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दुनियाभर की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच दौड़ेगी इंडियन इकोनॉमी, Goldman Sachs का अनुमान
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बादल छाए हुए हैं लेकिन भारत की विकास रफ्तार को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। करीब 150 साल पुराने वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और महंगाई में कमी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि आने वाले समय में दुनिया की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.1% रहने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है। बैंक का कहना है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से बेहतर रही हैं, जिससे विकास दर के अनुमान में सुधार हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान घटाया
Goldman Sachs ने कच्चे तेल के पूर्वानुमान में भी कटौती की है। बैंक के मुताबिक, वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 92 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं 2027 के लिए अनुमान 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।
भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत भी हाल के दिनों में तेजी से घटी है। जून में यह घटकर करीब 86.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 24 जून को इसका स्तर 70.71 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।
महंगाई का अनुमान भी हुआ कम
Goldman Sachs ने भारत के महंगाई अनुमान को भी घटा दिया है। बैंक ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूरिया कीमतों में कमी आने से खाद सब्सिडी पर सरकार का बोझ कम हो सकता है। साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट से सरकार पर राजकोषीय दबाव भी कम होने की संभावना है। हालांकि मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण मांग पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
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पावर ग्रिड के निदेशक मंडल ने कर्ज सीमा बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी
नई दिल्ली, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के निदेशक मंडल ने कंपनी की कर्ज लेने की सीमा 1.80 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.20 लाख करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि निदेशक मंडल की शुक्रवार को हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लगेगी।

निदेशक मंडल ने इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के जरिये 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। कंपनी ने कहा कि निदेशक मंडल ने उडुमलपेट-मदुरै 400 केवी एकल सर्किट (एस/सी) लाइन को 400 केवी क्वाड डबल सर्किट (डी/सी) लाइन में उन्नत/परिवर्तित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। करीब 772.65 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को आवंटन की तारीख से 30 महीने के भीतर, यानी 11 अगस्त, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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Volkswagen का 4 फैक्ट्रियां बंद करने का प्लान, 1,00,000 लोग होंगे बेरोगजार
बर्लिन, एजेंसी। यूरोप की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती पर विचार कर रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने एक नई रणनीति पेश की। प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारियों की छंटनी का आंकड़ा बढ़ाकर करीब 1 लाख तक किया जा सकता है। फिलहाल Volkswagen Group में लगभग 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। समूह के तहत Volkswagen के अलावा Porsche और Audi जैसे प्रीमियम ब्रांड भी शामिल हैं।

जर्मनी में 4 प्लांट बंद हो सकते हैं
रिपोर्ट के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।
इसके अलावा कंपनी Volkswagen ब्रांड और उसके कंपोनेंट बिजनेस को अलग करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहे Volkswagen ब्रांड को अधिक लाभदायक और कुशल बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।
क्यों उठाने पड़ रहे हैं ये कदम?
फॉक्सवैगन इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ), चीन में कमजोर मांग और यूरोप में BYD तथा Stellantis जैसी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी वजह से लागत घटाने और कारोबार को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।
पहले से जारी है कर्मचारियों की संख्या घटाने का अभियान
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 28,000 कर्मचारी पहले ही स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। यह 2030 तक पूरे Volkswagen Group में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले घोषित योजना का हिस्सा है।
हालांकि, नई प्रस्तावित छंटनी योजना को कर्मचारी संगठनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। Volkswagen के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, जबकि जर्मनी का लोअर सैक्सनी राज्य भी बोर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आमतौर पर कर्मचारी यूनियनों का समर्थन करता है। ऐसे में कंपनी के लिए इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा।
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AI सेवाओं से भारतीय आईटी कंपनियों को 10-12 अरब डॉलर का राजस्व: नासकॉम
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग को कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित सेवाओं से 10-12 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व अर्जित करने का अनुमान है और करीब एक-चौथाई कंपनियां एआई के प्रयोगों को सफलतापूर्वक उत्पादन स्तर पर लागू कर चुकी हैं। उद्योग संगठन नासकॉम ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। न्यूयॉर्क में आयोजित ‘नासकॉम यूएस सीईओ फोरम’ में उद्योग जगत के दिग्गजों ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि एआई के आने से पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं का महत्व कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि एआई के इस दौर में भी वैश्विक कंपनियों के बदलाव में आईटी क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

नासकॉम के अनुसार, एआई से उत्पादकता बढ़ेगी और मानकीकृत तथा दोहराए जाने वाले कार्यों का दायरा घटेगा। हालांकि, इसके साथ ही एआई के उपयोग के लिए आंकड़ों को तैयार और व्यवस्थित करने, अनुप्रयोगों के आधुनिकीकरण, विभिन्न प्रौद्योगिकियों के एकीकरण, एआई प्रशासन, साइबर सुरक्षा, एजेंट प्रबंधन तथा उद्योग-विशिष्ट समाधानों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बयान के मुताबिक, लगभग 25 प्रतिशत प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों ने एआई प्रयोगों को उत्पादन स्तर पर लागू कर दिया है। इस क्षेत्र में वर्तमान में 20 लाख से अधिक पेशेवर एआई कौशल से लैस हैं, जबकि एक लाख से दो लाख पेशेवरों को उन्नत एआई क्षमताओं का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। करीब 85 प्रतिशत प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाताओं के पास अब ‘एजेंटिक एआई’ मंच उपलब्ध हैं।
नासकॉम के अनुसार, वर्ष 2030 तक ‘एजेंटिक एआई’ प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग के लिए 300 से 400 अरब डॉलर के अतिरिक्त संभावित व्यय अवसर उपलब्ध करा सकता है। इसमें पुरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण, एआई परिचालन, साइबर सुरक्षा और प्रशासन जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। एजेंटिक एआई वह कृत्रिम मेधा प्रणाली है जो केवल निर्देशों का जवाब देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वयं योजना बनाती है, निर्णय लेती है, विभिन्न चरणों में काम करती है और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध उपकरणों या अन्य सॉफ्टवेयर का भी उपयोग कर सकती है। भारत के महावाणिज्य दूतावास में आयोजित इस फोरम में डेलावेयर के गवर्नर मैट मेयेर तथा अमेरिका में परिचालन कर रही भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) ने भाग लिया।
नासकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार ने कहा कि जैसे-जैसे एआई का उपयोग उत्पादन स्तर पर बढ़ेगा, उद्यमों को ऐसे विशेषज्ञ भागीदारों की आवश्यकता होगी जो इस प्रौद्योगिकी को जिम्मेदारी के साथ लागू करने और बड़े पैमाने पर विस्तार देने में सक्षम हों। उन्होंने कहा, “उद्यमों को एआई मॉडल, अनुप्रयोगों, डेटा मंचों, क्लाउड परिवेश, साइबर सुरक्षा नियंत्रण, नियामकीय आवश्यकताओं और उद्योग प्रणालियों को एक विश्वसनीय परिचालन ढांचे में एकीकृत करना होगा। भविष्य में आईटी सेवाओं का महत्व इन सभी प्रणालियों को सुरक्षित, कुशल और बड़े पैमाने पर एक साथ संचालित करने में होगा।”
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