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सोना ₹2,685 गिरकर ₹1.56 लाख पर आया:चांदी दो दिन में ₹20 हजार सस्ती होकर ₹2.48 लाख पर आई, ईरान जंग का असर
नई दिल्ली,एजेंसी। सोने-चांदी में आज लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,685 रुपए गिरकर 1.56 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 13 मार्च को सोना 1.58 लाख रुपए प्रति 10g था।
वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 11,777 रुपए घटकर 2.48 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले शुक्रवार को इसकी कीमत 2.60 लाख रुपए किलो थी। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना दो कारोबारी दिन में 4,589 और चांदी 19,590 सस्ती हुई है। इससे पहले 12 मार्च को सोना 1.60 लाख और चांदी 2.68 लाख पर थी।
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें
- ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं।
- खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है।
- लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं।
- पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।
ऑल टाइम हाई से 1.33 लाख रुपए गिरी चांदी
इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 20,407 रुपए सस्ता हो चुका है।
वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 46 दिन में चांदी 1.37 लाख रुपए सस्ती हो गई है।
कीमतें गिरने की 3 बड़ी वजहें
- ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम: अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ओर ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना कम कर दी है। माना जा रहा है कि मार्च की मीटिंग में दरें नहीं घटेंगी।
- कैश पर बढ़ा भरोसा: अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग से मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशक सोने के बजाय नकद हाथ में रखना पसंद कर रहे हैं। इससे सोने की मांग पर असर पड़ा है।
- महंगा तेल और शेयर बाजार की गिरावट: मिडिल ईस्ट जंग की वजह से तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे दुनियाभर के शेयर बाजारों में बिकवाली हो रही है। इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी हो रहा है।
एक्सपर्ट व्यू- अभी सोने-चांदी में निवेश से बचें
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक लोग शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए सोने-चांदी में मुनाफा वसूली कर रहे हैं। इससे सोने-चांदी के दामों में गिरावट है।

अजय केडिया अनुसार आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।

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1000 से 7500 रुपए हो सकती है पेंशन, ATM से मिलेगा PF का पैसा, बड़े बदलाव की तैयारी में EPFO
मुंबई, एजेंसी। अगर आप प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं और आपकी सैलरी से PF कटता है, तो आने वाले समय में आपको बड़ी राहत मिल सकती है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) अपने करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए कई अहम बदलावों पर काम कर रहा है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है।

पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी की चर्चा
Employees’ Pension Scheme (EPS-95) के तहत न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपए से बढ़ाकर 7,500 रुपए करने पर विचार किया जा रहा है। श्रमिक संगठनों की लंबे समय से यह मांग रही है और संसदीय समिति भी इसकी सिफारिश कर चुकी है। अगर यह लागू होता है, तो पेंशन में करीब 7.5 गुना बढ़ोतरी हो सकती है।
ATM और UPI से निकासी संभव
EPFO अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘EPFO 3.0’ को लॉन्च करने की तैयारी में है। इसके लागू होने के बाद PF खाता बैंक खाते की तरह काम कर सकता है। संभावना है कि सब्सक्राइबर्स ATM के जरिए सीधे PF से पैसे निकाल सकेंगे।
साथ ही, UAN को UPI से लिंक करने की सुविधा भी मिल सकती है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत पैसे ट्रांसफर किए जा सकेंगे।
निकासी पर सीमा तय होगी
नई व्यवस्था में पूरी राशि निकालने की अनुमति नहीं होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, सदस्य अपने कुल PF बैलेंस का लगभग 75% हिस्सा एडवांस के तौर पर निकाल सकेंगे, जबकि 25% राशि भविष्य के लिए खाते में बनी रहेगी।
बंद खातों के लिए E-PRAAPTI पोर्टल
निष्क्रिय PF खातों को सक्रिय करने के लिए EPFO ने नया ‘E-PRAAPTI’ पोर्टल पेश किया है। यह प्लेटफॉर्म आधार आधारित होगा, जिससे यूजर्स अपने पुराने खातों को आसानी से खोजकर मौजूदा UAN से लिंक कर सकेंगे।
क्लेम सेटलमेंट में रिकॉर्ड तेजी
वित्त वर्ष 2025–26 में EPFO ने 8.31 करोड़ क्लेम सेटल किए, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। करीब 71% एडवांस क्लेम 3 दिन के भीतर निपटाए गए, जिससे प्रोसेस पहले से ज्यादा तेज और आसान हो गया है।
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शेयर बाजार में FPI की बिकवाली तेज, 2026 में विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹1.08 लाख करोड़ से ज्यादा
मुंबई, एजेंसी। भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अब तक 1.08 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी कर ली है, जो पूरे 2025 की कुल निकासी से भी अधिक है। यह आंकड़ा निवेशकों के घटते भरोसे को साफ दर्शाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक रुपए की कमजोरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस (AI) सैक्टर में सीमित निवेश अवसरों ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इन कारकों के चलते उन्होंने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई है। एशियाई और उभरते बाजारों में भारत से निकासी का स्तर काफी ऊंचा रहा है। दक्षिण कोरिया के बाद भारत दूसरा सबसे ज्यादा बिकवाली वाला बाजार बना हुआ है। यह 2026 के पहले चार महीनों में अब तक की सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है।

2024 से जारी है गिरावट का ट्रैंड
विदेशी निवेशकों की यह दूरी नई नहीं है। सितंबर 2024 से ही FPI का रुख कमजोर पड़ने लगा था। कंपनियों की कमाई की तुलना में शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन ने निवेशकों को चिंतित किया। 2025 में भी 1.6 लाख करोड़ रुपए की रिकॉर्ड निकासी दर्ज की गई थी। मार्च 2026 में यह बिकवाली सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। AI से जुड़े वैश्विक बाजार जैसे ताइवान और दक्षिण कोरिया में भी निवेशकों ने पैसा निकाला।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया में 35.3 अरब डॉलर, भारत में 19.75 अरब डॉलर और ताइवान में 8.5 अरब डॉलर की निकासी हुई।
कहां जा रहा है पैसा
जहां भारत और एशियाई बाजारों से पैसा निकल रहा है, वहीं रूस और ब्राजील जैसे बाजारों में विदेशी निवेश बढ़ा है। इन देशों में क्रमशः 20.6 अरब डॉलर और 11.8 अरब डॉलर का निवेश आया है। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (डी.आई.आई.) ने बाजार को सहारा दिया है।
29 अप्रैल को जहां एफ.पी.आई. ने करीब 2,468करोड़ रुपए के शेयर बेचे, वहीं डी.आई.आई. ने लगभग 2,262 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। खासकर वे कंपनियां जो चौथी तिमाही (क्यू-4) में उम्मीद से बेहतर नतीजे दे रही हैं और आगे के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं, उनमें निवेश के मौके बन सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भारतीय बाजार के लिए चिंता का संकेत है, लेकिन घरेलू निवेशकों का समर्थन और मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में समझदारी से निवेश करना ही सबसे बड़ा हथियार साबित होगा।
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Why Market Crash: 5 बड़े कारणों से धड़ाम हुआ मार्केट, सेंसेक्स 582 अंक टूटा
मुंबई, एजेंसी। आज शेयर बाजार की शुरुआत लाल निशान पर हुई थी। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में दिनभर तेज गिरावट रही। हालांकि कारोबार बंद होने से पहले मार्केट ने रिकवरी की। सेंसेक्स 1151.22 अंक फिसल कर 76,345.14 पर आ गया, वहीं निफ्टी में 355.15 अंक की गिरावट आई।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 582.86 अंक टूटकर 76,913.50 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 180.10 अंक गिरावट के साथ 23,997.55 के स्तर पर बंद हुआ।

Why Market Crash: 5 बड़ी वजह
कच्चे तेल में उछाल
कच्चा तेल उछलकर प्रति बैरल $120 के भाव पर पहुंच गया और इसने वैश्विक मार्केट में हाहाकार मचा दिया। कच्चे तेल की उबाल ने महंगाई बढ़ने की रफ्तार, राजकोषीय संतुलन और करेंसी की स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है जिसने इक्विटी में रिस्क लेने की क्षमता को सीमित किया है।
कमजोर वैश्विक संकेतों का असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने वैश्विक बाजारों पर दबाव बनाया है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते अमेरिका से लेकर एशिया तक प्रमुख बाजारों में गिरावट देखी गई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।
रुपए में गिरावट
कच्चे तेल ने भारतीय करेंसी पर ऐसा दबाव बनाया कि एक डॉलर का भाव रू.95.26 तक फिसल गया। 30 मार्च के बाद पहली बार यह 95 के पार गया है।
बाजार में चौतरफा बिकवाली
शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान भारी बिकवाली देखने को मिली। Nifty PSU Bank, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं ऑटो, एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक और रियल्टी सेक्टर भी दबाव में रहे।
India VIX में उछाल
मार्केट की घबराहट को मापने वाले India VIX में उछाल ने मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत दिया तो निवेशक घबरा गए और ताबड़तोड़ शेयर बेचने लगे। India VIX की बात कराई यह 5% से अधिक उछलकर 18 के पार चला गया।
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