, अलीएक्सप्रेस ने यूरोपीय आयोग के फैसले का विरोध किया है। कंपनी का कहना है कि जुर्माने की राशि अत्यधिक है और हाल के वर्षों में किए गए सुधारों को नजरअंदाज किया गया है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी।

यूरोप अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार

यूरोप फिलहाल अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार है, जहां उसके लगभग 19.3 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। तुलना में Shein के करीब 15.6 करोड़ और Temu के लगभग 13 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। यूरोपीय यूनियन ने कंपनी को 20 अक्टूबर तक जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय तक भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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विदेश

ब्रिटिश PM स्टार्मर ने सौंपा इस्तीफा; बोले-‘मेरा काम पूरा हो गया’, नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने संभाली सत्ता

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लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। केअर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट से अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने कहा, “मेरा काम पूरा हो गया है।” इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। अब लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहम ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया है।  प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले केअर स्टार्मर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वह जिम्मेदारी एंडी बर्नहम को सौंप रहे हैं और उन्हें अपना पूरा समर्थन देते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल को देश की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया 
संवैधानिक परंपरा के अनुसार स्टार्मर ने बकिंघम पैलेस जाकर राजा चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद लेबर पार्टी के नवनिर्वाचित नेता एंडी बर्नहम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया। राजा से मुलाकात के बाद बर्नहम ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की और फिर 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचकर राष्ट्र को अपना पहला संबोधन दिया।

एंडी बर्नहम का परिचय
7 जनवरी 1970 में जन्मे  एंडी बर्नहम का पूरा नाम एंड्रयू मरे बर्नहम (Andrew Murray Burnham) है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के फिट्जविलियम कॉलेज से अंग्रेजी (English) में स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही उनकी राजनीति और सामाजिक मुद्दों में रुचि रही। 56 वर्षीय एंडी बर्नहम लंबे समय से लेबर पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।  वह ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर भी रह चुके हैं और स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण तथा क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों में निरंतरता बनी रह सकती है।

बर्नहम का राजनीतिक सफर

  • वर्ष 2001 में पहली बार ली (Leigh) संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए।
  • टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
  • 2008 से 2009 तक संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्री रहे।
  • 2009 से 2010 तक ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री (Health Secretary) रहे।
  • 2017 से 2026 तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे, जहां उन्होंने परिवहन, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास के क्षेत्र में कई पहल कीं।
  • जुलाई 2026 में लेबर पार्टी के नेता चुने गए और इसके बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।
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विदेश

टूटने की कगार पर पाकिस्तानः बलूचिस्तान से PoK तक भड़की बगावत की आग, देश के हो सकते 4 टुकड़े

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इस्लामाबाद,एजेंसी।पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा संकटों में से एक का सामना कर रहा है। एक ओर बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले तेज हो गए हैं, तो दूसरी ओर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) खैबर पख्तूनख्वा में लगातार सुरक्षा बलों को निशाना बना रही है। इसके साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शन और अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के साथ बढ़ते तनाव ने इस्लामाबाद की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के “चार टुकड़े होने” या “तत्काल गृहयुद्ध” जैसी बातें अभी दावे और अटकलें हैं। मौजूदा हालात गंभीर जरूर हैं, लेकिन ऐसा होने की पुष्टि किसी आधिकारिक या स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने नहीं की है।

बलूचिस्तान में हमले
बलूचिस्तान में बीएलए लगातार पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई सैन्य काफिलों, पुलिस चौकियों और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बलूच संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान ने दशकों से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की है। वहीं पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी संगठन मानती है।

खैबर पख्तूनख्वा में TTP का खूनी अभियान
खैबर पख्तूनख्वा और पूर्व कबायली इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार पुलिस और सेना पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई पुलिस चौकियों पर हमले, आत्मघाती विस्फोट और घात लगाकर किए गए हमलों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी को अफगानिस्तान की सीमा पार से समर्थन मिल रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

PoK में भी बढ़ रहा असंतोष
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली संकट और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।
कुछ स्थानीय संगठनों ने अधिक स्वायत्तता और कुछ समूहों ने पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी उठाई है। हालांकि पूरे क्षेत्र में अलगाववाद की एक जैसी स्थिति नहीं है और हालात अलग-अलग इलाकों में अलग हैं।

अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव
डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और आतंकियों को संरक्षण देने के आरोप लगाते रहे हैं। कई बार सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 के अनुसार पाकिस्तान में वर्ष 2025 के दौरान आतंकवादी घटनाओं और मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान अब एक साथ कई सुरक्षा मोर्चों पर लड़ रहा है, जिससे सेना और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक टिप्पणियों में पाकिस्तान के चार टुकड़े होने के दावे किए जा रहे हैं। पाकिस्तान गंभीर सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक संकट से जरूर गुजर रहा है, लेकिन उसके तत्काल विघटन या गृहयुद्ध की घोषणा जैसी कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार इन आंतरिक चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाती तो अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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