सीएम विष्णुदेव साय जाएंगे जापान-दक्षिण कोरिया:इलेक्ट्रॉनिक्स-ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण के उद्योगपतियों से करेंगे मुलाकात, औद्योगिक विकास पर होगी चर्चा, इन्वेस्टर्स को देंगे बुलावा
रायपुर,एजेंसी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 21 अगस्त से 10 दिनों के विदेश दौरे पर रवाना होंगे। बतौर मुख्यमंत्री, यह उनकी पहली विदेश यात्रा होगी। इस यात्रा में सीएम साय जापान और दक्षिण कोरिया जाएंगे।
सीएम सचिवालय के अधिकारियों के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य राज्य में निवेश बढ़ाना, औद्योगिक विकास को गति देना और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में नए अवसर तलाशना है। सीएम के साथ मुख्य सचिव अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और उद्योग सचिव रजत कुमार भी शामिल रहेंगे।
21 अगस्त को सुबह जाएंगे दिल्ली
सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार, सीएम साय 21 अगस्त की सुबह दिल्ली पहुंचेंगे। वहां वे एक या दो बैठकों में शामिल होंगे और शाम को जापान के लिए उड़ान भरेंगे। जापान में उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहेगा, जहां वे स्थानीय उद्योगपतियों, निवेशकों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़े उद्यमियों से मुलाकात करेंगे।
देश के कारोबारियों के साथ सीएम साय।
तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास पर होगा फोकस
इन बैठकों में निवेश आकर्षित करने, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास के नए मॉडल पर चर्चा की जाएगी। सरकार का विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर फोकस होगा।
जापान दौरे के बाद मुख्यमंत्री साय और उनका दल दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे, जहां वे औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी हस्तांतरण और लॉजिस्टिक्स सुधार से जुड़ी अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। दक्षिण कोरिया के साथ सहयोग से राज्य में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और बेहतर अधोसंरचना विकास के नए अवसर खुलेंगे।
कारोबारियों के साथ सीएम साय।
प्रदेश में चल रही योजनाओं-सुविधा की देंगे जानकारी
इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विदेशी निवेशकों को छत्तीसगढ़ के अनुकूल निवेश माहौल, उद्योग नीति और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। राज्य सरकार का मानना है कि इस दौरे से निवेश समझौतों की संभावनाएं मजबूत होंगी, जिससे आने वाले वर्षों में बड़े प्रोजेक्ट शुरू हो सकते हैं।
प्रदेश में निवेश करने के लिए अडाणी ग्रुप ने सहमति दी है।
मुख्यमंत्री 31 अगस्त की शाम दिल्ली वापस लौटेंगे। हालांकि, सीएम के विदेश प्रवास को लेकर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है। अंतिम समय में इसमें बदलाव भी हो सकता है।
प्रदेश को अब तक इतना निवेश मिला
प्रदेश सरकार नवा रायपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नॉलाजी का कैंपस स्थापित करने जा रही है। इसकी अनुमानित लागत 271 करोड़ रुपए होगी। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
नई औद्योगिक नीति में राज्य सरकार ने सबसे ज्यादा जोर पॉवर सेक्टर पर दिया है। इस सेक्टर में हमें 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू के साथ ही रायपुर में भी इन्वेस्टर्स समिट के दौरान 6 लाख 65 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले।
राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में पहली सेमीकंडक्टर यूनिट का भूमिपूजन किया। लगभग 11 सौ करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस यूनिट से चिप निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल करेगा राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट, जनजातीय संस्कृति और परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल रहेंगे प्रतिनिधिमंडल में शामिल
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों तथा जनप्रतिनिधियों का 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आगामी 30 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट करेगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन भी किया है। प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन का भ्रमण करेगा तथा नई दिल्ली के प्रमुख राष्ट्रीय स्थलों का अवलोकन भी करेगा। यह अवसर बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देश के सर्वाेच्च संवैधानिक मंच पर मिल रहे सम्मान का ऐतिहासिक प्रतीक होगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय समाज की गौरवशाली विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ उसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रपति भवन में बस्तर के कलाकारों और परंपरागत जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान बस्तर की संस्कृति, परंपरा और जनजातीय समाज के प्रति पूरे देश के सम्मान का प्रतीक है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर पंडुम-2026 ने यह सिद्ध कर दिया है कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और लोकपरंपराएं राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव जनजातीय ज्ञान परंपरा, लोकजीवन, पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था और सांस्कृतिक अस्मिता के संरक्षण का सशक्त अभियान बन चुका है। राष्ट्रपति भवन में बस्तर पंडुम के विजेता प्रतिभागियों एवं जनजातीय प्रतिनिधियों का सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक स्वाभिमान का सम्मान है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि बस्तर पंडुम आज केवल छत्तीसगढ़ का नहीं, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण जनजातीय सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुका है। लोककलाओं को मंच उपलब्ध कराने, कलाकारों को सम्मान दिलाने, जनजातीय ज्ञान परंपरा का दस्तावेजीकरण करने तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में इस महोत्सव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में पहली बार आयोजित बस्तर पंडुम ने विश्व के सबसे बड़े जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त कर छत्तीसगढ़ को वैश्विक पहचान दिलाई थी। इस उपलब्धि के बाद वर्ष 2026 में महोत्सव का दायरा और अधिक व्यापक किया गया। पहले जहां सात विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं, वहीं इस वर्ष इन्हें बढ़ाकर 12 विधाओं तक विस्तारित किया गया। बस्तर संभाग के सात जिलों के 32 विकासखंडों से 54 हजार 750 प्रतिभागियों ने इसमें भाग लेकर अपनी लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। 10 जनवरी से 9 फरवरी 2026 तक आयोजित महोत्सव में जनपद, जिला एवं संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। जनजातीय नृत्य, लोकगीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक पेय, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि सहित 12 विधाओं के माध्यम से बस्तर की सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन किया गया।
जगदलपुर में आयोजित संभाग स्तरीय समारोह का उद्घाटन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने किया, जबकि समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। महोत्सव में जनजातीय शिल्प, हस्तशिल्प, वन-औषधियों, पारंपरिक आभूषणों और लोक व्यंजनों की प्रदर्शनी ने बड़ी संख्या में आगंतुकों को आकर्षित किया। इससे स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण उद्यमियों को आर्थिक अवसर भी प्राप्त हुए। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्यप्रदेश के कलाकारों की सहभागिता ने बस्तर पंडुम को राष्ट्रीय सांस्कृतिक संगम का स्वरूप प्रदान किया।
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के आमंत्रण पर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने जा रही बस्तर की यह गौरवगाथा न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक शक्ति और जनजातीय गौरव का प्रतीक है, बल्कि भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर भी है।
मुख्यमंत्री साय ने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए विकास के स्पष्ट मंत्र
विकसित भारत जी राम जी योजना, लखपति दीदी, पीएम आवास और पीएम सूर्यघर योजना को गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, यही सुशासन की कसौटी – मुख्यमंत्री साय
रायपुर। ग्राम पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। यदि ग्राम पंचायतें सशक्त हों, गांव आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक ग्रामीण विकास की प्रक्रिया का सहभागी बने, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प वास्तविक रूप ले सकेगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित एसआईआरडी परिसर, निमोरा में आयोजित प्रदेश के सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ग्राम पंचायतें जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव बनाने का सबसे प्रभावी मंच हैं। अधिकारियों को संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा।
मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासकीय योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांव का प्रत्येक नागरिक स्वयं विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने प्रत्येक जिले में ऐसे गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां जनभागीदारी, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रभावी योजना के माध्यम से आदर्श विकास मॉडल विकसित किए जा सकें।
विकसित भारत जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 1 जुलाई से लागू विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण प्राथमिकता से किया जाए। इसके माध्यम से जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन बने प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग ही स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने तथा वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
10.40 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब लक्ष्य करोड़पति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब सरकार उन्हें उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर बड़ी संख्या में करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्व-सहायता समूहों, कौशल विकास, आजीविका गतिविधियों और नई औद्योगिक नीति से उत्पन्न अवसरों से जोड़ा जाए।
बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचे विकास की रोशनी
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों तक कभी पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, आवास, राशन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सरकार का लक्ष्य विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
पीएम आवास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित सभी योजनाओं के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए तथा पंचायत स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पंचायत स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। किसानों और ग्रामीण परिवारों को सौर पंप तथा अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल अपने सीमित उत्तरदायित्व का निर्वहन मात्र न होकर के समाज में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, उससे प्रेरणा लेकर प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी को समाज निर्माण का अवसर मानना चाहिए।
एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समाज की तस्वीर बदल सकता है
मुख्यमंत्री श्री साय ने पद्मश्री पोपटराव पवार के हिवड़े बाजार मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदार नेतृत्व और जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी गांव का कायाकल्प किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक व्यक्ति भी संकल्प लेकर आगे बढ़ता है, तो पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 1999 की अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब युवा सांसदों के मार्गदर्शन के लिए पोपटराव पवार को आमंत्रित किया गया था। उस समय एक युवा सरपंच के रूप में उन्होंने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की जो कहानी सुनाई थी, वही आज पूरे देश के लिए आदर्श ग्राम विकास का मॉडल बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में नानाजी देशमुख द्वारा विकसित ग्राम विकास मॉडल तथा ओडिशा में डॉ. अच्युत सामंत द्वारा शिक्षा के माध्यम से किए गए सामाजिक परिवर्तन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का अपना मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।
हिवड़े बाजार मॉडल ने दिखाया जनभागीदारी की ताकत
कार्यशाला में पद्मश्री पोपटराव पवार ने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की यात्रा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1989 में गांव जल संकट, पलायन, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। जनसहभागिता, अनुशासन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से गांव का व्यापक विकास किया गया। आज गांव में पलायन समाप्त हो चुका है, बीपीएल परिवार नहीं हैं, प्रतिदिन लगभग पांच हजार लीटर दूध का संग्रहण होता है तथा प्रति व्यक्ति आय लगभग नौ लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, संचालक श्रीमती प्रियंका ऋषि महोबिया, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमरजीत सिन्हा, प्रदेश के सभी जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धरसीवां विधायक और छालीवुड अभिनेता अनुज शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही कथित ट्रोलिंग को लेकर सख्ती दिखाई है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने पहली नजर में मामला गंभीर मानते हुए अनुज शर्मा और उनके परिवार की मॉर्फ फोटो, एडिटेड वीडियो, अश्लील कमेंट, कैरिकेचर और अन्य आपत्तिजनक पोस्ट तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह कंटेंट पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स और संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
याचिका में विधायक अनुज शर्मा ने बताया कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पहले ट्विटर) और यूट्यूब पर फर्जी और बेनाम अकाउंट्स से उन्हें निशाना बनाया गया। उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल कर मॉर्फ वीडियो, एडिटेड फोटो, अश्लील कैरिकेचर और आपत्तिजनक कमेंट वायरल किए गए।
उनकी मूवी और गानों के हिस्सों को भी एडिट कर गलत तरीके से फैलाया गया, ताकि उनकी सामाजिक और सार्वजनिक छवि खराब हो। याचिका में कहा गया है कि यह सिर्फ राजनीतिक आलोचना का मामला नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत उनकी छवि और परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।
अनुज शर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया पर फर्जी और बेनाम अकाउंट्स से उन्हें निशाना बनाया गया। (फाइल फोटो)
व्यक्तित्व और सम्मान से जुड़ा मामला
सुनवाई के दौरान अनुज शर्मा की ओर से कहा गया कि किसी व्यक्ति की फोटो, आवाज, पहचान या व्यक्तित्व का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करना उसके व्यक्तित्व अधिकार (पर्सनैलिटी राइट्स) का उल्लंघन है। यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिले सम्मान और निजता के अधिकार का भी उल्लंघन है।
हाईकोर्ट को बताया गया कि अनुज शर्मा धरसीवां के विधायक होने के साथ पद्मश्री सम्मानित कलाकार भी हैं। उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यूज, क्लिक और राजनीतिक फायदा लेने के लिए उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया।
हाईकोर्ट ने यह कंटेंट पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स और संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मामले से जुड़े लोगों को निर्देश दिया कि अनुज शर्मा और उनके परिवार से जुड़ी सभी आपत्तिजनक पोस्ट, मॉर्फ वीडियो, एडिटेड फोटो और कैरिकेचर तुरंत हटाए जाएं।
कोर्ट ने संबंधित अकाउंट चलाने वालों, कंटेंट बनाने वालों और चैनल एडमिन्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही बिना अनुमति किसी व्यक्ति की फोटो, पहचान या अन्य निजी चीजों का इस्तेमाल करने और मॉर्फ कंटेंट बनाने को लेकर भी जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
अनुज शर्मा बोले- अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में निजी हमले ठीक नहीं
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनुज शर्मा ने कहा कि वे मुख्यधारा और डिजिटल मीडिया के साथ अपने क्षेत्र की जनता का सम्मान करते हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी व्यक्ति और उसके परिवार की गरिमा, निजता और सम्मान पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा। अनुज शर्मा ने साफ कहा कि मीडिया या जनता से उन्हें कोई शिकायत नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर निजी और राजनीतिक फायदे के लिए किसी की छवि खराब करने वालों पर कानूनी कार्रवाई जरूरी है।