छत्तीसगढ़
रायपुर में खाद्य विभाग ने 1070KG पनीर किया नष्ट:फैक्ट्रियों में गंदगी, मिल्क पाउडर के बोरे और तेल के टिन मिले, सैंपल लैब भेजे
रायपुर,एजेंसी। राजधानी रायपुर में पनीर बनाने वाली दो फैक्ट्रियों पर खाद्य-औषधि विभाग ने छापेमारी कर कार्रवाई की है। यह कार्रवाई गुणवत्ता और स्वच्छता से जुड़ी शिकायतों के आधार पर की गई है। मौके पर पहुंची टीम ने फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण शुरू किया। फूड डिपार्टमेंट ने दोनों फैक्टियों से करीब 1060 किलो पनीर जब्त कर जमीन में दबाकर नष्ट किया।

टीम ने दोनों जगह से पनीर के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे हैं। साथ ही मिल्क पाउडर के बोरे और तेल के कई टिन भी जब्त किए गए हैं।

फैक्ट्री में साफ-सफाई की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया।

छापेमारी के दौरान टीम को फैक्ट्री में गंदगी मिली।

सैंपल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
दरअसल, रायपुर में खाद्य एवं औषधि विभाग ने रविवार को पनीर की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर कार्रवाई की है। शिकायतों के बाद टीम ने भाटागांव के KLP डेयरी एंड प्रोडक्शन में दबिश दी। छापेमारी के दौरान टीम ने फैक्ट्री में साफ-सफाई की स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया।
इस दौरान फैक्ट्री में गंदगी पाई गई, जिसके बाद डेयरी फैक्ट्री से 540 किलो पनीर जब्त कर नष्ट किया गया। पनीर को नष्ट करने के लिए रायपुर नगर निगम की टीम ने सरकारी जमीन चिन्हित की। इसके बाद जेसीबी मशीन की मदद से पनीर को जमीन में दबाकर नष्ट किया गया।
साथ ही पनीर बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और तैयार पनीर के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।

फैक्ट्री परिसर से मिल्क पाउडर के बोरे और तेल के टीन बरामद हुए।
मिल्क पाउडर, तेल के टीन बरामद
जांच के दौरान फैक्ट्री परिसर से मिल्क पाउडर के बोरे और बड़ी मात्रा में तेल के टीन भी बरामद किए गए। इन सामग्रियों के इस्तेमाल को लेकर टीम जांच कर रही है कि उनका इस्तेमाल नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं।
उरला के डेयरी फैक्ट्री में भी छापा मारा
इसी तरह टीम ने उरला के कन्हेरा रोड पर स्थित डेयरी संचालक हिमांशु बंसल के SJ डेयरी प्रोडक्ट में छापा मारा। जांच के दौरान यहां भी गंदगी पाई गई। इसके बाद फूड डिपार्टमेंट ने डेयरी फैक्ट्री से 500 किलो पनीर जब्त कर नष्ट किया।
रेड के दौरान टीम को विरोध का सामना करना पड़ा
उरला में पनीर फैक्ट्री पर छापेमारी के दौरान खाद्य विभाग की टीम को विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए उरला थाना प्रभारी और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और अधिकारियों की मदद की।
फैक्ट्री मालिकों से पूछताछ
अधिकारी दोनों फैक्ट्री मालिकों से पूछताछ कर रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में अनियमितता या मिलावट सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है, रिपोर्ट के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

रायपुर में खाद्य एवं औषधि विभाग ने पनीर बनाने वाली दो फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त डोमेन्द्र ध्रुव प्रभारी ने बताया कि फूड एंड ड्रग विभाग ने दीपक कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में छापेमारी की। जांच के दौरान भाटागांव के डेयरी संचालक आदर्श पराशर के KLP डेयरी एंड प्रोडक्शन में गंदगी पाई गई, जिसके बाद डेयरी फैक्ट्री से 540 किलो पनीर नष्ट किया गया।
इसी तरह उरला के कन्हेरा रोड पर स्थित डेयरी संचालक हिमांशु बंसल के SJ डेयरी प्रोडक्ट में भी गड़बड़ी मिली। यहां डेयरी फैक्ट्री से 500 किलो पनीर नष्ट किया गया।
दोनों जगह से टीम ने पनीर के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेजे हैं। साथ ही मिल्क पाउडर के बोरे और तेल के कई टिन भी जब्त किए गए हैं।

कोरबा
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के ठेकेदारों की कांट्रेक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने निविदा प्रक्रिया और अधिकारियों की मनमानी पर गंभीर चिंता जताई
कोरबा। प्रदेश सहित देश के कई राज्यों को रौशन करने के लिए विख्यात कोरबा जिले में स्थित राज्य विद्युत कंपनी की नई कार्यप्रणाली पर अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है।

सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कंपनी के एचटीपीपी,कोरबा पूर्व,डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अटल बिहारी बाजपेई ताप विद्युत संयंत्र मड़वा में कार्यरत ठेकेदारों के मध्य अब खुद के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता आन पड़ी है।

दरअसल एचटीपीपी,कोरबा पूर्व, डीएसपीएम, और मड़वा संयंत्र के संगठित कांट्रेक्टर एसोसिएशन द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में कॉन्ट्रैक्टर एशोसिऐसन के अध्यक्ष धनंजय सिंह समेत एसोशिएशन के पदाधिकारी पत्रकारों से रूबरू हुए इस दौरान वर्तमान में ठेकेदारों की समस्या को सामने रखते हुए कहा कि राज्य विद्युत कंपनी द्वारा अब बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 5 से 10 करोड़ की बड़ी-बड़ी निविदा जारी की जा रही है।जिसका सीधा असर स्थानीय ठेकेदारों को और उनके यहां कार्यरत लगभग 5000 ठेका श्रमिकों पर पड़ेगा।

वही बड़ी कंपनियां अपने साथ बाहरी मजदूरों लेकर आएंगे जिससे स्थानीय श्रमिकों के साथ छलावा होना संभव है ।ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब कोरबा जिला जो सबसे अधिक रोजगार देता था वहां से सर्वाधिक पलायन का रिकॉर्ड भी बन जाए।
हालांकि उद्योग मंत्री द्वारा इस समस्या के निदान को लेकर ठेकेदारों को आश्वस्त किया है।लेकिन विद्युत कंपनी के जवाबदार अधिकारी फिलहाल इस मामले में चुप्पी साधे हुए है।

छत्तीसगढ़
फूलो देवी नेताम का कोंडागांव में भव्य स्वागत:दोबारा राज्यसभा सांसद बनने के बाद पहली बार नगर पहुंचीं, कार्यकर्ताओं ने लड्डू से तौलकर खुशी जाहिर की
कोंडागांव,एजेंसी। बस्तर की आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर राज्यसभा सांसद बनाया है। दोबारा सांसद बनने के बाद वो कोंडागांव पहुंचीं। उनके नगर आगमन पर फरसगांव में कोंडागांव जिला कांग्रेस कमेटी और फरसगांव ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने भव्य स्वागत किया।

केसकाल फरसगांव पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़े, मांदरी नाचा और पटाखों के साथ उनका स्वागत किया। उन्हें रेस्ट हाउस ले जाया गया, जहां फूलमालाओं और गुलदस्तों से उनका अभिनंदन किया गया। कार्यकर्ताओं ने लड्डू से तौलकर अपनी खुशी व्यक्त की।
फूलो देवी नेताम ने कहा कि वह बस्तर की बेटी और बहू हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि वह जनपद सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष, विधायक और राज्यसभा सांसद बनीं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को एक बार फिर राज्यसभा सांसद बनने का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया।
सांसद ने कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, सचिन पायलट, दीपक बैज, भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव सहित सभी वरिष्ठ नेताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने क्षेत्र की जनता, सभी कांग्रेसजनों और महिला कांग्रेस के प्रत्येक पदाधिकारी-सदस्य को भी धन्यवाद दिया।
नेताम ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पार्टी है। एक साधारण आदिवासी परिवार की बेटी होने के बावजूद, कांग्रेस पार्टी के कारण ही वह राजनीति में इतने बड़े मुकाम तक पहुंच पाई हैं।


छत्तीसगढ़
कांग्रेस ने 7000 रुपए बोरा तेंदूपत्ता खरीदने की मांग:विधायक विक्रम मंडावी ने कहा- नीति नहीं बदली तो ठप होगा संग्रहण, भुगतान व्यवस्था बड़ी समस्या
बीजापुर,एजेंसी। बीजापुर से कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने 5500 से बढ़ाकर 7000 पर करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि, अगर तेंदूपत्ता नीति में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में संग्रहण पूरी तरह ठप हो सकता है। एक तरफ ‘नक्सल मुक्त बस्तर’ का दावा कर रही है, दूसरी तरफ आदिवासी संग्राहकों की बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।

मंडावी ने कहा कि, तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत भुगतान की वर्तमान व्यवस्था है। बैंक खातों के माध्यम से भुगतान करने की नीति जमीनी स्तर पर कारगर साबित नहीं हो रही है। बीजापुर जिले के कई दूरस्थ और अंदरूनी इलाकों में आज भी बैंकिंग सुविधाएं या तो उपलब्ध नहीं हैं या बेहद सीमित हैं।
ऐसे में संग्राहकों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनका रुझान इस काम से लगातार घट रहा है। उन्होंने मांग की कि पहले की तरह कैश भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि संग्राहकों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल सके और उनका भरोसा बना रहे।

फाइल फोटो
दर बढ़ाने की मांग, रू.5500 से रू.7000 प्रति बोरा
विधायक ने तेंदूपत्ता की मौजूदा दर को भी अपर्याप्त बताया। वर्तमान में रू.5500 प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी हो रही है, जबकि उन्होंने इसे बढ़ाकर ₹7000 प्रति बोरा करने की मांग की है। मंडावी का कहना है कि महंगाई और बढ़ती लागत को देखते हुए मौजूदा दर संग्राहकों के हित में नहीं है।
उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण भी लोग इस कार्य से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि पिछले दो वर्षों में तेंदूपत्ता संग्रहण में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो न सिर्फ संग्राहकों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि राज्य के राजस्व और वन आधारित अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
क्या है छत्तीसगढ़ की वर्तमान तेंदूपत्ता नीति
खरीदी व्यवस्था: छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से सहकारी मॉडल पर वन विभाग द्वारा खरीदी की जाती है।
संग्रहण दर में वृद्धि: सरकार ने प्रति मानक बोरा रू.1500 की बढ़ोतरी करते हुए दर को रू.5500 किया है।
चरणपादुका योजना: वन विभाग द्वारा महिला संग्राहकों को जूते (चरणपादुका) दिए जा रहे हैं।
बीमा और सामाजिक सुरक्षा: ‘राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’ के तहत 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। फड़ मुंशी को भी बीमा दायरे में शामिल किया गया है।
शिक्षा प्रोत्साहन: संग्राहक परिवारों के मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए रू.15,000 से रू.25,000 तक की छात्रवृत्ति दी जा रही है।
उत्पादन में योगदान: देश के कुल तेंदूपत्ता उत्पादन में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी लगभग 20% है।

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