देश
शुक्रवार को नहीं खुलेगा शेयर बाजार, कल से 3 दिन बंद रहेगी ट्रेडिंग
मुंबई, एजेंसी। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो आपके लिए बेहद जरूरी खबर है। इस बार शेयर मार्केट में लॉन्ग वीकेंड रहेगा। कल से लगातार तीन दिन तक भारतीय शेयर बाजार बंद रहेंगे। शुक्रवार (26 जून) को मुहर्रम के अवसर पर देश के दोनों प्रमुख स्टॉक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में ट्रेडिंग नहीं होगी। इसके साथ ही शनिवार, रविवार होने के कारण कारोबार नहीं होगा।
अब बाजार में नियमित ट्रेडिंग सोमवार 29 जून को दोबारा शुरू होगी। इससे पहले 28 मई को बकरीद के मौके पर बाजार बंद रहा था।

कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां
स्टॉक एक्सचेंज के कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 के लिए कुल 16 ट्रेडिंग छुट्टियां तय की गई थीं, जिनमें से 9 छुट्टियां बीत चुकी हैं। मुहर्रम के बाद साल के बचे हुए महीनों में 6 और मौकों पर शेयर बाजार में ट्रेडिंग बंद रहेगी। मुहर्रम के बाद अगली छुट्टी सीधे सितंबर में होगी यानी जुलाई और अगस्त के महीने में बाजार में कोई अतिरिक्त छुट्टी नहीं है।

MCX का शाम का सत्र रहेगा खुला
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह का ट्रेडिंग सत्र बंद रहेगा। हालांकि शाम का सत्र निर्धारित समय के अनुसार खुला रहेगा, जिससे कमोडिटी ट्रेडर्स शाम के दौरान सामान्य रूप से कारोबार कर सकेंगे।
निवेशकों और ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने सौदों और निवेश योजनाओं को इस लॉन्ग वीकेंड को ध्यान में रखकर व्यवस्थित करें।
देश
सेबी ने मई में निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का समाधान किया
नई दिल्ली, एजेंसी। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने मई में अपने ऑनलाइन शिकायत निवारण मंच (स्कोर्स) के जरिये निवेशकों की 5,500 से अधिक शिकायतों का निपटान किया है। सेबी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मई के आखिर तक स्कोर्स पर 10 शिकायतें तीन महीने से अधिक समय से लंबित थीं। इन शिकायतों से जुड़ी कंपनियों में केफिन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लि., सेक्योर क्रेडेंशियल्स लि. और ईस्टर्न इनवेस्टमेंट्स लि. शामिल हैं। नियामक के शिकायत मंच को मई में 4,918 नई शिकायतें मिलीं, जबकि इस दौरान 5,548 शिकायतों का समाधान किया गया। परिणामस्वरूप 31 मई, 2026 तक लंबित शिकायतों की संख्या 6,167 से घटकर 5,537 हो गई।

नियामक ने यह भी बताया कि अप्रैल के दौरान निवेशकों की शिकायतों पर कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने में कंपनियों को औसतन पांच दिन लगे, जबकि पहली बार की समीक्षा वाली शिकायतों के समाधान में औसतन आठ दिन लगे। सेबी ने स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतों के आंकड़ों में वे शिकायतें भी शामिल हैं जिनमें कंपनियों या संबंधित संस्थाओं ने तय समय के भीतर निवेशकों को अपनी कार्रवाई रिपोर्ट जमा कर दी हैं लेकिन शिकायतें अभी लंबित हैं। इससे निवेशकों को जवाब से असंतुष्ट होने पर समीक्षा की मांग करने का मौका मिलता है।

स्कोर्स 2.0 के तहत, शिकायतें अपने आप संबंधित कंपनी को भेज दी जाती हैं और उनके पास निवेशक को कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) जमा करने के लिए 21 दिन का समय होता है। अगर निवेशक जवाब से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे 15 दिन के भीतर पहले स्तर की समीक्षा की मांग कर सकते हैं, जिसके बाद एक तय संस्था शिकायत की जांच करती है और एटीआर जमा करती है। अगर निवेशक अब भी असंतुष्ट रहते हैं, तो वे अगले 15 दिन के भीतर दूसरे स्तर की समीक्षा की मांग भी कर सकते हैं। ऐसे मामलों में, सेबी सीधे मामले की जांच करता है और अपनी एटीआर जमा करता है।
देश
JSW इंफ्रास्ट्रक्चर के क्यूआईपी को 50,350 करोड़ रुपए से अधिक की बोलियां मिलीं
नई दिल्ली, एजेंसी। सज्जन जिंदल प्रवर्तित जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर के पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) को 50,350 करोड़ रुपए से अधिक की बोलियां मिली हैं, जो 7,503 करोड़ रुपए तक के सांकेतिक निर्गम आकार से लगभग सात गुना अधिक है। इस निर्गम का प्रबंधन कर रहे मर्चेंट बैंकरों ने यह जानकारी दी। क्यूआईपी 22 जून को शुरू हुआ। इसमें घरेलू और वैश्विक स्तर के प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने मजबूत भागीदारी दिखाई, जिससे देश के बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना क्षेत्र में निवेशकों की मजबूत रुचि का संकेत मिला है।

कंपनी ने 23 करोड़ नए शेयर के क्यूआईपी के जरिये 7,502.7 करोड़ रुपए तक जुटाने की योजना बनाई थी। इसमें प्रवर्तक द्वारा 3.32 करोड़ शेयर की बिक्री पेशकश (ओएफएस) भी शामिल थी। इन शेयर की पेशकश 285 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर की गई, जो 22 जून को बीएसई पर कंपनी के 307.25 रुपए के बंद भाव से 7.2 प्रतिशत कम है। मर्चेंट बैंकरों के अनुसार, कंपनी इससे प्राप्त राशि का इस्तेमान नए बंदरगाह विस्तार, रणनीतिक अधिग्रहणों और ऋण कम करने के लिए करेगी। जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर भारत की दूसरी सबसे बड़ी निजी वाणिज्यिक बंदरगाह संचालक कंपनी है।

देश
क्यूसीओ हटने से बढ़ा स्टेनलेस स्टील आयात, एमएसएमई की सरकार से इसे फिर लागू करने की मांग
नई दिल्ली, एजेंसी। स्टेनलेस स्टील क्षेत्र के 100 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने सरकार से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) को फिर से लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि आदेश हटाए जाने के बाद चीन से आयात में तेज वृद्धि हुई है। इस्पात मंत्रालय ने 27 अप्रैल को एक आदेश के जरिये विभिन्न स्टेनलेस स्टील उत्पादों के लिए केवल भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणित वस्तुओं के उपयोग को अनिवार्य बनाने वाले गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को स्थगित कर दिया था। यह कदम घरेलू विनिर्माण के लिए कच्चे माल की उपलब्धता आसान बनाने तथा विशेष रूप से एमएसएमई इकाइयों पर अनुपालन बोझ कम करने के उद्देश्य से उठाया गया था।

स्टेनलेस स्टील उद्योग के एमएसएमई ने हालांकि, आदेश स्थगित होने के बाद स्टेनलेस स्टील उत्पादों के आयात में आई तेज वृद्धि पर चिंता जताई है। उद्योग संगठनों, स्टेनलेस स्टील इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन और स्टेनलेस स्टील री-रोलर्स एसोसिएशन ने इस्पात मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा, ”क्यूसीओ के स्थगन से चीन से कम कीमत वाले आयात का रास्ता खुल गया है। इससे घरेलू एमएसएमई विनिर्माताओं पर भारी दबाव पड़ रहा है और हजारों नौकरियों तथा भारतीय उद्यमियों द्वारा किए गए बड़े निवेश पर खतरा मंडरा रहा है।”

संगठनों ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अप्रैल 2026 में स्टेनलेस स्टील का आयात 1,01,252 मीट्रिक टन रहा, जो एक वर्ष पहले के इसी महीने के 61,143 मीट्रिक टन की तुलना में 65 प्रतिशत अधिक है। मार्च 2026 के 59,917 मीट्रिक टन की तुलना में अप्रैल में आयात 69 प्रतिशत बढ़ा। उद्योग संगठनों के सदस्यों ने आगाह किया कि यदि सरकार ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया तो आयात के आंकड़े आगे भी बढ़ सकते हैं। एमएसएमई इकाइयों ने मंत्रालय को भेजे पत्र में कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेश और रोजगार दोनों जोखिम में हैं।
संगठनों ने कहा कि चीनी स्टेनलेस स्टील उत्पाद बेहद कम कीमतों पर भारतीय बाजार में आ रहे हैं, जिससे घरेलू विनिर्माताओं के लिए असमान प्रतिस्पर्धी माहौल बन रहा है। भारतीय कंपनियां गुणवत्ता मानकों, पर्यावरणीय नियमों और रोजगार संबंधी दायित्वों का पालन करती हैं, जबकि आयातित उत्पाद इन मानकों पर खरे नहीं उतरते। स्टेनलेस स्टील इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा, ” ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने की सरकारी नीति और प्रतिबद्धता पर भरोसा करते हुए अनेक एमएसएमई इकाइयों ने क्षमता विस्तार, प्रौद्योगिकी उन्नयन, गुणवत्ता सुधार और रोजगार सृजन में भारी निवेश किया है।”
-
Uncategorized9 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
कोरबा3 years agoकटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर के गुर्गों द्वारा दिव्य आकाश कर्मियों पर हमला की कोशिश
-
कोरबा2 years agoग्राम पंचायत पोड़ी के पूर्व सरपंच सचिव पर गबन के आधार पर अधिरोपित राशि 3341972/- रुपये शीघ्र वसूल हो- कय्युम बेग
-
कोरबा2 years agoकुसमुंडा खदान में डंपर पलट कर लगी आग, सरकारी गाड़ी में कोयला और डीजल चोर सवार थे, जलने से दोनों गंभीर
-
कोरबा2 years agoश्रीमती स्वाति दुबे का निधन
-
छत्तीसगढ़2 years agoबिलासपुर में अपोलो अस्पताल के 4 सीनियर डॉक्टर अरेस्ट
-
कोरबा3 years agoकटघोरा जनपद की 25 करोड़ की जमीन उनके करीबी कांग्रेसियों की 25 लाख में कैसे हो गई?
-
कोरबा3 years agoदर्री में 1320 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए नई सरकार गठन के बाद होगी पर्यावरणीय जनसुनवाई
