रायपुर, एजेंसी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पास नहीं होने के बाद भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करेगी। इसी कड़ी में लगातार छत्तीसगढ़ में भी विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन होंगे।
रायपुर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 70 करोड़ महिला शक्ति की उम्मीदों पर पानी फेरा गया, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के साथ गद्दारी की है।
CM बोले- कांग्रेस फूट डालो और राज करो की नीति अपनाती है
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि वे बहुत दुखी मन से मीडिया के बीच आए हैं और 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण विपक्ष के रवैये की वजह से नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन ने 70 करोड़ महिला शक्ति की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया है।
सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज में महिलाओं का आरक्षण 57 प्रतिशत है और विधानसभा में भी 21-22 प्रतिशत नारी शक्ति है। इंडी गठबंधन के लोग अंग्रेजों की तरह “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाते हैं और समाजवादी पार्टी जैसी पार्टी धर्म के नाम पर आरक्षण की बात कहकर लोगों को बरगलाती है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इंडी गठबंधन को इसका खामियाजा भुगतना होगा। कांग्रेस और इंडी गठबंधन का वास्तविक चेहरा सामने आ चुका है और देश की माता-बहनें सच्चाई जान चुकी हैं। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि देश की महिलाओं की उम्मीदों पर पानी नहीं फिरने दिया जाएगा।
सीएम साय ने कहा कि इंडी गठबंधन ने 70 करोड़ महिला शक्ति की उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया है।
अरुण सिंह बोले- यह विपक्ष की काली करतूत
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने अपनी “काली करतूत” का परिचय दिया और बिल पास नहीं होने दिया। जब भी महिला अधिकार की बात आई, कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के साथ गद्दारी की है और हमेशा उनके हितों की उपेक्षा की है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने महिला बिल को फाड़ने तक का काम किया। समाजवादी पार्टी और आरजेडी ने हमेशा महिलाओं को गाली देने का काम किया। महिलाओं को इस बार पूरी आशा थी कि बिल पास हो जाएगा, लेकिन बिल गिरने पर विपक्ष के लोगों ने तालियां बजाईं और खुशियां मनाईं, जबकि भाजपा के लोगों की आंखों में आंसू थे।
अरुण सिंह ने कहा कि कांग्रेस के लोग चालबाज हैं और कांग्रेस ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर बहुत बड़ा पाप किया है, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा। संशोधन में दो-तिहाई बहुमत चाहिए था, इसलिए उम्मीद थी कि कांग्रेस और विपक्ष समर्थन करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ लोग समर्थन करना चाहते थे, लेकिन राहुल गांधी ने ऐसा नहीं होने नहीं दिया। जो नासमझ हो उसे समझाया जा सकता है, लेकिन जो समझकर भी न समझे, वही काम कांग्रेस कर रही है। भाजपा के संविधान में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का उल्लेख है।
राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने महिला बिल को फाड़ने तक का काम किया।
लोकसभा में पास नहीं हो सका महिला आरक्षण बिल
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। इसे पारित करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। इस बिल में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था।
शनिवार को पीएम मोदी ने बिल को लेकर देश को सम्बोधित कर महिलाओं से बिल पास नहीं होने पर माफी मांगी।
PM मोदी ने माफी मांगी, विपक्ष पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार शाम देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर माताओं-बहनों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि इस बिल में संशोधन नहीं हो पाया और इसके लिए वे क्षमा चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए देशहित सर्वोपरि है, लेकिन कुछ दलों के लिए दलहित देशहित से बड़ा हो गया, जिसका नुकसान नारी शक्ति को उठाना पड़ा। उन्होंने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि इनकी राजनीति के कारण महिलाओं के अधिकारों को झटका लगा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण प्रस्ताव गिरने के बाद विपक्षी दलों ने खुशी जताई, जबकि देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति अपने अपमान को नहीं भूलती और इस पूरे घटनाक्रम को देश की महिलाएं याद रखेंगी।
विशेष सत्र में लाया गया था प्रस्ताव
महिला आरक्षण से जुड़े इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार ने संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था। मतदान के दौरान आवश्यक बहुमत नहीं मिलने के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका।
पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।
गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।
भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं। कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।
A Significant Initiative Towards Transparent, Fair and Time-Bound Grievance Redressal
Bilaspur/Korba. South Eastern Coalfields Limited (SECL) has constituted a High-Level Standing Review Committee with the objective of ensuring fair, transparent and time-bound examination of complaints related to employment in lieu of land. The Committee will examine each case on the basis of available records, documents and evidence and submit its recommendations to the competent authority.
The high-level standing review mechanism has been instituted with the objective of making the process of employment in lieu of land more transparent and impartial, while ensuring effective protection of the rights of all eligible beneficiaries.
The Committee will be headed by the General Manager (Land & Revenue), SECL Headquarters, Bilaspur. The Committee will comprise the General Manager (Planning & Projects), General Manager (Human Resources/Manpower), General Manager (Human Resources/Industrial Relations), and Deputy General Manager (Legal), SECL Headquarters, Bilaspur as its members.
As required, the Committee will examine relevant records and documents, seek necessary information from concerned officials and verify available facts and evidence. Complaints will be examined in accordance with the applicable rules and prescribed procedures, thereby facilitating their prompt, fair and reasoned disposal.
Any person may submit a complaint, along with relevant documents and evidence, regarding irregularities in employment in lieu of land, use of forged or fabricated documents, obtaining employment by concealing material facts, or any other related matter.
SECL has clarified that there is no provision for withdrawal of a duly registered complaint. Therefore, complainants are expected to submit complaints only on the basis of authentic facts and available evidence.
The Company has appealed to all concerned stakeholders and members of the public to submit complaints only through authorised channels and to remain cautious of intermediaries, unverified information and misleading claims.
SECL has further clarified that if, during the course of examination, any complaint is found to be knowingly false, malicious or based on misleading facts, or appears to have been submitted with the intention of tarnishing the reputation of any individual or causing unnecessary harassment, necessary legal action may be initiated against the concerned complainant in accordance with the applicable rules and legal provisions.
SECL remains committed to the highest standards of good governance, transparency, accountability and institutional fairness. The Company believes that the High-Level Standing Review mechanism will make the process of examination of complaints related to employment in lieu of land more transparent, impartial and credible. At the same time, it will help ensure effective protection of the interests of genuine and eligible beneficiaries, while further strengthening public confidence and institutional accountability in the grievance redressal mechanism.
कोरबा। कोरबा जिले के तरदा गांव और आसपास के क्षेत्र में मंगलवार को मगरमच्छ देखे जाने की खबर से हड़कंप मच गया। तरदा एनीकट और कुदुरमाल एनीकट में मगरमच्छ होने की सूचना के बाद सोशल मीडिया पर एक फोटो तेजी से वायरल हुई।
सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच की। जांच में सामने आया कि वायरल फोटो AI से तैयार की गई थी और क्षेत्र में मगरमच्छ मिलने की सूचना महज अफवाह थी।
तरदा में AI से मगरमच्छ की फोटो बनाकर किया वायरल।
पहले खेत में मिला था 4 फीट का मगरमच्छ
कुछ दिन पहले तरदा गांव में खेतों में काम कर रहे किसानों ने कीचड़ में करीब 4 फीट लंबा मगरमच्छ देखा था। इसके बाद ग्रामीणों ने रस्सी और जाल की मदद से उसे पकड़कर वन विभाग को सौंप दिया था। घटना के बाद ग्रामीणों में क्षेत्र में और मगरमच्छ होने की आशंका बनी हुई थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई AI फोटो
मंगलवार को तरदा और कुदुरमाल एनीकट में मगरमच्छ देखे जाने की सूचना के साथ सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई। फोटो सामने आने के बाद वन विभाग सक्रिय हुआ। बुधवार सुबह करतला वन मंडल के रेंजर अक्ष ऋषि टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आसपास के क्षेत्र की जांच की।
तरदा में AI से मगरमच्छ की फोटो बनाकर किया वायरल।
जांच में नहीं मिला मगरमच्छ
रेंजर अक्ष ऋषि ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल फोटो के आधार पर टीम मौके पर पहुंची थी। जांच में पता चला कि फोटो AI से तैयार की गई है। मौके पर मगरमच्छ मिलने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने लोगों से ऐसी तस्वीरों और अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की।
एहतियात के तौर पर गांव में कराई मुनादी
हालांकि वन विभाग ने एहतियात बरतते हुए आसपास के गांवों में मुनादी कराई है। ग्रामीणों को नदी, एनीकट और जल स्रोतों के आसपास सावधानी बरतने की समझाइश दी जा रही है। वन विभाग की टीम क्षेत्र पर नजर भी रख रही है।
फर्जी अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना पुष्टि के AI से तैयार फोटो या झूठी सूचना सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से लोगों में अनावश्यक दहशत फैलती है। ऐसी फर्जी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।