तेहरान,एजेंसी। अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है।
दरअसल ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। यहां बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और जहाजों में तेल भरने की फैसिलिटी मौजूद हैं। इसे हर दिन करीब 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है।
1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस जगह को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर डेवलप किया गया था और तब से यह ईरान की ऑयल सप्लाई की रीढ़ बन गया। हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल डोरान ने कहा,
ट्रम्प सरकार युद्ध के बाद भी ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह नहीं करना चाहती है। अमेरिका की पुरानी ‘रेड लाइन’ यानी तय सीमा यह रही है कि कुछ खास और अहम ठिकानों पर हमला नहीं किया जाए।
डोरान के मुताबिक अगर इन जगहों पर हमला हुआ, तो ईरान बड़े पैमाने पर जवाबी हमला कर सकता है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।
जंग के बीच भी जारी है तेल निर्यात
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है, लेकिन खार्ग आइलैंड पर अब तक हमला नहीं हुआ है। सैटेलाइट डेटा और जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनियों के मुताबिक जंग जारी होने के बावजूद ईरान यहां से लगातार तेल निर्यात कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल टैंकरों के जरिए बाहर भेजा गया है। असली आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है क्योंकि ईरान के कई जहाज अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं।
डार्क फ्लीट से भेजा जा रहा तेल
ईरान कई बार ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। ये जहाज अपनी लोकेशन दिखाने वाली ट्रैकिंग मशीन बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर स्थित है।
हाल ही में एक बड़ा तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करते समय कुछ समय के लिए ट्रैकिंग से गायब हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि वह जहाज एशिया की ओर जा रहा था ।
ईरान के खार्ग आइलैंड स्थित तेल टर्मिनल की 25 फरवरी 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीर।
खार्ग आइलैंड के पास दुनिया के अहम तेल रास्ते
खार्ग आइलैंड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर इस इलाके में हमला होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनल को तबाह कर दिया जाए या उस पर कब्जा कर लिया जाए, तो ईरान की सबसे बड़ी आय बंद हो सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा ईरान की सरकार और उसकी सैन्य ताकत के लिए सबसे बड़ा आर्थिक सहारा है। अगर यह कमाई रुक जाती है तो ईरान के लिए लंबे समय तक युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
हमला हुआ तो क्या असर होगा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ तो इसके दो बड़े असर हो सकते हैं:
ईरान की तेल से होने वाली कमाई अचानक गिर सकती है
दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं
कुछ अनुमानों के मुताबिक अगर यहां से सप्लाई रुकती है तो तेल की कीमत प्रति बैरल करीब 10 डॉलर तक बढ़ सकती है।
ईरान की तेल उत्पादन क्षमता
इस समय ईरान करीब 33 लाख बैरल कच्चा तेल का प्रोडक्शन करता है। इसके अलावा लगभग 13 लाख बैरल कंडेन्सेट और अन्य लिक्विड ईंधन का भी प्रोडक्शन करता है है। इस तरह कुल ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का 4.5% हिस्सा ईरान से आता है।
ईरान के बड़े तेल क्षेत्र जैसे अहवाज, मरून और गचसरान से पाइपलाइन सीधे खार्ग आइलैंड तक आती हैं। यहां तेल को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर टैंकर जहाजों में भरकर दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जाता है।
आइलैंड पर करीब 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है। फिलहाल अनुमान है कि यहां लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल स्टोरेज में मौजूद है, जो सामान्य हालात में 10 से 12 दिन के निर्यात के बराबर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंग शुरू होने से ठीक पहले ईरान ने खार्ग आइलैंड से ऑयल एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा दिया था।
15 से 20 फरवरी के बीच तेल निर्यात 30 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गया था, जो सामान्य से लगभग तीन गुना था। माना जा रहा है कि ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा तेल बाहर भेजने की कोशिश की।
ईरान-इराक वॉर में खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ था
खार्ग आइलैंड पहले भी कई बार रणनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है। 1979 के ईरान बंधक संकट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को सलाह दी गई थी कि इस आइलैंड पर कब्जा कर लिया जाए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
1980 के दशक में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के समय अमेरिका ने ईरान की कुछ अन्य तेल सुविधाओं पर हमला किया था, लेकिन खार्ग आइलैंड को निशाना नहीं बनाया गया। हालांकि ईरान-इराक वॉर के दौरान इराकी हमलों में इस आइलैंड के तेल टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन बाद में ईरान ने इसे दोबारा बना लिया।
अभी तक हमला क्यों नहीं किया गया
एक्सपर्ट्स का कहना है कि खार्ग आइलैंड पर हमला करने से दुनिया भर के तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और फैल सकता है।
यही वजह है कि अभी तक अमेरिका और उसके सहयोगी देश पहले ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर कैपिसिटी को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसलिए फिलहाल यह छोटा सा आइलैंड सीधे युद्ध का मैदान नहीं बना है, लेकिन आने वाले समय में जंग की दिशा तय करने में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।
नई दिल्ली/रोम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है।
मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है।
उन्होंने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी अहम रही है। मोदी ने दोनों देशों के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई।
प्रधानमंत्री ने मेलोनी को आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबा कार्यकाल
जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने शुक्रवार को लगातार 1413 दिन सत्ता में रहकर इटली में नया रिकॉर्ड बनाया। 1946 में इटली गणराज्य बनने के बाद यह किसी एक कैबिनेट का सबसे लंबा लगातार कार्यकाल है।
मेलोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार का रिकॉर्ड तोड़ा है। बर्लुस्कोनी की दूसरी कैबिनेट 2001 से 2005 तक 1412 दिन सत्ता में रही थी।
मेलोनी 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। वे दक्षिणपंथी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ की प्रमुख भी हैं।
मेलोनी ने भी मोदी को दी थी बधाई
जून 2026 में जब नरेंद्र मोदी ने 4399 दिन लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहकर जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था, तब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी उन्हें बधाई दी थी।
मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “बधाई हो नरेंद्र मोदी। आज आप भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।”
मेलोनी ने बधाई देते हुए पीएम मोदी के साथ की यह तस्वीर भी पोस्ट की थी।
मेलोनी की पार्टी आज मनाएगी जश्न
मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (FdI) ने सरकार के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न में शुक्रवार शाम दक्षिणी शहर बारी में बड़ी रैली आयोजित की है। इसमें मेलोनी भी भाषण देंगी।
रैली में हजारों समर्थकों के पहुंचने की उम्मीद है। करीब 80 बसों से समर्थकों को बारी लाया जा रहा है, जबकि कार्यक्रम स्थल पर करीब 10 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है।
मेलोनी ने सरकार के लंबे कार्यकाल को बड़ी उपलब्धि बताया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने लंबे समय तक सत्ता में बने रहने को ही अपनी उपलब्धि बना लिया है। यह रैली 2027 के चुनाव से पहले चुनावी ताकत दिखाने के कार्यक्रम के तौर पर भी देखी जा रही है।
इटली में सरकारें औसतन 13 महीने ही चलती हैं
इटली में पिछले कई दशकों से सरकारों के बार-बार बदलने और राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है। 80 साल पहले गणराज्य बनने के बाद से देश में 68 सरकारें बन चुकी हैं।
इन सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने रहा है। ऐसे में मेलोनी की तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाली गठबंधन सरकार का करीब 4 साल तक टिकना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इटली में सरकारें जल्दी क्यों गिरती हैं?
इटली की राजनीति में लंबे समय से कई पार्टियों का दबदबा रहा है। चुनाव के बाद अक्सर किसी एक पार्टी को इतनी सीटें नहीं मिलतीं कि वह अकेले सरकार बना सके। ऐसे में सरकार बनाने के लिए अलग-अलग पार्टियों को गठबंधन करना पड़ता है।
समस्या तब शुरू होती है, जब गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद बढ़ जाते हैं। गठबंधन की एक छोटी पार्टी भी समर्थन वापस ले ले, तो सरकार बहुमत खो सकती है। इसके बाद प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ सकता है या नई सरकार बनाने की कोशिश करनी पड़ती है। इटली में सरकार को संसद के दोनों सदनों- चैंबर ऑफ डेप्युटीज और सीनेट का समर्थन बनाए रखना जरूरी है।
मोदी ने मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी दी थी
पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की थी। यह टॉफी भारत में 1983 से बिक रही है। इसे पारले कंपनी बनाती है।
मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया था।
मेलोनी ने बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और मोदी को गिफ्ट के लिए धन्यवाद दिया था। मोदी और मेलोनी की साथ की तस्वीरों के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi काफी लोकप्रिय हुई थी।
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं।
गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा।
फ्रांस में 17 जून 2026 को G7 समिट में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प की आखिरी बार मुलाकात हुई थी।
G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव
सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है।
हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं।
अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं।
गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया।
ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं।
गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं।
240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य
गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है।
उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।
गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। शुक्रवार सुबह रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है।
बाढ़ के बाद सुरंग में 42 कर्मचारी और मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। दो लोगों के जिंदा मिलने के बाद बचाव अभियान में उम्मीद बढ़ी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई देने की सूचना मिली थी। इसके बाद नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग में दाखिल हुईं और तलाशी अभियान तेज किया।
बाढ़ से अब तक 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है।
सुरंग में रेस्क्यू से जुड़ी तस्वीरें…
चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शवों की बरामदगी का अभियान जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव मिले हैं, जबकि अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है।
प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं।
पति को जिंदा देख पत्नी बोली- दूसरी जिंदगी मिल गई
कबीर महर्जन 25 अगस्त की सुबह त्रिशूली-3A में मेंटेनेंस के काम के लिए गए थे। रेस्क्यू के बाद उनकी पत्नी ने कहा कि ऐसा लगा जैसे उनके पति को दूसरी जिंदगी मिल गई हो।
26 अगस्त को आई बाढ़ की घटना के बाद उनका फोन बंद हो गया। उस सुबह करीब 7:30 बजे पत्नी हीरा शोभा से कबीर की आखिरी बार बात हुई थी।
कई दिन तक कोई खबर नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती गई थी। अब कबीर के रेस्क्यू के बाद उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।
संजय साह बोले – सबकी जान बचाना मेरी जिम्मेदारी थी
नेपाल में आई भीषण आपदा के 9 दिन बाद सुरंग से दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकाला गया है। इनमें 30 साल के मैकेनिकल फोरमैन संजय साह भी शामिल हैं।
आपदा के समय उन्होंने सुरंग से भागने के बजाय पहले अपने साथियों को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि, सबकी जान बचाना उनकी जिम्मेदारी थी।
संजय साह अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन में काम करते थे। उन्होंने बताया कि हादसे के समय वह सुरंग के कंट्रोल रूम में थे। आमतौर पर वहां 4 से 6 लोग रहते थे, लेकिन उस दिन करीब 40-45 लोग मौजूद हो सकते थे।
उन्होंने बताया कि अंधेरे में उम्मीद बनाए रखने के लिए वह मंत्रों का जाप करते रहे।संजय ने यह भी कहा कि कुछ लोग सुरंग के अंदर और गहराई में फंसे हो सकते हैं।
बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत पैकेज घोषित
नेपाल सरकार ने बाढ़ से प्रभावित कारोबारियों के लिए राहत पैकेज घोषित किया है। बाढ़ में नष्ट वाहन, मशीनरी और उपकरण बिना कस्टम ड्यूटी के दोबारा आयात किए जा सकेंगे, जबकि प्रभावित लोगों के लोन की किस्तें आगे बढ़ाई या दोबारा तय की जाएंगी।
बीमा कंपनियों को तेजी से क्लेम निपटाने और शुरुआती आकलन के आधार पर 50% तक रकम एडवांस देने को कहा गया है।
बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग की करीब 15 बस्तियां तबाह हुई हैं, इसलिए सरकार लोगों को बाढ़ के खतरे वाले इलाकों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर बसाने की तैयारी कर रही है।
शुरुआती आकलन में करीब 16 लाख लोग प्रभावित और 8,317 घर तबाह हुए हैं। रेस्क्यू किए गए करीब 3,948 लोग अस्थायी केंद्रों में रह रहे हैं। रेस्क्यू कर्मियों को जोखिम भत्ता मिलेगा और ड्यूटी में मौत होने पर परिवार को 10 लाख नेपाली रुपए की मदद दी जाएगी।
नेपाल आपदा से जुड़ी तस्वीरें…
बाढ़ में अपनों को खोने वाले परिजन, शव नहीं मिलने के कारण काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार के दौरान रोते-बिलखते नजर आए
बाढ़ में 43 वर्षीय दिनेश अच्छामे की मौत हो गई। शव बरामद नहीं होने के बाद काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार की रस्म के दौरान परिजनों ने उनका पुतला लेकर अंतिम विदाई दी।
नेपाल के रसुवा में अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश और शवों को निकालने में बचावकर्मियों की टीम जुटी है।
भारतीय अधिकारियों ने काठमांडू के एयरपोर्ट पर नेपाली आधिकारियों को मदद सौंपी।
नेपाल में बाढ़ के कारण फंसे 56 यात्रियों की मुंबई वापसी। गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे यात्री।
नेपाल बाढ़ में 600 बच्चे लापता, तलाश जारी
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट में फ्लैश फ्लड के बाद करीब 600 बच्चे अब भी लापता हैं। रसुवा में करीब 280, जबकि नुवाकोट में 300-350 बच्चों के लापता होने की जानकारी है। अकेले नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में करीब 250 बच्चे लापता बताए गए हैं।
प्रशासन और स्कूलों से बच्चों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सटीक संख्या जुटाने में दिक्कत आ रही है। कुछ बच्चों का पता चल चुका है, लेकिन अलग-अलग स्कूलों से नए लापता बच्चों की जानकारी भी सामने आ रही है। बाढ़ में दोनों जिलों के 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता हैं।
एनवीडिया ने नेपाल बाढ़ राहत के लिए 1 करोड़ डॉलर दिए
अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 1.5 अरब नेपाली रुपए) की सहायता दी है।
वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग को मदद के लिए धन्यवाद दिया।
वागले के मुताबिक, इस सहायता के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हो चुके हैं।
UN में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाएंगे नेपाल PM
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर इसके असर का मुद्दा उठा सकते हैं।
रसुवा में विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शाह ने पहले महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। इसके बाद कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था।
भारत की नई खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण
भारत के छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे। दोनों C-130J विमानों से आई 21.5 टन सहायता में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत प्रयासों के लिए भारत के लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है।
26 अगस्त से भारत भेज रहा राहत सामग्री
भारत ने बाढ़ के बाद 26 अगस्त को पहला राहत विमान भेजा था। इसमें 10 टन सामग्री थी, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।
इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन, तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरण और DNA विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल थी।
2 सितंबर को भारत ने पांचवां विमान भेजा, जिसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां थीं।
बाढ़ की वजहों की जांच में जुटे विशेषज्ञ
भोटेकोशी आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए नेपाल में जलवायु वैज्ञानिक, पर्वतीय विशेषज्ञ और हिमनद विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञ अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक और जलवायु संबंधी कारणों की जांच कर रहे हैं।
इस बीच नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। राहत और सहायता के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में सीधे धनराशि जमा करने की व्यवस्था भी की गई है।