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मिडिल ईस्ट तनाव का असर, 4 हफ्तों से गिर रहा US बाजार, डूब गए $3 ट्रिलियन
नई दिल्ली,एजेंसी। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। बेंचमार्क इंडेक्स S&P 500 लगातार चौथे हफ्ते दबाव में रहा, जो पिछले एक साल का सबसे लंबा गिरावट का दौर है।
पिछले सप्ताह S&P 500 में 2.5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पूंजीकरण में 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94 लाख करोड़ रुपए) से अधिक की कमी आई। वहीं, बीते एक महीने में यह इंडेक्स करीब 5.83% टूट चुका है, जिससे कुल 3 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा मार्केट वैल्यू खत्म हो गई है।
200-दिन के मूविंग एवरेज के नीचे बंद हुआ बाजार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, S&P 500 हाल ही में अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज के नीचे बंद हुआ है, जो बाजार की सेहत का अहम संकेतक माना जाता है। इस स्तर के टूटने से बाजार में फोर्स्ड सेलिंग और गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है।
मिडिल ईस्ट तनाव बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि Iran–Israel conflict के लंबा खिंचने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे महंगाई का खतरा फिर से बढ़ गया है।

महंगाई के दबाव के कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो गया है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ रहा है।
‘ट्रिपल विचिंग’ से बढ़ी बाजार की अस्थिरता
शुक्रवार को करीब 5.7 ट्रिलियन डॉलर के ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी हुई, जिसे बाजार में ‘ट्रिपल विचिंग’ कहा जाता है। यह एक ऐसी घटना होती है, जिसमें बड़े पैमाने पर डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स खत्म होते हैं, जिससे बाजार में अचानक उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है।
ब्याज दरों पर बना दबाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने हाल में ब्याज दरों को स्थिर रखा है। पहले जहां निवेशक दरों में कटौती की उम्मीद कर रहे थे, वहीं अब तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई के खतरे के चलते यह उम्मीद कमजोर पड़ गई है।
आगे भी रह सकती है अनिश्चितता
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कुल मिलाकर, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई का डर और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता—इन तीनों कारणों ने अमेरिकी शेयर बाजार पर दबाव बना दिया है।

देश
IPO मार्केट में धमाका! निवेशकों के लिए बड़ा मौका, 7 इश्यू में लगा सकेंगे पैसा
मुंबई, एजेंसी। शेयर बाजार में 23 मार्च से शुरू हो रहे सप्ताह में निवेशकों के लिए मौके ही मौके हैं। इस दौरान कुल 7 नए IPO खुलने जा रहे हैं, जिनमें 3 मेनबोर्ड सेगमेंट के हैं। इसके अलावा, पहले से खुले 2 IPO में भी निवेश का मौका बना रहेगा।
ये हैं नए खुलने वाले IPO
नए सप्ताह में अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां बाजार से फंड जुटाने के लिए अपने पब्लिक इश्यू ला रही हैं:
- Tipco Engineering IPO: 60.55 करोड़ का इश्यू 23–25 मार्च तक खुला रहेगा। प्राइस बैंड रू.84–रू.89 और लॉट साइज 1,600 शेयर तय है। संभावित लिस्टिंग 1 अप्रैल को BSE SME पर हो सकती है।
- Sai Parenteral’s IPO: मेनबोर्ड इश्यू 24–27 मार्च तक खुला रहेगा। प्राइस बैंड ₹372–₹392 और लॉट साइज 38 शेयर है। कंपनी रू.408.79 करोड़ जुटाने की योजना में है।
- Amir Chand Jagdish Kumar IPO: 440 करोड़ का इश्यू 24–27 मार्च तक खुला रहेगा। प्राइस बैंड रू.201–रू.212 और लॉट साइज 70 शेयर है।
- Powerica IPO: 24–27 मार्च के बीच खुलने वाले इस इश्यू का प्राइस बैंड रू.375–रू.395 है। कंपनी रू.1,100 करोड़ जुटाना चाहती है।
- Highness Microelectronics IPO: 21.67 करोड़ का SME इश्यू 24–27 मार्च तक खुलेगा। प्राइस बैंड रू.114–रू.120 और लॉट साइज 1,200 शेयर है।
- Vivid Electromech IPO: 25–30 मार्च तक खुला रहेगा। कंपनी रू.130.54 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। प्राइस बैंड रू.528–रू.555 और लॉट साइज 240 शेयर है।
- Emiac Technologies IPO: यह इश्यू 27 मार्च को खुलेगा और 8 अप्रैल को बंद होगा। प्राइस बैंड और लॉट साइज का ऐलान अभी बाकी है।
पहले से खुले IPO में भी मौका
Speciality Medicines IPO: 20–24 मार्च तक खुला यह SME इश्यू रू.117–रू.124 के प्राइस बैंड पर उपलब्ध है।
Central Mine Planning IPO: 1,842 करोड़ का मेनबोर्ड इश्यू 20–24 मार्च तक खुला है, प्राइस बैंड रू.163–रू.172 है।
इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग
नए सप्ताह में 4 कंपनियां शेयर बाजार में डेब्यू करेंगी:

23 मार्च: Innovision (BSE, NSE)
24 मार्च: GSP Crop Science और Raajmarg Infra Investment Trust (BSE, NSE)
25 मार्च: Novus Loyalty (BSE SME)
निवेशकों के लिए सुनहरा मौका
एक ही हफ्ते में इतने IPO खुलने से निवेशकों के पास विकल्पों की भरमार रहेगी। हालांकि, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और जोखिम का आकलन जरूर करें।

देश
भारत ने लगातार दूसरे साल एक अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल किया
नई दिल्ली,एजेंसी। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ी हुई अनिश्चितताओं के बीच भारत ने लगातार दूसरे साल एक अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल कर लिया है। कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ”कोयला क्षेत्र में सभी हितधारकों के अमूल्य योगदान के साथ, देश ने लगातार दूसरे साल 20 मार्च, 2026 तक एक अरब टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक मील का पत्थर सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है।”

अधिकारियों ने कहा कि उच्च और निरंतर कोयला उत्पादन से देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिली है। इससे बिजली क्षेत्र को कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में रिकॉर्ड कोयला भंडार बनाए रखने में भी मदद मिली। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रदर्शन कोयला मूल्य श्रृंखला में मजबूत योजना, कुशल निष्पादन और कड़े समन्वय को दर्शाता है और देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कोयला मंत्रालय ने कहा कि वह एक स्थिर, पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित परिवेश विकसित करने पर जोर दे रहा है।

देश
चीन का चांदी में बड़ा दांव, तोड़ा 8 साल का रिकॉर्ड, 2 महीने में कर ली इतनी खरीदारी
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक तनाव और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच चीन ने चांदी के आयात में बड़ा कदम उठाया है। 2026 के पहले दो महीनों में चीन ने चांदी का आयात बढ़ाकर आठ साल का रिकॉर्ड बना दिया है। कस्टम्स डेटा के मुताबिक, जनवरी और फरवरी में चीन ने 790 टन से ज्यादा चांदी आयात की, जिसमें फरवरी में अकेले करीब 470 टन का रिकॉर्ड शामिल है।
स्थानीय मांग बढ़ी, कीमतें ग्लोबल स्तर से ऊपर
रिपोर्ट्स के अनुसार, औद्योगिक और निवेश मांग में तेजी के कारण चीन में चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर से ऊपर पहुंच गईं। इससे घरेलू स्टॉक तेजी से घटे और आयात बढ़ाने की जरूरत पड़ी। 2026 में चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। 29 जनवरी को स्पॉट सिल्वर 121.62 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर पर पहुंचा लेकिन 6 फरवरी तक यह गिरकर करीब 64 डॉलर प्रति औंस रह गया।
Goldman Sachs की चेतावनी
Goldman Sachs के विश्लेषकों ने पहले ही आगाह किया था कि चीन के नए एक्सपोर्ट कंट्रोल्स से स्थानीय कमी और वैश्विक बाजार में असंतुलन बढ़ सकता है। इससे ग्लोबल सिल्वर मार्केट के अलग-अलग हिस्सों में बंटने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
सप्लाई बाधाओं से बढ़ी अस्थिरता
विश्लेषकों के अनुसार, कम इन्वेंट्री और सप्लाई में रुकावट के कारण चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। यह स्थिति वैश्विक कमी से ज्यादा स्थानीय सप्लाई बाधाओं की वजह से बनी है।

नए नियमों से बाजार पर असर
2026 में लागू नए नियमों के तहत चीन में चांदी के निर्यात के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी कर दी गई है। इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है और निवेशक अपने स्टॉक जमा करने लगे हैं।
ग्लोबल मार्केट पर दिख सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के इस कदम से वैश्विक चांदी बाजार पर असर पड़ सकता है। आगे चलकर कीमतों में तेज और स्थानीय स्तर पर बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

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