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रुपए में गिरावट पर बोलीं वित्त मंत्री- ‘रुपया खुद बनाएगा अपनी राह’, चिंता की जरूरत नहीं

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के पास बना हुआ है लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि मौजूदा मजबूत आर्थिक हालात को देखते हुए रुपए की कमजोरी को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि रुपया अपनी राह खुद बनाएगा और इस विषय पर चर्चा को देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति के संदर्भ में समझना चाहिए।

रुपए में गिरावट के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत

4 दिसंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले ₹90.46 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा था। विशेषज्ञ इसका कारण भारत–अमेरिका ट्रेड डील में देरी और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी को बता रहे हैं। दिलचस्प है कि यह कमजोरी ऐसे समय में दिखी है जब देश में खुदरा महंगाई रिकॉर्ड लो 0.25% पर है और जीडीपी ग्रोथ 8% से ऊपर बनी हुई है।

सीतारमण ने कहा कि कमजोर रुपए से निर्यातकों को लाभ मिल सकता है लेकिन केवल इसी आधार पर रुपए की गिरावट को ‘फायदेमंद’ बताना सही मूल्यांकन नहीं है। उनके अनुसार, मजबूत विकास दर और स्थिर आर्थिक माहौल रुपए की मौजूदा स्थिति को बेहतर ढंग से समझाते हैं।

वित्त मंत्रालय का रुख

वित्त मंत्रालय का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार आगे भी बनी रहेगी।

  • Q2FY26 में जीडीपी वृद्धि 8.2% के छह-तिमाही उच्च स्तर पर रही।
  • अक्टूबर में खुदरा महंगाई 0.25% तक गिर गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

सीतारमण ने भरोसा जताया कि FY26 में ग्रोथ 7% या उससे अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति आज कई बड़े देशों की तुलना में कहीं ज्यादा स्थिर और तेज है, यही वजह है कि रुपए की गिरावट के बावजूद आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है।

टैक्स और जीएसटी सुधारों पर संकेत

वित्त मंत्री ने आयकर कटौती और जीएसटी दरों में सरलीकरण के प्रभाव पर भी बात की। उनके मुताबिक, इनकम टैक्स में बदलावों का असर अगले साल टैक्स कलेक्शन में दिखेगा लेकिन लोगों के खर्च में बढ़ोतरी अभी से दिखाई देने लगी है। जीएसटी सुधार पूरे देश में समान रूप से लागू होते हैं, इसलिए इनके असर को मध्यम अवधि में समझना ज्यादा उचित होगा। कुल मिलाकर सरकार का रुख स्पष्ट है — बुनियादी ढांचे की मजबूती, स्थिर महंगाई और निरंतर आर्थिक सुधारों की बदौलत भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले महीनों में भी मजबूत राह पर बनी रहेगी।

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NMDC ने लौह अयस्क के दाम 11.1% तक बढ़ाए, पांच अप्रैल से लागू

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नई दिल्ली,एजेंसी। सरकारी स्वामित्व वाली एनएमडीसी ने लौह अयस्क के दामों में 11.1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। कंपनी ने शेयर बाजार को यह जानकारी दी। देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी ने बताया कि नई कीमतें पांच अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गईं। कंपनी सूचना के अनुसार बैलाडीला खदानों (छत्तीसगढ़) से उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले बायला लंप (65.5 प्रतिशत लौह अंश) के दाम में 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। वहीं बायला फाइंस (64 प्रतिशत लौह अंश) के दाम 11.1 प्रतिशत बढ़ाए गए हैं। बायला फाइंस 10 मिलीमीटर से कम आकार का उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क उत्पाद है जो बैलाडीला क्षेत्र की खदानों से प्राप्त होता है। कंपनी ने बीएसई को दी सूचना में बताया कि पांच अप्रैल 2026 से लौह अयस्क की कीमतें इस प्रकार तय की गई हैं। 

बायला लंप (65.5 प्रतिशत, 10-40 मिमी) : 5,300 रुपए प्रति टन, बायला फाइंस (64 प्रतिशत, 10 मिमी से कम) 4,500 रुपए प्रति टन। संशोधित कीमतें ‘फ्री-ऑन-रेल’ (एफओआर) आधार पर हैं और इनमें रॉयल्टी, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) शुल्क, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास (एनएमईटी) अंशदान, माल एवं सेवा कर, पर्यावरण उपकर और अन्य कर जैसे वैधानिक शुल्क शामिल नहीं हैं। एनएमडीसी ने हाल ही में समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 5.3 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन किया और 5.02 करोड़ टन लौह अयस्क की बिक्री दर्ज की थी। 

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ऑनलाइन से लेकर नॉमिनेशन तक बड़े बदलाव, RBI ने बदले नियम, निवेशकों के लिए क्या है नया?

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फ्लोटिंग रेट सेविंग बॉन्ड 2020 (टैक्सेबल) से जुड़े नियमों को अपडेट कर दिया है। नए दिशा-निर्देश 2 अप्रैल से लागू हो गए हैं, जिनका मकसद निवेश प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और ज्यादा निवेशक-हितैषी बनाना है।

क्या हैं बड़े बदलाव?

1. ऑनलाइन आवेदन होगा अनिवार्य

RBI ने सभी बैंकों और अधिकृत संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे 30 सितंबर 2026 तक इन बॉन्ड्स के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू करें। इससे निवेशक घर बैठे भी आसानी से निवेश कर सकेंगे।

2. डिजिटल सेवाओं पर जोर

31 दिसंबर 2026 तक निवेशकों के लिए कई ऑनलाइन सुविधाएं शुरू की जाएंगी, जैसे:

  • बॉन्ड होल्डिंग देखना
  • नॉमिनी बदलना
  • समय से पहले निकासी का अनुरोध
  • सर्टिफिकेट और स्टेटमेंट डाउनलोड

3. जल्दी मिलेगा सर्टिफिकेट

अब बैंकों को निवेश की राशि मिलने के 3 कार्यदिवस के भीतर “सर्टिफिकेट ऑफ होल्डिंग” जारी करना होगा, जिससे निवेश की पुष्टि जल्दी हो सकेगी।

4. बैंकों के लिए सख्त नियम

रिसीविंग ऑफिस को निवेशकों का पैसा 2 कार्यदिवस के भीतर RBI को ट्रांसफर करना होगा। देरी होने पर जुर्माना लगेगा और ब्याज के नुकसान की भरपाई भी बैंक को करनी होगी।

5. देरी पर मिलेगा मुआवजा

अगर बैंक की गलती से ब्याज या मैच्योरिटी पेमेंट में देरी होती है, तो निवेशकों को लागू ब्याज दर के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।

6. नॉमिनेशन प्रक्रिया आसान

अब निवेशक एक से ज्यादा नॉमिनी जोड़ सकेंगे और उनकी हिस्सेदारी भी तय कर सकेंगे। निवेशक की मृत्यु की स्थिति में बॉन्ड ट्रांसफर प्रक्रिया भी आसान बनाई गई है।

7. शिकायत निवारण तेज

बैंकों को निवेशकों की शिकायत 5 कार्यदिवस के भीतर सुलझानी होगी। साथ ही एक स्पष्ट एस्केलेशन सिस्टम भी देना होगा, जिससे जरूरत पड़ने पर मामला RBI तक पहुंचाया जा सके।

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लाल से हरा हुआ बाजार, मिडिल ईस्ट राहत की खबर से जबरदस्त रिकवरी, इन 4 कारणों से अचानक तेजी

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच दिन की कमजोर शुरुआत करने वाला भारतीय शेयर बाजार सोमवार (6 अप्रैल) को जबरदस्त रिकवरी के साथ हरे निशान में लौट आया। शुरुआती गिरावट के बाद दोपहर के कारोबार में खरीदारी तेज हुई, जिससे निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत होता दिखा।

कारोबार बंद होने पर सेंसेक्स 787.30 अंक की बढ़त के साथ 74,106.85 पर बंद हुआ। निफ्टी 255.15 अंक की बढ़त के साथ 22,968.25 के स्तर पर बंद हुआ।

दोपहर करीब 2:20 बजे, सेंसेक्स 662.98 अंक यानी 0.9% की तेजी के साथ 73,982.52 पर और निफ्टी 208.65 अंक चढ़कर 22,921.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। फार्मा और ऑयल एंड गैस को छोड़कर अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में रहे। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी 1% से ज्यादा की मजबूती देखने को मिली।

इससे पहले सुबह के सत्र में बाजार दबाव में था। सेंसेक्स 590 अंकों तक टूटकर 72,728 के करीब पहुंच गया था, जबकि निफ्टी 22,543 तक फिसल गया था। हालांकि निचले स्तरों से जोरदार खरीदारी ने बाजार की दिशा बदल दी।

तेजी के पीछे ये 4 बड़े कारण रहे….

1. अमेरिका–ईरान तनाव में नरमी की उम्मीद

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम की दिशा में बातचीत आगे बढ़ी है। होर्मुज स्ट्रेट के दोबारा खुलने की उम्मीद से ग्लोबल सेंटीमेंट सुधरा और बाजार में तेजी लौटी।

2. रुपए में मजबूती

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 92.85 तक पहुंचा, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के कदमों का असर भी दिखा।

3. बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी

Nifty Bank और PSU बैंक इंडेक्स में करीब 2% तक की तेजी आई। बेहतर लोन ग्रोथ और आकर्षक वैल्यूएशन के चलते बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ी।

4. आईटी शेयरों में उछाल

निफ्टी IT इंडेक्स में करीब 1% की तेजी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि मार्च तिमाही में आईटी कंपनियों के नतीजे मजबूत रह सकते हैं।

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