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कोरबा

07 मई को ग्राम पंचायतों में मनाया जाएगा रोजगार दिवस

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चावल महोत्सव और आवास दिवस के साथ होंगी विविध गतिविधियां

जल संरक्षण एवं जल संवर्धन गतिविधियों पर दिया जा रहा है जोर

कोरबा। जिले में 07 मई को समस्त ग्राम पंचायतों में ग्राम रोजगार दिवस का आयोजन किया जाएगा। राज्य शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक माह की 7 तारीख को चावल महोत्सव के साथ रोजगार दिवस एवं आवास दिवस आयोजित किए जाने का निर्णय लिया गया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सभी ग्राम पंचायतों में इन आयोजनों को व्यापक जनभागीदारी के साथ प्रभावी रूप से संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं।

इस आयोजन के तहत विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य ग्रामीण विकास को गति देना तथा आमजन को योजनाओं से सीधे जोड़ना है।

सुशासन तिहार के तहत शत-प्रतिशत निराकरण पर जोर
राज्य शासन द्वारा संचालित सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर ही मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित लंबित प्रकरणों के शत-प्रतिशत निराकरण के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकतानुसार इन प्रकरणों का समाधान विकासखंड एवं जिला स्तर पर सुनिश्चित किया जाएगा।

आवास निर्माण की समयबद्ध पूर्णता पर फोकस
रोजगार सह आवास दिवस के दौरान स्वीकृत सभी आवासों को अधिकतम 90 दिनों में पूर्ण कराने हेतु कार्ययोजना तैयार की जाएगी। हितग्राहियों को उनके खाते में हस्तांतरित राशि की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को निर्माण सामग्री आपूर्ति एवं अन्य आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

जल संरक्षण एवं रोजगार सृजन गतिविधियों को बढ़ावा
ग्राम पंचायतों में ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ अभियान के अंतर्गत नए तालाब निर्माण की कार्ययोजना बनाई जाएगी। मनरेगा के अंतर्गत प्रचलित कार्यों को मई माह में पूर्ण करने तथा मांग आधारित नए कार्य प्रारंभ करने पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही ‘आजीविका डबरी’ के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।

महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहन
रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने, लंबित जियो टैगिंग कार्यों को पूर्ण करने एवं सूचना पटल पर परिवार की महिला सदस्य का नाम अंकित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहन मिले।

क्यूआर कोड से मिलेगी योजनाओं की जानकारी
07 मई को सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा एवं प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित जानकारी क्यूआर कोड के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी सरलता से प्राप्त हो सके और पारदर्शिता को बढ़ावा मिले।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग ने जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं कार्यक्रम अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस आयोजन को जनहितकारी एवं परिणाममुखी बनाते हुए ग्रामीणों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करें।

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कोरबा

एमजेएफ लायन आशीष अग्रवाल-पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित एक व्यक्तित्व

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द्वितीय वाईस डिस्ट्रिक्ट गवर्नर प्रत्याशी लायन आशीष अग्रवाल GLT Coordinator (ALLI, RLLI, DLLI, CLLI – Certified) से साक्षात्कार
09 एवं 10 मई को डिस्ट्रिक्ट कान्फ्रेंस

बिलासपुर/कोरबा। जीवन उसी का सार्थक है, जो पीड़ित मानवता के प्रति अपनी संवेदनाएं उड़ेल दे। जीवन में कई चुनौतियां और उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन सम रहकर लोगों के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा नहीं छोड़ते… एक ऐसे व्यक्तित्व का नाम है लायन आशीष अग्रवाल। लायंस क्लब बिलासपुर सेवा के बैनर तले लायन आशीष अग्रवाल की संवेदनाएं बिलासपुर क्षेत्र सहित द इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ लायंस क्लब्स डिस्ट्रिक्ट 3233सी ने देखी है, कि किस तरह लायन आशीष अग्रवाल ने टीम भावना के साथ लायनवाद को जिया है और रचनात्मक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़े सेवा कार्यों को धरती पर उतारा है।
लायन आशीष अग्रवाल कहा करते हैं कि प्रकृति ने हमें मानव बनाकर सबसे बड़ा उपहार दिया है और हम प्रकृति के ऐसे ऋणि हैं, जिसके परोपकार को हम आजीवन न भूल सकते हैं और न ही उऋण हो सकते हैं, इसलिए हम अपनी क्षमता को परिवार के साथ पीड़ित मानवता के लिए समर्पित करने का प्रयास हमेशा करते रहना चाहिए, ताकि सबकुछ समाज का दिया हुआ हम कुछ वापस समाज को लौटा सकें।
हम इस डिस्ट्रिक्ट कांफ्रेंस में पधारे समस्त लायन दिग्गजों, अतिथियों, समस्त पक्ष एवं विपक्ष में खड़े लायन साथियों, लायन दिग्गजों का लायनोचित अभिवादन करते हुए सभी का नमन भी करते हैं। हमसे जो अनुज (उम्र में) हैं, वे भी हमारे मार्गदर्शक हैं और उनके व्यवहार तथा सामाजिक चरित्र से हमें कुछ न कुछ सीखने को मिलता है और लायनिज्म को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है और पीड़ित मानवता की सेवा के लिए प्रेरणा।
लायनवाद एक प्रेरणा:लायन आशीष अग्रवाल एक सेवक
लायन आशीष अग्रवाल का कहना है कि लायनवाद सामाजिक सरोकार का एक विशाल वटवृक्ष है और हम वटवृक्ष का एक छोटी सी टहनी। द इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ लायंस क्लब्स एक वृहद और संभवत: दुनिया की सबसे बड़ी निजी सामाजिक सेवा संस्थान है और हम इसकी छोटी सी इकाई। इस संस्थान से जुड़ने का जो गौरव हम महसूस करते हैं, उसकी परिणीति एक सफल सामाजिक व्यक्तित्व बनने में है और हम व्यक्ति से व्यक्तित्व बनने के प्रयास में लगे रहते हैं। जो व्यक्तित्व बन जाए, उसी का जीवन सार्थक कहा जा सकता है। मैं व्यक्ति के रूप में सभी के सामने उपस्थित हुआ हूं और आपके आशीर्वाद से ही कहीं व्यक्तित्व बन सका, तो सभी का हृदय से आभारी रहूंगा और विश्वास दिलाता हूं कि टीम भावना को सर्वोपरी रखूंगा, पक्ष-विपक्ष का भेद नहीं रहेगा, रहेगा सिर्फ लायनवाद, मानवतावाद। न राग रहेगा, न द्वेष… सिर्फ रहेगा लायनवाद और मेरे प्रेरणा रहेंगे, सभी लायनवाद के दिग्गज, लायन साथी और मानवता के पुजारी। मेरे लिए लायनवाद मेरी प्रेरणा है और मैं लायनवाद का सेवक।
सेवा कार्य, जो मेरे लायनवाद को पुष्ट बनाते हैं कि मैं एक लायन हूं

लायन आशीष अग्रवाल अपने आपको एक व्यक्ति बताते हैं, लेकिन उनके सेवा कार्यों ने उन्हें एक व्यक्तित्व बना दिया। लायंस क्लब आफ बिलासपुर सेवा के बैनरतले लायन आशीष अग्रवाल ने लायनवाद के सिद्धांतों को आत्मसात किया और लायनवाद के विस्तार को नई ऊंचाईयां दी। लायन आशीष अग्रवाल ने लायंस क्लब में पहले लीडरशीप के गुर सीखे और अब लीडरशीप डेव्हलपमेंट के लिए नए लायन सदस्यों को लीडरशीप डेव्हलपमेंट के गुर सीखा रहे हैं।

उन्होंने हमेशा सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों में अपनी सहभागिता निभाई और समाज के अंतिम व्यक्ति तक लायनवाद को पहुंचाने अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी, ताकि क्षमता से अधिक लायनवाद का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

उनके सेवा कार्यों को कोरोनाकाल में बिलासपुर ने देखा है, कि किस तरह उन्होंने संकटग्रस्त लोगों का अन्न, किट, मास्क एवं अन्य जरूरत की सामाग्री पहुंचाई, ताकि कुछ लोगों को ही सही, राहत तो मिले।
बिलासपुर रेल्वे स्टेशन में वाटरकूलर की स्थापना हो, या अंधत्व विद्यालय में बच्चों के लिए कुछ उपहार भेंट करने की बात हो। ठंड में गरीबों को कंबल बांट कर ठंड से राहत दिलाने की बात हो या फिर स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से स्वस्थ बिलासपुर… स्वस्थ छत्तीसगढ़ की परिकल्पना में सहभागिता निभाने की। सामाजिक दायित्वों को निभाने में आशीष अग्रवाल कभी पीछे नहीं रहे और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी को टीम भावना के साथ बखूबी निभाई। उनके लिए लायनिज्म ही सर्वोपरी है और लायनिज्म से ही उनकी दिनचर्या प्रारंभ होती है। उनका कहना है कि छोटे शुभ काम से ही लायनिज्म को नई ऊंचाईयां दी जा सकती हैं।

एक नजर पारिवारिक पृष्टभूमि पर
एमजेएफ लायन आशीष अग्रवाल बिलासपुर/बाराद्वार के प्रतिष्ठित एवं कुलीन जिंदल परिवार में जन्म लिए और अब वे इस परिवार के उत्तराधिकारी हैं। पिता संतोष अग्रवाल भी हमेशा से सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और उनकी ख्याति बिलासपुर/बाराद्वार क्षेत्र में है। माँ श्रीमती सावित्रीदेवी अग्रवाल धर्मपरायण एवं संस्कारों की प्रतिमूर्ति हैं और मानवीय संवेदनाओं के प्रतीक। पिता की डांट के साथ उनका साया हमेशा अच्छा करने की प्रेरणा देते रहे और माँ के संस्कारों ने नैतिकता का मार्ग दिखाया। लायन आशीष अग्रवाल के लिए माता-पिता आदर्श हैं, जिनकी प्रेरणा से ही मुझे लायनवादी बनने का अवसर प्राप्त हुआ।
जीवन संगिनी लायन श्रीमती दुर्गा अग्रवाल भी एक सक्रिय लायन साथी के रूप में उनके हर सेवा कार्यों में अपना हाथ बढ़ाती हैं, जिससे समाज को चार हाथों का लाभ मिल सके। राष्ट्र निर्माण एवं समाज निर्माण की सीख देते लायन आशीष अग्रवाल-लायन दुर्गा अग्रवाल अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रहे हैं। लायन आशीष अग्रवाल का कहना है कि आज शिक्षा ही एक ऐसा हथियार है, जिससे व्यक्ति का जीवन सरल, सुलभ और वैभवशाली बन सकता है।
आशीष अग्रवाल:उच्चशिक्षित होने के साथ संगठन के कुशल प्रबंधक एवं सक्षम नेतृत्व
एमजेएफ लायन आशीष अग्रवाल प्रारंभ से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और प्राथमिक, माध्यमिक, हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल में प्रतिभावान विद्यार्थी के रूप में पहचाने जाते रहे। अपनी शिक्षा के दौरान मेरिट लिस्ट होल्डर होने के कारण विद्यार्थी जीवन में भी एमजेएफ लायन आशीष अग्रवाल की ख्याति पूरे छत्तीसगढ़ में फैली रही और अपने निरंतर प्रयासों से उन्होंने अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया। उच्चशिक्षा के तहत उन्होंने एमबीए और एम काम तक पढ़ाई की। उच्च शिक्षित व्यक्ति का यही प्रमाण है कि आशीष अग्रवाल भी विनम्र और विनयशील हैं।
आशीष अग्रवाल की विनम्रता के पीछे एक कुशल प्रबंधन क्षमता और नेतृत्व कौशल की छाप स्पष्ट झलकती है।
एक नजर व्यवसाय पर
लायन आशीष अग्रवाल कहा करते हैं कि पुरूषार्थ से कमाया धन हमेशा फलित होता है और आय का कुछ अंश समाज को समर्पित करने से धन का सदुपयोग। लायन आशीष अग्रवाल पारिवारिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए विरासत में मिले व्यवसाय के साथ खुद का स्टार्टअप प्रारंभ किया और वे मेसर्स बालाजी इंटरप्राईजेज, मेसर्स जिंदल कंस्ट्रक्शन, मेसर्स दुर्गा पॉलिमर, मेसर्स आशीष अग्रवाल एवं मेसर्स बालाजी ब्रोकर्स जैसी संस्थानों का संचालन करते हैं। परिवार सुदृढ़ और सक्षम होगा, तो समाज को भी लाभ होगा, इस लक्ष्य को लेकर लायन आशीष अग्रवाल सामाजिक सरोकार को अमलीजामा पहनाने में लगे हुए हैं।
एक नजर विशिष्ट सम्मान एवं उपलब्धियों पर

🥇 लायंस इंटरनेशनल प्रेसिडेंट लीडरशिप मेडल से दो बार सम्मानित

⭐ 2 स्टार सर्टिफाइड गाइडिंग लायन मेडल

🏆 रीजन चेयरपर्सन एक्सीलेंस अवॉर्ड

🦁 10 नए लायंस क्लब स्थापित – क्लब एक्सटेंशन अवॉर्ड से सम्मानित

🤝 4 नए लायंस क्लब के गाइडिंग लायन

👥 64 नए लायन सदस्य स्पॉन्सर

🤝 लायंस गौरव सम्मान

साथ ही लायंस अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, मल्टीपल काउंसिल चेयरपर्सन एवं डिस्ट्रिक्ट गवर्नर द्वारा अनेकों बार प्रमाण पत्र एवं एप्रिसिएशन अवॉर्ड से सम्मानित।

लीडरशिप एवं ट्रेनिंग में सक्रिय भूमिका

रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, राजनंदगांव, कटनी, रीवा, सतना सहित डिस्ट्रिक्ट के 70+ लायंस क्लबों में फैकल्टी के रूप में
🔹 लायंस पोर्टल प्रशिक्षण
🔹 लीडरशिप डेवलपमेंट
🔹 डिजिटल एवं आईटी सशक्तिकरण

लायंस संगठन में दायित्व

2025-26 – ग्लोबल लीडरशिप टीम कोऑर्डिनेटर

2024-25 – क्लब डायरेक्टर

2023-24 – डिस्ट्रिक्ट कैबिनेट सेक्रेटरी

2022-23 – क्लब डायरेक्टर

2021-22 – डिस्ट्रिक्ट आई.टी. चेयरपर्सन

2020-21 – रीजन चेयरपर्सन

2019-20 – डिस्ट्रिक्ट आई.टी. चेयरपर्सन

2018-19 – जोन चेयरपर्सन

2017-18 – अध्यक्ष, लायंस क्लब बिलासपुर सेवा

2016-17 – सचिव, लायंस क्लब बिलासपुर सेवा

सामाजिक एवं व्यावसायिक सहभागिता

पूर्व उपाध्यक्ष – अग्रवाल नवयुवक समिति

पूर्व सचिव – अग्रवाल नवयुवक समिति

पूर्व सहसचिव – अग्रसेन शिक्षा समिति

सक्रिय सदस्य – मारवाड़ी युवा मंच

सदस्य – छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज

संबद्धता – रूफ इंडिया एसोसिएशन


व्यवसाय

M/s बालाजी एंटरप्राइजेज

M/s जिंदल कंस्ट्रक्शन

M/s दुर्गा पॉलिमर

M/s आशीष अग्रवाल

M/s बालाजी ब्रोकर्स

संपर्क सूत्र

MJF लायन आशीष अग्रवाल
16/269, प्रदीप कोचिंग स्ट्रीट
दीपुपारा रोड, विद्या नगर
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ – 495001

📞 9827473074
📧 ashishagrawal11@gmail.com


🔷 हमारा संकल्प

✨ मजबूत नेतृत्व
✨ सक्रिय सदस्यता विस्तार
✨ तकनीकी सशक्तिकरण
✨ प्रशिक्षण आधारित विकास
✨ संगठित, समन्वित एवं उत्कृष्ट डिस्ट्रिक्ट निर्माण

आइए, एक सक्षम, ऊर्जावान और परिणामदायी नेतृत्व के साथ
डिस्ट्रिक्ट 3233-C को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।

🦁 आपका समर्थन – संगठन की शक्ति 🦁

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कोरबा

सुशासन तिहार के तहत जिला पंचायत में स्थापित किया गया कॉल सेंटर

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टोल फ्री नंबर 1800-233-2291 से मिलेगी आमजन को जानकारी

कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशानुसार जिले में आयोजित सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आमजन एवं ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु जिला पंचायत कार्यालय में कॉल सेंटर की स्थापना की गई है। इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को शासन की योजनाओं की जानकारी सरलता से उपलब्ध कराना एवं उनकी शिकायतों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करना है।

जिला पंचायत में स्थापित इस कॉल सेंटर के माध्यम से आमजन टोल फ्री नंबर 1800-233-2291 पर संपर्क कर शासकीय योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं तथा अपनी समस्याओं एवं शिकायतों को दर्ज करा सकते हैं। यह सुविधा पूर्णतः निःशुल्क है।

कॉल सेंटर कार्यालयीन दिवसों में प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:30 बजे तक संचालित रहेगा, जिससे अधिक से अधिक नागरिकों को इसका लाभ मिल सके।

सीईओ जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग का कहना है कि प्रशासन द्वारा यह पहल सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे आमजन और शासन के बीच संवाद को सशक्त बनाया जा सकेगा तथा शिकायतों के त्वरित निराकरण में मदद मिलेगी।

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कोरबा

‘‘ज्ञानभारतम्‘‘राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान- कोरबा में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का सशक्त अभियान

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श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में प्राप्त हुई 14 दुर्लभ पांडुलिपियां

डिजिटल संरक्षण से सुरक्षित हुई अमूल्य धरोहर रूपी प्राचीन पांडुलिपियां

कोरबा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के अंतर्गत कोरबा जिले में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण हेतु व्यापक, सुनियोजित एवं प्रभावी कार्यवाही निरंतर जारी है। इस अभियान का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में बिखरी प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण तथा भावी पीढ़ियों के लिए उनके सुरक्षित संवहन को सुनिश्चित करना है।
जिले के कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा इस महत्वाकांक्षी अभियान को गंभीरता एवं प्रतिबद्धता के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न प्राचीन, ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों में सर्वेक्षण कर उन पांडुलिपियों का संकलन एवं संरक्षण किया जा रहा है, जो अब तक निजी संरक्षण में सुरक्षित थीं और सार्वजनिक रूप से प्रकाश में नहीं आ सकी थीं।
इसी कड़ी में आज कोरबा नगर के समीप स्थित अत्यंत प्राचीन एवं आस्था के प्रमुख केंद्र श्रीराम गुफा मंदिर सीतामढ़ी में जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह की अगवाई में ‘‘ज्ञानभारतम दूत‘‘ युवा टीम कोरबा द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी प्राचीन गुफाओं एवं सांस्कृतिक परंपराओं के कारण ऐतिहासिक महत्ता भी रखता है। वर्षों से साधना, श्रद्धा एवं सांस्कृतिक निरंतरता का केंद्र रहा यह स्थल आज पुनः एक नई पहचान के साथ उभरकर सामने आया, जब यहां 14 अत्यंत दुर्लभ एवं प्राचीन पांडुलिपियों का प्राप्त होना सुनिश्चित हुआ।
जिला समन्वयक श्री सिंह ने बताया कि मंदिर के पुजारी दुकालू श्रीवास (पिता स्व. मातादीन श्रीवास) द्वारा इन पांडुलिपियों को अत्यंत श्रद्धा एवं सावधानी के साथ वर्षों से सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि ये पांडुलिपियां उन्हें उनके पिता से प्राप्त हुई थीं, जिन्हें उनके पूर्वजों द्वारा सहेजकर रखा गया था। इस प्रकार यह अनमोल धरोहर पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है, जो भारतीय पारिवारिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों की सजीव परंपरा को भी दर्शाती है। प्राप्त पांडुलिपियों का अध्ययन करने पर ज्ञात हुआ कि इनमें ओड़िया भाषा का प्रयोग किया गया है। इनकी लिपि की प्रमुख विशेषता इसके गोलाकार अक्षर हैं, जिन्हें मुंडिया’ कहा जाता है। विद्वानों के अनुसार प्राचीन काल में ताड़पत्रों पर लेखन के दौरान उनकी संरचना को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सीधी रेखाओं के स्थान पर गोलाकार अक्षरों का विकास किया गया, जिससे पत्तों की नसें फटने से बच सकें। इन पांडुलिपियों का कालखंड अनुमानतः 15 वीं से 19 वीं शताब्दी के मध्य का माना जा रहा है। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इन पांडुलिपियों के दोनों पक्षों (आगे एवं पीछे) पर लेखन अंकित है, जो उस काल की लेखन शैली एवं ज्ञान परंपरा की विशिष्टता को दर्शाता है।
जिला समन्वयक श्री सिंह ने इन पांडुलिपियों को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि इस प्रकार की विरासत केवल धार्मिक या ऐतिहासिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान एवं ज्ञान-संपदा का आधार भी है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘‘ज्ञानभारतम‘‘ मिशन राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान  के उद्देश्य एवं महत्ता को बताते हुए कहा कि यदि किसी के पास भी ऐसी कोई प्राचीन पांडुलिपियां, दस्तावेज या धरोहर सुरक्षित हैं, तो वे आगे आकर इस ज्ञानभारतम अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें, ताकि इन धरोहरों का संरक्षण वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित ढंग से किया जा सके। मौके पर ज्ञानभारतम दूत युवा टीम द्वारा जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सिंह की उपस्थिति में इन प्राचीन दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटल संरक्षण किया गया तथा उन्हें ज्ञानभारतम ऐप में अपलोड कर राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखित किया गया।
इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समन्वयक श्री सिंह द्वारा मंदिर के पुजारी दुकालू श्रीवास को उनके अमूल्य योगदान एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए मोमेंटो, शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस दौरान कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा के प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर, सहायक प्राध्यापक डॉ. सुशीला कुजूर, विकास पांडे सहित ‘‘ज्ञानभारतम दूत‘‘ युवा टीम के शिवराज थवाईत, मानुप्रताप श्रीवास, राज कुरी, खुशबू दिनकर, मुस्कान राजपूत, धारणा केवट, मिली चैहान, शालिनी कुर्रे सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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