विदेश
VOPM रिपोर्ट में Shocking खुलासाः पाकिस्तान पंजाब में 1 लाख से ज्यादा महिलाएं लापता, हर केस के पीछे खौफनाक सच
इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने महिलाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। Voice of Pakistan Minority (VOPM) के अनुसार, साल 2021 से 2025 के बीच 1,05,571 महिलाओं के लापता होने के मामले दर्ज किए गए। इनमें से 70,773 मामले अपहरण से जुड़े बताए गए हैं। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 80,767 मामलों को बाद में बंद (कैंसल) कर दिया गया। लेकिन अधिकार संगठन का कहना है कि केस बंद होने का मतलब यह नहीं कि परिवारों को सच्चाई या न्याय मिल गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 77% मामलों (लगभग 80,000 महिलाएं) अदालत में पेश होकर यह कहती हैं कि उन्होंने अपनी मर्जी से घर छोड़ा, अक्सर शादी के लिए। कानूनी तौर पर इसे “सहमति” मान लिया जाता है, लेकिन VOPM ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये बयान अक्सर सामाजिक दबाव, डर, पारिवारिक मजबूरी और सीमित विकल्पों के कारण दिए जाते हैं। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि यह वास्तव में स्वतंत्र निर्णय है। रिपोर्ट के अनुसार 3,258 महिलाएं अब भी लापता हैं और 3,864 मामले जांच के अधीन हैं। 1,432 मामलों में आरोपी पहचाने गए, लेकिन केस लंबित हैं। 1,820 मामले कानूनी देरी के कारण अटके हुए हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतने बड़े आंकड़ों के बीच सिर्फ 612 महिलाओं को ही बरामद कर अदालत में पेश किया गया, जो बेहद कम संख्या है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि हर केस एक परिवार की पीड़ा और इंतजार की कहानी है। हजारों परिवार आज भी अपनी बेटियों और बहनों के लौटने की उम्मीद में दरवाजे ताक रहे हैं। VOPM ने चेतावनी दी है कि इतने बड़े आंकड़ों का “सामान्य” हो जाना समाज के लिए खतरनाक संकेत है। यह मुद्दा सिर्फ कानून या प्रशासन का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, अधिकार और सम्मान से जुड़ा है।
देश
Cannes में राजस्थान की बेटी ने रचा इतिहास, घूंघट ओढ़ रेड कार्पेट पर उतरीं Ruchi Gurjar…महिलाओं की आजादी के लिए उठाई आवाज
कान, एजेंसी। जहां एक तरफ बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियां लाखों-करोड़ों की ड्रेस पहनकर कान फिल्म फेस्टिवल में शिरकत कर रही हैं। वहीं इसी मंच पर राजस्थान की बेटी ने एक नया इतिहास रच दिया है। आपको बता दें कि अभिनेत्री रुचि गुज्जर ने मॉडर्न ड्रेस न पहनते हुए उन्होंने राजपूती पोशाक पहनकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। इतना ही नहीं घाघरा चोली पहनकर उन्होंने साथ में घुघंट भी किया है। रूचि गुज्जर का यह लुक पूरे सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है। इसी के साथ सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज के साथ रूचि के एक कैप्शन भी लिखा है। उन्होंने इस कैप्शन में बताया है कि लाइमलाइट लूटने के लिए उन्होंने घूघंट नहीं किया बल्कि इसके पीछे मकसद कुछ और ही था। तो चलिए देखते हैं रूचि गुज्जर की ट्रेंडिंग तस्वीर-


रूचि गुज्जर ने इंटरनेशनल मंच पर राजस्थान की परंपरा और संस्कृति की एक नई कहानी लिख दी है। यह पोशाक पहनकर वो हर जगह चर्चा का विषय बन चुकी हैं।

फोटोज के साथ उन्होंने लिखा है- ”मेरा घूंघट चुप्पी नहीं, विरोध है Freedom From Ghughat”

कान फेस्टिवल में पहुंचकर उन्होंने महिलाओं के लिए आवाज उठाई है। इसी के साथ उन्होंने कहा है कि हमें घूंघट से आजादी चाहिए, ये मेरी चुप्पी नहीं है।

अपने इस खास लुक के जरिए रुचि गुज्जर ने सिर्फ फैशन नहीं दिखाया, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने घूंघट प्रथा के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए महिलाओं की स्वतंत्रता और पहचान की बात की।

आपको बता दें कि रूचि गुज्जर ने जो ये पोशाक पहनी है वो रूपा शर्मा द्वारा डिज़ाइन की गई है। गुलाबी रंग की इस लहंगा-चोली पर सिल्वर जरी वाली कढ़ाई की गई है।

इसी के साथ उन्होंने कोई सोने-चांदी के गहने नहीं बल्कि राजस्थानी गहने, चूड़ियां पहनी हैं। कान फेस्टिवल में उन्होंने घूघंट के साथ एंट्री की लेकिन बाद में इसे हटा दिया।
कैसे फेमस हुई Ruchi Gurjar ?
इसी के साथ आपको बता दें कि रूचि गुज्जर का पिछले साल वाला लुक भी काफी वायरल हुआ था। पिछली बार उन्होंने अपने गले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का हार पहना था। इसी नेकलेस के बाद उनकी लोकप्रियता पहले से ज्यादा बढ़ गई।
विदेश
ईरान की संसद में विवादित प्रस्तावः ट्रंप-नेतन्याहू की हत्या करने वाले को मिलेगा ₹500 करोड़ का ईनाम !
तेहरान, एजेंसी। ईरान (Iran) में इन दिनों एक बेहद विवादित प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद में ऐसा बिल लाने की तैयारी की जा रही है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हत्या करने वाले को लगभग 58 मिलियन डॉलर (रू.500 करोड़) का इनाम देने की बात कही गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम फरवरी में तेहरान पर हुए हमलों के बाद सामने आया है। दावा किया गया कि उन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) मारे गए थे।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी (Ebrahim Azizi) ने कथित तौर पर कहा कि संसद जल्द इस प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है। एक अन्य सांसद महमूद नबावियन( Mahmoud Nabavian) ने भी ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ “कार्रवाई” की बात कही। इसी बीच ईरान समर्थक कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर समूहों ने भी “Kill Trump” जैसे अभियान चलाने के दावे किए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशें भी जारी हैं। पाकिस्तान और खाड़ी देशों की मध्यस्थता से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इजराइल और अमेरिका पहले ही ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हालांकि अभी तक ईरानी सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। कई विश्लेषक इसे राजनीतिक दबाव और प्रचार रणनीति भी मान रहे हैं।
विदेश
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने दिखाई परमाणु ताकत ! 64000 सैनिकों संग न्यूक्लियर ड्रिल की शुरू, 200 मिसाइल L व 13 पनडुब्बियां भी शामिल
मॉस्को, एजेंसी। रूस ने मंगलवार से तीन दिन का बड़ा परमाणु सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस दौरान बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल लॉन्च का अभ्यास भी किया जाएगा। इस अभ्यास में करीब 64 हजार सैनिक और 7,800 सैन्य उपकरण शामिल हैं। रूस का कहना है कि यह अभ्यास युद्ध जैसी स्थिति में परमाणु बलों की तैयारी जांचने के लिए किया जा रहा है।

रूस ने बताया कि ड्रिल में 200 से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर, 140 से ज्यादा विमान, 73 युद्धपोत और 13 पनडुब्बियां शामिल हैं। इनमें 8 रणनीतिक परमाणु पनडुब्बियां भी हैं। रूस की रॉकेट फोर्स, नॉर्दर्न फ्लीट, पैसिफिक फ्लीट और लंबी दूरी की एयर फोर्स इस अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। रूस ने यह भी कहा कि Belarus में तैनात सामरिक परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी इस दौरान दी जाएगी।
यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया पहले से रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व तनाव और नाटो के साथ बढ़ते टकराव जैसी स्थितियों से गुजर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि रूस का शक्ति प्रदर्शन भी है। माना जा रहा है कि Vladimir Putin पश्चिमी देशों और NATO को रूस की परमाणु ताकत का संदेश देना चाहते हैं। हालांकि रूस का कहना है कि यह एक नियमित सैन्य अभ्यास है।
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