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कोरबा

नागरिकों को न्याय के करीब लाने और न्यायिक सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में कटघोरा में परिवार न्यायालय का आभाषी रूप से मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा द्वारा किया गया उद्घाटन

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कोरबा 03 सितंबर 2026। छत्तीसगढ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कोरबा जिला के व्यवहार न्यायालय कटघोरा में कुटुम्ब न्यायालय का वर्चुअल उद्घाटन किया। कानूनी जरूरतों को दृष्टिगत करते हुए न्यायिक सुविधाओं की उपलब्धता को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। न्याय प्रणाली को नागरिकों के लिए अधिक सुलभ और उत्तरदायी बनाना ही कार्यक्रम का उद्देश्य रहा। परिवार न्यायालय कटघोरा के नियमित रूप से स्थापित होने से इस क्षेत्र के नागरिकों को न्यायिक कार्यवाही के लिए अधिक सुविधाजनक और निकटवर्ती न्यायिक मंच प्राप्त होगा। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में न्यायिक सेवाओं के विस्तार व न्यायिक व्यवस्था में आधुनिक अधोसंरचना ए तकनीकी नवाचार तथा  जन-केन्द्रित न्याय व्यवस्था के संबंध में इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किये। उनके द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि विशेष रूप से परिवार न्यायालय के प्रारंभ होने से पारिवारिक विवादों से संबंधित मामलों में शामिल पक्षों को स्थानीय स्तर पर न्यायिक सुविधाओं का लाभ उठाने में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र  न्यायाधीश  संतोष शर्मा द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के प्रारूप के अनुसार कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन से किया गया। परिवार न्यायालय की स्थापना के पीछे का दृष्टिकोण और मार्गदर्शक विचार मुख्य न्यायाधीश के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन से अत्यधिक प्रेरित है, परिणाम स्वरूप परिवार न्यायालय की स्थापना, अधिक सुलभ ,उत्तरदायी और नागरिक केंद्रित, न्याय वितरण प्रणाली के प्रति उनके दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है।
वर्चुअल उद्घाटन के तुरंत पश्चात कटघोरा में शुरू होने वाले परिवार न्यायालय से संबंधित एक संक्षिप्त वीडियो प्रदर्शित किया गया। वीडियो के माध्यम से न्यायिक सुविधा और उसकी स्वरूप की एक झलक प्रस्तुत की गई। यह प्रस्तुती केवल एक न्यायिक सुविधा के संबंध में जानकारी देने तक ही सीमित नहीं थी। बल्कि न्याय वितरण प्रणाली को लोगों को करीब लाने की दिशा में एक नई शुरूआत का दृश्य परिचय भी बन गई। कार्यक्रम के समापन पर परिवार न्यायालय कोरबा की प्रधान न्यायाधीश नीता यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने माननीय मुख्य  न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर, न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्तागण, न्यायिक कर्मचारीगण और कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी संबंधित व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस नई न्यायिक सुविधा का शुभारंभ न्याय को आम जनता तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल न्यायिक अवसंरचना के विस्तार को दर्शाती है बल्कि बदलते समय के अनुरूप सुगम, सुलभ और नागरिक केंद्रित न्याय वितरण प्रणाली के प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
इस अवसर पर सागर चंद्राकर प्रथम व्यवहार  न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी कटघोरा द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया। उक्त अवसर पर कोरबा जिला में पदस्थ समस्त  न्यायाधीश  गण, छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद की अध्यक्ष रविन्द्र परासर, अधिवक्त संघ कटघोरा के अध्यक्ष राजेश पाल सहित अन्य अधिवक्तागण, न्यायिक कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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मिनीमाता बांगो बांध से कुल 12017 Cusec पानी छोड़ा जा रहा हसदेव नदी में

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कोरबा। आज दिनांक 04/09/2026 को 06:00 AM बजे से मिनीमाता बांगो बांध का जलस्तर 358.70M एवं 94.24% होने पर 8:00 AM बजे निम्नानुसार गेटों को कम कर बाढ़ के पानी को नियंत्रित किया जा रहा है
गेट न.1 nil
गेट न.2 nil
गेट न.3 nil
गेट न.4 nil
गेट न.5 को 0.10M
गेट न.6 को 0.30M
गेट न.7 को 0.10M
गेट न.8 n
गेट न.9 nil
गेट न.10 nil
गेट न.11 nil
(Total Gate opening 0.50mtr)
कुल Radial गेट से 3017 Cusec तथा
पॉवर प्लांट हाइडल के द्वारा 9000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है इस प्रकार बांध से कुल 12017 Cusec पानी हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है तथा Inflow 14992 Cusec दर्ज की गयी है |

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कोरबा

कटघोरा एवं पोड़ी उपरोड़ा में उर्वरक-कीटनाशक दुकानों का औचक निरीक्षण

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अनियमितता मिलने पर कई विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस, महेश राम कृषि केंद्र में कीटनाशक बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध

कोरबा, 04 सितंबर 2026। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं कीटनाशक दवाएं उपलब्ध कराने तथा कृषि आदानों की बिक्री में अनियमितता, कालाबाजारी एवं ओवर-रेटिंग पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से जिला स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा आज विकासखंड कटघोरा एवं पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र में उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रय प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान दुकानों में उपलब्ध उर्वरक एवं कीटनाशकों के स्टॉक, मूल्य सूची, विक्रय अभिलेख, लाइसेंस एवं भंडारण व्यवस्था की बारीकी से जांच की गई। जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में अनियमितताएं एवं कमियां पाए जाने पर कृषि विभाग द्वारा नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की गई।

सर्वमंगला खाद भंडार सहित कई दुकानों को नोटिस

निरीक्षण के दौरान सर्वमंगला खाद भंडार, बाकी मोगरा में अनियमितताएं पाए जाने पर संचालक को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसी प्रकार सोनी कृषि केंद्र, शिव बीज भंडार एवं अंसारी कृषि केंद्र, कसनियां, पोड़ी उपरोड़ा में भी निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

दो कार्यदिवस में सुधार नहीं होने पर लाइसेंस निरस्तीकरण की चेतावनी

सोनी कृषि केंद्र कसनियां, शिव बीज भंडार कसनियां एवं अंसारी कृषि केंद्र कसनियां को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निरीक्षण के दौरान पाई गई अनियमितताओं में दो कार्यदिवस के भीतर सुधार सुनिश्चित करें। निर्धारित अवधि में कमियों का निराकरण नहीं किए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विक्रय लाइसेंस निरस्त करने की नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

महेश राम कृषि केंद्र में कीटनाशक बिक्री पर प्रतिबंध

महेश राम कृषि केंद्र, रंजना में निरीक्षण के दौरान पाई गई खामियों को गंभीरता से लेते हुए उक्त प्रतिष्ठान से कीटनाशकों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इसके अलावा निरीक्षण अभियान के तहत राजू कृषि केंद्र, रंजना में भी उर्वरक एवं कीटनाशकों के स्टॉक तथा संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की गई।

किसानों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उर्वरक एवं कीटनाशकों की कालाबाजारी, ओवर-रेटिंग, अनियमित बिक्री तथा अमानक कृषि आदानों के विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जिले में निरीक्षण की कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

विभाग द्वारा कृषि आदान विक्रेताओं को नियमानुसार स्टॉक एवं विक्रय अभिलेख संधारित करने, निर्धारित मूल्य पर सामग्री का विक्रय करने तथा किसानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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कोरबा

IPS डांगी केस,शासन को 7 दिन में देना होगा जवाब:हाईकोर्ट का आखिरी मौका, लेटलतीफी पर लगाई फटकार, 29 सितंबर को अगली सुनवाई

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सस्पेंडेड IPS अफसर रतनलाल डांगी से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी शासन ने अब तक जवाब और जांच रिपोर्ट पेश नहीं की है। शासन की ओर से देरी पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। जस्टिस एके प्रसाद की बेंच ने शासन को आखिरी मौका देते हुए एक सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने का आदेश दिया है।

वहीं, इस मामले में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली SI की पत्नी ने जांच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की जांच किसी महिला IAS अधिकारी से कराने की मांग की है। 12 अगस्त 2026 को जारी हाईकोर्ट के आदेश के पालन में शासन की ओर से अब तक जरूरी जानकारी पेश नहीं की जा सकी है।

29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने राज्य शासन को जवाब देने के लिए अंतिम मौका देते हुए एक सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि इस दौरान शिकायत पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी शपथ पत्र के साथ पेश करनी होगी।

ऐसा नहीं करने पर संबंधित अधिकारी को 29 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना पड़ेगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पैरवी की।

क्या है मामला ?

कोरबा की महिला योग टीचर ने आईपीएस रतनलाल डांगी पर ऑनलाइन योग क्लास के दौरान अश्लील बातचीत करने और वीडियो कॉल पर आपत्तिजनक हरकत करने का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि उसकी बात नहीं मानने पर डांगी ने उसके सब इंस्पेक्टर पति को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने और घोर नक्सल प्रभावित इलाकों में ट्रांसफर कराने की धमकी दी।

पीड़िता ने 15 अक्टूबर 2025 को सबूतों के साथ डीजीपी से शिकायत की थी। इसके बाद मार्च 2026 में डांगी को सस्पेंड कर दिया गया। मामले की जांच के लिए डीजीपी ने तत्कालीन आईजी आनंद छाबड़ा और तत्कालीन डीआईजी मिलना कुर्रे को जांच अधिकारी बनाया था।

पीड़िता का कहना है कि एक अधिकारी आरोपी के बराबर रैंक के थे, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे जूनियर थीं। इसी वजह से उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोनों को जांच से हटाकर किसी सीनियर IAS अधिकारी (खासकर महिला IAS अधिकारी) से जांच कराने की मांग की है।

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