छत्तीसगढ़
ढेबर बोले-PM भी शहर की समस्या दूर नहीं कर सकते:BJP पार्षदों ने घेरा रायपुर निगम; साव बोले-मेयर को पद पर रहने का अधिकार नहीं
रायपुर, एजेंसी। रायपुर मेयर एजाज ढेबर ने भाजपा पार्षद दल के हंगामे और इस्तीफे की मांग पर कहा- ये मुझसे 5 साल से इस्तीफा मांग रहे हैं, सबसे बड़ी बात यह कि मैंने जो बयान दिया उसको गलत तरीके से पेश किया गया। मैं उस बयान पर कायम हूं की सफाई की समस्या, पानी की समस्या लगातार रहेगी। बीजेपी इसपर राजनीति कर रही है।एजाज ढेबर ने कहा था कि शहर की समस्याओं का निदान PM नरेंद्र मोदी भी नहीं कर सकते। इस बयान के बाद वे भाजपा के निशाने पर हैं। डिप्टी CM अरुण साव ने कहा कि ढेबर अगर मेयर की जिम्मेदारी नहीं संभाल सकते तो उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। वहीं भाजपा पार्षद मेयर के बयान के बाद निगम का घेराव करने पहुंचे। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर भी मेयर ढेबर को ट्रोल किया जा रहा है। लिखा है कि, महापौर जी अपनी कुर्सी किसी भाजपा पार्षद को दे दीजिए। अमित चिमनानी ने लिखा- ये बयान रायपुर की जनता के साथ हुए धोखे का प्रमाण है।
छत्तीसगढ़
फूलो देवी नेताम का कोंडागांव में भव्य स्वागत:दोबारा राज्यसभा सांसद बनने के बाद पहली बार नगर पहुंचीं, कार्यकर्ताओं ने लड्डू से तौलकर खुशी जाहिर की
कोंडागांव,एजेंसी। बस्तर की आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर राज्यसभा सांसद बनाया है। दोबारा सांसद बनने के बाद वो कोंडागांव पहुंचीं। उनके नगर आगमन पर फरसगांव में कोंडागांव जिला कांग्रेस कमेटी और फरसगांव ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने भव्य स्वागत किया।

केसकाल फरसगांव पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़े, मांदरी नाचा और पटाखों के साथ उनका स्वागत किया। उन्हें रेस्ट हाउस ले जाया गया, जहां फूलमालाओं और गुलदस्तों से उनका अभिनंदन किया गया। कार्यकर्ताओं ने लड्डू से तौलकर अपनी खुशी व्यक्त की।
फूलो देवी नेताम ने कहा कि वह बस्तर की बेटी और बहू हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि वह जनपद सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक और राज्यसभा सांसद बनीं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर राज्यसभा सांसद बनने का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया।
सांसद ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, सचिन पायलट, दीपक बैज, भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव सहित सभी वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने क्षेत्र की जनता, सभी कांग्रेसजनों और महिला कांग्रेस के प्रत्येक पदाधिकारी-सदस्य को भी धन्यवाद दिया।
नेताम ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पार्टी है। एक साधारण आदिवासी परिवार की बेटी होने के बावजूद, कांग्रेस पार्टी के कारण ही वह राजनीति में इतने बड़े मुकाम तक पहुंच पाई हैं।


छत्तीसगढ़
कांग्रेस ने 7000 रुपए बोरा तेंदूपत्ता खरीदने की मांग:विधायक विक्रम मंडावी ने कहा- नीति नहीं बदली तो ठप होगा संग्रहण, भुगतान व्यवस्था बड़ी समस्या
बीजापुर,एजेंसी। बीजापुर से कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने 5500 से बढ़ाकर 7000 पर करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि, अगर तेंदूपत्ता नीति में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में संग्रहण पूरी तरह ठप हो सकता है। एक तरफ ‘नक्सल मुक्त बस्तर’ का दावा कर रही है, दूसरी तरफ आदिवासी संग्राहकों की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

मंडावी ने कहा कि, तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत भुगतान की वर्तमान व्यवस्था है। बैंक खातों के माध्यम से भुगतान करने की नीति जमीनी स्तर पर कारगर साबित नहीं हो रही है। बीजापुर जिले के कई दूरस्थ और अंदरूनी इलाकों में आज भी बैंकिंग सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या बेहद सीमित हैं।
ऐसे में संग्राहकों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनका रुझान इस काम से लगातार घट रहा है। उन्होंने मांग की कि पहले की तरह कैश भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि संग्राहकों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल सके और उनका भरोसा बना रहे।

फाइल फोटो
दर बढ़ाने की मांग, रू.5500 से रू.7000 प्रति बोरा
विधायक ने तेंदूपत्ता की मौजूदा दर को भी अपर्याप्त बताया। वर्तमान में रू.5500 प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी हो रही है, जबकि उन्होंने इसे बढ़ाकर ₹7000 प्रति बोरा करने की मांग की है। मंडावी का कहना है कि महंगाई और बढ़ती लागत को देखते हुए मौजूदा दर संग्राहकों के हित में नहीं है।
उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण भी लोग इस कार्य से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि पिछले दो वर्षों में तेंदूपत्ता संग्रहण में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो न सिर्फ संग्राहकों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि राज्य के राजस्व और वन आधारित अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
क्या है छत्तीसगढ़ की वर्तमान तेंदूपत्ता नीति
खरीदी व्यवस्था: छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से सहकारी मॉडल पर वन विभाग द्वारा खरीदी की जाती है।
संग्रहण दर में वृद्धि: सरकार ने प्रति मानक बोरा रू.1500 की बढ़ोतरी करते हुए दर को रू.5500 किया है।
चरणपादुका योजना: वन विभाग द्वारा महिला संग्राहकों को जूते (चरणपादुका) दिए जा रहे हैं।
बीमा और सामाजिक सुरक्षा: ‘राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’ के तहत 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। फड़ मुंशी को भी बीमा दायरे में शामिल किया गया है।
शिक्षा प्रोत्साहन: संग्राहक परिवारों के मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए रू.15,000 से रू.25,000 तक की छात्रवृत्ति दी जा रही है।
उत्पादन में योगदान: देश के कुल तेंदूपत्ता उत्पादन में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी लगभग 20% है।

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में 1 मई से जनगणना का पहला चरण:परिवार-मकान, वाहन समेत 33 सवाल पूछे जाएंगे, 7 स्टेप्स में ऑनलाइन भर सकेंगे जानकारी
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर परिवार, मकान और बुनियादी सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। कर्मचारी तय समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे।

इस बार प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल पर खुद भी अपने घर और परिवार की जानकारी भर सकेंगे। इसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है। ऑनलाइन जानकारी भरने वालों को एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसे बाद में कर्मचारियों को दिखाना होगा।
जनगणना के इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग (रहवासी या व्यवसायिक), निर्माण की गुणवत्ता (कच्चा-पक्का), परिवारों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, बिजली, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट, टीवी-रेडियो जैसी सुविधाओं की भी जानकारी ली जाएगी।
घर में कितने लोग रहते हैं और कौन-कौन से वाहन उपयोग होते हैं, यह भी दर्ज किया जाएगा।
हर घर बनेगा ‘डिजिटल डॉट’, 5 बड़े फायदे
इस बार हर मकान की जियो-टैगिंग कर उसे डिजिटल मैप पर दर्ज किया जाएगा। इसका फायदा कई स्तर पर मिलेगा। आपदा के समय राहत और बचाव तेजी से होगा, किस घर में कितने लोग हैं, तुरंत पता चलेगा।विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन में सटीक डेटा मिलेगा।
शहरों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और पार्क की बेहतर प्लानिंग हो सकेगी। पलायन और शहरीकरण की सही तस्वीर सामने आएगी। मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम हटाने में मदद मिलेगी।
जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी गोपनीय रखी जाएगी। इसका इस्तेमाल सिर्फ योजनाएं बनाने और नीतिगत फैसलों के लिए किया जाएगा।
निगरानी के लिए कंट्रोल रूम, घर-घर पहुंचेगी टीम
जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग करेंगे और शिकायत के लिए हेल्पलाइन भी उपलब्ध रहेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अधिकृत पहचान पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी दें और सही जानकारी साझा करें।

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