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छत्तीसगढ़

गर्भस्थ शिशु की मौत, डॉक्टर्स पर भड़कीं मंत्री राजवाड़े:बोलीं- मेरा ब्लड ले लो, सूरजपुर अस्पताल में खून की कमी से रुका प्रसूता का ट्रीटमेंट

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सूरजपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल में इलाज में लापरवाही की जानकारी मिलने पर महिला-बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल पहुंचीं। लापरवाही और दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने सिविल सर्जन और डॉक्टरों को फटकार लगाई।

जानकारी के अनुसार, महिला को गंभीर हालत में शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद रविवार को पता चला कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी है और उसका ऑपरेशन कर मृत शिशु को निकालना आवश्यक था, लेकिन अस्पताल में ब्लड की कमी बताते हुए उसका इलाज शुरू नहीं किया गया, जिस पर लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मेरा ब्लड ले लो और इलाज करो।

इस मामले में सूरजपुर के सीएमएचओ डॉ. अनिल पैकरा ने डॉक्टर निकिता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जिला अस्पताल में अव्यवस्था पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल ने नाराजगी जताई।

जिला अस्पताल में अव्यवस्था पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल ने नाराजगी जताई।

शिकायत मिली तो सीधे हॉस्पिटल पहुंचीं मंत्री

सोमवार को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को मरीज का इलाज शुरू न होने की शिकायत मिली, जिसके बाद वे शाम को अस्पताल पहुंचीं। उनके पहुंचते ही सीएस डॉ. मरकाम सहित अन्य चिकित्सक मौके पर मौजूद हो गए।

मंत्री ने इलाज में लापरवाही पर सीएस को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही डॉक्टरों और नर्सों के दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे पूरी चिकित्सा व्यवस्था की छवि खराब हो रही है।

दरअसल, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। शिकायत भाजपा नेताओं तक पहुंची तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया, जिस पर डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा-मंत्री या विधायक को बुला लो, कुछ नहीं होगा।

लापरवाही पर मंत्री ने सिविल सर्जन और अन्य स्टाफ को जमकर फटकार लगाई।

लापरवाही पर मंत्री ने सिविल सर्जन और अन्य स्टाफ को जमकर फटकार लगाई।

मंत्री ने कहा- व्यवस्था सुधारें, यह बर्दाश्त नहीं

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार किया जाए। पहले भी कई शिकायतें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो मेरा ब्लड निकाल लो, लेकिन मरीज का इलाज तुरंत होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल में फैली बदबू और गंदगी पर भी अपनी नाराजगी जताई।

पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही

सूरजपुर अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप पहले भी लग चुके हैं। इलाज न करने और हालत बिगड़ने पर अंबिकापुर रेफर करने की दो घटनाओं में प्रसूता और नवजात की मौत हो चुकी है। इन मामलों में केवल नर्सों पर कार्रवाई की गई।

सीएमएचओ बोले- प्रसूता की हालत खतरे से बाहर

सूरजपुर सीएमएचओ डॉ. अनिल पैकरा के अनुसार गर्भवती महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसमें खून की कमी थी। गर्भ में ही शिशु की मौत हो चुकी थी, इसलिए अबॉर्शन के लिए ब्लड की जरूरत थी।

सीएमएचओ ने बताया कि महिला का अबॉर्शन कर दिया गया है और एक यूनिट ब्लड चढ़ाया जा चुका है। अब वह खतरे से बाहर है, हालांकि एक यूनिट और ब्लड चढ़ाया जाना है। डॉक्टर निकिता की ड्यूटी ब्लड बैंक में है। उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया गया है।

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बिलासपुर में मजदूरों से भरा ट्रैक्टर पलटा, 2 की मौत:6 मजदूर घायल, धान रोपाई करने जा रहे थे, कच्ची सड़क पर हुआ हादसा

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मंगलवार सुबह धान रोपाई के लिए जा रहे मजदूरों से भरा ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गया। हादसे में 2 महिला मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हो गए। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों ने तत्काल ट्रॉली के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। घटना हिर्री थाना क्षेत्र की है।

जानकारी के अनुसार, मुड़पार गांव के श्रमिक गांव के ही एक किसान के खेत में धान की रोपाई करने ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर जा रहे थे। सुबह कच्ची सड़क से गुजरते समय ट्रैक्टर चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। संतुलन बिगड़ते ही ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खेत में पलट गया। हादसे के दौरान ट्रॉली में सवार कई श्रमिक उसके नीचे दब गए।

खेत में मची चीख-पुकार, आसपास के लोगों ने की मदद

हादसे की आवाज सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण और अन्य मजदूर मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर ट्रॉली उठाई और उसके नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। काफी मशक्कत के बाद घायलों को बाहर निकाला गया, लेकिन दो श्रमिकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है।

सूचना मिलते ही हिर्री थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भिजवाया। अस्पताल में सभी घायलों का उपचार जारी है, जबकि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

कच्ची सड़क पर अनियंत्रित हुआ ट्रैक्टर

पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में कच्ची सड़क पर ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ने से हादसा होना माना जा रहा है। पुलिस चालक, घायल श्रमिकों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है। पुलिस मामले में मर्ग कायम कर जांच कर रही है।

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस के आदिवासी नेताओं का दिल्ली में डेरा:PCC अध्यक्ष पद को लेकर अमरजीत-कवासी समेत कई दावेदार, हाईकमान से मुलाकातों का दौर

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष (PCC) के पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी के कई आदिवासी नेता इन दिनों दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। संगठन में संभावित बदलाव की चर्चाओं के बीच नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। कांग्रेस हाईकमान से मुलाकातों का दौर भी जारी है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए आदिवासी चेहरे को मौका मिलने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच कई वरिष्ठ आदिवासी नेता दिल्ली पहुंचे हैं।

चर्चा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता अरविंद नेताम, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, विधायक लखेश्वर बघेल, विधायक जनक ध्रुव समेत कई आदिवासी नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में लिए जा रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से अब तक किसी नाम पर आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है।

दिल्ली में कौन-कौन मौजूद?

सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, आबकारी घोटाला मामले में जमानत पर बाहर आए वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा, विधायक जनक ध्रुव समेत कई आदिवासी नेता इन दिनों दिल्ली में हैं।

संगठन में बड़ा बदलाव कर सकती है कांग्रेस

पार्टी सूत्रों का कहना है कि, कांग्रेस आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन में बड़ा बदलाव कर सकती है। प्रदेश अध्यक्ष के साथ-साथ संगठन के अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी फेरबदल की संभावना जताई जा रही है।

हाल के दिनों में प्रदेश कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में दिल्ली में नेताओं की मौजूदगी को इसी राजनीतिक कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही करेगा।

फिलहाल, कांग्रेस संगठन की ओर से किसी भी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक गतिविधियों ने प्रदेश की सियासत का तापमान जरूर बढ़ा दिया है।

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इंटरकास्ट मैरिज के बाद एडवोकेट कपल का सामाजिक बहिष्कार:35 हजार दिए, भोज कराया, फिर भी नहीं अपनाया, SP से कार्रवाई की मांग

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खैरागढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में इंटरकास्ट मैरिज करने वाले एडवोकेट दंपती को कथित तौर पर समाज से बाहर कर दिया गया है। दंपती का आरोप है कि समाज में दोबारा शामिल करने के नाम पर उनसे 35 हजार रुपए लिए गए। इसके अलावा पूरे समाज को भोज भी कराया गया।

इसके बावजूद उन्हें अब तक समाज में शामिल नहीं किया गया। दंपती का कहना है कि उनके पास ऑडियो रिकॉर्डिंग है। इसमें कथित जुर्माना लगाने, समाज से बाहर करने और 35 हजार रुपए लेने की बात कही गई है। दंपती ने इस मामले की लिखित शिकायत एसपी ऑफिस में की है।

उन्होंने एफआईआर दर्ज करने, ऑडियो की फॉरेंसिक जांच कराने, लिए गए 35 हजार रुपए वापस दिलाने और समाज के नाम पर चल रही ऐसी प्रथा की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामला ग्राम देवरी का है।

सितंबर 2025 में किया इंटरकास्ट मैरिज

दरअसल, एडवोकेट नेमीचंद वर्मा ने एसपी को दी लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि, इंटरकास्ट मैरिज करने के बाद समाज के कुछ लोगों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया। उन्होंने बताया कि सितंबर 2025 में उन्होंने अपनी इच्छा से प्रमिला सोनकर से शादी की थी।

इसके बाद समाज की बैठक में उन पर 35 रुपए हजार का तथाकथित जुर्माना लगाया गया। परिवार ने समाज के दबाव में पैसे जमा कर दिए। इसके बावजूद पूरे समाज को सामूहिक भोज कराने और समाज की आराध्य वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा के सामने पूजा करने के लिए मजबूर किया गया।

दंपती का अब भी सामाजिक बहिष्कार

वकील नेमीचंद का आरोप है कि जुर्माना लेने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों को समाज में शामिल कर लिया गया, लेकिन उन्हें और उनकी पत्नी को आज भी समाज से बाहर रखा गया है। समाज के लोगों को उनसे कोई संबंध नहीं रखने, घर नहीं आने और किसी भी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में नहीं बुलाने के निर्देश दिए गए।

मानसिक प्रताड़ना और अपमान का आरोप

पीड़ित ने कहा कि लगातार सामाजिक बहिष्कार के कारण उन्हें और उनकी पत्नी को मानसिक परेशानी और सामाजिक अपमान झेलना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इससे उनके सम्मान और समानता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है।

दंपती ने आवेदन में देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

दंपती ने आवेदन में देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

गांव के लोगों से भी लगाई मदद की गुहार

नेमीचंद ने बताया कि उन्होंने गांव के प्रमुख लोगों से भी मदद मांगी थी। इस दौरान उन्हें बताया गया कि गांव में कई अन्य लोग भी इसी तरह के सामाजिक बहिष्कार का सामना कर चुके हैं और ऐसे मामलों में पुलिस से शिकायत करना ही सही रास्ता है।

पहले भी ऐसे मामले होने का दावा

शिकायत में कहा गया है कि गांव में कई लोगों से समाज के नाम पर जुर्माना लिया गया और उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया। पहले भी इस तरह की शिकायतें पुलिस तक पहुंची थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से ऐसे लोगों के हौसले बढ़ गए हैं।

दंपती ने इस पूरे मामले की शिकायत एसपी कार्यालय में की है।

दंपती ने इस पूरे मामले की शिकायत एसपी कार्यालय में की है।

ऑडियो रिकॉर्डिंग को बताया अहम सबूत

नेमीचंद ने दावा किया कि उनके पास एक ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जिसमें समाज के एक सदस्य के साथ हुई बातचीत दर्ज है। उनका कहना है कि इसमें जुर्माना, सामाजिक बहिष्कार और रकम देने जैसी बातें सामने आती हैं। जरूरत पड़ने पर वे यह रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंपेंगे।

एसपी से FIR दर्ज करने की मांग

शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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