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छत्तीसगढ़

बालोद में खड़े ट्रक से टकराई बस, कंडक्टर की मौत:12 यात्री घायल, ड्राइवर को झपकी आने से हुआ हादसा

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बालोद,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर सोमवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। जगदलपुर से रायपुर जा रही महिंद्रा कंपनी की बस खड़े ट्रक से टकरा गई। हादसे में बस कंडक्टर की मौके पर ही मौत हो गई। करीब 12 यात्री घायल हुए हैं। घायलों का धमतरी में इलाज चल रहा है।

घटना रात 3 से 4 बजे के बीच की है। हादसे के समय अधिकतर यात्री सो रहे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस के शीशे टूट गए और यात्री इधर-उधर गिरने लगे। घायलों को धमतरी जिला अस्पताल और क्रिश्चियन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। कुछ गंभीर घायलों को रेफर किया जा सकता है।

हादसे के समय अधिकतर यात्री सो रहे थे।

हादसे के समय अधिकतर यात्री सो रहे थे।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर के अनुसार, प्रथम दृष्टया चालक को हल्की नींद आने से यह हादसा हुआ। स्थानीय थाने को सूचना मिलते ही पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। यह हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग 30 के डेंजर जोन में हुआ है।

सुबह 3-4 बजे बस खड़े ट्रक से टकराई गई।

सुबह 3-4 बजे बस खड़े ट्रक से टकराई गई।

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कोरबा

युवाओं को स्वरोजगार हेतु प्रोत्साहित किया गया

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 उद्यमिता जागरूकता शिविर का आयोजन

कोरबा। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, कोरबा द्वारा स्थानीय एक होटल में उद्यमिता जागरूकता शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं एवं इच्छुक उद्यमियों को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना तथा राज्य एवं केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विशेष रूप से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के बारे में व्यापक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने उपस्थित युवाओं को बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से वे किस प्रकार अपना स्वयं का उद्योग या व्यवसाय प्रारंभ कर सकते हैं तथा सरकार द्वारा उपलब्ध सब्सिडी एवं वित्तीय सहायता का लाभ कैसे प्राप्त कर सकते हैं।

पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत बैंक ऋण, सब्सिडी प्रक्रिया, पात्रता मानदंड एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी विस्तारपूर्वक प्रदान की गई। वहीं पीएमएफएमई योजना के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए उपलब्ध सहायता, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण एवं वित्तीय सहयोग की रूपरेखा सरल एवं सहज भाषा में समझाई गई। शिविर में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। कार्यक्रम ने युवाओं में स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा जगाई तथा उन्हें अपने व्यवसाय की संभावनाओं को मूर्त रूप देने हेतु प्रोत्साहित किया।

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कोरबा

भूमिहीन कृषि मजदूरों और उनके परिवारों की आर्थिक समृद्धि हेतु अत्यंत लाभकारी है भूमिहीन  कृषि मजदूर कल्याण योजना

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खाते में राशि अंतरण के साथ हितग्राहियों से मुख्यमंत्री ने किया संवाद

कोरबा जिले के हितग्राहियों के खाते में अंतरित हुई राशि

कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत आयोजित राज्यस्तरीय राशि वितरण कार्यक्रम बलौदाबाजार में हितग्राहियों के बैंक खातों में सहायता राशि का अंतरण किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर के हितग्राहियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों से योजना के लाभ तथा उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी प्राप्त की।

शासन के निर्देशानुसार कोरबा जिले के तहसील पोड़ी उपरोड़ा में योजना के हितग्राहियों को लाभान्वित करने हेतु तहसील स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा पूजा एवं राजगीत के साथ किया गया। तत्पश्चात मुख्य अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। स्वागत उद्बोधन अनुविभागीय अधिकारी (रा.) मनोज कुमार बंजारे द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने उद्बोधन दिया तथा हितग्राहियों को प्रमाण पत्र वितरित किए।

मुख्य अतिथि तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम, विधायक पाली-तानाखार, ने कहा कि यह योजना छत्तीसगढ़ के भूमिहीन कृषि मजदूरों एवं उनके परिवारों की आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. पवन सिंह, अध्यक्ष जिला पंचायत कोरबा, ने कहा कि राज्य शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की तरह यह योजना भी भूमिहीन कृषक परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

योजना के तहत पात्र परिवार के मुखिया को प्रतिवर्ष रूपये 10 हजार की एकमुश्त राशि डीबीटी के माध्यम से प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
कोरबा जिले में कुल 10 हजार 081 हितग्राही पंजीकृत हैं, जिनमें 9,923 ग्रामीण एवं 158 नगरीय क्षेत्र के हितग्राही शामिल हैं। विकासखण्ड पोड़ी उपरोड़ा के 1,853 हितग्राहियों को आज के कार्यक्रम में राशि का लाभ प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में श्रीमती माधुरी देवी ठाकुर, अध्यक्ष जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा, विनय देवांगन तहसीलदार, जयप्रकाश डड़सेना मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत, सुमन मानिकपुरी नायब तहसीलदार, जनप्रतिनिधि, हितग्राही तथा किसान बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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कोरबा

मोट्राईज़्ड ट्राईसाइकिल से दिव्यांग सूरज के जीवन में फैली नई रोशनी

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कोरबा। नगर पालिका निगम क्षेत्र के सेमीपाली-जमनीपाली, कोरबा के निवासी 32 वर्षीय सूरज कुमार जन्म से ही 100 प्रतिशत अस्थि-बाधित दिव्यांगता के बावजूद हिम्मत नहीं हारे। दो पैरों से पूर्णतः दिव्यांग होने के कारण उनका हर दिन संघर्ष और तकलीफ़ों से भरा था। चलना-फिरना, दैनिक कार्यों को करना, बाहर जाना-हर कदम पर मुश्किलें उनका जीवन बोझिल बना देती थीं। फिर भी जीवन को आगे बढ़ाने की उनकी इच्छाशक्ति कभी कमजोर नहीं हुई। बेहतर सहारे की तलाश में 14 मार्च 2026 को वे लोक अदालत में उपस्थित हुए और मोट्राईज़्ड ट्राईसाइकिल की मांग रखी।

छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग ने उनकी आवश्यकता को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई करते हुए सहायक उपकरण प्रदाय योजना के अंतर्गत उसी दिन मोट्राईज़्ड ट्राईसाइकिल स्वीकृत कर प्रदान की। यह महत्वपूर्ण सहयोग उप-संचालक एवं श्रीमती भुनेश्वरी तिवारी (एम.आर.ए.) द्वारा निःशुल्क दिया गया। मोट्राईज़्ड ट्राईसाइकिल जैसे ही सूरज कुमार को मिली, उनके जीवन में मानो नई रोशनी फैल गई। पहले जहां हर कदम संघर्ष था, वहीं अब गतिशीलता, आत्मविश्वास और उत्साह का नया अध्याय शुरू हुआ।
ट्राईसाइकिल मिलने के बाद उनकी मुस्कान और जीवन की चमक सब कुछ बयां कर रही थी। स्वयं सूरज कुमार के शब्दों में “अब मैं मोट्राईज़्ड ट्राईसाइकिल की मदद से अपने रोजमर्रा के काम आसानी से कर सकूंगा। स्व-रोज़गार कर आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्य धारा से जुड़कर जीवन जी सकूंगा।“ आज सूरज कुमार अपनी नई ट्राईसाइकिल के साथ न केवल स्वतंत्र रूप से चल-फिर पा रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।
यह सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि उनके जीवन में आत्मसम्मान, संभावना और नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है।

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