छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलने के नियम बदले:अब एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट जरूरी नहीं, एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठेंगे, बिल्डिंग-सेफ्टी की जानकारी देनी होगी
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल शुरू करने और उनकी मान्यता को लेकर नियम बदल गए हैं। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 7 सितंबर 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है। ये नियम एकेडमिक सेशन 2026-27 से लागू होंगे। इससे पहले 2018 के नियम लागू थे।
राज्य सरकार के जून 2026 के नोटिफिकेशन के बाद अब नए नियम बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन में स्कूल संचालकों को कुछ बड़ी राहत दी गई है। अब स्कूल खोलने के लिए एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होगा।
मान्यता के लिए स्कूल को सेल्फ सर्टिफिकेशन देना होगा। इसमें स्कूल को खुद बताना होगा कि उसकी बिल्डिंग सेफ है, लैब, लाइब्रेरी और प्लेग्राउंड की सुविधा है, टीचिंग स्टाफ क्वालिफाइड है और बच्चों की सेफ्टी के जरूरी इंतजाम किए गए हैं।
अगर सेल्फ सर्टिफिकेशन में गलत जानकारी दी गई तो स्कूल की मान्यता सस्पेंड या कैंसिल की जा सकती है। फाइन भी लगाया जा सकता है। इसके अलवा अब एक रूम में अधिकतम 45 बच्चें ही बैठ सकेंगे।
नई गाइडलाइन में क्या बदला?
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि स्कूल खोलने के लिए अब अनिवार्यता प्रमाण पत्र (एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट) नहीं लेना होगा। इसके अलावा स्कूल के लिए न्यूनतम कॉर्पस फंड रखने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।
स्कूल को सिर्फ यह बताना होगा कि उसके पास स्कूल चलाने और स्टाफ की सैलरी देने के लिए पर्याप्त फाइनेंस है। स्कूल को हर एकेडमिक सेशन खत्म होने के 3 महीने के अंदर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी।
नई मान्यता के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा
स्कूल की नई मान्यता के लिए पूरा प्रोसेस ऑनलाइन होगा। स्कूल के ऑथराइज्ड अधिकारी को मंडल के पोर्टल पर फॉर्म भरना होगा और फीस भी ऑनलाइन जमा करनी होगी। एक ही समय पर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की मान्यता नहीं मिलेगी। पहले हाईस्कूल की मान्यता लेनी होगी।
इसके बाद ही हायर सेकंडरी की मान्यता के लिए अप्लाई किया जा सकेगा। नई मान्यता के लिए स्कूल को 2 साल पहले 15 अप्रैल तक अप्लाई करना होगा। लेट फीस के साथ 31 जुलाई तक आवेदन किया जा सकेगा। रिन्यूअल के लिए 31 दिसंबर तक नॉर्मल फीस के साथ आवेदन करना होगा।
इसके बाद 28 फरवरी तक 4 हजार रुपए लेट फीस लगेगी। 28 फरवरी के बाद हर दिन 100 रुपए अतिरिक्त फीस लगेगी। हाईस्कूल और हायर सेकंडरी के लिए लेट फीस अलग-अलग लगेगी।
बिना मान्यता 9वीं से 12वीं तक क्लास नहीं चला सकेंगे
जिस प्राइवेट स्कूल के पास मंडल की मान्यता नहीं है, वह 9वीं से 12वीं तक की क्लास नहीं चला सकेगा। अगर किसी स्कूल की मान्यता कैंसिल हो जाती है तो वहां पढ़ रहे बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा।
स्कूल की जमीन स्कूल संचालक के नाम होनी चाहिए।
हिंदी और इंग्लिश मीडियम के लिए अलग सेटअप
नई गाइडलाइन में हिंदी और इंग्लिश मीडियम स्कूलों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। अगर कोई स्कूल हिंदी और इंग्लिश दोनों मीडियम चलाना चाहता है तो दोनों के लिए जमीन, बिल्डिंग, प्रिंसिपल और टीचिंग स्टाफ अलग-अलग रखना होगा।
एक ही बिल्डिंग में 2 अलग बोर्ड भी नहीं चलाए जा सकेंगे। अगर कोई स्कूल इंग्लिश मीडियम शुरू करना चाहता है तो उसे इसके लिए नया स्कूल मानकर नई मान्यता लेनी होगी। इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने वाले टीचर के पास इंग्लिश मीडियम बैकग्राउंड का सर्टिफिकेट भी होना जरूरी होगा।
स्कूल की जमीन और बिल्डिंग के लिए भी नए नियम
स्कूल की जमीन स्कूल संचालक के नाम होनी चाहिए। इसके अलावा कम से कम 3 साल का रेंट एग्रीमेंट या रजिस्टर्ड लीज भी मान्य होगी। जमीन का बी-1 खसरा और सिविल इंजीनियर से तैयार बिल्डिंग मैप नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत से सर्टिफाइड होना चाहिए।
मैप में जमीन, पूरी बिल्डिंग और हर रूम का एरिया अलग-अलग दिखाना होगा। अगर शुरुआत में स्कूल के पास खुद की जमीन नहीं है तो जमीन खरीदने और बिल्डिंग बनाने का वर्क प्लान देना होगा। इस प्लान को 3 साल में पूरा करना होगा। ऐसा नहीं होने पर चौथे साल से हर साल पेनल्टी लगेगी।
स्कूल में बच्चों के लिए खेल, प्रेयर और पार्किंग की खुली जगह भी रखनी होगी। कृषि संकाय वाले स्कूलों में प्रैक्टिकल के लिए कृषि जमीन जरूरी होगी। इसके अलावा मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी होगा।
नए नियम के तहत एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे ही बैठ सकेंगे।
एक क्लासरूम में 45 से ज्यादा बच्चे नहीं
नई गाइडलाइन के मुताबिक क्लासरूम कम से कम 300 स्क्वायर फीट का होना चाहिए। एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठ सकेंगे। हर बच्चे के लिए कम से कम 6 स्क्वायर फीट जगह जरूरी होगी। हाईस्कूल के लिए कम से कम 7 क्लासरूम जरूरी हैं। हायर सेकंडरी में चुने गए संकाय के हिसाब से अतिरिक्त रूम रखने होंगे।
एक बिल्डिंग में एक ही शिफ्ट चलेगी और स्कूल की शिफ्ट कम से कम 6 घंटे की होनी चाहिए। अधूरी बिल्डिंग, जंगल की जमीन, सरकारी जमीन या अतिक्रमण वाली जमीन पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी। इंस्पेक्शन के समय स्कूल की बिल्डिंग की वीडियोग्राफी भी दिखानी होगी।
व्यावसायिक दुकानों के बीच, फ्लैट्स के बीच या नियमों के खिलाफ जगह पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी। स्कूल कैंपस के अंदर कोई दूसरा बिजनेस भी नहीं चलाया जा सकेगा।
नई गाइफलाइन के अनुसार लाइब्रेरी और लैब शेयर करने की भी सुविधा होनी चाहिए। (फाइल)
लाइब्रेरी और लैब शेयर करने की भी सुविधा
नई गाइडलाइन में स्कूलों को कुछ सुविधाएं शेयर करने की अनुमति दी गई है। लाइब्रेरी, लैब, प्लेग्राउंड और कंप्यूटर लैब स्कूल के अंदर होना बेहतर माना गया है, लेकिन स्कूल चाहे तो पास के सरकारी इंस्टीट्यूट, नगर पालिका, कॉलेज या दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूल के साथ इन सुविधाओं को शेयर कर सकता है।
इसके लिए फॉर्मल एग्रीमेंट जरूरी होगा। बच्चों की एंट्री का रिकॉर्ड रखना होगा और उनकी सेफ्टी की जिम्मेदारी भी स्कूल की होगी। हाईस्कूल में एक लैब रूम पर्याप्त होगा। वहीं हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब रखनी होंगी।
कंप्यूटर पढ़ाने के लिए पीजीडीसीए क्वालिफिकेशन वाला टीचर जरूरी होगा।
हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब रखनी होंगी।
हाईस्कूल में 13 पदों का स्टाफ सेटअप
हाईस्कूल के लिए कुल 13 पदों का स्टाफ सेटअप तय किया गया है। इसमें एक प्रिंसिपल, 6 लेक्चरर और बाकी सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं। हायर सेकंडरी में हर संकाय के हिसाब से करीब 10 पदों का स्टाफ रखना होगा। प्रिंसिपल और लेक्चरर के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ बीएड जरूरी होगा।
प्रिंसिपल के पास कम से कम 5 साल का टीचिंग एक्सपीरियंस होना चाहिए। स्कूल में काउंसलर की व्यवस्था भी करनी होगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करना होगा। स्टाफ की लिस्ट के साथ फोटो, आधार, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और सैलरी स्लिप भी जमा करनी होगी।
बच्चों की सेफ्टी के लिए ये इंतजाम जरूरी
स्कूल में बच्चों के लिए साफ पीने का पानी, लड़के-लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट, दिव्यांगों के लिए टॉयलेट और स्टाफ के लिए अलग टॉयलेट जरूरी होगा। बिजली, पर्याप्त फर्नीचर और सीसीटीवी कैमरे भी अनिवार्य होंगे।
अगर स्कूल बस चलाता है तो हर साल बस का टेक्निकल चेकअप कराना होगा। ड्राइवर और कंडक्टर का हेल्थ चेकअप भी जरूरी होगा।
स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं।
स्कूल के नाम में भी कई शब्द नहीं लगा सकेंगे
नई गाइडलाइन में स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। प्राइवेट स्कूल अपने नाम में नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय, एकलव्य, प्रयास, केंद्रीय, राष्ट्रीय, पीएमश्री, स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
मंडल के मुताबिक, ऐसे नाम से पैरेंट्स को स्कूल के बारे में गलतफहमी हो सकती है। स्कूल को कम से कम एक बोर्ड एग्जाम तक चलाना होगा। मान्यता मिलने के बाद स्कूल को कम से कम एक बोर्ड एग्जाम तक चलाना जरूरी होगा। यानी बच्चों को बीच में स्कूल बदलने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
अगर स्कूल लगातार 2 साल तक रिन्यूअल फीस और एग्जाम फॉर्म जमा नहीं करता है तो उसकी मान्यता अपने आप कैंसिल हो जाएगी।
दूसरे बोर्ड में जाना है तो मंडल से NOC जरूरी
अगर कोई स्कूल सीबीएसई या किसी दूसरे बोर्ड से मान्यता लेना चाहता है तो उसे मंडल में 3 साल की फीस एक साथ जमा करनी होगी। इसके बाद ही एनओसी मिलेगी। स्कूल की जगह, बिल्डिंग, नाम या मीडियम बदलना है तो पहले सरकार से परमिशन लेनी होगी।
इसके बाद 30 दिन के अंदर मंडल में आवेदन करना होगा। बिना परमिशन बदलाव करने पर स्कूल की मान्यता कैंसिल की जा सकती है। इसी तरह स्कूल का मैनेजमेंट भी मंडल की परमिशन के बिना ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
मंडल ने साफ किया- ये सिर्फ मिनिमम स्टैंडर्ड हैं
मंडल ने नई गाइडलाइन में साफ किया है कि ये स्कूलों के लिए मिनिमम स्टैंडर्ड हैं। जो स्कूल इन नियमों को पूरा नहीं करेंगे, अगले साल उनकी मान्यता पर विचार नहीं किया जाएगा।
यानी नई गाइडलाइन में जहां स्कूल खोलने वालों को एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट और कॉर्पस फंड से राहत दी गई है, वहीं बिल्डिंग, स्टाफ, सेफ्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्कूल संचालन के नियमों को सख्त रखा गया है।
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ में शराब पीने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में बसपा पार्षद समेत दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े (55) और निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे (52) के रूप में हुई है।
दोनों ने शुक्रवार देर शाम अपने दो अन्य साथियों के साथ देशी शराब का सेवन किया था। घर पहुंचने के बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी और उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उन्हें बिलासपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।
रामखिलावन जांगड़े ने सिम्स में, जबकि जोहितराम खरे ने अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, शराब पीने के दौरान साथ रहे कमल नाथ खरे उर्फ राजा की शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मामले में शराब पीने के दौरान मौजूद मुकेश कश्यप उर्फ गोलू को पुलिस ने हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है।
बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े।
निजी क्लिनिक संचालक जोहितराम खरे
जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका
घटना के बाद शराब में जहरीला पदार्थ मिले होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, फिलहाल दोनों की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगी।
दोनों मृतकों के शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत शराब के सेवन से हुई या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
चार लोग साथ बैठकर पी रहे थे शराब
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर शाम भाजपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े अपने तीन साथियों के साथ बैठकर शराब पी रहे थे। इनमें रामखिलावन जांगड़े और जोहितराम खरे की तबीयत अचानक बिगड़ गई। शराब सेवन के बाद दोनों को सांस लेने में परेशानी होने लगी।
हालत खराब होने पर परिजन और आसपास के लोग उन्हें इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पामगढ़ लेकर पहुंचे। वहां शुरुआती इलाज के बाद दोनों की स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बिलासपुर रेफर कर दिया।
सिम्स में इलाज के दौरान बसपा पार्षद रामखिलावन जांगड़े की मौत हो गई।
सिम्स और अपोलो अस्पताल में हुई मौत
पामगढ़ से बिलासपुर पहुंचने के बाद रामखिलावन जांगड़े को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि जोहितराम खरे का अपोलो अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान दोनों ने दम तोड़ दिया।
दोनों की मौत के बाद मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। शराब में जहरीला पदार्थ मिला होने की आशंका के बीच पोस्टमॉर्टम और अन्य जांच के जरिए मौत की वजह पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों की मौत शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी के कारण हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी।
सांस लेने में परेशानी के बाद बिगड़ी हालत
एसडीओपी तोपेश वर्मा के अनुसार, दोनों मृतकों ने अपने दो अन्य साथियों के साथ सादी देशी शराब का सेवन किया था। इसके बाद घर पहुंचने पर उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। हालत बिगड़ने पर दोनों को बिलासपुर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
एसडीओपी ने बताया कि शराब पीने के दौरान मौजूद दो अन्य साथियों की तलाश की जा रही है, ताकि घटना के संबंध में जानकारी जुटाई जा सके।
पोस्टमॉर्टम और जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह
दोनों शवों का बिलासपुर में पोस्टमॉर्टम कराया जाना है। मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखकर जांच कराए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों की मौत किस वजह से हुई और क्या शराब में किसी जहरीले पदार्थ की मिलावट थी।
फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटा रही है। शराब सेवन के दौरान मौजूद दोनों अन्य साथियों से पूछताछ के बाद घटना के संबंध में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी की शुरुआत होने जा रही है। सरकार 3100 रुपए समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदेगी। पंजीकृत किसानों से 1 एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान लिया जाएगा। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2027 तक चलेगा।
दुर्ग पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तारीख का ऑफिशियल ऐलान किया। राज्य सरकार ने इस सीजन में कुल 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का बड़ा लक्ष्य रखा है। पिछले साल 140 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था। धान खरीदी का लक्ष्य इस साल 20 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है।
पिछले 5 सालों में 63% बढ़ा धान खरीदी का लक्ष्य
2021-22: 98 लाख मीट्रिक टन
2026-27: 160 लाख मीट्रिक टन
5 साल में लक्ष्य 1.63 गुना बढ़ा
कुल बढ़ोतरी: 62 लाख मीट्रिक टन (करीब 63%)
किसानों को इन बातों का रखना होगा ध्यान:
एग्रीस्टैक पंजीयन अनिवार्य: धान बेचने के लिए इस बार किसानों को एग्रीस्टैक पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराना जरूरी किया गया है।
टोकन की व्यवस्था: खरीदी केंद्रों पर टोकन के जरिए तय तारीख पर ही धान की बिक्री हो सकेगी।
बायोमेट्रिक सत्यापन: उपार्जन केंद्रों पर पारदर्शिता बरतने के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
गुणवत्ता और नमी के मानक: धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, अन्यथा माल रिजेक्ट हो सकता है।
सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में टीचर और उनके बेटे की हत्या के आरोपी की पत्नी ने अपने पति को फांसी देने की मांग की है। आरोपी की पत्नी और मृतका एक ही स्कूल में टीचर थीं।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि करीब 15 दिन पहले ही उसके पति ने बिना उसकी मर्जी के उसका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। उसे शक है कि अगला टारगेट वह खुद थी। उसका कहना है कि पति ने घटना वाली रात पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उसे पति के इस हत्याकांड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
आरोपी की पत्नी ने बताया कि पति ने पुलिस की पूछताछ में टीचर की हत्या इगो में करने की बात कही थी। रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था। आरोपी की पत्नी ने कहा, हो सकता है कि दोनों के बीच अवैध संबंध रहे हों, हालांकि इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
मामला जयनगर और विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है। आरोपी ने टीचर रजनी बरेट (40) से पैसे मांगे, नहीं देने पर उसका गला घोंट दिया। वहीं, मृतका के बेटे सूजल बरेट (18) को सुनसान जगह ले जाकर पत्थर से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या के आरोप में परवेश कुमार उर्फ प्रवेश कुमार को गिरफ्तार किया है।
बेटे की लाश सड़क किनारे सुनसान जगह में मिली थी।
महिला सरकारी स्कूल में टीचर थी, उसकी लाश बाथरूम में मिली थी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पत्नी ने कहा-बीमा कराया था, अगला टार्गेट मैं थी
दोहरे हत्याकांड के आरोपी प्रवेश कुमार की गिरफ्तारी के बाद उसकी पत्नी सरिता लकड़ा ने पति से सारे रिश्ते तोड़ने की बात कही और उसे जल्द से जल्द फांसी देने की मांग की।
सरिता कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोने लगी। उसने बताया कि हत्या की घटना से करीब 15 दिन पहले ही उनके पति प्रवेश ने बिना उनकी मर्जी के टाटा एआईए कंपनी में उनका एक करोड़ रुपए का बीमा कराया था। सरिता ने आशंका जताई कि उनके पति का अगला टारगेट वह खुद थी।
पत्नी बोली- जान का खतरा, पति ने झूठ बोला था
सरिता लकड़ा ने कहा कि अब उसे अपनी जान का डर सता रहा है। पति ने एक करोड़ रुपए का बीमा इसलिए कराया था, ताकि मेरी मौत के बाद बीमा की रकम लेकर वह आसानी से फरार हो सके।
सरिता ने बताया कि घटना वाली रात भी पति ने पेंड्रा जाने की बात कहकर उसे गुमराह किया था। उन्हें इस हत्याकांड की जानकारी बाद में पुलिस के जरिए मिली। सरिता ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की मांग की है।
चार साल से थे लिव इन में
हत्याकांड का आरोपी प्रवेश कुमार मूल रूप से हरियाणा के करनाल जिले का रहने वाला है। वह ऑटो पार्ट्स सप्लाई का कारोबार करता था और विश्रामपुर में रह रहा था। कोरोना काल में उसकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी। उसने कारोबार के लिए बैंक से 20 लाख रुपए का लोन भी लिया था।
आर्थिक तंगी के कारण उसे अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। इसके बाद वह अलग-अलग दुकानों पर ऑटो पार्ट्स की सप्लाई करने लगा। सरिता लकड़ा के संपर्क में आने के बाद दोनों वर्ष 2022 से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे। सरिता ने बताया कि इस वारदात के बाद उन्होंने अपनी मांग का सिंदूर मिटा दिया है।
‘नामर्द’कहने पर हत्या, कहा- हो सकता है अवैध संबंध
सरिता ने बताया कि उनके पति प्रवेश कुमार ने पुलिस की पुलिस की पूछताछ में कहा था कि उसने इगो में आकर रजनी की हत्या कर दी। सरिता के मुताबिक, रजनी ने शायद प्रवेश को ‘नामर्द’ कहा था, जिसके कारण उसने हत्या की।
सरिता ने यह भी कहा कि हो सकता है कि प्रवेश और रजनी के बीच अवैध संबंध रहे हों, लेकिन उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
टीचर और बेटे की हुई थी हत्या
जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह जयनगर थाना क्षेत्र के महावीरपुर में नेशनल हाईवे-43 से लगी ग्रामीण सड़क के किनारे एक लड़के का शव मिला था। लड़के की हत्या के बाद शव सड़क किनारे फेंका गया था।
मृतक की पहचान बिश्रामपुर के कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं के छात्र सुजल बरेठ (18) के रूप में हुई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सुजल की स्कूटी घर से करीब 500 मीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर लावारिस हालत में खड़ी थी।
मां का शव बाथरूम में मिला
देर रात पुलिस सुजल के घर पहुंची, तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला। उसकी मां रजनी बरेठ का भी पता नहीं चल रहा था। इसके बाद बिश्रामपुर पुलिस ने सुजल के रिश्तेदारों को मौके पर बुलाया। उनकी मौजूदगी में घर का ताला तोड़ा गया। अंदर बाथरूम में सुजल की मां रजनी बरेठ (40) का शव भी संदिग्ध हालत में मिला।
पति से तलाक के बाद बेटे के साथ रहती थी
रजनी बरेठ बेलटिकरी के सरकारी स्कूल में टीचर थीं। पति से 5 साल पहले तलाक के बाद वह अपने बेटे सुजल के साथ विश्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवनगर में किराए के मकान में रहती थीं। घटना के बाद पुलिस ने कई संदेहियों से पूछताछ की।
मामला ब्लाइंड मर्डर का होने के कारण साइबर सेल और सूरजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले गए और संदिग्धों के मोबाइल की लोकेशन भी निकाली गई।
सहेली के पति पर गया शक
जांच के दौरान रजनी बरेठ के स्कूल में पदस्थ एक महिला टीचर के पति परवेश उर्फ प्रवेश कुमार (36) की भूमिका संदिग्ध मिली। पुलिस को CCTV में एक व्यक्ति टीचर के घर की ओर जाते दिखा था। जांच के बीच संदिग्ध फरार हो गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना कबूल कर लिया।
पैसे देने से मना करने पर मां की हत्या
पूछताछ में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ और सुजल बरेठ की हत्या करना स्वीकार किया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी और रजनी बरेठ एक ही स्कूल में टीचर थीं, जिसके कारण आरोपी का रजनी बरेठ के घर आना-जाना था।
आरोपी ने मोटर-पार्ट्स के व्यवसाय के लिए 20 लाख रुपये का लोन लिया था और उसे पैसों की जरूरत थी। उसे पता था कि रजनी बरेठ ने भी 19 लाख रुपये का लोन लिया है।
9 अक्टूबर की दोपहर आरोपी पैदल रजनी बरेठ के घर पहुंचा। रजनी शाम को ड्यूटी से लौटीं, तो सुजल ट्यूशन के लिए घर से चला गया। प्रवेश ने रजनी से पैसे मांगे। उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया।
बाथरूम में गला दबाकर मार डाला
पैसों के लालच में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ से झूमाझटकी की। जब रजनी भागने लगीं, तो आरोपी ने उन्हें बाथरूम में खींचकर उनके सिर पर शैंपू की बोतल मारी और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
आरोपी प्रवेश कुमार
सबूत मिटाने बेटे को मार डाला
आरोपी ने बताया कि बेटे सुजल को पता था कि घर पर उसकी मां और आरोपी मौजूद थे, इसलिए उसने सुजल को भी मारने की प्लानिंग की। वह रजनी के घर जाने वाले रास्ते के तिराहे पर करीब 3 घंटे तक सुजल का इंतजार करता रहा। रात करीब 9 बजे सुजल आया, तो उसने कहा कि तेरी मम्मी मेरे घर पर हैं।
आरोपी सुजल को कार में बैठाकर घुमाते हुए अंबिकापुर लेकर आया और उसे मैगी खिलाई। रात को वे राईं जंगल में बाथरूम जाने के बहाने रुके, जहां आरोपी ने सुजल के गले में स्टॉक कसकर उसे मारने की कोशिश की।
सीमेंट के टुकड़े से सिर-सीने पर मारा
सुजल भागने लगा, तो आरोपी ने सड़क किनारे पड़े सीमेंट के खंभे के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को कार में रखकर वह कालीघाट पहुंचा, जहां सड़क के किनारे उसने सुजल का शव फेंक दिया।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी के कब्जे से मृतका का मोबाइल, ज्वेलरी एवं अन्य सामान बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त कार भी जब्त की गई है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने आरोपी के पास से मृतका का मोबाइल, गहने और अन्य सामान बरामद किया है। जांच में आरोपी की पत्नी की इस हत्याकांड में कोई भूमिका नहीं मिली है।