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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के एक जस्टिस कोरोना पॉजिटिव:समर वेकेशन में बाहर गए थे; 24 घंटे में 9 नए केस; कुल एक्टिव मामले 28

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटे में कोविड के 9 नए मरीज मिले है। इनमें एक हाईकोर्ट के एक जस्टिस भी शामिल हैं। वे समर वेकेशन में बाहर गए हुए थे वापस आकर जांच कराने पर पॉजिटिव पाए गए।

गुरुवार को रायपुर में 5 और बिलासपुर में 4 पेशेंट में कोविड की पुष्टि हुई हैं। नया वैरिएंट आने के बाद से ये एक दिन में सबसे बड़ा आंकड़ा है। अब तक प्रदेश में 30 मरीज सामने आए हैं। जिनमें 2 रिकवर हो गए वहीं 28 केस एक्टिव हैं।

जानिए अलग-अलग शहर के एक्टिव केस

28 एक्टिव केस में से 27 होम आइसोलेशन में हैं, और 1 मरीज का इलाज निजी हॉस्पिटल में चल रहा है।

बस्तर में 1

सबसे ज्यादा 18 एक्टिव केस रायपुर में है

बिलासपुर में 6

दुर्ग में 3

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग कोविड JN.1 को लेकर लाइट अलर्ट पर है। मेकाहारा के डॉ. आर के पांडा के मुताबिक, ज्यादातर मरीज होम क्वारंटाइन में ही ठीक हो जा रहे हैं, लेकिन उन मरीजों को ज्यादा खतरा है, जिन्हें पहले से दूसरी या एक से ज्यादा बीमारियां हैं। खासकर डायबिटीज पेशेंट और चेन स्मोकर्स नए वैरिएंट के चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

देशभर में कोविड से 51 मौतें

वहीं, अगर देशभर की बात करें तो 9 राज्यों को छोड़कर बाकी स्टेट्स में कोविड का नया वैरिएंट JN.1 फैल चुका है। अब तक 4 हजार 866 मरीज मिल चुके हैं, जबकि 51 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। गुरुवार को दिल्ली में पांच माह के एक बच्चे की मौत भी कोविड से रिपोर्ट की गई है। हालांकि फैटेलिटी रेट सिर्फ 2% है।

मेकाहारा में कोविड के सीरियस केस अब तक नहीं आए

मेकाहारा में पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के हेड आर के पांडा ने बताया कि कोविड के सीरियस केस अब तक नहीं आए हैं। मेकाहारा में 28 मई से कोविड ओपीडी शुरू कर दी गई है। कोविड का लक्षण दिखने पर तत्काल मरीजों की स्क्रीनिंग की जा रही है।

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छत्तीसगढ़

बलौदाबाजार : किसानों की खुशियों भरी होली के बाद अब भूमिहीन कृषि श्रमिकों की नवरात्रि भी हुई समृद्ध

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राशि का किया अंतरण

प्रदेश के 4.95 लाख से अधिक भूमिहीन कृषकों के खातों में 495 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित

सुशासन सरकार की सतत पहल से किसान, मजदूर और महिलाओं को मिल रहा मजबूत आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राशि का किया अंतरण

बलौदाबाजार। किसानों की खुशियों भरी होली के बाद अब भूमिहीन कृषि श्रमिकों के लिए भी यह नवरात्रि समृद्धि और आत्मविश्वास का संदेश लेकर आई है। छत्तीसगढ़ में सुशासन सरकार की योजनाएं अब सीधे जनजीवन में परिवर्तन का आधार बनती दिख रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बलौदाबाजार जिले में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राशि का किया अंतरण

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बलौदा बाजार में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के 4 लाख 95 हजार 965 भूमिहीन कृषि मजदूरों के खातों में 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार  रुपये की राशि अंतरित की। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि श्रम और सम्मान को सशक्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राशि का किया अंतरण

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत किए गए वादों को सरकार द्वारा तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि धान खरीदी में अंतर की राशि मिलने से किसानों ने इस वर्ष उत्साह और संतोष के साथ होली मनाई, वहीं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को मिली राशि ने उनके आत्मनिर्भरता के संकल्प को और मजबूत किया है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से गृह प्रवेश कराते हुए मकानों की चाबियां भी सौंपीं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 18 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा का नया अध्याय जुड़ा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बलौदाबाजार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का स्मरण करते हुए बाबा गुरु घासीदास, संत कबीर और शहीद वीर नारायण सिंह को नमन किया। उन्होंने कहा कि  दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि भूमिहीन कृषि मजदूरों को दी जा रही है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं, बच्चों की शिक्षा और छोटे व्यवसायों को आगे बढ़ाने में सक्षम हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादे के अनुरूप 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार हेतु 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। साथ ही तेंदूपत्ता संग्रहण दर में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः संचालन तथा रामलला दर्शन एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजनाओं के माध्यम से सामाजिक और आध्यात्मिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बिजली बिल समाधान योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि कोरोना काल में लंबित बिलों के निपटान हेतु विशेष छूट एवं आसान किस्तों की सुविधा प्रदान की जा रही है। यह योजना जून तक संचालित होगी और प्रदेशभर में इसके लिए समाधान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रदेश के समग्र विकास पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज संपदा, कृषि और वन उत्पादों के बेहतर उपयोग से छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का लक्ष्य है। उन्होंने बस्तर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों तक नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शांति, विश्वास और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के संकल्प और सुरक्षाबलों के साहस से नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने विभिन्न विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया तथा पांच जिलों के हितग्राहियों से वर्चुअल संवाद कर योजनाओं के प्रभाव की जानकारी ली।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को कम समय में पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता का प्रमाण है। उन्होंने महतारी वंदन योजना, धान खरीदी के अंतर की राशि तथा प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 18 लाख गरीब परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। 

राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। आज योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुंच रही है, जिससे व्यवस्था में विश्वास और पारदर्शिता दोनों मजबूत हुए हैं। उन्होंने सभी भूमिहीन कृषि मजदूरों, विशेषकर बैगा-गुनिया परिवारों को इस योजना के लाभ के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : लाल आतंक पर निर्णायक प्रहार: बस्तर में हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव सहित कुल 18 माओवादियों का आत्मसमर्पण

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मुख्यमंत्री ने कहा—नक्सलवाद अब अंतिम पड़ाव पर, बस्तर में गूंज रही विकास की आवाज़

रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को आज एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। बस्तर संभाग के जगदलपुर में मोस्ट वॉन्टेड हार्डकोर नक्सली कमांडर पापाराव ने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आत्मसमर्पण को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक प्रहार बताते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और बस्तर की धरती पर हिंसा की विचारधारा पराजित होती स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि वर्षों तक भय और हिंसा का वातावरण बनाने वाली माओवादी विचारधारा अब समाप्ति की ओर है और बस्तर तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की पारदर्शी, संवेदनशील और पुनर्वास केंद्रित नीतियों के कारण भटके हुए युवा अब मुख्यधारा में लौटने का विश्वास पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का भरोसा मिले, तो हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास के मार्ग को अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में बंदूक की आवाज़ नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की गूंज सुनाई दे रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से हो रहे कार्यों ने बस्तर के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त मार्गदर्शन को देते हुए कहा कि नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने सुरक्षाबलों के साहस, समर्पण और रणनीतिक कार्रवाई की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि माओवाद के पूर्ण खात्मे के साथ बस्तर में शांति, विकास और विश्वास की यह यात्रा निरंतर आगे बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ देश के सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राज्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।

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छत्तीसगढ़

प्यून को हर-महीने मिल रहा था 4.5 लाख भत्ता:बिलासपुर में 6 महीने में 30 लाख ट्रांसफर, कांग्रेस ने DEO-जूनियर ऑडिटर की CS से शिकायत की

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बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जिला शिक्षा विभाग में बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है। युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा का कहना है कि बीईओ कोटा कार्यालय में पदस्थ रहे प्यून को हर महीने 4 लाख से 4.50 लाख रुपए का भत्ता भुगतान किया गया है। इस तरह करीब 30 लाख रुपए अकाउंट में डाले गए हैं।

प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) विजय टांडे और स्थापना शाखा के जूनियर ऑडिटर सुनील यादव पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की शिकायत प्रमुख सचिव की है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, विजय टांडे ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि शिकायत की जांच संयुक्त संचालक शिक्षा की ओर से कराई जा रही है, इसलिए अब इस मामले में कुछ कहना उचित नहीं होगा। इतना तय है कि जांच के बाद सत्य उजागर हो जाएगा।

क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के मुताबिक देवेंद्र कुमार पालके कोटा बीईओ कार्यालय में प्यून के पद पर पदस्थ रहे। आरोप है कि प्यून को हर महीने 4 लाख से 4.50 लाख रुपए तक भत्ता दिया गया, जो सामान्य वेतन ढांचे से कई गुना अधिक है।

वर्दी धुलाई भत्ता और अन्य भत्ते के नाम करीब 30 लाख रुपए देवेंद्र कुमार पालके के खाते में ट्रांसफर किए हैं।

सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच भुगतान

अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि कोटा विकासखंड में पदस्थ रहते समय विजय टांडे ने सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कर्मचारी देवेंद्र कुमार पालके को कर्मचारी कोड के जरिए 30 लाख रुपए जारी किए।

DDO रहते पूरी प्रक्रिया पर नियंत्रण

शिकायत में बताया गया है कि उस समय विजय टांडे विकासखंड शिक्षा अधिकारी कोटा के साथ आहरण-संवितरण अधिकारी (डीडीओ) भी थे। ऐसे में पूरा भुगतान उनकी जानकारी और अनुमति से ही संभव हुआ। बिना मिलीभगत इतनी बड़ी राशि का लेन-देन संभव नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा ने मामले की शिकायत मुख्य सचिव से की है।

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा ने मामले की शिकायत मुख्य सचिव से की है।

खातों की जांच की मांग

अंकित गौरहा ने देवेंद्र कुमार पालके और अधिकारियों के बीच बैंक लेन-देन की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे वास्तविक आर्थिक लाभ और पूरे कथित षड्यंत्र का खुलासा हो सकेगा।

पहले भी उठा मामला, कार्रवाई अधूरी

यह मामला पहले कलेक्टर की समय-सीमा बैठकों में भी उठ चुका है। कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। कोटा थाने में केस दर्ज हुआ, लेकिन इसके बाद भी विजय टांडे पर ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।

कारनामा छिपाने के लिए अधीनस्थ निलंबित

अंकित गौरहा ने आरोप लगाया कि अनियमितताओं को छिपाने के लिए संबंधित क्लर्क और प्यून को निलंबित कर दिया गया, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की थी। शिकायत में जिला शिक्षा कार्यालय के कुछ अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता का भी जिक्र है।

शिकायत में कहा गया है कि मासिक व्यय पत्रक और बजट दस्तावेजों में हेरफेर कर गबन की राशि छिपाई गई। हस्ताक्षरयुक्त हार्ड कॉपी जमा होने के बावजूद वास्तविक वित्तीय स्थिति अलग रखी गई।

विजय टांडे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है।

विजय टांडे ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है।

पुराने मामलों में कार्रवाई नहीं, पदोन्नति मिली

गौरहा ने बताया कि यह पहला मामला नहीं है। पहले सहायक ग्रेड-2 राजेश कुमार प्रताप के प्रकरण में कार्रवाई हुई, लेकिन उसी मामले में विजय टांडे पर कोई कदम नहीं उठाया गया।

दिवंगत शिक्षक पुष्कर भारद्वाज की पत्नी नीलम भारद्वाज ने रिश्वत मांगने की शिकायत शपथ-पत्र के साथ दी थी, जो जांच में सही पाई गई। संबंधित क्लर्क निलंबित हुआ, लेकिन विजय टांडे के खिलाफ जांच की अनुशंसा के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में उन्हें प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बना दिया गया।

जांच प्रभावित होने की आशंका, निलंबन की मांग

शिकायत में कहा गया है कि प्रभारी डीईओ के खिलाफ पहले से कई मामलों की जांच चल रही है। ऐसे में पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए उन्हें तत्काल निलंबित कर स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। सुनील यादव के खिलाफ भी सबूत सौंपे गए हैं।

संयुक्त संचालक शिक्षा ने चुप्पी साधी

प्रभारी डीईओ विजय टांडे पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच संयुक्त संचालक शिक्षा आरपी आदित्य कर रहे हैं। इस मामले में उनसे कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्हें एसएमएस भेजकर यह पूछा गया कि जांच कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं और रिपोर्ट कब तक दी जाएगी।

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