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बिज़नस

जापान की अर्थव्यवस्था जनवरी-मार्च तिमाही में 2.1% की वार्षिक दर से बढ़ी

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तोक्यो, एजेंसी। जापान की अर्थव्यवस्था जनवरी-मार्च तिमाही में 2.1 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी। पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद यह अर्थव्यवस्था की मजबूती दर्शाती है। सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी। जापान का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पिछले तिमाही के मुकाबले मौसमी समायोजन के आधार पर 0.5 प्रतिशत बढ़ा। यह लगातार दूसरी तिमाही है जब वृद्धि दर्ज की गई है। उपभोक्ताओं और व्यवसायों द्वारा बढ़ा हुआ खर्च अपेक्षा से बेहतर परिणामों में सहायक रहा। सरकारी खर्च में वृद्धि ने भी इस विस्तार को समर्थन दिया। 

मंत्रिमंडल कार्यालय से प्राप्त प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार निजी उपभोग तिमाही आधार पर 0.3 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा। सार्वजनिक मांग भी पिछली तिमाही के मुकाबले 0.3 प्रतिशत बढ़ी। तिमाही में जापान का कुल आयात 0.5 प्रतिशत बढ़ा जबकि निर्यात में 1.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने वृद्धि को बनाए रखने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने पर काम करने का वादा किया है। इसके लिए सरकारी खर्च में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की आवश्यकता हो सकती है।  

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देश

कहीं छूट न जाए मौका: घर में बेटी के जन्म पर अब सरकार देगी 50,000 रुपये, जानें पूरा प्रोसेस?

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जयपुर, एजेंसी। केंद्र और राज्य सरकारें देश की बेटियों को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने के लिए लगातार कई बड़ी योजनाएं चला रही हैं। इसी कड़ी में राजस्थान सरकार की एक बेहद शानदार और महत्वाकांक्षी योजना इन दिनों काफी चर्चा में है जिसका नाम है ‘मुख्यमंत्री राजश्री योजना’ (Mukhyamantri Rajshree Yojana)। 

यह विशेष स्कीम राज्य की बेटियों के जन्म से लेकर उनकी पूरी स्कूली शिक्षा (12वीं क्लास) तक का पूरा वित्तीय खर्च उठाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में लिंगानुपात (महिला-पुरुष अनुपात) को सुधारना, भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों को रोकना और बेटियों के स्वास्थ्य व शिक्षा को बढ़ावा देना है।

राजस्थान सरकार ने इस योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की थी। तब से लेकर आज तक यह स्कीम प्रदेश की लाखों बेटियों की जिंदगी संवार रही है। योजना के तहत पात्र बेटी को उसके जन्म से लेकर 12वीं कक्षा पास करने तक अलग-अलग चरणों में कुल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह पूरी राशि सीधे बेटी के नाम पर खुले बैंक खाते में (Direct Benefit Transfer) भेजी जाती है।

जानें कब और कितना मिलेगा पैसा?

योजना के तहत ₹50,000 की कुल राशि को 6 आसान किस्तों में बांटकर दिया जाता है:

पहली किस्त (जन्म के समय): बेटी के जन्म लेते ही परिवार को ₹2,500 दिए जाते हैं।

दूसरी किस्त (1 वर्ष पूरा होने पर): बेटी के 1 साल की होने और सभी जरूरी टीके लगने पर ₹2,500 मिलते हैं।

तीसरी किस्त (स्कूल एडमिशन): पहली बार सरकारी स्कूल में एडमिशन (पहली क्लास) लेने पर ₹4,000 दिए जाते हैं।

चौथी किस्त (क्लास 6 में प्रवेश): जब बेटी छठी क्लास में पहुंचती है, तो ₹5,000 की सहायता मिलती है।

पांचवीं किस्त (क्लास 10 में प्रवेश): दसवीं कक्षा में दाखिला लेने पर ₹11,000 खाते में आते हैं।

छठी और आखिरी किस्त (12वीं पास): बारहवीं कक्षा सफलतापूर्वक पास करने पर बेटी को एकमुश्त ₹25,000 दिए जाते हैं जिसका उपयोग उसकी आगे की पढ़ाई या शादी के लिए किया जा सकता है।

आवेदन के लिए यह Documents हैं जरूरी

अगर आप भी अपनी बेटी के लिए इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपके पास नीचे दिए गए कागजात होने अनिवार्य हैं। बच्ची का Birth Certificate, पहचान पत्र के रूप में पहचान संबंधी कार्ड (जैसे जन-आधार या पूर्ववर्ती पहचान कार्ड), मातृ और शिशु स्वास्थ्य कार्ड (Mamta Card), स्कूल में प्रवेश (एडमिशन) का आधिकारिक प्रमाण पत्र, बैंक खाते की जानकारी (पासबुक की फोटोकॉपी)

कैसे और कहां करें आवेदन?

मुख्यमंत्री राजश्री योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया बेहद सरल बनाई गई है। आप राजस्थान सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी ई-मित्र (E-Mitra) केंद्र पर जाकर इसके लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। आप अपने क्षेत्र के महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के कार्यालय, सरकारी अस्पताल या आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क करके भी इस योजना का फॉर्म जमा कर सकते हैं।

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देश

LPG Price Hike: महंगाई का एक और झटका; घरेलू गैस सिलेंडर के दाम 29 रुपए बढ़े- जानिए अब क्या होगी नई कीमत

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में महंगाई ने आम आदमी का दम घोंट दिया है। जरूरत का सामान दिन पर दिन महंगा हो रहा है। दूध, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी के बाद अब देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। रसोई गैस (एलपीजी) की कीमत में 29 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार में वृद्धि के चलते सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते तीन महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी की गई है। उद्योग सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत सात जून से 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो जाएगी।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में वृद्धि होने के बाद सात मार्च को की गई 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी के बाद यह दूसरी बार वृद्धि की गई है।

सूत्रों के अनुसार, नवीनतम संशोधन से पहले सरकारी तेल विपणन कंपनियों को बेचे गए प्रत्येक एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 703 रुपये का नुकसान हो रहा था। 

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देश

खाद्य तेलों की पैकेजिंग के नियमों में बड़ा बदलाव: अब वजन और मात्रा दोनों दिखाना होगा अनिवार्य, उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने उपभोक्ताओं के लिए मूल्य तुलना को आसान बनाने, बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने तथा पैकेजिंग में एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य तेलों और वसा की पैकेजिंग तथा शुद्ध मात्रा निर्धारण से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में संशोधन किया है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि खाद्य तेल उद्योग के प्रमुख संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया है। विभाग का कहना है कि बाजार में अलग-अलग आकार के पैकेटों की बढ़ती संख्या के कारण उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांडों की कीमतों और मात्रा की तुलना करने में कठिनाई होती है इसलिए नयी व्यवस्था से खाद्य तेलों की पैकेजिंग में एकरूपता आएगी और खरीदारी अधिक पारदर्शी बनेगी।

संशोधित एसओपी के तहत पाम, सोयाबीन, सूरजमुखी, सरसों, मूंगफली, तिल, राइस ब्रान, कपास बीज और मक्का तेल सहित प्रमुख खाद्य तेलों तथा मिश्रित खाद्य तेलों के लिए 200 मिलीलीटर/ग्राम, 500 मिलीलीटर/ग्राम, 1, 2, 3, 4, 5, 15 और 20 लीटर/किलोग्राम के मानक पैक आकार निर्धारित किए गए हैं। नये प्रावधानों के अनुसार यदि किसी खाद्य तेल की मात्रा लीटर या मिलीलीटर में दर्शाई जाती है तो पैकेट पर उसका समतुल्य वजन भी स्पष्ट अंकित करना होगा। इससे उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांडों के उत्पादों की वास्तविक कीमत और मात्रा का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया है कि 200 मिलीलीटर या 200 ग्राम से कम मात्रा वाले पैकेट इस मानक के दायरे से बाहर रहेंगे ताकि कम कीमत वाले छोटे पैक उपलब्ध रहें। यह व्यवस्था देश में निर्मित और आयातित दोनों प्रकार के खाद्य तेलों पर लागू होगी। निर्माताओं, पैकर्स और आयातकों को नए नियमों को लागू करने के लिए तीन महीने का संक्रमण काल दिया गया है। विभाग के अनुसार इस पहल से उपभोक्ताओं को पैसे का सही मूल्य समझने, विभिन्न ब्रांडों की कीमतों की तुलना करने और अधिक सूचित खरीदारी निर्णय लेने में मदद मिलेगी। साथ ही खाद्य तेल उद्योग में पैकेजिंग की एकरूपता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। 

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