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छत्तीसगढ़

गरियाबंद सरप्राइज ऑपरेशन:4 महीने से मटाल की पहाड़ी पर छिपा था बालाकृष्णा, सटीक लोकेशन मिलते ही घुसी फोर्स, 8 महीने में 28 नक्सली ढेर

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गरियाबंद,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार (11 सितंबर) को हुई मुठभेड़ में 10 नक्सलियों को ढेर कर फोर्स वापस लौट आई है, हालांकि सर्चिंग अभी जारी है। इस एनकाउंटर के बाद जवानों ने हथियार लेकर जश्न मनाया।

वहीं,मारे गए बालकृष्ण, प्रमोद और विमल वेकेंट समेत कई नक्सलियों के परिजन गरियाबंद गरियाबंद शव लेने पहुंचे हैं। पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस उनके शव को परिजनों को सौंप देगी।

रायपुर रेंज के IG अमरेश मिश्रा ने बताया कि गुरुवार (11 सितंबर) को मैनपुर ब्लॉक के गांव मटाल में जहां मुठभेड़ हुआ वहां, बालाकृष्णा पिछले 4 महीने से छिपकर बैठा था। जिसकी सटीक लोकेशन मिलते ही फोर्स ने घुसकर नक्सलियों को मार गिराया।

गरियाबंद में 10 नक्सलियों को ढेर करने के बाद लौटने की तैयारी में फोर्स।

गरियाबंद में 10 नक्सलियों को ढेर करने के बाद लौटने की तैयारी में फोर्स।

8 महीने में 28 नक्सली मारे गए, 21 का सरेंडर

जानकारी के मुताबिक, जिले में पिछले 8 महीने में पुलिस ने दो सीसी मेंबर समेत 28 नक्सलियों को मार गिराया है। इस दौरान 21 नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है।

गुरुवार (11 सितंबर) को मैनपुर ब्लॉक के गांव मटाल में हुई मुठभेड़ में मारा गया मनोज ओडिशा स्टेट कमेटी का सदस्य था। उस पर 6 राज्यों में 1.80 करोड़ रुपए का इनाम था। साथ ही ओडिशा कैडर का लीडर प्रमोद भी मारा गया, जिस पर 1.20 करोड़ का इनाम था।

इसके अलावा टेक्निकल टीम का सदस्य विमल भी मारा गया, जो रेडियो और अन्य हथियार बनाने का काम करता था। ओडिशा कमेटी में अब केवल एक सीसी मेंबर गणेश उईके बचा है। पहले के दो प्रमुख सदस्य चलपति और मनोज गरियाबंद में मारे जा चुके हैं।

स्टेट और जोनल कमेटी के सदस्य भी मारे गए

स्टेट कमेटी के 7 सदस्यों में से 4 – प्रमोद, कार्तिक, जयराम और विमल को गरियाबंद पुलिस ने मार गिराया है। जोनल मिलिट्री कमेटी के दो सदस्यों में से एक सत्यम गावड़े भी मारा जा चुका है।

क्षेत्र में 5 एरिया कमेटी सक्रिय हैं, जिनमें सुना बेड़ा एरिया कमेटी सबसे बड़ी है। यह कमेटी ओडिशा के नूआपाड़ा जिले में सबसे ज्यादा सक्रिय है। शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने से यह कमेटी भी कमजोर पड़ने की स्थिति में है। सुरक्षा बलों के अनुसार बॉर्डर पर नक्सलियों का लगभग 70 प्रतिशत सफाया हो चुका है।

जवानों ने हथियार लेकर जश्न मनाया।

जवानों ने हथियार लेकर जश्न मनाया।

IG अमरेश मिश्रा ने बताया कैसे किया ऑपरेशन लॉन्च

रायपुर रेंज के IG बस्तर अमरेश मिश्रा ने बताया कि बढ़ते दबाव की वजह से नक्सली अब गरियाबंद में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे थे, क्योंकि यह इलाका उनके लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। यहां मुठभेड़ कम होती है। इसी कारण गरियाबंद पुलिस लगातार नक्सलियों को ट्रैस करने की कोशिश कर रही थी। जंगल और पहाड़ों में सरप्राइज ऑपरेशन किए जा रहे हैं।

इस दौरान करीब 12-13 बार फोर्स का नक्सलियों से सामना हुआ, मुठभेड़ भी हुई। लेकिन कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी। पुलिस जंगल से लेकर बॉर्डर तक मुखबिरों से लगातार संपर्क बनाए हुए थी और नक्सलियों की मूवमेंट की जानकारी जुटाई जा रही थी। तकनीकी टीम भी नक्सलियों को ट्रैक करने की कोशिश कर रही थी।

बुधवार (10 सितंबर) दोपहर को टेक्निकल टीम से सूचना मिली कि बड़ी संख्या में नक्सली मैनपुर के मटाल पहाड़ियों में छिपे हुए हैं। टीम ने सटीक लोकेशन साझा की, जो सबसे बड़ी सूचना थी। बीते 4 महीने से बालकृष्णा की इस क्षेत्र में सक्रियता की सूचनाएं मिलती रही थी। इस बार एडवांस तकनीक से उसकी मौजूदगी के प्रमाण इकट्ठा किए गए थे।

सूचना मिलते ही एसपी के साथ मिलकर एक बड़ा ऑपरेशन प्लान किया गया। 400 से ज्यादा जवानों की 10 टीम बनाई गई और उन्हें शाम ढलते ही अलग-अलग रास्तों से मटाल की ओर खाना किया गया। भारी बारिश भी हो रही थी।

इसके बीच जवान जंगल से होते हुए मटाल पहाड़ के पास पहुंचे और चारों ओर से पहाड़ को घेरने लगे। तभी नक्सलियों को जवानों के आने की भनक लग गई। उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने तुरंत पोजीशन लेकर जवाबी कार्रवाई की।हम लगातार जवानों के संपर्क में थे और मौके से जानकारी लेते हुए उन्हें जरूरी निर्देश भी देते रहे।

गुरुवार रात तक फायरिंग जारी रही। इस दौरान नक्सलियों ने धमाका भी किया। अंधेरे और बारिश के कारण हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। जवानों के लिए यह बेहद कठिन परिस्थिति थी। हम भी पूरी रात वार रूम में बैठे रहे और लगातार जवानों से बातचीत करते रहे।

शुक्रवार सुबह एक बार फिर फायरिंग शुरू हुई, लेकिन नक्सली भाग निकले। ऑपरेशन के बाद 10 नक्सलियों के शव बरामद किए गए। इनमें सेंट्रल कमेटी का सदस्य मनोज उर्फ मोडेम बालकृष्णा भी शामिल है। इस ऑपरेशन के बाद से फोर्स का मोरल हाई है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने निकली छत्तीसगढ़ की बेटी, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएं

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रायपुर/जांजगीर-चांपा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले की युवा पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास को उनके आगामी माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास से मुलाकात के दौरान कहा कि आगामी 9 अप्रैल को सुश्री अमिता विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के संकल्प के साथ काठमांडू के लिए रवाना हो रही हैं। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि की यात्रा नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं, साहस और आत्मविश्वास की ऊंची उड़ान है।

उन्होंने कहा कि अमिता का यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प अटल हो, तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं रहती। प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नए मानक स्थापित कर रही हैं और छत्तीसगढ़ को नई पहचान दे रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अमिता श्रीवास ने वर्ष 2021 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माउंट किलिमंजारो को फतह कर पहले ही अपनी क्षमता और दृढ़ता का परिचय दिया है। उनका यह सतत प्रयास न केवल उपलब्धि है, बल्कि प्रदेश की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अमिता अपने इस साहसिक अभियान में सफलता प्राप्त कर विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर देश का तिरंगा फहराएंगी और छत्तीसगढ़ सहित पूरे राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगी।

मुख्यमंत्री ने सुश्री अमिता श्रीवास को इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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छत्तीसगढ़

अमित जोगी की सजा पर सिंहदेव का बयान:कहा- तकनीकी आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अपील, 20 अप्रैल को होगी सुनवाई

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मुंगेली,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में जेसीसीजे प्रमुख अमित जोगी को बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अब इस पर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का बयान सामने आया है। मुंगेली के लोरमी में एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे सिंहदेव ने कहा कि अमित जोगी ने बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है।

सिंहदेव ने बताया कि उन्होंने सुना है कि यह अपील किसी तकनीकी आधार पर की गई है। उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस बात को स्वीकार कर राहत देगा या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही पता चलेगा।

गौरतलब है कि रामावतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिविजनल बेंच ने सुनाया था।

अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। जुर्माना न देने पर उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और इसकी अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

जोगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो आदेशों को चुनौती दी गई है। पहला, वह आदेश जिसमें सीबीआई को अपील करने की अनुमति दी गई थी, और दूसरा, हाईकोर्ट का वह फैसला जिसमें उन्हें हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

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छत्तीसगढ़

महिला आयोग ने BSP मैनेजमेंट को लगाई फटकार:कर्मचारी के 2 महिलाओं से अवैध संबंध,पत्नी-बच्चों को नहीं दे रहा भरण-पोषण, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की सिफारिश

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने सोमवार को महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय 390वीं और रायपुर जिले की 179वीं जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें कई गंभीर मामलों पर विस्तृत सुनवाई हुई।

आरोप लगा कि, BSP अपने पुरुष कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय मामलों की लिपापोती करता है। इस पर महिला आयोग ने BSP के शीर्ष अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।

BSP को आयोग की कड़ी फटकार

भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से जुड़े मामले में आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई। आरोप है कि, एक कर्मचारी दो महिलाओं से अवैध संबंध रखते हुए पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण नहीं दे रहा, लेकिन BSP प्रबंधन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

आयोग ने कहा कि, सुनवाई के दौरान BSP अधिकारी भरण-पोषण दिलाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन बाद में मामले को दबा दिया जाता है। BSP की ओर से यह तर्क दिया गया कि, कर्मचारी ने लिखित में मना कर दिया है, इसलिए वेतन से राशि नहीं दी जा सकती। इस पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि इस तरह का रवैया यह संदेश देता है कि BSP में कार्यरत कर्मचारी अपनी पत्नी-बच्चों को छोड़ सकते हैं और संस्थान कोई कार्रवाई नहीं करेगा। इस पर आयोग ने BSP के शीर्ष अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।

पति-पत्नी विवाद में महिला को FIR की सलाह

एक केस में महिला अपने ससुराल में रहना चाहती है, लेकिन पति और ससुराल पक्ष उसे साथ रखने को तैयार नहीं है। आरोप है कि महिला पर दबाव बनाकर स्टाम्प पेपर पर लिखकर तलाक का दावा किया गया, जिसे आयोग ने अमान्य बताया।

साथ ही, महिला को न तो भरण-पोषण दिया जा रहा है और न ही उसका स्त्रीधन लौटाया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह वैधानिक तलाक नहीं है और महिला चाहें तो सभी के खिलाफ FIR दर्ज करा सकती है।

बेटियों को मिलेगा संपत्ति में हक

दूसरे मामले में महिला ने अपने दिवंगत पति की संयुक्त संपत्ति में अपनी दो बेटियों के हिस्से की मांग की। देवर ने बेटियों का हक स्वीकार किया। आयोग ने निर्देश दिया कि, महिला तुरंत संपत्ति पर कब्जा ले और तहसील में नामांतरण कराए। प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग को सूचना देने को कहा गया।

भारत माला मुआवजा विवाद में खाते पर रोक की सिफारिश

एक अन्य केस में भारत माला परियोजना के तहत करीब 2.5 एकड़ जमीन का 1.64 करोड़ रुपए मुआवजा अनावेदक के खाते में जमा है। महिला ने इसमें अपने हिस्से की मांग की।

आयोग ने कलेक्टर दुर्ग को पत्र लिखकर बैंक ऑफ बड़ौदा, गंजपारा शाखा में संबंधित खाते के लेनदेन पर रोक लगाने की अनुशंसा की, ताकि सुलह प्रक्रिया पूरी हो सके। अगली सुनवाई में सभी पक्षों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

पुलिस पर गंभीर आरोप, जांच के आदेश

कबीरधाम जिले के पिपरिया थाना से जुड़े मामले में पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे। शिकायत के अनुसार, एक आरक्षक और उसकी पत्नी (महिला आरक्षक) ने फर्जी FIR दर्ज कराकर पड़ोसी महिला, उसकी बहू और 4 माह के बच्चे को दो महीने तक जेल में डलवा दिया। आयोग ने पाया कि पुलिस अधिकारियों ने अपने ही विभाग के कर्मचारी के पक्ष में कार्रवाई की और पीड़ितों की शिकायत दर्ज नहीं की।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण, शंकर नगर को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं और एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही DGP को भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ पद के दुरुपयोग पर कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

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