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फेयरवेल में भावुक हुए चीफ-जस्टिस रमेश सिन्हा:कहा- बेंच और बार एक ही न्याय प्रणाली के अभिन्न अंग, 50,228 मामलों का निराकरण कर इतिहास रचा

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा रिटायर हो गए। हाईकोर्ट में आयोजित फेयरवेल पर चीफ जस्टिस सिन्हा बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि अदालतें केवल ईंट, पत्थर और कंक्रीट से निर्मित संरचना नहीं है, बल्कि यह वह स्थान है जहां नागरिक अपनी आशाओं और न्याय व्यवस्था पर विश्वास के साथ आते हैं।

बेंच और बार एक ही न्याय वितरण प्रणाली के अभिन्न अंग हैं। एक सशक्त न्यायपालिका के लिए स्वतंत्र और गरिमापूर्ण बार का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने कार्यकाल में सहयोग के लिए सभी न्यायाधीशों, रजिस्ट्री के अधिकारियों, अधिवक्ताओं और राज्य शासन के प्रति आभार जताया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी केवल केस निपटाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें संस्था को मजबूत करना, बुनियादी ढांचे का विकास करना और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण तैयार करना भी शामिल है।

जस्टिस अग्रवाल ने गिनाई कार्यकाल की उपलब्धियां

इस कार्यक्रम की शुरुआत में जस्टिस संजय के अग्रवाल ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के कार्यकाल में प्रदेशभर की अदालतों और आवासीय कॉलोनियों के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों की जानकारी दी। इसके साथ ही उनके कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

समारोह में बोलते हुए बेहद भावुक हो गए चीफ जस्टिस सिन्हा

सीजे सिन्हा ने संस्थागत मूल्यों पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि निष्पक्षता, विश्वास और न्याय के प्रति निष्ठा से ही एक महान संस्था का निर्माण होता है। इस दौरान चीफ जस्टिस बेहद भावुक हो गए। उन्होंने संदेश दिया कि हमारे द्वारा धारण किया गया पद अस्थायी होता है, लेकिन संस्थाओं को स्थायी रूप से बने रहना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका कार्यकाल तभी सफल माना जाएगा जब वे अपने पीछे एक ऐसी संस्था छोड़कर जाएं जो उन्हें मिली संस्था से अधिक सशक्त हो।

बेंच और बार न्याय प्रणाली के अटूट हिस्से

चीफ जस्टिस ने कहा कि, बेंच और बार एक ही न्याय वितरण प्रणाली के अभिन्न अंग हैं। एक सशक्त न्यायपालिका के लिए स्वतंत्र और गरिमापूर्ण बार का होना अधिक आवश्यक है। उन्होंने अपने कार्यकाल में सहयोग के लिए सभी न्यायाधीशों, रजिस्ट्री के अधिकारियों, अधिवक्ताओं और राज्य शासन के प्रति आभार जताया।

जनहित व प्रशासनिक कसावट के लिए याद किए जाएंगे चीफ जस्टिस सिन्हा

समारोह में महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने चीफ जस्टिस के असाधारण न्यायिक करियर की जानकारी दी। बताया कि 29 मार्च 2023 से 01 सितंबर 2026 तक चीफ जस्टिस द्वारा कुल 50228 मामलों का निराकरण किया गया। इनमें सिंगल बेंच के 32600 मामले और डिवीजन बेंच के 17628 मामले शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने 369 से अधिक रिपोर्टेड निर्णयों के जरिए संवैधानिक, आपराधिक और सेवा विधि जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों का निराकरण किया। छत्तीसगढ़ आने से पहले करीब 1 लाख 34 हजार 200 निर्णय दे चुके थे। इसके साथ ही जनहित के मुद्दों और मीडिया रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेने के लिए चीफ जस्टिस सिन्हा हमेशा याद किए जाएंगे।

जस्टिस संजय के अग्रवाल बने कार्यवाहक चीफ जस्टिस

जस्टिस संजय के अग्रवाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए कार्यवाहक चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा शुक्रवार को रिटायर हो गए हैं। उनके रिटायरमेंट के तुरंत बाद राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए हाई कोर्ट के जज जस्टिस संजय के अग्रवाल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का कार्यवाहक चीफ जस्टिस नियुक्त किया है।

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश के बाद, अब जस्टिस अग्रवाल चीफ जस्टिस के पद के सभी कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

मंत्रालय ने इस नियुक्ति और अधिसूचना की प्रति छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य के मुख्य सचिव, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट को भी सूचनार्थ भेज दी है। बता दें कि जस्टिस अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया जा चुका है। अधिसूचना जारी होने तक वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

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छत्तीसगढ़

रिटायरमेंट के बाद घर को बनाया गुरुकुल:बिलासपुर में 22 साल से फ्री में संस्कृत पढ़ा रहीं डॉ. पुष्पा दीक्षित, विदेशों तक से सीखने पहुंचे विद्यार्थी

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बिलासपुर, एजेंसी। आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद लोग आराम की जिंदगी बिताना पसंद करते हैं, लेकिन बिलासपुर की डॉ. पुष्पा दीक्षित ने अपना पूरा समय संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उनका घर पिछले करीब 22 साल से संस्कृत की पाठशाला बना हुआ है।

यहां देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ नेपाल, चीन और अमेरिका समेत कई देशों से भी विद्यार्थी संस्कृत सीखने पहुंच चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि यहां संस्कृत सीखने के लिए किसी तरह की फीस या शुल्क नहीं लिया जाता है।

डॉ. पुष्पा दीक्षित का घर करीब 22 साल से संस्कृत की पाठशाला बना हुआ है।

डॉ. पुष्पा दीक्षित का घर करीब 22 साल से संस्कृत की पाठशाला बना हुआ है।

संस्कृत सीखने के लिए किसी तरह की फीस या शुल्क नहीं लिया जाता है।

संस्कृत सीखने के लिए किसी तरह की फीस या शुल्क नहीं लिया जाता है।

बच्चों को संस्कृत पढ़ाती डॉ. पुष्पा दीक्षित।

बच्चों को संस्कृत पढ़ाती डॉ. पुष्पा दीक्षित।

दिल्ली से नेपाल तक पहुंच रहे विद्यार्थी

दरअसल, गोंड़पारा स्थित पाणिनीय शोध संस्थान में संस्कृत सीखने वालों का दायरा बिलासपुर तक सीमित नहीं है। दिल्ली, बेंगलुरु, देहरादून समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी यहां आ चुके हैं। नेपाल समेत विदेशों से भी विद्यार्थी संस्कृत सीखने पहुंचे हैं।

यहां आने वाले विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि भी अलग-अलग है। स्कूली बच्चों के साथ नौकरी और पढ़ाई करने वाले युवा भी संस्कृत सीखते हैं। BTech, MTech और PhD जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके युवा भी संस्कृत की गहराई समझने के लिए यहां पहुंच रहे हैं।

पाणिनीय पद्धति से संस्कृत की पढ़ाई

डॉ. पुष्पा दीक्षित की पाठशाला की सबसे बड़ी खासियत पाणिनीय पद्धति से संस्कृत पढ़ाना है। उनका मानना है कि संस्कृत को केवल रटकर नहीं, बल्कि उसकी व्याकरणिक संरचना और पद्धति को समझकर सीखा जाना चाहिए।

इसी वजह से दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों के लिए उनका घर सीखने का केंद्र बन गया है। यहां सीखने के लिए न उम्र की सीमा है और न आर्थिक क्षमता की शर्त।

न फीस, न शुल्क, सीखने की इच्छा जरूरी

डॉ. दीक्षित संस्कृत को कमाई का जरिया बनाने के बजाय इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में विश्वास रखती हैं। इसी उद्देश्य से वे अपने स्तर पर बच्चों और युवाओं को निशुल्क संस्कृत पढ़ा रही हैं।

आधुनिक समय में जहां युवाओं का रुझान तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा की ओर बढ़ रहा है, वहीं इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं का संस्कृत सीखने के लिए यहां पहुंचना इस पहल को खास बनाता है।

दिल्ली, बेंगलुरु, देहरादून समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी यहां आ चुके हैं।

दिल्ली, बेंगलुरु, देहरादून समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी यहां आ चुके हैं।

शिक्षक दिवस पर शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता

शिक्षक दिवस के मौके पर डॉ. पुष्पा दीक्षित ने मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ऐसी शिक्षा व्यवस्था के पक्षधर थे, जिसमें राष्ट्रहित, विचार और संस्कारों को महत्व मिले।

उनका मानना है कि शिक्षा में भारतीय संस्कृति और विचार आधारित अध्ययन को पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए। उनके अनुसार संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति से जोड़ने का माध्यम भी है।

सरकारी मदद के बिना 22 साल से जारी अभियान

डॉ. पुष्पा दीक्षित की यह पहल किसी बड़े संस्थान या सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं है। उन्होंने अपने घर से यह अभियान शुरू किया और करीब 22 वर्षों से लगातार बच्चों और युवाओं को संस्कृत का ज्ञान दे रही हैं।

बिलासपुर की यह पाठशाला बताती है कि किसी भाषा और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा बड़े संस्थान की जरूरत नहीं होती। एक व्यक्ति की लगन और समर्पण भी कई लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ सकता है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : लोकधुनों और लोकगाथाओं से सजेगा रायपुर का ‘लोकरंग पर्व’

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6 से 8 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर दिखेगी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक 

संस्कृति,  भरथरी-पंडवानी से लेकर पंथी, करमा, सुआ और ददरिया तक की होंगी मनमोहक प्रस्तुतियां

रायपुर, 05 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं, लोकगाथाओं और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच देने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘विभागीय आयोजन 2026’ के अंतर्गत तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 6, 7 एवं 8 सितंबर को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा। कार्यक्रम प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से प्रारंभ होगा।
    लोकरंग पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की विविध लोक विधाओं को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकगाथाओं, लोकनाट्य, लोकगीत और लोकनृत्य की ऐसी रंगारंग प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी, जो छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और उसकी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करेंगी।

भरथरी और पंडवानी से लेकर पंथी-करमा तक
    तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक विधाओं भरथरी, पंडवानी, ढोलामारू, लोरिकचंदा, नाचा और गम्मत की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनके साथ सुआ, करमा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को छत्तीसगढ़ की लोकजीवन से जोड़ेंगी।
    वहीं बांसगीत, देवारगीत, ददरिया, जसगीत और संस्कार गायन जैसी लोक एवं पारंपरिक गायन शैलियों की प्रस्तुतियों के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की गहराई को सामने लाया जाएगा।

लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, नई पीढ़ी तक पहुंचेगी विरासत
    ‘लोकरंग पर्व’ केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी लोक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। लोकगीतों, लोकगाथाओं और पारंपरिक नृत्य-नाट्य शैलियों के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण एवं जनजातीय जीवन, सामाजिक परंपराओं और लोक आस्थाओं की झलक दर्शकों को देखने मिलेगी।
    आयोजन में पारंपरिक लोक विधाओं के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर साकार करेंगे। लोक वाद्यों की धुन, पारंपरिक गीतों की मिठास और लोकनृत्यों की लय से मुक्ताकाशी मंच तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा।

मुक्ताकाशी मंच पर तीन शाम संस्कृति के नाम
    संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश की लोककलाओं और लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ आम नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। 6 से 8 सितंबर तक शाम 7 बजे से होने वाली प्रस्तुतियों में दर्शकों को छत्तीसगढ़ की अलग-अलग लोक विधाओं का विविधतापूर्ण संगम देखने को मिलेगा।
    ‘लोकरंग पर्व’ के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की जीवंत तस्वीर रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर उभरेगी, जहां लोकगाथाओं की कथात्मकता, लोकगीतों की मिठास, नृत्यों की थिरकन और पारंपरिक वाद्यों की गूंज मिलकर प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करेगी।

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रायगढ़ : रायगढ़ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया भंडारे का उद्घाटन, श्रद्धालुओं को वितरित किया प्रसाद

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने किया भंडारे का उद्घाटन, श्रद्धालुओं को वितरित किया प्रसाद

रायगढ़, 05 सितम्बर 2026। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रायगढ़ में आयोजित जन्माष्टमी मेले के उपलक्ष्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने भंडारे का विधिवत उद्घाटन किया तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
    इस अवसर पर ओ.पी. चौधरी ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए सभी श्रद्धालुओं एवं जिलेवासियों को जन्माष्टमी पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, सत्य, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
    जन्माष्टमी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक शामिल हुए। भंडारे में श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन स्थल पर भक्तिमय वातावरण रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।
    श्री चौधरी ने कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को मजबूत करने के साथ समाज में आपसी भाईचारे और सेवा की भावना को भी बढ़ावा देते हैं।

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