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लॉरेंस गैंग से गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा अलग हुआ:सलमान के घर फायरिंग, बाबा सिद्दीकी-मूसेवाला की हत्या जैसी वारदातें साथ कर चुके

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जालंधर,एजेंसी। देश और विदेश में अपना नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर लॉरेंस का गैंग दो फाड़ हो गया है। कनाडा से लॉरेंस का गैंग संभाल रहा गैंगस्टर गोल्डी बराड़ अब रोहित गोदारा को साथ लेकर अलग हो गया है। इन गैंगस्टरों ने साथ मिलकर सलमान खान के घर पर फायरिंग, सिद्धू मूसेवाला की हत्या, बाबा सिद्दीकी का मर्डर जैसी चर्चित वारदातों को अंजाम दिया था।

लॉरेंस गैंग और पंजाब पुलिस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, एक तरफ गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस और उसका भाई अनमोल बिश्नोई हैं। वहीं, दूसरी तरह कनाडा में बैठा गैंगस्टर गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा हैं। हालांकि इसे लेकर दोनों ओर से कोई बयान नहीं आया है।

बराड़-गोदारा ने लॉरेंस के इशारों पर कई देशों में करवाई वारदातें

गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा वही गैंगस्टर हैं, जिन्होंने विदेश में रहते हुए लॉरेंस के इशारों पर पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में कई वारदातें करवाई हैं। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, फिरौती सहित अन्य कई मामले शामिल हैं।

सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि बराड़ और गोदारा ने मिलकर कनाडा, अमेरिका, यूके, यूरोप में भी लॉरेंस के एंटी गैंग के गुर्गों की टारगेट किलिंग करवाई और खुद भी की। इसमें सबसे बड़ा नाम खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला का खास सुक्खा दुनिके है।

हालांकि दोनों गैंगस्टर एक-दूसरे के खिलाफ कोई वारदात या फिर अन्य कोई गतिविधि नहीं कर रहे हैं, मगर दोनों गैंगस्टरों ने बिना लॉरेंस के वारदातें करवानी शुरू कर दी हैं।

दोनों की विचारधारा बनी गैंग टूटने का कारण

लॉरेंस गैंग से जुड़े कुछ लोगों और पंजाब पुलिस के सूत्रों से पता चला है कि लॉरेंस के लिए काम कर रहे गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का उससे अलग होने का सबसे बड़ा कारण दोनों की विचारधारा है। लॉरेंस भारत में एक हिंदू गैंगस्टर के तौर पर अपने आप को दर्शाता है। जबकि गोल्डी बराड़ के लिंक खालिस्तानी आतंकियों के साथ भी हैं। पंजाब पुलिस की जांच में कई बार सामने आ चुका है कि गोल्डी बराड़ खालिस्तानी आतंकियों के टच में है।

इन 2 घटनाओं में दिखी गैंग की दरार…

1. व्यवसायी की हत्या में लॉरेंस का नाम शामिल नहीं किया

कनाडा के मिसिसॉगा शहर में 14 मई, 2025 को ट्रकिंग सेफ्टी और कम्प्लाइंस व्यवसायी हरजीत सिंह धड्डा को दोपहर के समय गोली मार दी गई। इस मामले में कनाडा पुलिस ने पंजाबी मूल के 2 युवकों को गिरफ्तार किया। इस हत्या की जिम्मेदारी रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ ने ली थी।

कारोबारी धड्डा को फिरौती के लिए कई दिनों से धमकियां मिल रही थी। यह हत्या इसलिए भी खास हो जाती है, क्योंकि यह पहली वारदात थी, जिसकी जिम्मेदारी लेते समय बराड़ और गोदारा ने लॉरेंस गैंग का नाम नहीं लिया।

मिसिसॉगा के ट्रकिंग सेफ्टी और कम्प्लाइंस व्यवसाय चलाने वाले हरजीत सिंह धड्डा। - फाइल फोटो

मिसिसॉगा के ट्रकिंग सेफ्टी और कम्प्लाइंस व्यवसाय चलाने वाले हरजीत सिंह धड्डा। – फाइल फोटो

2. पंचकूला में पहलवान की हत्या में केवल अनमोल का नाम आया

वहीं, हरियाणा के पंचकूला में बीते गुरुवार को देर रात पहलवान सोनू नोल्टा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात खुद को अनमोल बिश्नोई का करीबी बताने वाले पीयूष नाम के युवक ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर की। उक्त वारदात की जिम्मेदारी सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर ली गई। इसमें आरोपियों ने कहा कि यह वारदात अनमोल बिश्नोई के कहने पर की गई।

ऐसा लॉरेंस की ओर से भी पहली बार हुआ है कि किसी वारदात में सिर्फ अनमोल बिश्नोई का नाम लिया गया है। लॉरेंस का पक्ष अब बराड़ की जगह अनमोल को सारे गैंग का कर्ताधर्ता बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है।

सोनू पहलवान की हत्या करने के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर जिम्मेदारी लेते आरोपी। इनसेट में मृतक का फाइल फोटो।

सोनू पहलवान की हत्या करने के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर जिम्मेदारी लेते आरोपी। इनसेट में मृतक का फाइल फोटो।

चारों गैंगस्टरों की बदमाशियों के रिकॉर्ड…

1. गैंगस्टर लॉरेंस: गैंगस्टर लॉरेंस पर करीब 84 FIR दर्ज हैं। 2016 में उसे नेपाल से गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल में ही बंद है। इस वक्त वह गुजरात की साबरमती जेल में बंद है। करीब 9 साल से वह बाहर नहीं आया है। इसके बावजूद देश में हुए कई केसों में उसका नाम आया है। लॉरेंस मूल रूप से पंजाब के फाजिल्का जिले के दुतारावली गांव का रहने वाला है।

लॉरेंस के बड़े केसों में मशहूर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला, राजस्थान के करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव गोगामेड़ी और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी का मर्डर शामिल है। इसके अलावा वह काले हिरण के शिकार के आरोपों से घिरे बॉलीवुड स्टार सलमान खान के भी पीछे पड़ा है।

2. अनमोल बिश्नोई: अनमोल बिश्नोई उर्फ भानू, लॉरेंस का भाई है। NIA ने मोस्ट वांटेड मानते हुए इस पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। इस वक्त वह अमेरिका की इमिग्रेशन विभाग की हिरासत में है। फर्जी पासपोर्ट के जरिए नेपाल के रास्ते दुबई और फिर दुबई से कीनिया और वहां से अमेरिका पहुंचा था। अमेरिका के अलास्का में गिरफ्तारी के बाद अब प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चल रही है।

अनमोल का नाम सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, सलमान खान के घर पर गोलीबारी, बाबा सिद्दीकी हत्या की साजिश सहित 20 से ज्यादा केस दर्ज हैं। लॉरेंस के कहने पर अनमोल ने पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में कई वारदातें करवाई हैं। अनमोल मूल रूप से पंजाब के फाजिल्का का रहने वाला है।

3. गोल्डी बराड़: पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब के रहने वाले सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ का जन्म 1994 में हुआ था। गोल्डी के पिता शमशेर सिंह पंजाब पुलिस में ASI थे। गोल्डी बराड़ लॉरेंस गैंग का एक प्रमुख सदस्य है। वह राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में 20 से ज्यादा हत्याएं करवा चुका है।

गोल्डी स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। इसके बाद उसने वहां की नागरिकता ले ली। गोल्डी तब चर्चा में आया, जब उसने पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की मानसा में हत्या करवा दी। इसके बाद लॉरेंस के इशारों पर 20 से ज्यादा हत्याएं करवाईं। दर्जनों लोगों से रंगदारी मांगी और कई कारोबारियों के घर पर फायरिंग करवाई।

गोल्डी पहले यूके, फिर थाईलैंड और अब कनाडा में बैठकर वारदातें करवा रहा है। जून 2022 में बराड़ के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। जनवरी 2024 में आतंकवादी घोषित हुआ। उस पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई।

4. रोहित गोदारा: राजस्थान का कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा बीकानेर के लूणकरणसर का रहने वाला है। असली नाम रावताराम स्वामी है। पंजाब के सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड, राजस्थान में करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी, गैंगस्टर राजू ठेहट मर्डर सहित अन्य कई प्रमुख हत्याओं का मास्टरमाइंड है।

गोदारा पर देश में करीब 35 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। 13 जून 2022 को दिल्ली से फर्जी पासपोर्ट के जरिए दुबई भाग गया था। अब वह पुर्तगाल में है। वह गोल्डी के साथ मिलकर गैंग चला रहा है।

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सोनिया बोलीं-खामेनेई की हत्या पर भारत की चुप्पी से हैरानी:यह न्यूट्रल रहना नहीं, जिम्मेदारी से पीछे हटना, यह पीएम की ईरान पर हमले की अनदेखी

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नई दिल्ली,एजेंसी। कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा- दिल्ली की चुप्पी हैरान करने वाली है, यह तटस्थता (न्यूट्रल) नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है।

मंगलवार को इंडियन एक्सप्रेस में पब्लिश आर्टिकल में उन्होंने लिखा- 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की एक दिन पहले अमेरिका और इजराइल के टारगेटेड अटैक में हत्या कर दी गई। जब दो देशों की डिप्लोमैट लेवल की बातचीत चल रही हो, तब एक मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार को दिखाती है।

सोनिया ने लिखा कि भारत सरकार ने न तो हत्या की निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। मोदी ने अमेरिका-इजराइल के हमले को अनदेखा किया, केवल यूएई पर ईरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा की। बाद में पीएम ने ‘गहरी चिंता’ और ‘बातचीत व कूटनीति’ की बात कही। जबकि हमला उस समय हुआ, जब दो देशों के बीच कूटनीतिक प्रक्रिया जारी थी।

सोनिया गांधी के आर्टिकल की बड़ी बातें…

1. बिना युद्ध घोषणा के हत्या

यह हत्या बिना किसी औपचारिक युद्ध की घोषणा और उस समय की गई, जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के मुताबिक, किसी भी देश की सीमाओं या उसकी राजनीतिक आजादी के खिलाफ बल प्रयोग या धमकी देना गलत है। किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की टारगेट किलिंग इन नियमों के खिलाफ है। अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी इस पर आवाज नहीं उठाता तो अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ सकते हैं।

2. प्रधानमंत्री का इजराइल दौरा

हत्या से सिर्फ 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री इजराइल यात्रा से लौटे थे। वहां उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू सरकार के समर्थन की बात दोहराई। यह उस समय हुआ, जब गाजा संघर्ष में बड़ी संख्या में आम नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, मारे जाने पर दुनियाभर में नाराजगी है।

3. ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स देशों का रुख

ग्लोबल साउथ के कई देशों और ब्रिक्स के साझेदार रूस व चीन ने इस मामले में दूरी बनाए रखी है। ऐसे समय में भारत का खुला समर्थन, बिना साफ नैतिक रुख के, गलत संदेश दे सकता है। सोनिया गांधी के अनुसार, इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया भर में दिखेगा।

4. बमबारी और टारगेट किलिंग की निंदा

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ईरान की जमीन पर हुई बमबारी और टारगेट किलिंग की साफ निंदा करती है। ये क्षेत्र और दुनिया के लिए खतरनाक कदम है। पार्टी की ईरान की जनता और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति संवेदनाएं हैं।

5. संविधान का हवाला

भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 में कहा गया है कि देशों के बीच विवाद बातचीत से सुलझाए जाने चाहिए, सभी देशों की बराबरी का सम्मान होना चाहिए और किसी के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। ये सिद्धांत लंबे समय से भारत की विदेश नीति का आधार रहे हैं। मौजूदा चुप्पी इन सिद्धांतों से मेल नहीं खाती।

सोनिया ने किया- भारत और ईरान के संबंधों का जिक्र

सोनिया गांधी ने कहा कि 1994 में OIC के कुछ देशों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की थी। उस समय ईरान ने अहम भूमिका निभाकर उसे रुकवाया, जिससे कश्मीर मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंच सका।

ईरान ने पाकिस्तान सीमा के पास ज़ाहेदान में भारत को कूटनीतिक मौजूदगी की अनुमति दी, जो ग्वादर पोर्ट और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अप्रैल 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने तेहरान दौरे में दोनों देशों के गहरे संबंधों को दोहराया था।

सोनिया का इजराइल-भारत के संबंध और विश्वसनीयता का सवाल

सोनिया ने लिखा कि हाल के सालों भारत-इजराइल संबंध रक्षा, कृषि और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़े हैं। भारत के तेहरान और तेल अवीव दोनों से संबंध हैं, इसलिए वह संयम की अपील कर सकता है। लेकिन यह तभी संभव है जब उसकी विश्वसनीयता बनी रहे और वह सिद्धांत आधारित रुख अपनाए।

सोनिया गांधी ने कहा कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। गल्फ वॉर यमन, इराक और सीरिया जैसे संकटों में भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा इसलिए कर सका, क्योंकि उसे स्वतंत्र और निष्पक्ष देश माना जाता था, न कि किसी शक्ति का प्रतिनिधि।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत की विदेश नीति गुटनिरपेक्षता पर आधारित रही जो निष्क्रिय तटस्थता नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता थी। मौजूदा स्थिति उस रुख के कमजोर पड़ने का संकेत देती है। यदि ईरान के मामले में संप्रभुता की अनदेखी पर भारत स्पष्ट नहीं बोलता, तो छोटे देश भविष्य में उस पर कैसे भरोसा करेंगे?

सोनिया ने संसद में बहस की मांग की

सोनिया गांधी ने कहा कि संसद की अगली बैठक में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की टारगेट किलिंग, उस पर भारत सरकार की चुप्पी और इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कानून व संप्रभुता के सिद्धांतों का कमजोर होने के मुद्दे पर खुली बहस होनी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का विनाश और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता भारत के रणनीतिक और नैतिक हितों से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की बात करता रहा है, जो केवल औपचारिक नारा नहीं, बल्कि न्याय, संयम और संवाद की प्रतिबद्धता है। ऐसे समय में जब नियम-आधारित व्यवस्था दबाव में है, चुप रहना जिम्मेदारी से पीछे हटना है।

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इजराइल-ईरान जंग: मोदी ने ओमान पर हमले की निंदा की,8 खाड़ी देशों से बात की, दुबई-अबूधाबी से 2000 से ज्यादा भारतीय लौटे

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नई दिल्ली,एजेंसी। इजराइल-ईरान जंग का आज चौथा दिन है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाद भारतीय वापिस आ रहे हैं। दुबई और अबूधाबी से मंगलवार शाम तक सात फ्लाइट से 2100 से ज्यादा भारतीय लौट चुके हैं।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन में भारतीयों की सुरक्षा को लेकर 8 खाड़ी देशों के नेताओं से बात की है। पीएम ने आज ओमान के सुल्तान, कतर के अमीर और कुवैत के क्राउन प्रिंस से फोन पर बात वहां हुए हमलों की निंदा की।

एयरस्पेस बंद होने के कारण मंगलवार को दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और चेन्नई एयरपोर्ट पर 250 से ज्यादा इंटरनेशनल फ्लाइट कैंसिल कर दी गईं। इनमें दिल्ली से 80+, मुंबई से 107, बेंगलुरु से 42 और चेन्नई से 30 उड़ानें शामिल हैं।

इंडिगो आज जेद्दाह से हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद के लिए 10 स्पेशल उड़ानें भी चला रहा है। एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मस्कट के लिए उड़ानें शुरू की हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के विरोध में जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन जारी हैं। बांदीपोरा के शादीपोरा में शिया समुदाय ने पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। श्रीनगर दूसरे दिन भी बंद रहा। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को भड़काऊ भाषणों पर सतर्क रहने का निर्देश दिया है।

अबू धाबी से भारत लौटे लोग

अबू धाबी से एक भारतीय परिवार के सुरक्षित दिल्ली पहुंचने पर परिजन ने राहत की सांस ली।

अबू धाबी से एक भारतीय परिवार के सुरक्षित दिल्ली पहुंचने पर परिजन ने राहत की सांस ली।

अबू धाबी से भारत सुरक्षित लौटने पर दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर सेल्फी लेता एक परिवार।

अबू धाबी से भारत सुरक्षित लौटने पर दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर सेल्फी लेता एक परिवार।

अबू धाबी से आए अपने लोगों को मिलकर खुश होता एक परिवार।

अबू धाबी से आए अपने लोगों को मिलकर खुश होता एक परिवार।

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अबू धाबी से लौटी युवती के आंसू झलक उठे।

दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अबू धाबी से लौटी युवती के आंसू झलक उठे।

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भारत के पास सिर्फ 25 दिन का तेल बचा:इजराइल-ईरान जंग के बीच इम्पोर्ट रूट बंद, सरकार नए सप्लायर्स तलाश रही

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नई दिल्ली,एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध के बीच भारत के पास अब सिर्फ 25 दिनों का क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल और रिफाइंड ऑयल का स्टॉक बचा है।

न्यूज एजेंसी ANI ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर यह अपडेट सरकारी सूत्रों के मुताबिक दिया है। हालांकि सरकार अभी पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाएगी।

दरअसल, ईरान ने स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया है। साथ ही ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि इस रूट से अगर कोई भी जहाज गुजरता है, तो उसे आग लगा दी जाएगी। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह रूट दुनिया के ऑयल बिजनेस के लिए सबसे जरूरी माना जाता है।

होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया के कई देशों की तेल सप्लाई पर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत समेत एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर होगा। इस रूट के बंद होने कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। अभी ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5.58% बढ़कर 80.41 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का अभी कोई प्लान नहीं

आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि भारत सरकार का फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की अवेलेबिलिटी और किफायती दाम तय करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

सोमवार को पेट्रोलियम मंत्री ने रिव्यू मीटिंग की थी

इससे पहले सोमवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी तेल कंपनियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की थी। इस बैठक में कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई स्थिति की समीक्षा की गई। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि वे बदलती परिस्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर असर को लेकर सरकार एक्टिव

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सरकार एक्टिव है। वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने एक स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन मीटिंग की थी। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव का भारत के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट और कार्गो फ्लो पर क्या असर पड़ सकता है।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी।

शिपिंग रूट और इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने की चुनौती

बैठक में लॉजिस्टिक ऑपरेटर्स और शिपिंग लाइन्स के प्रतिनिधियों ने बताया कि मौजूदा तनाव के कारण जहाजों के रूट बदलने पड़ रहे हैं, जिससे ट्रांजिट टाइम बढ़ गया है। इसके अलावा, माल ढुलाई और इंश्योरेंस की लागत में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। सरकार ने एक्सपोर्टर्स और इंपोर्टर्स के लिए डॉक्यूमेंटेशन और पेमेंट प्रोसेस को आसान बनाने और कार्गो मूवमेंट में देरी को कम करने पर जोर दिया है।

पश्चिम एशिया पर भारत की निर्भरता बड़ी

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 85% इंपोर्ट करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी हलचल का सीधा असर भारत की इकोनॉमी और एनर्जी सिक्योरिटी पर पड़ता है। सरकार अब रूस और अन्य अफ्रीकी देशों जैसे वैकल्पिक रास्तों पर फोकस बढ़ा रही है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।

भारत फिर बढ़ाएगा रूस से कच्चे तेल की खरीद

एक दिन पहले ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि ईरान-इजराइल के बीच जंग और तेल की सप्लाई चेन प्रभावित होने के बाद भारत ने एक बार फिर रूस की ओर रुख किया है। भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने का प्लान बना रहा है।

स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई लगभग ठप हो गई है, जिसके चलते सरकारी रिफाइनरीज और पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने दिल्ली में एक इमरजेंसी मीटिंग कर विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।

भारत की समुद्र में खड़े रूसी तेल टैंकरों को खरीदने की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल भारतीय समुद्र के करीब या एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस समय लगभग 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में है। सप्लाई में कमी आने की स्थिति में भारत इन टैंकरों को तुरंत रिसीव कर सकता है, जिससे ट्रांसपोर्टेशन का समय और लागत दोनों कम होगी।

भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल?

सस्ता विकल्प: रूस भारत को बेंचमार्क कीमतों से डिस्काउंट पर तेल ऑफर करता है।

सप्लाई सिक्योरिटी: मिडिल ईस्ट में तनाव होने पर स्ट्रैट ऑफ होर्मुज से सप्लाई रुक जाती है, रूस एक सुरक्षित विकल्प है।

इकोनॉमी पर असर: सस्ता तेल मिलने से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहती हैं और महंगाई काबू में रहती है।

भारत रूसी तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार

दिसंबर 2025 में भारत रूस से तेल खरीदने में तीसरे नंबर पर रहा। तुर्किये दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया। तुर्किये ने 2.6 बिलियन यूरो का तेल खरीदा। भारत ने दिसंबर में रूस से 2.3 बिलियन यूरो (लगभग 23,000 करोड़ रुपए) का तेल खरीदा। नवंबर में भारत ने 3.3 बिलियन यूरो (34,700 करोड़ रुपए) का तेल खरीदा था।

चीन अब भी सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, उसने दिसंबर में रूस से 6 बिलियन यूरो यानी करीब 63,100 करोड़ रुपए का तेल खरीदा। भारत की खरीद कम होने की सबसे बड़ी वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने रूस से तेल खरीद करीब आधी कर दी।

पहले रिलायंस पूरी सप्लाई रूस की कंपनी रोसनेफ्ट से लेती थी, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों के डर से अब कंपनियां रूस से तेल कम खरीद रही हैं। रिलायंस के अलावा सरकारी तेल कंपनियों ने भी दिसंबर में रूस से तेल खरीद करीब 15% घटा दी।

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