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बंगाल हिंसा: कोलकाता में बड़ा एक्शन, 80 लोग गिरफ्तार, बिना इजाजत जुलूस पर बैन, पुलिस का बड़ा ऑपरेशन जारी
कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद छिटपुट हिंसा की घटनाओं की खबरों के बीच कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय कुमार नंद ने बुधवार को चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि उपद्रवियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है और अब तक कोलकाता पुलिस क्षेत्राधिकार में 80 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

नंद ने कहा कि गिरफ्तार किए गए 80 लोगों में से 65 को विशिष्ट मामलों में हिरासत में लिया गया है, जबकि 15 अन्य को एहतियाती तौर पर पकड़ा गया है। पुलिस आयुक्त ने कहा, ”जो भी व्यक्ति डर या आतंक का माहौल बनाने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
बुलडोजर को किसी भी विजय जुलूस में शामिल करने की अनुमति नहीं
नंद ने यहां पुलिस मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि किसी को भी किसी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाले कृत्यों में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ”कुछ घटनाएं हुई हैं, लेकिन स्थिति कुल मिलाकर शांतिपूर्ण है।”
उन्होंने यह भी बताया कि छापेमारी के दौरान कई हथियार भी बरामद किए गए हैं। नंद ने चेतावनी दी कि चुनाव प्रचार के दौरान केंद्र में रहे बुलडोजर को किसी भी विजय जुलूस में शामिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, ”जेसीबी (बुलडोजर) या इसी तरह के उपकरणों के साथ कोई रैली नहीं निकाली जाएगी।”
पुलिस प्रमुख ने कहा कि यदि जेसीबी मालिक अपने वाहन ऐसे उद्देश्यों के लिए किराये पर देते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि चुनाव के बाद की स्थिति में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और कोलकाता पुलिस संयुक्त रूप से काम करेंगे, जैसा कि उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान किया था। उन्होंने कहा, ”हम समाज के हर सदस्य का सहयोग और योगदान चाहते हैं।”

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बंगाल में जश्न मनाने वाले अपनी ही पार्टी के नेताओं पर बरसे राहुल, कहा- TMC की हार पर खुश न हों कांग्रेसी, छोटी राजनीति से ऊपर उठें
कोलकाता/नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी शिकस्त के बाद, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के उन नेताओं को आड़े हाथों लिया है जो इस हार पर खुशी जता रहे हैं। राहुल गांधी ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

छोटी राजनीति से ऊपर उठें
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य विपक्षी दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि टीएमसी की हार पर “बगलें बजाने” (खुश होने) की जरूरत नहीं है। उन्होंने लिखा “कांग्रेस में कुछ लोग और अन्य दल टीएमसी की हार पर जश्न मना रहे हैं। उन्हें यह साफ समझने की जरूरत है – असम और बंगाल के जनादेश की चोरी भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने के भाजपा के मिशन में एक बड़ा कदम है।” राहुल गांधी ने आगे अपील करते हुए कहा कि यह समय छोटी राजनीति करने का नहीं है, बल्कि देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होने का है।

ममता बनर्जी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का किया समर्थन
राहुल गांधी ने निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सुर में सुर मिलाते हुए निर्वाचन आयोग (EC) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव आयोग की मदद से जनादेश चुराया है। राहुल गांधी ने दावा किया कि बंगाल में भाजपा ने 100 से ज्यादा सीटों की लूट की है। उन्होंने असम के चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाते हुए इसे ‘लोकतंत्र विरोधी’ कदम बताया।
ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को बताया अनैतिक
इससे पहले ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को ‘अनैतिक’ और ‘अवैध’ करार दिया था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “बीजेपी ने 100 से ज्यादा सीटें लूटी हैं। चुनाव आयोग अब ‘बीजेपी का आयोग’ बन गया है। हमने शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह कोई नैतिक जीत नहीं है। पीएम, गृह मंत्री और केंद्रीय बलों ने मिलकर जो किया, वह पूरी तरह अवैध है। हम फिर वापसी करेंगे।”

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TVK in Tamil Nadu: कांग्रेस नेताओं ने विजय थलापति से की मुलाकात, TVK को पूर्ण समर्थन दिया
चेन्नई, एजेंसी। DMK की लंबे समय से सहयोगी रही कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को अभिनेता-राजनेता विजय की TVK को तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की घोषणा की और द्रविड़ पार्टी से संबंध तोड़ लिए। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विधायक दल (CLP) ने TVK को सरकार बनाने के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने का फैसला किया है। AICC तमिलनाडु के प्रभारी गिरीश चोडंकर ने TVK प्रमुख विजय के समर्थन मांगने के अनुरोध का हवाला देते हुए एक बयान में यह जानकारी दी। TVK प्रमुख विजय द्वारा स्वागत किए गए कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें राज्य में सरकार बनाने के लिए समर्थन पत्र सौंपा।

देश के मुख्य विपक्षी दल ने विजय को यह समर्थन इस शर्त के साथ दिया है कि टीवीके इस गठबंधन से ”सांप्रदायिक ताकतों” को दूर रखेगी। कांग्रेस के टीवीके साथ जाने के फैसले के साथ ही द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ उसके 22 साल पुराने गठबंधन का पटाक्षेप तय माना जा रहा है। हालांकि कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडानकर ने कहा कि कांग्रेस, द्रमुक के साथ संपर्क में है और एमके स्टालिन की पार्टी ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा है।
द्रमुक और कांग्रेस वर्ष 2004 से एक दूसरे की सहयोगी हैं। अतीत में भी कुछ मौकों पर दोनों का गठबंधन रहा है। टीवीके के नेता विजय ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर समर्थन का आग्रह किया था, जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडानकर ने इस पर विचार किया और फिर तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी को निर्देशित किया गया कि वह राज्य की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय ले। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में विजय को समर्थन देने के फैसले पर मुहर लगाई गई। इसी बैठक में कन्याकुमारी किल्लियूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक एस राजेश कुमार को विधायक दल का नेता भी चुना गया।
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें हासिल हुई हैं, जिनमें से दो सीटों पर खुद विजय निर्वाचित हुए हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए टीवीके को 11 और विधायकों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस के पांच विधायक निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस अब तक द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडानकर ने एक बयान में कहा, ”टीवीके के अध्यक्ष विजय ने तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस से औपचारिक रूप से समर्थन का अनुरोध किया।
तमिलनाडु की जनता, विशेषकर युवाओं ने संवैधानिक सिद्धांतों में विश्वास रखने वाली धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और कल्याणकारी सरकार के लिए स्पष्ट, सशक्त और भारी बहुमत से अपना मत व्यक्त किया है। उन्होंने विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु टीवीके को अगली सरकार बनाने के लिए चुना है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस भारत में धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और कल्याणकारी राजनीति का समर्थन करती है और इसकी संस्थापक राजनीतिक पार्टी है। चोडानकर ने कहा, “तमिलनाडु की जनता के इस जनादेश का सम्मान करना, इसे कायम रखना और इसे मंजिल तक पहुंचाने में सहायता करना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है।
ऐसे में तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) ने टीवीके को सरकार बनाने के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने का निर्णय लिया है।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस का समर्थन इस शर्त पर आधारित होगा कि टीवीके इस गठबंधन से उन सभी सांप्रदायिक ताकतों को दूर रखे जो भारत के संविधान में विश्वास नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि टीवीके और तमिलनाडु कांग्रेस के बीच यह गठबंधन आने वाले वर्षों और दशकों में पेरियार के सामाजिक न्याय के आदर्शों और डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संवैधानिक आदर्शों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ पेरुंथलाइवर कामराज के तमिलनाडु के गौरवशाली दिनों को वापस लाने का प्रयास करेगा।
कांग्रेस नेता ने कहा, ”दोनों पार्टियों के बीच आपसी सम्मान, उचित हिस्सेदारी और साझा जिम्मेदारी पर आधारित यह गठबंधन न केवल इस सरकार के गठन के लिए है, बल्कि स्थानीय निकायों, लोकसभा और राज्यसभा के भावी चुनावों के लिए भी है।” उन्होंने कहा, ”विजय और राहुल गांधी संयुक्त रूप से एक धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील सरकार के लिए तमिलनाडु के लोगों के इस ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करने और तमिलनाडु की जनता विशेषकर युवाओं के सपनों और वादों को पूरा करने का संकल्प लेते हैं।” चोडानकर ने संवाददाताओं से कहा कि विजय को समर्थन देने की एकमात्र शर्त यही है कि उनकी अगुवाई वाली सरकार में भाजपा या उसका कोई सहयोगी दल शामिल नहीं होना चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने जनादेश का सम्मान करते हुए टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, ”तमिलनाडु के लोगों ने बदलाव और विजय और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के लिए मतदान किया है। हालांकि, टीवीके पार्टी या किसी अन्य पार्टी या गठबंधन को निर्णायक जनादेश नहीं मिला। लेकिन जनादेश विजय के नेतृत्व में सरकार में बदलाव के लिए है और यह धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। इस जनादेश का सम्मान करते हुए, विजय ने कांग्रेस पार्टी से संपर्क किया, और कांग्रेस पार्टी ने भी उस गठन को अपना समर्थन दिया।” वेणुगोपाल ने मंगलवार रात संवाददाताओं से कहा था, “टीवीके अध्यक्ष विजय ने कांग्रेस से तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए समर्थन का अनुरोध किया है। उन्होंने अपने राजनीतिक मिशन में पेरुमथलाईवर कामराज से भी प्रेरणा लेने की बात कही है। कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि तमिलनाडु में जनादेश एक ऐसी धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए है, जो संविधान की अक्षरशः रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हो।” उन्होंने कहा था कि कांग्रेस इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि भाजपा और उसके प्रतिनिधि किसी भी तरह से तमिलनाडु सरकार को न चलाएं।

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एक साल बाद ऑपरेशन सिंदूर का पूरा सच: अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट ने सामने रखी युद्ध की असली तस्वीर, खोले कई राज
नई दिल्ली, एजेंसी। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए Operation Sindoor को लेकर एक साल बाद सामने आई विस्तृत अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट ने युद्ध की असली तस्वीर सामने रखी है। शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में यह धारणा बनाई गई थी कि पाकिस्तान ने भारतीय लड़ाकू विमानों को गिराकर बढ़त हासिल कर ली है। यह वही पैटर्न था जो अक्सर भारत-पाक संघर्षों में देखा जाता है—जहां पाकिस्तान तेजी से सूचना युद्ध में बढ़त लेने की कोशिश करता है, जबकि भारत अपेक्षाकृत संयमित रहता है। लेकिन स्विट्जरलैंड की संस्था Centre d’Histoire et de Prospective Militaires द्वारा 15 जनवरी 2026 को जारी रिपोर्ट ने इन शुरुआती दावों को अधूरा और भ्रामक बताया। रिपोर्ट में 7 से 10 मई तक चले 88 घंटे के इस हवाई अभियान का क्रमवार विश्लेषण किया गया है।

भारत को शुरुआती झटका
7 मई को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद पाकिस्तान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। इस शुरुआती टकराव में भारत को नुकसान हुआ। रिपोर्ट के अनुसार एक राफेल, एक मिराज-2000 और एक अन्य लड़ाकू विमान (मिग-29 या सुखोई-30) खोया गया। यही घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छा गईं और पाकिस्तान की बढ़त का नैरेटिव बना।

8-9 मई को रणनीतिक पलटवार
लेकिन इसके बाद भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए पाकिस्तान के एयर डिफेंस नेटवर्क को निशाना बनाना शुरू किया। 8 मई को भारत ने पाकिस्तान के आठ एयर डिफेंस ठिकानों पर हमला किया, जिनमें प्रमुख रडार सिस्टम शामिल थे। 9 मई को भी ऐसे चार और हमले किए गए। इन हमलों में लोइटरिंग म्यूनिशन (जैसे इजरायली हारोप और हार्पी) का इस्तेमाल किया गया, जो दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाते हैं। इन लगातार हमलों से पाकिस्तान की निगरानी, समन्वय और जवाब देने की क्षमता कमजोर हो गई। आधुनिक युद्ध में यह बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि बिना प्रभावी रडार और कमांड सिस्टम के हवाई युद्ध लड़ना मुश्किल हो जाता है।

भारत के एयर डिफेंस सिस्टम में बड़ा बदलाव
इसी दौरान भारत ने लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के विमानों की गतिविधियों को सीमित कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि करीब 300 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाली प्रणाली ने पाकिस्तान के विमानों को पीछे हटने पर मजबूर किया। इससे पाकिस्तान के लिए अपने हवाई अभियान को जारी रखना कठिन हो गया। पाकिस्तान ने जवाब में सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल दागे, लेकिन भारत के मजबूत और एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम ने उन्हें काफी हद तक विफल कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, आधे से ज्यादा ड्रोन सिर्फ एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से ही गिरा दिए गए, जबकि बाकी को इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से निष्क्रिय किया गया।
10 मई को निर्णायक हमला
10 मई की सुबह भारत ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के अंदर गहराई तक सटीक हमले किए। इन हमलों में ब्रह्मोस, स्कैल्प और अन्य लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह रही कि ये हमले भारतीय सीमा के भीतर से ही किए गए। इन हमलों में इस्लामाबाद के पास नूर खान एयरबेस, मुरीद एयरबेस (ड्रोन सेंटर), रहीम यार खान, रफीकी और सुक्कुर जैसे कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद दूसरी लहर में सरगोधा, जैकबाबाद और भोलारी एयरबेस पर भी हमले हुए। रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमान, ड्रोन सिस्टम, रडार और कमांड सेंटर क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए। सैटेलाइट तस्वीरों ने भी इन ठिकानों पर हुए नुकसान की पुष्टि की।
अंतत: क्यों झुका पाकिस्तान?
10 मई तक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी थी। पाकिस्तान की वायुसेना अपनी क्षमता खो रही थी और उसके लिए अभियान जारी रखना मुश्किल हो गया था। इसी कारण उसने युद्धविराम की मांग की। रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला किसी कूटनीतिक दबाव से ज्यादा युद्ध के हालात के कारण लिया गया। यह आपरेशन बताता है कि युद्ध की असली तस्वीर शुरुआती घटनाओं से नहीं, बल्कि पूरे अभियान के परिणाम से तय होती है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने शुरुआती नुकसान के बावजूद रणनीतिक बढ़त हासिल कर अंततः अपना उद्देश्य पूरा किया।

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