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AI और ऑटोमेशन से बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, स्टैंडर्ड चार्टर्ड करेगा 7,000 नौकरियां खत्म

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मुंबई, एजेंसी। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered) ने अगले चार वर्षों में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की संख्या घटाने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक 2030 तक 7,000 से अधिक नौकरियां खत्म कर सकता है। यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के तहत उठाया जा रहा है।

लंदन मुख्यालय वाले इस बैंक का लक्ष्य अपने कॉरपोरेट विभागों में लगभग 15% पदों को कम करना है। बैंक के इन विभागों में करीब 52,000 कर्मचारी काम करते हैं, जबकि दुनियाभर में बैंक की कुल वर्कफोर्स लगभग 82,000 है।

AI से बदलेगा बैंकिंग का कामकाज

बैंक के CEO Bill Winters ने कहा कि यह केवल लागत घटाने की कवायद नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में बड़े तकनीकी बदलाव का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों को नई तकनीकों के मुताबिक रीस्किल और रीपोजिशन करने का मौका भी देगा।

बैंक का कहना है कि AI और ऑटोमेशन के जरिए कई बैक-ऑफिस प्रक्रियाएं तेज और कम लागत वाली बनेंगी। इसका सबसे ज्यादा असर चेन्नई, बेंगलुरु, कुआलालंपुर और वारसॉ जैसे शहरों में स्थित बैक-ऑफिस सेंटरों पर पड़ सकता है।

मुनाफा बढ़ाने पर फोकस

स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने अपने दीर्घकालिक लाभ अनुमान को भी बढ़ाया है। बैंक को उम्मीद है कि टेंजिबल इक्विटी पर रिटर्न 2028 तक 15% से अधिक और 2030 तक लगभग 18% तक पहुंच सकता है। बैंक अब वेल्थ मैनेजमेंट और समृद्ध रिटेल बैंकिंग जैसे हाई-मार्जिन बिजनेस पर ज्यादा ध्यान देगा।

ग्लोबल बैंकिंग सेक्टर में बढ़ रहा AI का इस्तेमाल

यह बदलाव सिर्फ एक बैंक तक सीमित नहीं है। जापान की Mizuho Financial Group भी पहले घोषणा कर चुकी है कि वह अगले 10 वर्षों में ऑटोमेशन और नई तकनीकों की मदद से 5,000 नौकरियां कम करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बैंकिंग उद्योग तेजी से AI आधारित सिस्टम की ओर बढ़ रहा है ताकि लागत कम की जा सके और प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाई जा सके। 

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MV इलेक्ट्रोसिस्टम्स का IPO 30 जुलाई को खुलेगा, मूल्य दायरा 400-425 रुपए प्रति शेयर

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नई दिल्ली, एजेंसी। इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कंपनी एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स ने सोमवार को अपने 290 करोड़ रुपए के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए 400-425 रुपए प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया। कंपनी ने बताया कि मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर सूचीबद्ध होने के बाद उसका बाजार मूल्यांकन करीब 1,160 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। 

कंपनी का सार्वजनिक निर्गम पूरी तरह नए शेयरों की बिक्री पर आधारित होगा और इसमें बिक्री पेशकश (ओएफएस) का कोई हिस्सा नहीं होगा। यह आईपीओ 30 जुलाई को अभिदान के लिए खुलेगा और तीन अगस्त को बंद होगा। नए शेयरों से जुटाई गई राशि का उपयोग दीर्घकालिक कार्यशील पूंजी जरूरतों को पूरा करने, नए बिजली इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अनुसंधान, डिजाइन और विकास गतिविधियों में निवेश तथा सामान्य कंपनी कामकाज के लिए किया जाएगा। 

एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स एक प्रौद्योगिकी आधारित कंपनी है, जो रेलवे के रेल डिब्बों और इंजन में इस्तेमाल होने वाले विद्युत एवं पावर इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की डिजाइनिंग, विकास, असेंबलिंग और विनिर्माण का काम करती है। आईपीओ में 75 प्रतिशत हिस्सा पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी), 15 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों (एनआईआई) और 10 प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित किया गया है। कंपनी के शेयरों को छह अगस्त को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।

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केनरा बैंक का पहली तिमाही में शुद्ध लाभ मामूली बढ़कर 4,856 करोड़ रुपए पर

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नई दिल्ली, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र के केनरा बैंक का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शुद्ध लाभ मामूली दो प्रतिशत बढ़कर 4,856 करोड़ रुपए हो गया। इस बीच, बैंक ने कहा है कि उसका विदेश में रहने वाले भारतीयों से 1.3 अरब डॉलर की जमा जुटाने का लक्ष्य है। बेंगलुरु स्थित इस बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही में 4,752 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। 

केनरा बैंक ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि समीक्षाधीन तिमाही में उसकी कुल आय बढ़कर 39,684 करोड़ रुपए हो गई, जो वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में 38,063 करोड़ रुपए थी। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंक की ब्याज आय भी बढ़कर 32,957 करोड़ रुपए हो गई, जो वित्त वर्ष 2025-26 की जून तिमाही में 31,003 करोड़ रुपए थी। बैंक की परिसंपत्ति की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। जून तिमाही के अंत में सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) घटकर कुल अग्रिम का 1.57 प्रतिशत रह गईं, जो एक साल पहले 2.69 प्रतिशत थीं। 

इसी तरह, समीक्षाधीन तिमाही में शुद्ध एनपीए यानी फंसा कर्ज घटकर 0.36 प्रतिशत रह गया, जबकि 2025-26 की समान तिमाही में यह 0.63 प्रतिशत था। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ब्रजेश कुमार सिंह ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही में बैंक की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 10,000 करोड़ रुपए को पार कर गई और इसमें 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि बैंक की शुद्ध ब्याज आय बढ़कर 10,215 करोड़ रुपए हो गई, जो 2025-26 की समान तिमाही में 9,009 करोड़ रुपए थी। 

बैंक ने आय संबंधी परिणामों के बाद हुई बैठक में बताया कि उसकी योजना विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से करीब 1.3 अरब डॉलर और विदेशी मुद्रा उधारी के जरिये एक अरब डॉलर जुटाने की है। सिंह ने कहा कि बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) और विदेशी मुद्रा उधारी (ओएफसीबी) के माध्यम से बैंक 50-50 करोड़ डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक बैंक एफसीएनआर (बी) जमा माध्यम से 77.5 करोड़ डॉलर जुटा चुका है। 

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भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 12 गीगावाट होने का अनुमान: रिपोर्ट

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नई दिल्ली, एजेंसी। कृत्रिम मेधा (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग, बड़े पैमाने पर क्लाउड अवसंरचना में निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के दम पर भारत की डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2025 के 2.2 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 12 गीगावाट से अधिक होने का अनुमान है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। परामर्श कंपनी वुड मैकेंजी की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के लिए समर्पित डेटा सेंटर क्षमता वर्ष 2025 के 275 मेगावाट से बढ़कर 2030 तक 6,546 मेगावाट होने का अनुमान है। वहीं, डेटा सेंटर की बिजली मांग 2025 के 10 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) से बढ़कर 2040 तक 191 टेरावाट-घंटे होने का अनुमान है। 

वुड मैकेंजी के शोध सहयोगी सौहार्द पाल ने कहा, ”भारत का डेटा सेंटर बाजार दीर्घकालिक निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में उभर रहा है। बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, एआई आधारित कार्यभार में वृद्धि और पिछले एक दशक के नीतिगत समर्थन ने भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों की बराबरी करने की स्थिति में ला खड़ा किया है। अब डेवलपर्स और निवेशकों के लिए सवाल यह नहीं रह गया है कि भारत में निवेश किया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि निवेश कहां और किस प्रकार किया जाए।” 

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 32 लाख करोड़ रुपए मूल्य वाली और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था डेटा सेंटर अवसंरचना की मांग को बढ़ा रही है। देश में 103 करोड़ से अधिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और हर महीने करीब 2,200 करोड़ यूपीआई लेनदेन किए जाते हैं। भारत का घरेलू एआई बाजार वर्ष 2032 तक 11.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु वर्तमान में देश के कुल स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) भार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। 

हालांकि, भविष्य में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में निवेश बढ़ने की संभावना है। ये उभरते बाजार वैश्विक स्तर की बड़ी क्लाउड सेवा कंपनियों से महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहे हैं। इनमें अमेजन वेब सर्विसेज और गूगल के अलावा घरेलू कंपनी अदाणीकॉननेक्स भी शामिल है, जिसने 2.6 गीगावाट क्षमता की विकास परियोजनाओं की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली की उपलब्धता अब डेटा सेंटर उद्योग की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। 

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