मुंबई, एजेंसी। क्रेडिट कार्ड का उपयोग लोग शॉपिंग, बिल पेमेंट और ट्रैवल जैसे कई कामों के लिए करते हैं और इसके बदले मिलने वाले रिवॉर्ड्स इसे और आकर्षक बनाते हैं लेकिन अब HDFC बैंक के दो प्रमुख प्रीमियम कार्ड्स Regalia Gold और Diners Privilege में बड़े बदलाव किए हैं, जिनसे ग्राहकों को पहले जैसे फायदे नहीं मिलेंगे।
रिवॉर्ड पॉइंट्स में कटौती
Regalia Gold कार्ड पर रिवॉर्ड सिस्टम को कम फायदेमंद बना दिया गया है। पहले रू.150 खर्च पर 4 रिवॉर्ड पॉइंट मिलते थे लेकिन अब रू.200 खर्च पर 5 पॉइंट मिलेंगे। इससे कुल रिवॉर्ड रेट पहले की तुलना में घट गया है। हालांकि ट्रैवल और शॉपिंग जैसी कुछ कैटेगरी में रिवॉर्ड दरें पहले जैसी ही बनी रहेंगी।
नए चार्ज और फीस में बदलाव
बैंक ने Dynamic Currency Conversion (DCC) फीस भी बढ़ा दी है। अब अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन पर जब रुपये में बिल आएगा तो 1.75% फीस लगेगी। इसके अलावा कार्ड खो जाने या खराब हो जाने पर नया कार्ड बनवाने के लिए रू.199 का चार्ज भी लगेगा। ये बदलाव 15 मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं।
लाउंज एक्सेस अब खर्च से जुड़ा
1 जुलाई 2026 से फ्री डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस अब सीधे खर्च से जुड़ जाएगा। इसके लिए हर तिमाही (कैलेंडर क्वार्टर) में कम से कम रू.60,000 खर्च करना जरूरी होगा।
योग्य ग्राहकों को Regalia Gold कार्ड पर हर क्वार्टर में 3 फ्री लाउंज विजिट मिलेंगी
Diners Privilege कार्ड पर SmartBuy वाउचर के जरिए 2 डोमेस्टिक और 1 इंटरनेशनल लाउंज एक्सेस मिलेगा
नया Travel Edge प्रोग्राम
HDFC बैंक ने Regalia Gold कार्डधारकों के लिए Travel Edge प्रोग्राम भी शुरू किया है। इसके तहत एयरपोर्ट ट्रांसफर, होटल डाइनिंग डिस्काउंट, स्पा और रूम अपग्रेड जैसे फायदे वाउचर के आधार पर मिल सकते हैं।
क्या ग्राहकों के लिए फायदेमंद है कार्ड?
इन बदलावों के बाद अब इन प्रीमियम कार्ड्स का पूरा फायदा उठाने के लिए ज्यादा खर्च करना जरूरी होगा। विशेषज्ञों के अनुसार ग्राहकों को अपने खर्च पैटर्न के आधार पर यह तय करना चाहिए कि कार्ड अभी भी उनके लिए फायदेमंद है या नहीं।
नई दिल्ली, एजेंसी। रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी है।
BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं।
भारत ने लगातार बातचीत के जरिए इन मतभेदों को दूर करने और सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई।
BRICS समिट से जुड़ीं फोटोज
PM मोदी, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग BRICS समिट के दौरान बातचीत करते हुए।
मोदी, पुतिन और जिनपिंग एक साथ मंच पर नजर आए। इस दौरान मोदी दोनों नेताओं का हाथ थामे दिखे।
BRICS समिट में PM मोदी के साथ जिनपिंग, पुतिन और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत दूसरे नेता नजर आए।
PM मोदी ने 18वें BRICS समिट से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत मंडपम में स्वागत किया
BRICS नेताओं के स्वागत के लिए सजे मंच पर रामेश्वरम के प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की तस्वीर लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग को इस मंदिर के बारे में बताया।
BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन साथ दिखाई दिए।
ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा: 10 सबसे अहम बातें
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा: 22 अप्रैल 2025 के हमले की कड़ी निंदा, 26 लोगों की मौत का जिक्र।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख: आतंकवाद के हर रूप और हर वजह की निंदा की गई।
आतंकवाद को धर्म से न जोड़ें: आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का विरोध।
सीमा पार आतंकवाद पर कार्रवाई: आतंकवाद, उसकी फंडिंग और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई पर जोर।
आतंकियों की जवाबदेही तय हो: आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की बात।
संयुक्त राष्ट्र की आतंकरोधी संधि जल्द बने: अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्तावित संधि को जल्द अपनाने की मांग।
ब्रिक्स के मूल सिद्धांत मजबूत होंगे: आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता और सहमति से फैसलों पर जोर।
एकतरफा टैरिफ की निंदा: एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर चिंता जताई गई। कहा कि ऐसे कदम WTO के नियमों के अनुरूप होने चाहिए।
परमाणु खतरा: परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खतरे और बढ़ते वैश्विक तनाव पर चिंता जताई गई।
भारत की अध्यक्षता की सराहना: BRICS देशों ने भारत की अध्यक्षता में हुए BRICS प्लस और आउटरीच संवाद की सराहना की।
PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट 2026 के औपचारिक शुरुआत की घोषणा की।
ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की अहम बातें
अगले 20 साल का नया एजेंडा बनाएं
BRICS के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव।
ग्लोबल साउथ नियम बनाने में हिस्सा ले
AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी पर जोर।
युवाओं को तैयार करें
युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून की ट्रेनिंग देने का सुझाव।
नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बने
मुसीबत में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकालने के लिए देशों के बीच नेटवर्क बनाने की बात।
भविष्य सबका, फैसला भी सबका
मोदी ने कहा- दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए।
जिनपिंग BRICS के लिए 7 साल बाद भारत आए
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। गलवान झड़प के बाद यह जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। BRICS समिट में शामिल होने के बाद वे आज शाम प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की।
दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं।
हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है।
BRICS नेताओं ने साथ में पौधा लगाया
BRICS समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BRICS देशों के नेताओं ने भारत मंडपम के बाहर लॉन में साथ मिलकर पौधा लगाया।
BRICS नेताओं ने साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई
BRICS देशों ने कहा- आतंकवाद को धर्म से न जोड़ा जाए
BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। सदस्य देशों ने आतंकवाद के हर रूप की निंदा की और इसके खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने पर जोर दिया।
घोषणा में कहा गया कि आतंकवाद को किसी भी वजह से सही नहीं ठहराया जा सकता। आतंकियों की फंडिंग और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है।
ईरान-UAE के मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान मंजूर
भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर BRICS देशों ने शनिवार को नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।
पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर ईरान और UAE के बीच मतभेदों के बावजूद कई दौर की बातचीत के बाद सहमति बनी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिवसीय BRICS समिट के पहले दिन की बैठक के अंत में घोषणा को मंजूरी दिए जाने का ऐलान किया।
BRICS ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की
BRICS देशों ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है।
नई दिल्ली घोषणा में सदस्य देशों ने आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर जोर दिया।
घोषणा में सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों की फंडिंग और उन्हें पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही गई है।
जिनपिंग बोले- पश्चिम एशिया युद्ध से लोगों को भारी नुकसान
सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पूरे क्षेत्र के लोगों को भारी नुकसान हुआ है। इस युद्ध से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी हित पूरा नहीं हो रहा है।
अगले साल चीन संभालेगा BRICS की अध्यक्षता
अगले साल BRICS की अध्यक्षता चीन करेगा। इस मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी के हित में नहीं है। शी ने कहा कि BRICS देशों को मजबूती से इतिहास के सही पक्ष के साथ खड़ा रहना चाहिए।
पजशकियान बोले- परमाणु ठिकानों पर हमले बंद हों
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों को किसी भी हमले या धमकी से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि BRICS देशों को एकतरफा प्रतिबंधों का मिलकर सामना करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके मुताबिक, BRICS को दुनिया में न्याय की आवाज बनना चाहिए।
पजशकियान ने फिलिस्तीन के मुद्दे को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी लोगों को अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार मिलना चाहिए। उनके मुताबिक, यह वैश्विक व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा है और BRICS को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा BRICS मार्केट पहुंचीं
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान की बेटी जहरा पजशकियान BRICS बाजार पहुंचीं। उन्होंने यहां बने ईरान पवेलियन का दौरा किया और ईरानी कला व हस्तशिल्प देखे।
BRICS के 20 साल पर PM मोदी ने 2 डाक टिकट जारी किए
BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा को सर्वसम्मति से दी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली घोषणा को अपनाने का प्रस्ताव रखा। PM मोदी ने कहा, “किसी भी सदस्य ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। नई दिल्ली घोषणा-2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी जाती है।”
भंडारा, एजेंसी। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में शुक्रवार को ट्रक और बोलेरो की टक्कर में 3 बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 लोग घायल हैं। पुलिस के मुताबिक, हादसा सुबह करीब 4 बजे नागपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर पिंपलगांव सड़क के पास हुआ।
सभी लोग छत्तीसगढ़ के रायपुर से नेशनल हाईवे-53 के रास्ते नागपुर जा रहे थे। ट्रक में फंसे पिकअप को निकालने के लिए दो जेसीबी की मदद लेनी पड़ी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव का काम शुरू किया।
घटना से जुड़ी तस्वीरें…
हादसे के बाद आसपास के लोगों ने घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा।
हादसे के बाद बोलेरो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसमें कितने लोग सवार थे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
मौके पर पुलिस ने क्रेन और जेसीबी की मदद से ट्रक में फंसी बोलेरो को बाहर निकाला।
घायलों को पुलिस और स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया।
10 सितंबर: वैन-ट्रक की टक्कर में 6 की मौत
इससे पहले गुरुवार को नांदेड जिले में नांदेड-भोकर रोड पर वैन और ट्रक की टक्कर हो गई थी। हादसे में 6 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
पुलिस के मुताबिक हादसा शाम करीब 7 बजे सीताखंडी घाट के पास हुआ। टाटा मैजिक वैन नांदेड से भोकर की ओर जा रही थी, तभी सामने से आ रहे ट्रक से उसकी जोरदार टक्कर हो गई।
टक्कर इतनी तेज थी कि वैन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और वैन में फंसे घायलों को बाहर निकाला। सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ से बड़े पैमाने पर तबाही हुई। टूटे घर, सड़कें, पुल और दूसरी सुविधाएं दोबारा बनाने के लिए 7,233 करोड़ नेपाली रुपए यानी करीब रू.45 हजार करोड़ की जरूरत का अनुमान है। यह नेपाल की GDP का करीब 11% है।
बाढ़ और भूस्खलन से 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 1,377 लोगों की मौत और करीब 5,130 लोगों के लापता होने की खबर है। करीब 65% रिकवरी खर्च यानी रू.29 हजार करोड़ सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर खर्च होंगे। बाढ़ में 7,570 घर, 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य केंद्र भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
नेपाल त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें…
बाढ़ और भूस्खलन से हुई मौतों के बाद नुवाकोट जिले के बिदुर में सामूहिक दफन की तैयारी करते सुरक्षाकर्मी।
बाढ़ और भूस्खलन के 16 दिन बाद भी तबाही के निशान साफ नजर आ रहे हैं। नुवाकोट के देवीघाट में मलबे के बीच से गुजरते स्थानीय लोग।
बाढ़ और भूस्खलन से जमा हुए मलबे को हटाने का काम जारी है। नुवाकोट के धुंगे बाजार इलाके में बाढ़ से बर्बाद हुए इलाकों से मलबा हटाती क्रेन।
बाढ़ के बाद प्रभावित लोगों की मदद जारी है। नुवाकोट में अस्थायी राहत केंद्र के बाहर मुफ्त दवा वितरण केंद्र पर बाढ़ पीड़ित मरीज से बात करतीं सशस्त्र पुलिस बल की डॉक्टर सबिता केसी।
545 लापता लोगों की तलाश में खोजी कुत्ते उतारे
अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 545 लापता लोगों की तलाश के लिए प्रशिक्षित खोजी कुत्ते उतारे गए हैं। टीमें सुरंगों, हेडवर्क्स और मलबे में तलाश कर रही हैं।
बाढ़ के समय प्रोजेक्ट में 1,433 लोग काम कर रहे थे। इनमें 878 बचा लिए गए, जबकि 545 लापता हैं। इनमें 9 दक्षिण कोरियाई, 34 चीनी और 50 भारतीय शामिल हैं।
नेपाली सेना, ड्रोन टीम, दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञ और शेरपा रेस्क्यू टीम भी अभियान में जुटी हैं।
भारत ने भेजी 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री
नेपाल के राहत और बचाव अभियान में भारत लगातार मदद कर रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 26 अगस्त से अब तक आठ विशेष उड़ानों के जरिए नेपाल को 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेजी गई है।
भारत ने 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें सुरंग और मलबे में फंसे लोगों को निकालने वाली टीमें, मेडिकल विशेषज्ञ और फोरेंसिक कर्मी शामिल हैं।
भारत ने टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाओं के साथ मलबा हटाने और सुरंगों में बचाव के लिए गैस डिटेक्टर, ब्रीदिंग उपकरण, मड रेस्क्यू सूट, जनरेटर, लाइटिंग टावर और पानी निकालने वाले पंप भी भेजे हैं।
पुनर्निर्माण की लागत का 75% सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर पर
पुनर्निर्माण की अनुमानित लागत में करीब 75% यानी रू.2.96 लाख करोड़ बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने में खर्च होंगे। बाढ़ में 7,570 निजी घर, 48 सार्वजनिक इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य संस्थान क्षतिग्रस्त हुए हैं।
इससे साफ है कि नेपाल के सामने चुनौती केवल लोगों को तत्काल राहत देने की नहीं है। उसे अगले कई वर्षों तक सड़क, पुल, बिजली, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और घरों को दोबारा बनाने के लिए भारी खर्च करना होगा।