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छत्तीसगढ़

गुरु जी का जीवन सत्य व त्याग की मिसाल रहा: अजीत भोगल

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श्री गुरु तेग बहादुर विद्यालय में शहीदी दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया गया

गुरु जी की याद में जरूरतमंद बच्चों को स्वेटर तथा स्वच्छता दीदियों को कंबल वितरित

बिलासपुर। श्री गुरु तेग बहादुर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गुरु तेग बहादुर जी का 350वाँ शहीदी दिवस श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षण समिति के पदाधिकारियों द्वारा गुरु जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात ज्ञानी सरवन सिंह जी ने गुरुवाणी का पाठ कर अरदास की।

शिक्षण समिति के अध्यक्ष अजीत सिंह भोगल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का पूरा जीवन सत्य, साहस, समानता और त्याग की मिसाल रहा। उन्होंने कहा कि गुरु जी ने अपनी वाणी में राम नाम की महिमा, शांति, संतुलन, और मानवता के उत्थान का संदेश दिया। गुरु जी का संदेश है कि सही कार्य के लिए सदैव खड़े रहना चाहिए, भले ही उसके लिए सर्वोच्च बलिदान ही क्यों न देना पड़े। अजीत भोगल ने कहा कि मनुष्य को सुख- दुःख दोनों स्थितियों में संतुलित, दयालु तथा अहंकार रहित रहना चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों व शिक्षकों को प्रसाद वितरित किया गया। गुरु जी की स्मृति में जरूरतमंद बच्चों को स्वेटर तथा विद्यालय की स्वच्छता दीदियों को कंबल प्रदान किए गए। उत्साह से भरे बच्चों ने “श्री गुरु तेग बहादुर जी अमर रहें” के नारे लगाए। कार्यक्रम में त्रिलोचन सिंह, गुरप्रीत सिंह, अमरदेव भगत, सुखविंदर सिंह, मनदीप कौर, गरिमा सिंह, ग्राम विकास विभाग नगर प्रमुख अमित चतुर्वेदी, पार्षद नितिन पटेल, शिक्षिका प्रतिभा यादव, तृप्ति कर्मकार, निशा यादव, प्रमिला साहू, सरल तिवारी सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में सालभर में सड़क हादसों में 6,967 मौतें:हाईकोर्ट ने पूछा- क्या पुलिस का काम सिर्फ गाय हांकना है, NHAI-कलेक्टर्स से शपथपत्र मांगा

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में पिछले एक साल में सड़क हादसों में 6,967 लोगों की मौत हुई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने लगातार बढ़ रहे हादसों को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि, क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना है?

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले में राज्य सरकार और संबंधित विभागों से एक बार फिर 10 दिन के भीतर शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है। प्रदेश में सड़क हादसों के बढ़ते मामलों को देखते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी।

जिसके बाद हाईकोर्ट से नियुक्त कोर्ट कमिश्नर ने प्रदेश के कई जिलों से जुटाए गए अधिकृत आंकड़े पेश किए। जिसमें बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अफसर गंभीर नहीं हैं। नियमों के मुताबिक हर महीने बुलाई जाने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें तक आयोजित नहीं की जा रही हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि, क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?

हाईकोर्ट ने कहा कि, क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?

सड़क हादसों में एक साल में 6,967 लोगों की गई जान

कोर्ट कमिश्नर ने हाईकोर्ट को बताया कि, 2025 में प्रदेश में कुल 15,484 सड़क हादसे दर्ज किए गए। जिनमें 6,967 लोगों की मौत हुई और 13,156 लोग घायल हुए। वहीं, साल 2026 में 31 मई तक केवल 5 महीनों में 6,891 सड़क दुर्घटनाओं में 3,170 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

300 से अधिक मौतें फिर भी कलेक्टर उदासीन

सरगुजा जिले में एक साल के भीतर सड़क हादसों में 300 से अधिक लोगों की मौत हुई। इसके बावजूद कलेक्टर की अध्यक्षता में पूरे साल यानी 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक सड़क सुरक्षा समिति की केवल 1 बैठक बुलाई गई। कांकेर जिले में भी सालभर में महज 1 बैठक ही आयोजित की गई।

बारिश में हाईवे पर बैठे मवेशियों पर नाराजगी

सीजे ने कहा कि बारिश के मौसम में आवारा मवेशी नेशनल हाईवे और मुख्य सड़कों पर बैठे रहते हैं। दिन में स्थिति संभल जाती है, लेकिन रात में लोगों की जान जोखिम में रहती है। ऐसे में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “क्या पुलिसकर्मियों का काम सिर्फ मवेशी हांकना है या व्यवस्था बनाना?”

उन्होंने कहा कि, राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में रोज सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, लेकिन व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

आवारा मवेशी नेशनल हाईवे और मुख्य सड़कों पर बैठे रहते हैं।

आवारा मवेशी नेशनल हाईवे और मुख्य सड़कों पर बैठे रहते हैं।

रायपुर बना सबसे बड़ा डेथ जोन

हाईकोर्ट में प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स की सूची भी पेश की गई। इनमें 7 अकेले रायपुर जिले में हैं। धरसींवा के सिलतरा से निको गेट के बीच एक साल में 19 लोगों की मौत हुई। कोरबा के पाली से गझरा नाला मार्ग पर 22 हादसों में 17 लोगों की जान गई। रायपुर के तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा क्षेत्र भी गंभीर दुर्घटना वाले स्थानों में शामिल हैं।

चीफ जस्टिस बोले- 10 टन की गाड़ी में 22-25 टन माल

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कहा कि, औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रकों की अवैध पार्किंग हादसों की बड़ी वजह है। 10 टन क्षमता वाले वाहनों में 22 से 25 टन तक माल लादा जा रहा है, जबकि वजन जांचने वाली वेइंग मशीनें बंद पड़ी हैं। भारी वाहन मुख्य सड़कों पर खड़े रहते हैं, इसलिए दुर्घटनाएं होना तय है।

हाईकोर्ट ने इन बिंदुओं पर मांगा जवाब

सड़क सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की समयबद्ध कार्ययोजना अदालत को बताई जाए।

सड़क सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें क्यों नहीं हुईं?

अवैध पार्किंग और ओवरलोडिंग रोकने के लिए क्या कार्रवाई हुई?

चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए?

एनएचएआई के क्षेत्रीय और प्रशासनिक अधिकारी शपथ पत्र के साथ रिपोर्ट पेश करें।

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खेल

पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख ठगी का आरोप:नवीन जिंदल से पहचान बताकर काम में पार्टनर बनाने ठेकेदार को फंसाया, FIR के आदेश

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख रुपए की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम दिलाने का झांसा देकर ठेकेदार से फ्रॉड किया गया। अब कोर्ट ने उन पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पीड़ित दिनकर विश्वमित्र का कहना है कि, राजेश चौहान ने खुद को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बताते हुए उद्योगपति नवीन जिंदल से करीबी संबंध होने का दावा किया था। भरोसा दिलाने के लिए जिंदल इस्पात का कथित वर्क ऑर्डर भी दिखाया और ट्रांसपोर्ट के काम में पार्टनर बनाने की बात कही। बाद में पता चला कि पूरा दस्तावेज फर्जी था।

पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) कोर्ट ने मोहन नगर पुलिस को केस दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया है। वर्तमान में राजेश चौहान बिजनेसमैन और क्रिकेट एकेडमी के संचालक हैं।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर धोखाधड़ी का आरोप लगा है।

दोस्त के जरिए हुई पहचान, करोड़ों के काम का दिया लालच

पीड़ित दिनकर विश्वमित्र ने कोर्ट में बताया कि, उसकी मुलाकात दोस्त सरोज कुमार के जरिए राजेश चौहान से हुई थी। बातचीत के दौरान राजेश ने कहा कि उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन और अन्य सामग्री के ट्रांसपोर्ट का बड़ा ठेका मिला है।

अगर वह ट्रक लगाकर इस काम में पार्टनर बनता है, तो उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा। भरोसा बढ़ाने के लिए आरोपी ने जिंदल इस्पात का कथित वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज भी दिखाए। इन्हें देखकर दिनकर ने साझेदारी के लिए हामी भर दी।

इंडिया टीम के लिए 35 वनडे खेल चुके हैं राजेश चौहान।

इंडिया टीम के लिए 35 वनडे खेल चुके हैं राजेश चौहान।

इकरारनामा हुआ, फिर अलग-अलग किस्तों में लिए 17.52 लाख रुपए

शिकायत के अनुसार, 30 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों के बीच इकरारनामा हुआ। उसी दौरान दिनकर ने 2.51 लाख रुपए का पहला भुगतान किया। इसके बाद आरोपी के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो किस्तों में 15.01 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए।

इस तरह आरोपी ने कुल 17.52 लाख रुपए ले लिए। पीड़ित को भरोसा था कि जल्द ही ट्रांसपोर्ट का काम शुरू होगा, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी न तो काम मिला और न ही किसी तरह का फायदा।

भारत के लिए राजेश चौहान 21 टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

भारत के लिए राजेश चौहान 21 टेस्ट मैच खेल चुके हैं।

जिंदल प्लांट पहुंचने पर खुला पूरा मामला

जब लंबे समय तक कोई काम शुरू नहीं हुआ तो दिनकर खुद ओडिशा स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड पहुंचा। वहां कंपनी अधिकारियों से जानकारी लेने पर उसे पता चला कि राजेश चौहान या उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ऐसा कोई ट्रांसपोर्ट ठेका कभी दिया ही नहीं गया था।

पीड़ित का आरोप है कि उसे जो वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज दिखाए गए थे, वे फर्जी थे। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।

पुलिस से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

पीड़ित ने मोहन नगर थाना और दुर्ग के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत दी। उसका आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ता सौरभ चौबे के माध्यम से न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत आवेदन लगाया।

कोर्ट ने कहा- प्रथम दृष्टया बनता है मामला

इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऐश्वर्या दीवान ने आवेदन के साथ पेश किए गए बैंक लेन-देन, इकरारनामा और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है और इसकी जांच जरूरी है।

इसके बाद कोर्ट ने मोहन नगर थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज कर विधि अनुसार जांच करने और अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है।

कौन हैं पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान?

राजेश चौहान भारत के पूर्व ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। उन्होंने 1993 से 1998 के बीच भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। घरेलू क्रिकेट में मध्य प्रदेश के लिए शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। 90 के दशक में वे अनिल कुंबले और वेंकटपति राजू के साथ भारत की स्पिन तिकड़ी का अहम हिस्सा रहे।

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छत्तीसगढ़

अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में 10% आरक्षण:4 साल की सेवा जरूरी, खाद की व्यवस्था के लिए बनेगी मंत्री उप समिति, कैबिनेट का फैसला

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रायपुर, एजेंसी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों और अग्निवीर सैनिकों से जुड़े दो अहम फैसलों पर मुहर लगी है। कैबिनेट ने खरीफ और रबी सीजन में किसानों को समय पर खाद मुहैया कराने के लिए मंत्री-मंडलीय उप समिति के गठन को मंजूरी दी है। यह समिति खाद की आपूर्ति, वितरण और प्रबंधन की निगरानी करेगी और सरकार को जरूरी सुझाव देगी।

समिति की अध्यक्षता उप मुख्यमंत्री करेंगे। इसमें कृषि, सहकारिता और वित्त मंत्री सदस्य होंगे। कृषि उत्पादन आयुक्त समिति के संयोजक रहेंगे। जरूरत पड़ने पर अधिकारी, विशेषज्ञ और अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी बैठक में बुलाया जा सकेगा।

समिति का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ और रबी सीजन में समय पर खाद मुहैया कराना और किसी भी तरह की कमी या वितरण संबंधी समस्या का समाधान करना है।

अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में 10% आरक्षण

कैबिनेट ने राज्य में अग्निवीर सैनिकों के लिए तृतीय श्रेणी के सरकारी पदों पर 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया है। इसके लिए “छत्तीसगढ़ अग्निवीर सैनिक आरक्षण नियम-2026” बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह आरक्षण पुलिस विभाग में आरक्षक, वन विभाग में वनरक्षक और जेल विभाग में प्रहरी की सीधी भर्ती में लागू होगा।

किन अग्निवीरों को मिलेगा फायदा

आरक्षण का लाभ उन अग्निवीर सैनिकों को मिलेगा, जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद वैध सेवा प्रमाण पत्र के साथ सेवामुक्ति प्राप्त की हो। यह फैसला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर से 26 जुलाई 2024 को विधानसभा में की गई घोषणा के पालन में लिया गया है।

अनुभव का मिलेगा लाभ

सरकार का कहना है कि इस फैसले से अग्निवीरों को सम्मानजनक रोजगार मिलेगा। साथ ही उनके अनुशासन और अनुभव का लाभ पुलिस, वन और जेल विभाग को भी मिलेगा।

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