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पिता बोले- डॉक्टर ने बच्चे को एक्सपायरी इंजेक्शन लगाया:तब से सुस्त और नींद में, सिद्धार्थ हॉस्पिटल में जांच के दौरान मिले 3 एक्सपायरी इंजेक्शन

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सरगुजा, एजेंसी। अंबिकापुर के सिद्धार्थ हॉस्पिटल में एडमिट बच्चे को एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने का आरोप लगा है। तब से सुस्त और नींद में है। बच्चे के पिता ने कलेक्टर से इसकी शिकायत कर जांच की मांग की। जिसके बाद सीएमएचओ ने शिकायत की जांच कराई, तो अस्पताल के फार्मेसी में उसी बैच के 3 एक्सपायरी इंजेक्शन वायल मिले हैं। जिसे बच्चे को लगाया गया था।

जानकारी के मुताबिक, सरगुजा जिले के नगर पंचायत लखनपुर निवासी शम्स खान ने सिद्धार्थ हॉस्पिटल में एडमिट बेटे उमैर खान (3.6 साल) को एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है।शिकायत के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को उमैर खान को सिद्धार्थ हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था।

डॉक्टर वैभव जायसवाल के लिखे पर्ची के आधार पर बच्चे को Amikacin 250mg इंजेक्शन लगाया गया। अगले दिन 7 सितंबर 2026 को इंजेक्शन की शीशी की जांच करने पर बैच नंबर L-24E-5B, निर्माण तारीख 05-2024 और एक्सपायरी तिथि 04-2026 लिखा मिला।

हॉस्पिटल के फार्मेसी की जांच करती टीम।

हॉस्पिटल के फार्मेसी की जांच करती टीम।

एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने की शिकायत

इस मामले की शिकायत सरगुजा कलेक्टर से करते हुए उमैर खान ने कहा कि, यदि यह इंजेक्शन बेटे को लगाई गई है, तो बहुत गंभीर मामला है, क्योंकि एक्सपायरी होने के बाद इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया। इसलिए मामले की निष्पक्ष और तत्काल जांच कराने की मांग की।

उन्होंने अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, इंजेक्शन प्रशासन रिकॉर्ड, नर्सिंग रिकॉर्ड, फार्मेसी स्टॉक रजिस्टर और 6 सितंबर 2026 के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की है। जिससे जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट न हो सके।

जांच के लिए पहुंची टीम, मिली एक्सपायर्ड दवाएं

कलेक्टर अजीत वसंत ने शिकायत मिलने पर तत्काल एक्शन लेते हुए सरगुजा सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को को शिकायत की जांच कराने के निर्देश दिए। सीएमएचओ के निर्देश पर नर्सिंग होम एक्ट के नोडल आफिसर डॉ पीके सिन्हा की टीम को हॉस्पिटल पहुंची।

टीम ने हॉस्पिटल के फार्मेसी की जांच की तो उसी बैच के 3 एक्सपायर्ड इंजेक्शन के वायल मिले। जिस बैच का इंजेक्शन बच्चे को लगाया गया था।

बच्चे पर साइड इफेक्ट के जांच की मांग

शम्स खान ने एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाने से साइड इफेक्ट्स के जांच की भी मांग की है। इंजेक्शन लगाने के बाद बच्चा सुस्त है और नींद में सो रहा है। 6 सितबर को उन्होंने बच्चे को सिद्धार्थ हॉस्पिटल में डॉक्टर वैभव जायसवाल को दिखाया था। उन्होंने बच्चे की जांच के लिए टेस्ट लिखा। टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद बच्चे को उसी अस्पताल में इंजेक्शन लगाया गया था।

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ED की खबर स्टेटस पर लगाई, युवक को धमकाया:बोला- पीटते हुए थाने ले जाऊंगा, जेल में डलवा दूंगा, लड़के ने छोड़ा गांव

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में ED की कार्रवाई से जुड़ी खबर मोबाइल स्टेटस पर लगाना युवक को भारी पड़ गया। युवक ने ED कार्रवाई में सामने आए अनिल चंद्राकर से जुड़ी खबर स्टेटस पर लगाकर नीचे ‘जामगांव एम’ लिख दिया।

इसे देखकर जामगांव एम के किराना दुकान संचालक अनिल चंद्राकर ने युवक को फोन किया और गाली-गलौज करते हुए धमकी दी कि ‘मारते-मारते थाने ले जाऊंगा, 6 महीने के लिए जेल में डलवा दूंगा।’ इसके बाद डर के कारण युवक को गांव छोड़ना पड़ा। मोबाइल पर दी गई धमकी का ऑडियो भी वायरल हो रहा है।

दरअसल, ED केस में सामने आए अनिल चंद्राकर और धमकी देने वाले जामगांव एम के किराना दुकान संचालक अनिल चंद्राकर अलग-अलग व्यक्ति हैं। मामले में पाटन थाने में शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित युवक ने पूरी बातचीत दूसरे फोन से रिकॉर्ड किया।

पीड़ित युवक ने पूरी बातचीत दूसरे फोन से रिकॉर्ड किया।

स्टेटस लगाने के अगले दिन आया कॉल

जानकारी के मुताबिक, पाटन के रूही गांव निवासी परमेश्वर सिंगौर ने वॉट्सऐप पर न्यूज पेपर की कटिंग अपने स्टेटस पर लगाई थी। खबर स्टेटस पर लगाने के अगले दिन उन्हें एक व्यक्ति ने कॉल किया।

खुद को अनिल चंद्राकर बताते हुए उसने परमेश्वर से गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। कुछ घंटे बाद आरोपी के गांव आने की जानकारी मिली तो परमेश्वर डरकर गांव छोड़कर चले गए।

परमेश्वर ने फोन पर हुई बातचीत को अपने दोस्त के मोबाइल से रिकॉर्ड करने की बात कही है।

उत्सुकता में स्टेटस पर लगाई थी ED की खबर

मामला 3 सितंबर का है। परमेश्वर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उस दिन एक अखबार में यह खबर छपी थी। खबर में ED की कार्रवाई का जिक्र था। इसमें लिखा था कि करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपए अनिल चंद्राकर को दिए गए थे।

परमेश्वर के मुताबिक, उन्होंने खबर को सिर्फ उत्सुकता में अपने मोबाइल के स्टेटस पर लगाया था। उनका कहना है कि वे अखबार में नाम छपे किसी भी व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं और न ही उनका किसी से विवाद है।

पीड़ित ने बातचीत की रिकॉर्डिंग पुलिस को दी

शिकायत के मुताबिक, 4 सितंबर को दोपहर करीब 1.40 बजे परमेश्वर के मोबाइल पर एक नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम अनिल चंद्राकर बताया। परमेश्वर का आरोप है कि फोन उठाते ही उसने भद्दी-भद्दी गालियां दी और कहा कि मारते-मारते थाने ले जाऊंगा।

परमेश्वर ने उसे समझाने की कोशिश की कि उसने किसी को अपमानित करने के लिए अखबार की खबर अपने स्टेटस पर नहीं लगाई थी। इसके बावजूद गाली-गलौज जारी रहने का आरोप है।

परमेश्वर ने पुलिस को बताया कि बातचीत के दौरान वह डर गया था। उसने अपने दोस्त भोला राम सिंगौर के मोबाइल से पूरी बातचीत रिकॉर्ड कराई। इस रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव में पुलिस को सौंपा गया है।

गांव आने की सूचना मिली तो घर छोड़कर चला गया

परमेश्वर के अनुसार, उसी दिन करीब 3.10 बजे उसे अनिल चंद्राकर के गांव आने की जानकारी मिली। गांव के ही हितेंद्र पटेल ने फोन कर बताया कि अनिल गांव आए हैं और उसे बुला रहे हैं। शिकायत में परमेश्वर ने आरोप लगाया है कि उसे यह भी कहा गया कि आज तुम्हें जान से मार देंगे।

परमेश्वर का कहना है कि डर के कारण वह गांव छोड़कर चला गया। उसने पुलिस को बताया कि उसे अपनी जान का डर है और इसी वजह से वह घर से बाहर रहने को मजबूर है। शिकायत में जिस अनिल चंद्राकर का जिक्र है, वह ED की कार्रवाई में सामने आए अनिल चंद्राकर से अलग है।

ईडी मामले से अपना कोई संबंध नहीं बताया

परमेश्वर ने शिकायत में बताया है कि जिस मामले से जुड़ी खबर उन्होंने स्टेटस पर लगाई थी, उससे उनका कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि वह न तो इस मामले में गवाह हैं और न ही किसी जांच का हिस्सा हैं। अखबार में खबर पढ़ने के बाद उन्होंने उसे केवल जानकारी के लिए अपने स्टेटस पर लगाया था।

परमेश्वर ने पुलिस को अखबार में छपी खबर की कॉपी और फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में देने की बात कही है। शिकायत के आधार पर पाटन पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(4) के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

ED केस के अनिल चंद्राकर के नाम से हुआ भ्रम

ED केस में सामने आए अनिल चंद्राकर और धमकी देने वाले जामगांव एम के अनिल चंद्राकर अलग-अलग व्यक्ति हैं। ED के मुताबिक, CGPSC-2021 परीक्षा का पेपर लीक कर कुछ अभ्यर्थियों और आरोपियों के रिश्तेदारों तक पहुंचाया गया था। इसके बदले अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए। जांच में डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों पर गलत तरीके से चयन कराने की कोशिश का भी पता चला।

ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों को पेपर देने का भरोसा दिलाकर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद लिए थे। इसमें से करीब 2.80 करोड़ रुपए ED केस में सामने आए अनिल चंद्राकर को दिए गए थे।

इसी मामले में ED की कार्रवाई से जुड़ी खबर अखबार में प्रकाशित हुई थी। इस खबर को परमेश्वर ने अपने मोबाइल स्टेटस पर लगाया था, जिसके बाद जामगांव एम के अनिल चंद्राकर ने उसे फोन कर धमकी दी।

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BSP लोहा चोरी, विजय बघेल बोले-चोर तो चोर होता है:कहा- कांग्रेस पहले अपने गिरेबान में झांके, बैज ने जोड़े थे सीएम हाउस से तार

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। भिलाई स्टील प्लांट में लोहा चोरी के मामले को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि लोहा चोरी के तार सीएम हाउस से जुड़े हैं। इस आरोप पर भाजपा सांसद विजय बघेल ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मामले को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। चोरी करने वाला किसी भी पार्टी से जुड़ा हो, वह अपराधी है और उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

विजय बघेल ने कहा कि लोहा चोरी के मामले में भाजपा से जुड़े किसी पदाधिकारी का नाम सामने आने की बात कही जा रही है, लेकिन इससे अपराध की गंभीरता कम नहीं होती। उन्होंने कहा, ‘चोर तो चोर होता है, अपराधी-अपराधी होता है।’ सांसद ने कहा कि पुलिस मामले की पूरी गंभीरता और बारीकी से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

दीपक बैज के आरोपों पर विजय बघेल ने कहा कि आरोप लगाने से पहले कांग्रेस नेताओं को अपना गिरेबान झांककर देखना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे के जेल जाने का भी जिक्र किया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने लोहा चोरी के तार सीएम हाउस से जुड़े थे।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने लोहा चोरी के तार सीएम हाउस से जुड़े थे।

विजय बघेल- कांग्रेस के भीतर खींचतान

विजय बघेल ने कहा कि आज मुख्यमंत्री से जुड़े लोगों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में भी मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगे थे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे का नाम लेते हुए कहा कि वह जेल जा चुके हैं।

विजय बघेल ने आगे कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर दीपक बैज के पास जो बातें पहुंचती हैं, वे उन्हें बोलते हैं। उन्होंने कांग्रेस में एकता नहीं होने का दावा करते हुए कहा कि पार्टी के नेता एक-दूसरे पर ही निशाना साधने में लगे हुए हैं।

पार्टी देखकर अपराध तय नहीं होता

विजय बघेल ने कहा कि किसी आरोपी का संबंध भाजपा से हो या कांग्रेस से, अपराध को अपराध ही माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा से जुड़े किसी व्यक्ति का नाम आया है तो जांच होनी चाहिए, लेकिन इसी आधार पर पूरे मामले को राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं है।

उन्होंने पुलिस की जांच पर भरोसा जताते हुए कहा कि पुलिस पूरी सख्ती और बारीकी से मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़ी जानकारी एसपी के माध्यम से भी ली जा सकती है।

CBI-ED जांच की मांग पर बोले- उनसे ही पूछिए

बीजेपी विधायक ने लोहा चोरी मामले में पुलिस जांच पर असंतोष जताते हुए CBI और ED से जांच कराने की मांग की है। इस पर विजय बघेल ने कहा कि इस मांग को लेकर उनसे ही पूछना बेहतर रहेगा।

पुलिस ने लोहा चोरी में इस्तेमाल 10 गाड़ियां जब्त की थी।

पुलिस ने लोहा चोरी में इस्तेमाल 10 गाड़ियां जब्त की थी।

पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आया था मामला

भिलाई स्टील प्लांट से स्क्रैप चोरी का मामला उस समय सामने आया, जब दुर्ग पुलिस ने अकलोरडीह स्थित एक कबाड़ यार्ड में कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में लौह स्क्रैप बरामद किया था। पुलिस के मुताबिक, करीब 250 टन लौह स्क्रैप बरामद हुआ था, जिसकी कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपए बताई गई थी।

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। BSP के अधिकारी हिमांशु भूषण मल्लिक और इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज देवांगन भी अरेस्ट किए गए। बाद में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 18 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई।

सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप में CISF के जवानों पर भी कार्रवाई की गई। इस मामले में अब तक 5 से ज्यादा आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। इनमें कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह भी शामिल है।

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छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलने के नियम बदले:अब एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट जरूरी नहीं, एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठेंगे, बिल्डिंग-सेफ्टी की जानकारी देनी होगी

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल शुरू करने और उनकी मान्यता को लेकर नियम बदल गए हैं। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 7 सितंबर 2026 को नई गाइडलाइन जारी की है। ये नियम एकेडमिक सेशन 2026-27 से लागू होंगे। इससे पहले 2018 के नियम लागू थे।

राज्य सरकार के जून 2026 के नोटिफिकेशन के बाद अब नए नियम बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन में स्कूल संचालकों को कुछ बड़ी राहत दी गई है। अब स्कूल खोलने के लिए एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होगा।

मान्यता के लिए स्कूल को सेल्फ सर्टिफिकेशन देना होगा। इसमें स्कूल को खुद बताना होगा कि उसकी बिल्डिंग सेफ है, लैब, लाइब्रेरी और प्लेग्राउंड की सुविधा है, टीचिंग स्टाफ क्वालिफाइड है और बच्चों की सेफ्टी के जरूरी इंतजाम किए गए हैं।

अगर सेल्फ सर्टिफिकेशन में गलत जानकारी दी गई तो स्कूल की मान्यता सस्पेंड या कैंसिल की जा सकती है। फाइन भी लगाया जा सकता है। इसके अलवा अब एक रूम में अधिकतम 45 बच्चें ही बैठ सकेंगे।

नई गाइडलाइन में क्या बदला?

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि स्कूल खोलने के लिए अब अनिवार्यता प्रमाण पत्र (एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट) नहीं लेना होगा। इसके अलावा स्कूल के लिए न्यूनतम कॉर्पस फंड रखने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।

स्कूल को सिर्फ यह बताना होगा कि उसके पास स्कूल चलाने और स्टाफ की सैलरी देने के लिए पर्याप्त फाइनेंस है। स्कूल को हर एकेडमिक सेशन खत्म होने के 3 महीने के अंदर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी।

नई मान्यता के लिए ऑनलाइन अप्लाई करना होगा

स्कूल की नई मान्यता के लिए पूरा प्रोसेस ऑनलाइन होगा। स्कूल के ऑथराइज्ड अधिकारी को मंडल के पोर्टल पर फॉर्म भरना होगा और फीस भी ऑनलाइन जमा करनी होगी। एक ही समय पर हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की मान्यता नहीं मिलेगी। पहले हाईस्कूल की मान्यता लेनी होगी।

इसके बाद ही हायर सेकंडरी की मान्यता के लिए अप्लाई किया जा सकेगा। नई मान्यता के लिए स्कूल को 2 साल पहले 15 अप्रैल तक अप्लाई करना होगा। लेट फीस के साथ 31 जुलाई तक आवेदन किया जा सकेगा। रिन्यूअल के लिए 31 दिसंबर तक नॉर्मल फीस के साथ आवेदन करना होगा।

इसके बाद 28 फरवरी तक 4 हजार रुपए लेट फीस लगेगी। 28 फरवरी के बाद हर दिन 100 रुपए अतिरिक्त फीस लगेगी। हाईस्कूल और हायर सेकंडरी के लिए लेट फीस अलग-अलग लगेगी।

बिना मान्यता 9वीं से 12वीं तक क्लास नहीं चला सकेंगे

जिस प्राइवेट स्कूल के पास मंडल की मान्यता नहीं है, वह 9वीं से 12वीं तक की क्लास नहीं चला सकेगा। अगर किसी स्कूल की मान्यता कैंसिल हो जाती है तो वहां पढ़ रहे बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा।

स्कूल की जमीन स्कूल संचालक के नाम होनी चाहिए।

स्कूल की जमीन स्कूल संचालक के नाम होनी चाहिए।

हिंदी और इंग्लिश मीडियम के लिए अलग सेटअप

नई गाइडलाइन में हिंदी और इंग्लिश मीडियम स्कूलों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। अगर कोई स्कूल हिंदी और इंग्लिश दोनों मीडियम चलाना चाहता है तो दोनों के लिए जमीन, बिल्डिंग, प्रिंसिपल और टीचिंग स्टाफ अलग-अलग रखना होगा।

एक ही बिल्डिंग में 2 अलग बोर्ड भी नहीं चलाए जा सकेंगे। अगर कोई स्कूल इंग्लिश मीडियम शुरू करना चाहता है तो उसे इसके लिए नया स्कूल मानकर नई मान्यता लेनी होगी। इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने वाले टीचर के पास इंग्लिश मीडियम बैकग्राउंड का सर्टिफिकेट भी होना जरूरी होगा।

स्कूल की जमीन और बिल्डिंग के लिए भी नए नियम

स्कूल की जमीन स्कूल संचालक के नाम होनी चाहिए। इसके अलावा कम से कम 3 साल का रेंट एग्रीमेंट या रजिस्टर्ड लीज भी मान्य होगी। जमीन का बी-1 खसरा और सिविल इंजीनियर से तैयार बिल्डिंग मैप नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत से सर्टिफाइड होना चाहिए।

मैप में जमीन, पूरी बिल्डिंग और हर रूम का एरिया अलग-अलग दिखाना होगा। अगर शुरुआत में स्कूल के पास खुद की जमीन नहीं है तो जमीन खरीदने और बिल्डिंग बनाने का वर्क प्लान देना होगा। इस प्लान को 3 साल में पूरा करना होगा। ऐसा नहीं होने पर चौथे साल से हर साल पेनल्टी लगेगी।

स्कूल में बच्चों के लिए खेल, प्रेयर और पार्किंग की खुली जगह भी रखनी होगी। कृषि संकाय वाले स्कूलों में प्रैक्टिकल के लिए कृषि जमीन जरूरी होगी। इसके अलावा मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी होगा।

नए नियम के तहत एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे ही बैठ सकेंगे।

नए नियम के तहत एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे ही बैठ सकेंगे।

एक क्लासरूम में 45 से ज्यादा बच्चे नहीं

नई गाइडलाइन के मुताबिक क्लासरूम कम से कम 300 स्क्वायर फीट का होना चाहिए। एक रूम में अधिकतम 45 बच्चे बैठ सकेंगे। हर बच्चे के लिए कम से कम 6 स्क्वायर फीट जगह जरूरी होगी। हाईस्कूल के लिए कम से कम 7 क्लासरूम जरूरी हैं। हायर सेकंडरी में चुने गए संकाय के हिसाब से अतिरिक्त रूम रखने होंगे।

एक बिल्डिंग में एक ही शिफ्ट चलेगी और स्कूल की शिफ्ट कम से कम 6 घंटे की होनी चाहिए। अधूरी बिल्डिंग, जंगल की जमीन, सरकारी जमीन या अतिक्रमण वाली जमीन पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी। इंस्पेक्शन के समय स्कूल की बिल्डिंग की वीडियोग्राफी भी दिखानी होगी।

व्यावसायिक दुकानों के बीच, फ्लैट्स के बीच या नियमों के खिलाफ जगह पर स्कूल को मान्यता नहीं मिलेगी। स्कूल कैंपस के अंदर कोई दूसरा बिजनेस भी नहीं चलाया जा सकेगा।

नई गाइफलाइन के अनुसार लाइब्रेरी और लैब शेयर करने की भी सुविधा होनी चाहिए। (फाइल)

नई गाइफलाइन के अनुसार लाइब्रेरी और लैब शेयर करने की भी सुविधा होनी चाहिए। (फाइल)

लाइब्रेरी और लैब शेयर करने की भी सुविधा

नई गाइडलाइन में स्कूलों को कुछ सुविधाएं शेयर करने की अनुमति दी गई है। लाइब्रेरी, लैब, प्लेग्राउंड और कंप्यूटर लैब स्कूल के अंदर होना बेहतर माना गया है, लेकिन स्कूल चाहे तो पास के सरकारी इंस्टीट्यूट, नगर पालिका, कॉलेज या दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूल के साथ इन सुविधाओं को शेयर कर सकता है।

इसके लिए फॉर्मल एग्रीमेंट जरूरी होगा। बच्चों की एंट्री का रिकॉर्ड रखना होगा और उनकी सेफ्टी की जिम्मेदारी भी स्कूल की होगी। हाईस्कूल में एक लैब रूम पर्याप्त होगा। वहीं हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब रखनी होंगी।

कंप्यूटर पढ़ाने के लिए पीजीडीसीए क्वालिफिकेशन वाला टीचर जरूरी होगा।

हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब रखनी होंगी।

हायर सेकंडरी में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और कृषि के लिए अलग-अलग लैब रखनी होंगी।

हाईस्कूल में 13 पदों का स्टाफ सेटअप

हाईस्कूल के लिए कुल 13 पदों का स्टाफ सेटअप तय किया गया है। इसमें एक प्रिंसिपल, 6 लेक्चरर और बाकी सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं। हायर सेकंडरी में हर संकाय के हिसाब से करीब 10 पदों का स्टाफ रखना होगा। प्रिंसिपल और लेक्चरर के लिए पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ बीएड जरूरी होगा।

प्रिंसिपल के पास कम से कम 5 साल का टीचिंग एक्सपीरियंस होना चाहिए। स्कूल में काउंसलर की व्यवस्था भी करनी होगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करना होगा। स्टाफ की लिस्ट के साथ फोटो, आधार, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और सैलरी स्लिप भी जमा करनी होगी।

बच्चों की सेफ्टी के लिए ये इंतजाम जरूरी

स्कूल में बच्चों के लिए साफ पीने का पानी, लड़के-लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट, दिव्यांगों के लिए टॉयलेट और स्टाफ के लिए अलग टॉयलेट जरूरी होगा। बिजली, पर्याप्त फर्नीचर और सीसीटीवी कैमरे भी अनिवार्य होंगे।

अगर स्कूल बस चलाता है तो हर साल बस का टेक्निकल चेकअप कराना होगा। ड्राइवर और कंडक्टर का हेल्थ चेकअप भी जरूरी होगा।

स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं।

स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं।

स्कूल के नाम में भी कई शब्द नहीं लगा सकेंगे

नई गाइडलाइन में स्कूल के नाम को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। प्राइवेट स्कूल अपने नाम में नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय, एकलव्य, प्रयास, केंद्रीय, राष्ट्रीय, पीएमश्री, स्वामी आत्मानंद और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।

मंडल के मुताबिक, ऐसे नाम से पैरेंट्स को स्कूल के बारे में गलतफहमी हो सकती है। स्कूल को कम से कम एक बोर्ड एग्जाम तक चलाना होगा। मान्यता मिलने के बाद स्कूल को कम से कम एक बोर्ड एग्जाम तक चलाना जरूरी होगा। यानी बच्चों को बीच में स्कूल बदलने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।

अगर स्कूल लगातार 2 साल तक रिन्यूअल फीस और एग्जाम फॉर्म जमा नहीं करता है तो उसकी मान्यता अपने आप कैंसिल हो जाएगी।

दूसरे बोर्ड में जाना है तो मंडल से NOC जरूरी

अगर कोई स्कूल सीबीएसई या किसी दूसरे बोर्ड से मान्यता लेना चाहता है तो उसे मंडल में 3 साल की फीस एक साथ जमा करनी होगी। इसके बाद ही एनओसी मिलेगी। स्कूल की जगह, बिल्डिंग, नाम या मीडियम बदलना है तो पहले सरकार से परमिशन लेनी होगी।

इसके बाद 30 दिन के अंदर मंडल में आवेदन करना होगा। बिना परमिशन बदलाव करने पर स्कूल की मान्यता कैंसिल की जा सकती है। इसी तरह स्कूल का मैनेजमेंट भी मंडल की परमिशन के बिना ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।

मंडल ने साफ किया- ये सिर्फ मिनिमम स्टैंडर्ड हैं

मंडल ने नई गाइडलाइन में साफ किया है कि ये स्कूलों के लिए मिनिमम स्टैंडर्ड हैं। जो स्कूल इन नियमों को पूरा नहीं करेंगे, अगले साल उनकी मान्यता पर विचार नहीं किया जाएगा।

यानी नई गाइडलाइन में जहां स्कूल खोलने वालों को एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट और कॉर्पस फंड से राहत दी गई है, वहीं बिल्डिंग, स्टाफ, सेफ्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्कूल संचालन के नियमों को सख्त रखा गया है।

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