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गोल्ड क्रैश का असर, चीन के बड़े बैंकों ने ट्रेडिंग सर्विस की बंद
बीजिंग/मुंबई, एजेंसी। कुछ महीने पहले तक लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा था सोना अब तेज गिरावट के दौर से गुजर रहा है। इस गिरावट के बीच चीन के बड़े बैंकों ने आम निवेशकों के लिए गोल्ड और अन्य प्रीशियस मेटल्स की ट्रेडिंग सेवाएं सीमित या बंद करना शुरू कर दिया है।
इस साल की शुरुआत में सोने की कीमत 5,600 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी जो अब गिरकर 4000 डॉलर से नीचे आ गई हैं। भारतीय मूल्य में लगभग 1.97 लाख रुपए से गिरकर 1.41 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक आ गई है यानी कुछ ही महीनों में लगभग 56,000 रुपए प्रति 10 ग्राम (करीब 29%) की गिरावट दर्ज की गई है।

चीन ने क्या लिया फैसला
चीन के सबसे बड़े बैंक इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना (ICBC) ने घोषणा की है कि वह 24 जुलाई के बाद से शंघाई गोल्ड एक्सचेंज से जुड़े प्रीशियस मेटल्स ट्रेडिंग प्रोडक्ट्स में व्यक्तिगत निवेशकों के लिए इंटरमीडियरी सेवाएं बंद कर देगा।
इसका मतलब है कि आम निवेशक बैंक के जरिए गोल्ड और सिल्वर की डायरेक्ट ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। ग्राहकों को 24 जुलाई से पहले अपनी ओपन पोजीशन बंद करने के लिए कहा गया है। इसी तरह चाइना गुआंगफा बैंक ने भी ग्राहकों को तय समय सीमा के भीतर अपनी पोजीशन बंद करने का निर्देश दिया है, अन्यथा महीने के अंत तक उन्हें जबरन क्लोज किया जाएगा।

निवेश पर पूरी रोक नहीं
बैंकों ने साफ किया है कि पूरी तरह निवेश बंद नहीं किया जा रहा है। ग्राहक अब भी गोल्ड ETF और गोल्ड अक्यूम्युलेशन प्लान जैसे विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। केवल हाई-रिस्क ट्रेडिंग और डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स पर रोक लगाई जा रही है।
बैंक क्यों ले रहे हैं यह कदम?
विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण जोखिम बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान तनाव, ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और वैश्विक महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। इसी वजह से बैंकों ने जोखिम कम करने के लिए यह कदम उठाया है ताकि आम निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे फैसले
यह पहली बार नहीं है जब चीन में इस तरह की सख्ती की गई हो। इससे पहले भी कई चीनी बैंक रिटेल निवेशकों के लिए प्रीशियस मेटल्स ट्रेडिंग पर प्रतिबंध या सीमाएं लगा चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन का फोकस धीरे-धीरे संस्थागत निवेश की ओर बढ़ा है।
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सेबी ने मई में निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का समाधान किया
नई दिल्ली, एजेंसी। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने मई में अपने ऑनलाइन शिकायत निवारण मंच (स्कोर्स) के जरिये निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का निपटान किया है। सेबी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मई के आखिर तक स्कोर्स पर 10 शिकायतें तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं। इन शिकायतों से जुड़ी कंपनियों में केफिन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लि., सेक्योर क्रेडेंशियल्स लि. और ईस्टर्न इनवेस्टमेंट्स लि. शामिल हैं। नियामक के शिकायत मंच को मई में 4,918 नई शिकायतें मिलीं, जबकि इस दौरान 5,548 शिकायतों का समाधान किया गया। परिणामस्वरूप 31 मई, 2026 तक लंबित शिकायतों की संख्या 6,167 से घटकर 5,537 हो गई।

नियामक ने यह भी बताया कि अप्रैल के दौरान निवेशकों की शिकायतों पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने में कंपनियों को औसतन पांच दिन लगे, जबकि पहली बार की समीक्षा वाली शिकायतों के समाधान में औसतन आठ दिन लगे। सेबी ने स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों के आंकड़ों में वे शिकायतें भी शामिल हैं जिनमें कंपनियों या संबंधित संस्थाओं ने तय समय के भीतर निवेशकों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट जमा कर दी हैं लेकिन शिकायतें अभी लंबित हैं। इससे निवेशकों को जवाब से असंतुष्ट होने पर समीक्षा की मांग करने का मौका मिलता है।

स्कोर्स 2.0 के तहत, शिकायतें अपने आप संबंधित कंपनी को भेज दी जाती हैं और उनके पास निवेशक को कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने के लिए 21 दिन का समय होता है। अगर निवेशक जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे 15 दिन के भीतर पहले स्तर की समीक्षा की मांग कर सकते हैं, जिसके बाद एक तय संस्था शिकायत की जांच करती है और एटीआर जमा करती है। अगर निवेशक अब भी असंतुष्ट रहते हैं, तो वे अगले 15 दिन के भीतर दूसरे स्तर की समीक्षा की मांग भी कर सकते हैं। ऐसे मामलों में, सेबी सीधे मामले की जांच करता है और अपनी एटीआर जमा करता है।
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शुक्रवार को नहीं खुलेगा शेयर बाजार, कल से 3 दिन बंद रहेगी ट्रेडिंग
मुंबई, एजेंसी। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आपके लिए बेहद जरूरी खबर है। इस बार शेयर मार्केट में लॉन्ग वीकेंड रहेगा। कल से लगातार तीन दिन तक भारतीय शेयर बाजार बंद रहेंगे। शुक्रवार (26 जून) को मुहर्रम के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख स्टॉक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में ट्रेडिंग नहीं होगी। इसके साथ ही शनिवार, रविवार होने के कारण कारोबार नहीं होगा।
अब बाजार में नियमित ट्रेडिंग सोमवार 29 जून को दोबारा शुरू होगी। इससे पहले 28 मई को बकरीद के मौके पर बाजार बंद रहा था।

कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां
स्टॉक एक्सचेंज के कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 के लिए कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां तय की गई थीं, जिनमें से 9 छुट्टियां बीत चुकी हैं। मुहर्रम के बाद साल के बचे हुए महीनों में 6 और मौकों पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग बंद रहेगी। मुहर्रम के बाद अगली छुट्टी सीधे सितंबर में होगी यानी जुलाई और अगस्त के महीने में बाजार में कोई अतिरिक्त छुट्टी नहीं है।

MCX का शाम का सत्र रहेगा खुला
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह का ट्रेडिंग सत्र बंद रहेगा। हालांकि शाम का सत्र निर्धारित समय के अनुसार खुला रहेगा, जिससे कमोडिटी ट्रेडर्स शाम के दौरान सामान्य रूप से कारोबार कर सकेंगे।
निवेशकों और ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने सौदों और निवेश योजनाओं को इस लॉन्ग वीकेंड को ध्यान में रखकर व्यवस्थित करें।
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JSW इंफ्रास्ट्रक्चर के क्यूआईपी को 50,350 करोड़ रुपए से अधिक की बोलियां मिलीं
नई दिल्ली, एजेंसी। सज्जन जिंदल प्रवर्तित जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर के पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) को 50,350 करोड़ रुपए से अधिक की बोलियां मिली हैं, जो 7,503 करोड़ रुपए तक के सांकेतिक निर्गम आकार से लगभग सात गुना अधिक है। इस निर्गम का प्रबंधन कर रहे मर्चेंट बैंकरों ने यह जानकारी दी। क्यूआईपी 22 जून को शुरू हुआ। इसमें घरेलू और वैश्विक स्तर के प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने मजबूत भागीदारी दिखाई, जिससे देश के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना क्षेत्र में निवेशकों की मजबूत रुचि का संकेत मिला है।

कंपनी ने 23 करोड़ नए शेयर के क्यूआईपी के जरिये 7,502.7 करोड़ रुपए तक जुटाने की योजना बनाई थी। इसमें प्रवर्तक द्वारा 3.32 करोड़ शेयर की बिक्री पेशकश (ओएफएस) भी शामिल थी। इन शेयर की पेशकश 285 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर की गई, जो 22 जून को बीएसई पर कंपनी के 307.25 रुपए के बंद भाव से 7.2 प्रतिशत कम है। मर्चेंट बैंकरों के अनुसार, कंपनी इससे प्राप्त राशि का इस्तेमान नए बंदरगाह विस्तार, रणनीतिक अधिग्रहणों और ऋण कम करने के लिए करेगी। जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी वाणिज्यिक बंदरगाह संचालक कंपनी है।

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