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चीनी के दाम बढ़ने पर कांग्रेसियों ने किया चीनी सत्याग्रह:बिलासपुर में नेहरू चौक पर प्रदर्शन, कहा- महंगाई से जनता परेशान, सरकार पर आरोप लगाए

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बिलासपुर, एजेंसी। बिलासपुर में शहर और जिला कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को नेहरू चौक पर ‘चीनी सत्याग्रह’ किया। उन्होंने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है। इसका खामियाजा आम लोगों को महंगाई के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार महंगाई रोकने और उसे नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाम रही है। देश की जनता महंगाई से बहुत परेशान है।

महंगाई पर कांग्रेस ने केंद्र को घेरा

जिला शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सिधांशु मिश्रा ने बताया कि चीनी के दाम बहुत बढ़ गए हैं। रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनों को महंगी मिठाई खरीदनी पड़ी।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए महंगाई पर रोक नहीं लगा रही है। चीनी के दाम बढ़ाना सीधे तौर पर उद्योगपतियों और व्यापारियों को फायदा पहुंचाने जैसा है।

दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि जनता को लूटा जा रहा है। आज शक्कर की कीमत 70 रुपए प्रति किलो से ज्यादा हो गई है। पेट्रोल और डीजल के दाम भी बहुत बढ़ गए हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महंगाई रोकने के वादे के साथ सत्ता में आई थी, लेकिन उसने अपने सभी वादे भुला दिए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से खाद्य वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। दाल, चावल, गेहूं, आटा, डीजल और पेट्रोल सभी महंगे हो गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार महंगाई पर काबू पाने में असफल रही है।

इस धरना प्रदर्शन में शहर कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय पांडे, महापौर रामशरण यादव, अभय नारायण राय, महेश दुबे, समीर अहमद, राजेंद्र शुक्ला और जितेंद्र पांडे शामिल थे। ब्लॉक अध्यक्ष गीतांजलि कौशिक, स्वर्णा शुक्ला, लक्ष्मीनाथ साहू, राकेश शर्मा, विनोद साहू और शिल्पी तिवारी भी मौजूद रहे।

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सीमा घृतेश और शिवा मिश्रा समेत कई अन्य नेता भी इस दौरान उपस्थित थे।

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एलायंस एयर ने पांच महीने में बंद की कोलकाता फ्लाइट:बुकिंग साइट से भी हटाया, यात्रियों की कमी के कारण हो रहा था घाटा

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सरगुजा, एजेंसी। एलांयस एयर ने पांच माह में ही बिलासपुर-अंबिकापुर-कोलकाता की फ्लाइट सेवा बंद कर दी है। यह फ्लाइट सप्ताह में दो दिन चल रही थी। यात्रियों की कमी के कारण लगातार घाटा होने के कारण सेवा को बंद किया गया है।

एलायंस एयर ने बिलासपुर-अंबिकापुर-दिल्ली और कोलकाता की सेवाएं एक साथ शुरू की थी। इसमें दिल्ली फ्लाइट का रिस्पांस अच्छा है। कोलकाता फ्लाइट के लिए बिलासपुर और अंबिकापुर से पर्याप्त यात्री नहीं मिल रहे थे। यह सेवा राज्य सरकार की पहल पर शुरू की गई थी।

सरगुजा के दरिमा एयरपोर्ट से उड़ान योजना के तहत फ्लाईबिग ने हवाई सेवा शुरू की थी, लेकिन छह महीने बाद ही यह सेवा बंद हो गई। इसके बाद राज्य सरकार की पहल पर एलायंस एयर ने 30 मार्च से दिल्ली और 1 अप्रैल से कोलकाता के लिए फ्लाइट सेवा शुरू की। इस सेवा को चलाने के लिए राज्य सरकार की ओर से एलायंस एयर को कुछ राशि भी दी जा रही थी।

मार्च से शुरू की गई थी दिल्ली व कोलकाता की हवाई सेवा

मार्च से शुरू की गई थी दिल्ली व कोलकाता की हवाई सेवा

पांच माह में बंद करनी पड़ी कोलकाता की उड़ान

एलायंस एयर को फ्लाइट शुरू होने के बाद दिल्ली के लिए तो पर्याप्त यात्री मिल रहे हैं, लेकिन कोलकाता के लिए यात्रियों की संख्या काफी कम थी। सप्ताह में दो दिन संचालित फ्लाइट में दरिमा से करीब करीब 20 से 25 यात्री ही प्रति सप्ताह सफर कर रहे थे। कई दिन तो सिर्फ दो या तीन यात्री ही चढ़े या उतरे थे।

एलायंस एयर ने लगातार घाटे और सेवा के प्रति लोगों के कम रूझान को देखते हुए बिलासपुर-अंबिकापुर-कोलकाता और कोलकाता-अंबिकापुर-बिलासपुर सेवा को बंद कर दिया गया है। एलांयस एयर ने कोलकाता फ्लाइट की बुकिंग भी अपनी वेबसाइट पर बंद कर दी है।

एयरपोर्ट के डायरेक्टर सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में फ्लाइट बंद कर दी गई है।

दिल्ली सेवा का रूझान अच्छा

एयरलाइन कंपनी की ओर से सप्ताह में दो दिन सोमवार और बुधवार को बिलासपुर-अंबिकापुर-दिल्ली के बीच नियमित फ्लाइट संचालित की जा रही है।

सोमवार को फ्लाइट बिलासपुर होते हुए अंबिकापुर पहुंचती है। वहीं, बुधवार को फ्लाइट सीधे दिल्ली से अंबिकापुर आती है और इसके बाद अंबिकापुर से बिलासपुर होते हुए दिल्ली के लिए रवाना होती है।

दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में अंबिकापुर से रोजाना करीब 30 से 35 यात्री सफर कर रहे हैं। फ्लाइट का संचालन भी तय समय के अनुसार हो रहा है।

वाराणसी सहित अन्य रूट पर फ्लाइट सेवा शुरू करने की कोशिश

सरगुजा को अन्य शहरों से हवाई सेवा से जोड़ने के लिए सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने पहल की है। रायपुर-अंबिकापुर-वाराणसी हवाई सेवा शुरू करने के लिए इंडिगो और एलायंस एयर से चर्चा की जा रही है।

प्रमुख धार्मिक स्थल होने के कारण बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी हर दिन बनारस का सफर करते हैं। मां महामाया एयरपोर्ट दरिमा के डायरेक्टर सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि वाराणसी के साथ पटना और विशाखापट्टनम के लिए भी हवाई सेवा शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है।

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छत्तीसगढ़

रिटायरमेंट के बाद घर को बनाया गुरुकुल:बिलासपुर में 22 साल से फ्री में संस्कृत पढ़ा रहीं डॉ. पुष्पा दीक्षित, विदेशों तक से सीखने पहुंचे विद्यार्थी

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बिलासपुर, एजेंसी। आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद लोग आराम की जिंदगी बिताना पसंद करते हैं, लेकिन बिलासपुर की डॉ. पुष्पा दीक्षित ने अपना पूरा समय संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उनका घर पिछले करीब 22 साल से संस्कृत की पाठशाला बना हुआ है।

यहां देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ नेपाल, चीन और अमेरिका समेत कई देशों से भी विद्यार्थी संस्कृत सीखने पहुंच चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि यहां संस्कृत सीखने के लिए किसी तरह की फीस या शुल्क नहीं लिया जाता है।

डॉ. पुष्पा दीक्षित का घर करीब 22 साल से संस्कृत की पाठशाला बना हुआ है।

डॉ. पुष्पा दीक्षित का घर करीब 22 साल से संस्कृत की पाठशाला बना हुआ है।

संस्कृत सीखने के लिए किसी तरह की फीस या शुल्क नहीं लिया जाता है।

संस्कृत सीखने के लिए किसी तरह की फीस या शुल्क नहीं लिया जाता है।

बच्चों को संस्कृत पढ़ाती डॉ. पुष्पा दीक्षित।

बच्चों को संस्कृत पढ़ाती डॉ. पुष्पा दीक्षित।

दिल्ली से नेपाल तक पहुंच रहे विद्यार्थी

दरअसल, गोंड़पारा स्थित पाणिनीय शोध संस्थान में संस्कृत सीखने वालों का दायरा बिलासपुर तक सीमित नहीं है। दिल्ली, बेंगलुरु, देहरादून समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी यहां आ चुके हैं। नेपाल समेत विदेशों से भी विद्यार्थी संस्कृत सीखने पहुंचे हैं।

यहां आने वाले विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि भी अलग-अलग है। स्कूली बच्चों के साथ नौकरी और पढ़ाई करने वाले युवा भी संस्कृत सीखते हैं। BTech, MTech और PhD जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके युवा भी संस्कृत की गहराई समझने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

पाणिनीय पद्धति से संस्कृत की पढ़ाई

डॉ. पुष्पा दीक्षित की पाठशाला की सबसे बड़ी खासियत पाणिनीय पद्धति से संस्कृत पढ़ाना है। उनका मानना है कि संस्कृत को केवल रटकर नहीं, बल्कि उसकी व्याकरणिक संरचना और पद्धति को समझकर सीखा जाना चाहिए।

इसी वजह से दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों के लिए उनका घर सीखने का केंद्र बन गया है। यहां सीखने के लिए न उम्र की सीमा है और न आर्थिक क्षमता की शर्त।

न फीस, न शुल्क, सीखने की इच्छा जरूरी

डॉ. दीक्षित संस्कृत को कमाई का जरिया बनाने के बजाय इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में विश्वास रखती हैं। इसी उद्देश्य से वे अपने स्तर पर बच्चों और युवाओं को निशुल्क संस्कृत पढ़ा रही हैं।

आधुनिक समय में जहां युवाओं का रुझान तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा की ओर बढ़ रहा है, वहीं इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं का संस्कृत सीखने के लिए यहां पहुंचना इस पहल को खास बनाता है।

दिल्ली, बेंगलुरु, देहरादून समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी यहां आ चुके हैं।

दिल्ली, बेंगलुरु, देहरादून समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी यहां आ चुके हैं।

शिक्षक दिवस पर शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता

शिक्षक दिवस के मौके पर डॉ. पुष्पा दीक्षित ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ऐसी शिक्षा व्यवस्था के पक्षधर थे, जिसमें राष्ट्रहित, विचार और संस्कारों को महत्व मिले।

उनका मानना है कि शिक्षा में भारतीय संस्कृति और विचार आधारित अध्ययन को पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए। उनके अनुसार संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी है।

सरकारी मदद के बिना 22 साल से जारी अभियान

डॉ. पुष्पा दीक्षित की यह पहल किसी बड़े संस्थान या सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं है। उन्होंने अपने घर से यह अभियान शुरू किया और करीब 22 वर्षों से लगातार बच्चों और युवाओं को संस्कृत का ज्ञान दे रही हैं।

बिलासपुर की यह पाठशाला बताती है कि किसी भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा बड़े संस्थान की जरूरत नहीं होती। एक व्यक्ति की लगन और समर्पण भी कई लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ सकता है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा रायपुर का ‘लोकरंग पर्व’

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6 से 8 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर दिखेगी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक 

संस्कृति,  भरथरी-पंडवानी से लेकर पंथी, करमा, सुआ और ददरिया तक की होंगी मनमोहक प्रस्तुतियां

रायपुर, 05 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के अंतर्गत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 6, 7 एवं 8 सितंबर को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा।
    लोकरंग पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकगाथाओं, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य की ऐसी रंगारंग प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और उसकी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करेंगी।

भरथरी और पंडवानी से लेकर पंथी-करमा तक
    तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक विधाओं भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनके साथ सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकजीवन से जोड़ेंगी।
    वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी लोक एवं पारंपरिक गायन शैलियों की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को सामने लाया जाएगा।

लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत
    ‘लोकरंग पर्व’ केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। लोकगीतों, लोकगाथाओं और पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैलियों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक दर्शकों को देखने मिलेगी।
    आयोजन में पारंपरिक लोक विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर साकार करेंगे। लोक वाद्यों की धुन, पारंपरिक गीतों की मिठास और लोकनृत्यों की लय से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा।

मुक्ताकाशी मंच पर तीन शाम संस्कृति के नाम
    संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। 6 से 8 सितंबर तक शाम 7 बजे से होने वाली प्रस्तुतियों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं का विविधतापूर्ण संगम देखने को मिलेगा।
    ‘लोकरंग पर्व’ के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर उभरेगी, जहां लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, नृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्यों की गूंज मिलकर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करेगी।

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