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इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश अप्रैल में 5% घटकर 38,440 करोड़ रुपए पर

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नई दिल्ली, एजेंसी। इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में अप्रैल माह में 38,440 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया जो मार्च की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत कम है। उद्योग निकाय एम्फी के सोमवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के माध्यम से किया जाने वाला मासिक योगदान भी घटकर 31,115 करोड़ रुपए रह गया, जबकि मार्च में यह 32,087 करोड़ रुपए था। 

हालांकि, म्यूचुअल फंड उद्योग में समग्र रूप से अप्रैल के दौरान 3.22 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया, जबकि मार्च में 2.4 लाख करोड़ रुपए की निकासी हुई थी। अप्रैल में यह बढ़त मुख्य रूप से ऋण-आधारित डेट फंड्स में 2.5 लाख करोड़ रुपए के भारी निवेश से आई। इस प्रवाह के चलते उद्योग की कुल प्रबंधन-अधीन परिसंपत्तियां (एयूएम) बढ़कर अप्रैल के अंत तक 81.92 लाख करोड़ रुपए हो गईं, जो मार्च के अंत में 73.73 लाख करोड़ रुपए थीं। 

श्रेणीवार आंकड़ों के मुताबिक, इक्विटी फंड योजनाओं में निवेश घटकर अप्रैल में 38,440 करोड़ रुपए रह गया जबकि मार्च में यह 40,450 करोड़ रुपए था। हालांकि, यह फरवरी के 25,978 करोड़ रुपए से अधिक है। अधिकांश श्रेणियों में निवेश सकारात्मक रहा लेकिन मुनाफावसूली और पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन की वजह से लाभांश प्रतिफल और इक्विटी-संबद्ध बचत योजना (ईएलएसएस) फंड में मामूली निकासी दर्ज की गई। 

इक्विटी खंड में फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे अधिक 10,148 करोड़ रुपए का निवेश आया। इसके बाद स्मॉलकैप में 6,886 करोड़ रुपए और मिडकैप में 6,551 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। वहीं लार्जकैप में 2,525 करोड़ रुपए का शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया। इसके अलावा, सोना आधारित गोल्ड ईटीएफ में अप्रैल के दौरान 3,040 करोड़ रुपए का निवेश आया, जो मार्च के 2,266 करोड़ रुपए से अधिक है। 

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पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी, यहां चेक करें प्रमुख शहरों का भाव

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मुंबई, एजेंसी। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फिलहाल आम लोगों को राहत मिलती दिखाई दे रही है। तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) हर दिन सुबह 6 बजे ईंधन के नए रेट जारी किए लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

Middle East तनाव से बढ़ी चिंता
हाल के दिनों में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी है, क्योंकि दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। यदि यहां शिपमेंट प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

घरेलू ईंधन कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं
हालांकि, भारत सरकार और तेल कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल घरेलू ईंधन कीमतों में बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। कंपनियां बाजार के उतार-चढ़ाव का कुछ असर खुद वहन कर सकती हैं ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ न पड़े।

आज देश के बड़े शहरों में पेट्रोल के दाम
नई दिल्ली –  94.77 रुपए प्रति लीटर
मुंबई –  103.54 रुपए प्रति लीटर
कोलकाता – 105.45 रुपए  प्रति लीटर
चेन्नई –  100.85  रुपए प्रति लीटर
नोएडा –  95.05  रुपए प्रति लीटर
गुरुग्राम –  95.65  रुपए प्रति लीटर
बेंगलुरु –  102.96  रुपए प्रति लीटर
हैदराबाद –  107.46  रुपए प्रति लीटर
जयपुर –  104.56  रुपए प्रति लीटर
लखनऊ –  94.73  रुपए प्रति लीटर
पटना –  105.23  रुपए प्रति लीटर
चंडीगढ़ –  94.30  रुपए प्रति लीटर
भुवनेश्वर –  101.11  रुपए प्रति लीटर
तिरुवनंतपुरम –   107.48  रुपए प्रति लीटर

आज डीजल के ताजा रेट
नई दिल्ली –  87.67  रुपए प्रति लीटर
मुंबई –  90.03  रुपए प्रति लीटर
कोलकाता –  92.02  रुपए प्रति लीटर
चेन्नई –  92.40  रुपए प्रति लीटर
नोएडा –  88.19  रुपए प्रति लीटर
गुरुग्राम –  88.10  रुपए प्रति लीटर
बेंगलुरु –  90.99  रुपए प्रति लीटर
हैदराबाद –  95.70  रुपए प्रति लीटर
जयपुर –  90.07  रुपए प्रति लीटर
लखनऊ –  87.86  रुपए प्रति लीटर
पटना –  91.49  रुपए प्रति लीटर
चंडीगढ़ –  82.45  रुपए प्रति लीटर
भुवनेश्वर –  92.69  रुपए प्रति लीटर
तिरुवनंतपुरम –  96.48  रुपए प्रति लीटर

प्रीमियम ईंधन हुआ महंगा
तेल कंपनियों ने प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में भी बदलाव किया है। इंडियन ऑयल के XP100 पेट्रोल की कीमत में ₹11 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत करीब ₹160 प्रति लीटर पहुंच गई है। यह ईंधन मुख्य रूप से लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस बाइकों में इस्तेमाल होता है। इसके अलावा Xtra Green डीजल की कीमत भी बढ़ाई गई है, जो अब लगभग ₹92.99 प्रति लीटर हो गई है।

क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार और OMCs उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही हैं।

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हफ्ते की शुरुआत में बाजार धड़ाम, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट से निवेशकों में घबराहट

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मुंबई, एजेंसी। रविवार को पीएम मोदी के गोल्ड न खरीदने की अपील के बाद आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट बढ़ गई और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों बड़े इंडेक्स भारी गिरावट के साथ कारोबार करने लगे। ग्लोबल तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार पर दबाव बनाया।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स करीब 900 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 250 अंकों से अधिक फिसल गया। शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में दिखाई दिए।

बाजार खुलते ही बढ़ी गिरावट
30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,328 के मुकाबले करीब 76,600 के स्तर पर खुला। कारोबार शुरू होने के कुछ ही मिनटों में इसमें और गिरावट आई और इंडेक्स लगभग 944 अंक टूटकर 76,300 के आसपास पहुंच गया।

वहीं, निफ्टी 50 भी पिछले बंद 24,176 से नीचे खुला और शुरुआती कारोबार में 23,900 के करीब पहुंच गया। बाजार में तेज बिकवाली के चलते निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर नजर आया।

बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें
1. Middle East Tension से बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता फिर बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा और निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी।

2. Crude Oil Prices में तेज उछाल
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में 3 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। तेल महंगा होने से भारत जैसे आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ता है। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई देता है।

3. निवेशकों में बढ़ा डर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, ग्लोबल अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है।

सभी सेक्टर में बिकवाली
सोमवार की गिरावट में आईटी, बैंकिंग, फार्मा और मेटल सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। कई बड़ी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे:

  1. TCS
  2. Infosys
  3. Tech Mahindra
  4. ICICI Bank
  5. Kotak Mahindra Bank
  6. Tata Steel
  7. Sun Pharma
  8. ITC

लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक ग्लोबल तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।

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पश्चिम एशिया संकट पर भारत अलर्ट, राजनाथ सिंह ने मंत्रियों साथ की हाईलेवल मीटिंग

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नई दिल्ली, एजेंसी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति पर नज़र रखने के लिए गठित मंत्रियों के अनौपचारिक अधिकार प्राप्त समूह (IGoM) की बैठक की अध्यक्षता की।

आप को बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे माल की कीमतों में आई तेजी के बीच एडहेसिव (चिपकाने वाले उत्पाद) और निर्माण रसायन बनाने वाली कंपनी पिडिलाइट इंडस्ट्रीज कीमतों में एक और दौर की वृद्धि पर विचार कर रही है। कंपनी के प्रबंध निदेशक सुधांशु वत्स ने यह जानकारी दी। फेविकोल, डॉ. फिक्सिट, फेवीक्विक और एम-सील जैसे ब्रांड की मालिक कंपनी अप्रैल और मई में पहले ही दो बार कीमतें बढ़ा चुकी है। वत्स ने कंपनी के तिमाही नतीजों की घोषणा के बाद संवाददाताओं से कहा कि कंपनी के कच्चे माल की लागत, जो मुख्य रूप से कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों पर आधारित है, पश्चिम एशिया संकट के कारण भारित औसत आधार पर 40-50 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

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