छत्तीसगढ़
टॉप नक्सली लीडर हिड़मा के घर सुकमा पहुंचे डिप्टी सीएम:मां से मिले गृह मंत्री विजय शर्मा, कहा- बेटा लौट आए, सरकार देगी सुरक्षा
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2 months agoon
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Divya Akashसुकमा,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा दक्षिण बस्तर के कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा के गांव पुवर्ती पहुंचे और उसकी मां से मुलाकात की। यह मुलाकात बस्तर में शांति और नक्सल हिंसा खत्म करने की दिशा में एक अहम कोशिश मानी जा रही है।
गृह मंत्री विजय शर्मा रविवार को खुद बाइक से गांव पहुंचे। उन्होंने गांव के बीच जाकर हिड़मा की मां से बात की और वहीं उनके घर पर भोजन भी किया। उन्होंने कहा- अब हिंसा का कोई मतलब नहीं रह गया है। आपका बेटा लौट आए, यही सबसे अच्छा रास्ता है। सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के लिए दरवाजे खोल चुकी है।
डिप्टी सीएम ने बताया कि सरकार बस्तर में शांति चाहती है और इसके लिए हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि अगर हिड़मा आत्मसमर्पण करना चाहता है, तो सरकार उसे पूरा सहयोग देगी।
कौन है हिड़मा?
हिड़मा बस्तर का सबसे कुख्यात नक्सली कमांडर है। वह पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) की बटालियन नंबर 1 का प्रभारी है और कई बड़ी नक्सली वारदातों – जैसे ताड़मेटला हमला (2010), बुरकापाल हमला (2017) और अरनपुर आईईडी ब्लास्ट (2023) – में उसका नाम जुड़ा है।केंद्र सरकार ने उस पर 40 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है, और सुरक्षा बल लंबे समय से उसे पकड़ने के लिए अभियान चला रहे हैं।
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छत्तीसगढ़
राइस मिल से 16 करोड़ का धान जब्त:कस्टम मिलिंग के लिए 58 हजार क्विंटल उठाया, 4,577 क्विंटल गायब, संचालक पर FIR, मिल भी सील
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2 minutes agoon
January 18, 2026By
Divya Akashबिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल की ओर से धान उठाव में गड़बड़ी पाई गई। इस मामले में शनिवार को SDM मनीष साहू की टीम ने राइस मिल सील कर दिया है। इसके अलावा टीम ने मौके से 54 हजार क्विंटल धान जब्त किया है, जिसकी कीमत 16 करोड़ रुपए आंकी है।
मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, राइस मिल की ओर से कस्टम मिलिंग के लिए 58,600 क्विंटल धान उठाव किया था। जांच में 54,082.8 क्विंटल धान पाया गया। जबकि 4,577.2 क्विंटल धान गायब मिला। वहीं संचालक पर FIR दर्ज की गई है। खाद्य नियंत्रक के अनुसार जिले में अब तक 56 करोड़ से ज्यादा का धान जब्त किया गया है।
इससे पहले 16 जनवरी को प्रशासन ने 2 राइस मिल से 2890 क्विंटल और 3152 क्विंटल धान गायब पाया गया था, जिसकी कीमत 89 लाख 62 हजार रुपए आंकी गई थी। वहीं, दोनों मिलों से कुल 46,257 क्विंटल धान जब्त किया था, जिसकी कीमत 14 करोड़ 33 लाख रुपए आंकी गई थी।

अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल की ओर से 58,600 क्विंटल धान उठाव किया था।

जांच में 54,082.8 क्विंटल धान पाया गया, जबकि 4,577.2 क्विंटल धान गायब मिला।

SDM की जांच में टीम ने राइस मिल सील करते ही 54 क्विंटल धान भी जब्त कर लिया।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, धान उठाव में अनियमितताओं को देखते हुए प्रशासन एक्शन मोड पर है। लगातार टीम राइस मिलों में दबिश देकर रिकॉर्ड की जांच में रही है। ऐसे में SDM मनीष साहू की टीम ने 16 जनवरी को संजीत मित्तल के सिरगिट्टी स्थित अमरनाथ एग्रो प्रोडक्ट राइस मिल पर दबिश दी।
SDM मनीष साहू, तहसीलदार प्रकाश साहू, खाद्य निरीक्षक मंगेश कांत और ललिता शर्मा ने 16 और 17 जनवरी को 2 दिनों तक राइस मिल की गहन जांच की। इस दौरान मिल परिसर से 4,577 क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसके बाद अधिकारियों ने तत्काल मिल को सील करने की कार्रवाई की।

जांच के दौरान रिकॉर्ड में 11,443 बोरी धान कम पाया गया।
16.76 करोड़ रुपए का धान जब्त
जांच में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत उठाए गए धान का भौतिक सत्यापन किया गया। रिकॉर्ड के अनुसार, राइस मिल की ओर से कुल 1,46,650 बोरा (58,600 क्विंटल) धान का उठाव किया गया था, लेकिन मौके पर केवल 1,35,207 बोरा (54,082.8 क्विंटल) धान ही उपलब्ध मिला।
संचालक संजीत मित्तल के खिलाफ केस दर्ज
इस तरह 11,443 बोरा यानी 4,577.2 क्विंटल धान कम पाया गया। उपलब्ध 54,082.8 क्विंटल धान, जिसकी कीमत 16.76 करोड़ रुपए आंकी गई है, उसे जब्त कर लिया गया। प्रशासन ने इस मामले को छत्तीसगढ़ चावल उपार्जन आदेश 2016 का उल्लंघन मानते हुए संचालक के खिलाफ केस दर्ज किया है। धान की हेराफेरी की आशंका को देखते हुए मिल को सील कर दिया गया है।

टीम ने 2 दिनों तक राइस मिल की गहन जांच करने के बाद सीलबंद की कार्रवाई की।
किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने सख्त कार्रवाई
फूड कंट्रोलर अमृत कुजूर ने बताया कि समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान के परिवहन और भंडारण में अनियमितता बरतने वाली अन्य राइस मिलों में भी इसी तरह जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसानों को उनके धान का समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने, कोचिया और अन्य बिचौलियों की ओर से मंडियों में अवैध धान खपाने से रोकने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर पर पलटी स्कूल बस…5 की मौत:इनमें 4 महिलाएं और एक पुरुष
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6 minutes agoon
January 18, 2026By
Divya Akash82 लोग घायल, ब्रेक फेल था, सड़क पर बिखरी रहीं लाशें
बलरामपुर/लातेहार,एजेंसी। छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर पर तेज रफ्तार स्कूल बस बेकाबू होकर पलट गई। हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 82 लोग घायल हो गए हैं। इनमें 30 से ज्यादा की हालत गंभीर है। बताया जा जा रहा है कि बस का ब्रेक फेल हो गया था। मामला महुआडांड थाना क्षेत्र का है।
जानकारी के मुताबिक लातेहार जिले में हादसे में 4 महिलाएं और एक पुरुष की जान गई है। इनकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। मरने वाले सभी छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रहने वाले थे। स्थानीय और राहगीरों की मदद से घायलों को एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया है। बस में 87 लोग सवार थे।
हादसे से जुड़ी तस्वीरें ….

तेज रफ्तार स्कूल बस बेकाबू होकर पलट गई गई। सड़क किनारे घायल पड़े हैं।

हादसे के बाद सड़क किनारे घायलों पड़े नजर आ रहे हैं। लोग मदद की गुहार लगा रहे थे।

घायलों को ग्रामीणों की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा है।
हादसा कैसे और कहां हुआ ?
दरअसल, छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के 87 लोग ज्ञान गंगा स्कूल की बस में सवार होकर झारखंड के महुआडांड़ थाना क्षेत्र के लोध गांव सगाई कार्यक्रम में जा रहे थे। ओरसा बंगलादारा घाटी में उतरते समय बस का ब्रेक अचानक फेल हो गया।
इस दौरान तेज रफ्तार बस पीडब्ल्यूडी के रोड सेफ्टी गार्ड को तोड़ते हुए पेड़ से टकराकर करीब 20 फीट खाई में जाकर पलट गई। हादसे में 5 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई।

घायलों को एंबुलेंस की मदद से स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया।
बस का ब्रेक हो गया था फेल, नहीं हुई कंट्रोल
वहीं बस ड्राइवर विकास पाठक ने बताया कि हादसे से कुछ समय पहले ही ब्रेक नहीं लगने का अहसास हुआ। स्थिति को संभालने के लिए हैंड ब्रेक का उपयोग किया। इसके बाद इंजन भी बंद कर दिया, लेकिन ढलान होने के कारण बस पर बेकाबू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसा इतना गंभीर था कि कई यात्री बस के भीतर ही दब गए, जबकि कुछ यात्री उछलकर सड़क किनारे जा गिरे। हादसे के बाद स्थानीय पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी गई। महुआडांड़ पुलिस मौके पर पहुंची।

भीषण बस हादसे के बाद लोगों की चीख-पुकार मच गई। कई जगह चोटें आई हैं। लोगों को अस्पताल लाया जा रहा।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कार्मेल अस्पताल में घायल भर्ती
महुआडांड़ थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से लोगों को बस से बाहर निकाला गया। घायलों को एंबुलेंस के जरिए महुआडांड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कार्मेल अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। कई घायलों की हालत गंभीर है।
वहीं बलरामपुर के सामरी के थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह भी मौके पर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि एम्बुलेंस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। बस में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया है। घायलों को महुआडांड स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।

घायलों को स्थानीय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
घायलों को रांची रेफर किया जा रहा
सामरी के थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह के मुताबिक कुछ घायलों की हालत नाजुक है, जिन्हें रांची रेफर किया जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अमित के नेतृत्व में स्वास्थ्य कर्मी पूरी तरह अलर्ट पर हैं।
पुलिस के मुताबिक घायलों में 60 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में और 22 को कार्मेल हॉस्पिटल में दाखिल किया गया है। वहीं हॉस्पिटल पहुंचने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं हॉस्पिटल पहुंचने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

भीषण सड़क हादसे में मौत के बाद ग्रामीणों के शवों को मॉर्च्युरी में रखा गया है।
कोरबा
भू-विस्थापितों को राहत, हर परिवार को 6.78 लाख मुआवजा
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12 minutes agoon
January 18, 2026By
Divya Akashकोरबा। एसईसीएल मानिकपुर खदान से प्रभावित भिलाईखुर्द के भ-ूविस्थापितों को बड़ी राहत मिली है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल पर 300 प्रभावितों को मुआवजा देने का रास्ता साफ हो गया है। हर परिवार को 6.78 लाख मुआवजा देने एसईसीएल प्रबंधन ने सहमति दी है।
एसईसीएल विश्राम गृह कोरबा में शुक्रवार को नगर विधायक व उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता मेंभिलाईखुर्द के भूविस्थापितों, एसईसीएल के अधिकारियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। जिसमें देवांगन ने एसईसीएल के अधिकारियों को दो टूक कहा कि 50 वर्ष पूर्व खदान के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था।
तब ज़मीन का मुआवजा दिया जा चुका था, लेकिन इतने वर्षों बाद आज ज़मीन खाली करवाई जा रही है। भू-विस्थापितों को मकानों और शिफ्टिंग का उचित मुआवजा दिए किसी भी तरह से जमीन खाली करवाना गलत है। उद्योग मंत्री ने बैठक में भू विस्थापितों की मांग को मजबूती से रखते हुए कहा की इतने वर्षों में एक-एक जमीन धारक के एक से अधिक परिवार हो चुके हैं, आज की स्थिति में सिर्फ एक ज़मीन धारक के बजाए एक-एक परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।
देवांगन ने कहा की देश की ऊर्जा के लिए कोयला अतिमहत्वपूर्ण हैं, लेकिन भू- विस्थापितों को साथ में लेकर खदानों का विस्तार करना होगा। एसईसीएल के अधिकारियों ने बैठक में ही सभी परिवारों का मुआवजा देने की मंजूरी दी। भू-विस्थापित के प्रति परिवार को 6.78 लाख देने की घोषणा की गई। पिछले 8 वर्ष से बिना मुआवजा दिए प्रबंधन बस्ती खाली कराने पर आमदा था। मंत्री के दबाव के बाद एसईसीएल बैकफुट पर आए। इस निर्णय का ग्राम भिलाईखुर्द के सभी भू विस्थापितों ने स्वागत करते हुए अपनी सहमति देते हुए मंत्री देवांगन का आभार जताया।
एसईसीएल मानिकपुर खदान से 52 लाख 50 हजार टन कोयला उत्पादन किया गया था। कोरबा एरिया का यह सबसे बड़ा ओपन माइंस है। लगातार 11 साल से लक्ष्य हासिल कर रहा है। इस साल कोरबा एरिया में 83 लाख 60 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

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