Connect with us

देश

ईरान समझौता नेतन्याहू की हार और मोदी PM की विफलता: जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते में पाकिस्तान की भूमिका नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए झटका है और “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का लगातार तुष्टिकरण करना शर्मनाक और राष्ट्रविरोधी है।” पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन ईरान के लिए कई उपलब्धियां लेकर आया है तो यह इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पराजय भी है।

4 सूत्रीय इस्लामाबाद समझौता 
रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, “अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। इस समझौते का नाम “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू)” रखा जाना ही इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान की क्षेत्रीय प्रतिष्ठा और वैश्विक प्रभाव में नया उभार आया है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वही देश है जिसे नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने वैश्विक मंच पर लगभग अलग-थलग कर दिया था। रमेश ने दावा किया कि यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की दिशा और शैली दोनों के लिए एक गंभीर झटका है।

आने वाले 60 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण 
कांग्रेस नेता ने कहा, “पाकिस्तान अब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक और सुरक्षा संरचना में पहले से कहीं अधिक गहराई से शामिल हो चुका है, जिसके भारत के लिए गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।” रमेश ने कहा, “यदि यह एमओयू अपनी भावना और शब्दों, दोनों के अनुरूप लागू होता है, तो यह एक बड़ी प्रगति होगी। लेकिन इसमें दोनों पक्षों के लिए “मेमोरेंडम ऑफ मिसअंडरस्टैंडिंग” (गलतफहमी का समझौता) बन जाने की भी संभावना है। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि आने वाले 60 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।

 एमओयू स्वयं ईरान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण
कांग्रेस महासचिव ने कहा, “यह एमओयू स्वयं ईरान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और कुछ हद तक अप्रत्याशित उपलब्धियां लेकर आया है। ईरान ने अपनी दृढ़ता और सहनशक्ति का प्रदर्शन किया है। जिन जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) देशों ने ईरान के जवाबी हमलों का पूरा भार झेला है, उन्होंने इस एमओयू का सतर्कता के साथ स्वागत किया है। लेकिन वे निस्संदेह अन्य देशों के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करेंगे।” उनके मुताबिक, यह एमओयू इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की स्पष्ट पराजय है, हालांकि वह अब भी विभिन्न तरीकों से इसे विफल कर सकते हैं।
इज़राइल के प्रति अंधभक्ति देश को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर 
रमेश ने कहा, “बेंजामिन नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ चुके हैं। यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से उनके प्रति अपनी नाराज़गी और निराशा व्यक्त की है। केवल प्रधानमंत्री मोदी ही लेबनान, गाज़ा और पश्चिमी तट सहित पूरे क्षेत्र में नेतन्याहू की कार्रवाइयों के समर्थन में अडिग बने हुए हैं। मोदी की इज़राइल के प्रति यह अंधभक्ति हमारे देश को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रही है।

कांग्रेस नेता का कहना है कि यह एमओयू अमेरिका के लिए एक गंभीर झटका है, जिसने इज़राइल के साथ मिलकर 28 फ़रवरी, 2026 को ईरान के विरुद्ध अधिकतम उद्देश्यों के साथ युद्ध शुरू किया था, लेकिन वे लक्ष्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने दावा किया, “एक बार फिर सैन्य शक्ति की सीमाएं उजागर हो गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रंप के प्रति लगातार अपनाई जा रही तुष्टिकरण की नीति का ताज़ा उदाहरण बुधवार रात देखने को मिला, जब ट्रंप–मोदी द्विपक्षीय बैठक पर भारतीय विदेश मंत्रालय का आधिकारिक वक्तव्य जारी किया गया। यह (तुष्टिकरण) शर्मनाक है और वास्तव में राष्ट्र-विरोधी है।

Continue Reading

देश

कमजोर मानसून से बढ़ी महंगाई की चिंता, टमाटर से लेकर दाल-चावल तक महंगे होने के संकेत

Published

on

मुंबई, एजेंसी। देश के कई हिस्सों में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज होने के बाद खाद्य महंगाई को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार नहीं सुधरी तो खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका सीधा असर सब्जियों, दालों और अनाज की उपलब्धता पर पड़ेगा, जिससे बाजार में कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि, अंतिम स्थिति मानसून के आगामी चरण और फसल की प्रगति पर निर्भर करेगी।

मौसम में बदलाव का सबसे तेज प्रभाव जल्दी खराब होने वाली सब्जियों पर दिखाई देता है। टमाटर, हरी सब्जियां, मिर्च और अन्य ताजी उपज की आपूर्ति बारिश पर काफी हद तक निर्भर करती है। यदि वर्षा कम होती है तो उत्पादन घटने के साथ मंडियों में आवक भी कम हो जाती है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन पैदा होने से कीमतों में तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ सप्ताह में सब्जियों के दाम में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

दाल और चावल की कीमतों पर भी बन सकता है दबाव

कमजोर मानसून का असर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं रहता। खरीफ सीजन में धान और कई प्रकार की दालों की खेती भी पर्याप्त वर्षा पर निर्भर करती है। यदि बुआई का रकबा घटता है या फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में आने वाले महीनों में चावल और दाल की कीमतों पर भी दबाव बनने की आशंका है। खाद्यान्न महंगे होने से आम परिवारों के मासिक रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

मानसून की चाल पर टिकी किसानों और बाजार की नजर

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार कई क्षेत्रों में अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है। किसान भी अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि फसलों की बुआई समय पर पूरी हो सके। कृषि क्षेत्र में उत्पादन और बाजार में आपूर्ति का सीधा संबंध मौसम से होता है। यदि जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रहने पर खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

महंगाई पर पड़ सकता है व्यापक असर

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि देश की खुदरा महंगाई दर पर भी पड़ता है। सब्जियां, दाल और अनाज उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी कीमतें बढ़ने पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति प्रभावित होती है। ऐसे समय में सरकार और संबंधित एजेंसियां भी आपूर्ति की निगरानी तथा आवश्यक कदम उठाने पर ध्यान देती हैं।

Continue Reading

देश

EPFO ने लागू की नई EDLI योजना, कर्मचारियों को मिलेगा बड़ा सुरक्षा कवच

Published

on

नई दिल्ली, एजेंसी। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों सदस्यों और उनके परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने कर्मचारी निक्षेप सहबद्ध बीमा योजना-2026 (EDLI Scheme 2026) लागू कर दी है। सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत अधिसूचित यह नई योजना 29 जून से पूरे देश में प्रभावी हो चुकी है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के परिवारों को पहले से अधिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

नई योजना के तहत पहले की तरह अधिकतम 7 लाख रुपए का बीमा कवर जारी रहेगा। इसके अलावा पहली बार पीएफ खाते के औसत बैलेंस के आधार पर अधिकतम 1 लाख रुपए तक का अतिरिक्त एश्योरेंस बेनिफिट भी दिया जाएगा। यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है और उसके पीएफ खाते का औसत बैलेंस 50 हजार रुपए से अधिक है, तो नॉमिनी को 50 हजार रुपए की निश्चित राशि के साथ अतिरिक्त रकम का लाभ मिलेगा। यह अतिरिक्त लाभ अधिकतम 1 लाख रुपए तक सीमित रहेगा।

सरकार ने बीमा दावे के नियमों को भी आसान बनाया है। यदि किसी कर्मचारी का अंतिम पीएफ अंशदान जमा होने के छह महीने के भीतर निधन हो जाता है, तो उसके परिवार को भी 7 लाख रुपए तक के बीमा कवर का लाभ मिलेगा।

20 दिन में होगा क्लेम सेटलमेंट

नई व्यवस्था में क्लेम निपटान की समय-सीमा भी तय कर दी गई है। सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद बीमा दावा 20 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा। तय समय सीमा से देरी होने पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा और विशेष परिस्थितियों में इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी पर भी तय की जा सकती है।

पूरी तरह डिजिटल हुआ सिस्टम

इसके अलावा पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। अब नियोक्ताओं को बीमा अंशदान और प्रशासनिक शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा, जबकि क्लेम दाखिल करने और उसके निपटान की प्रक्रिया भी पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों के परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

Continue Reading

देश

भारतीय कंपनियों का बॉन्ड निर्गम जून में 28% बढ़कर 1.33 लाख करोड़ रुपए पर

Published

on

मुंबई, एजेंसी। सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल में गिरावट आने, उधारी लागत में कमी और बाजार धारणा में सुधार के बीच जून में कॉरपोरेट बॉन्ड के जरिए धन जुटाने में सालाना आधार पर 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय कंपनियों ने जून में कॉरपोरेट बॉन्ड जारी कर 1.33 लाख करोड़ रुपए जुटाए, जो एक साल पहले इसी महीने के 1.04 लाख करोड़ रुपए और मई के 93,675 करोड़ रुपए से अधिक है। 

रॉकफोर्ट एलएलपी के प्रबंध साझेदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, “अप्रैल और मई में सुस्त रहने के बाद जून में बाजार परिस्थितियां अनुकूल होने से कॉरपोरेट बॉन्ड के निर्गम में तेज वृद्धि हुई। इसका सबसे बड़ा कारण मानक सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) के प्रतिफल में उल्लेखनीय गिरावट रही, जिससे कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में उधारी लागत कम हुई।” चॉइस वेल्थ के उपाध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब आने से मुद्रास्फीति और राजकोषीय दबाव की चिंताएं कम होने से बॉन्ड निर्गम में तेजी आई। उच्च प्रतिफल, वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण अधिकांश कंपनियों ने अप्रैल और मई में उधारी योजनाएं टाल दी थीं। 

हालांकि, जून में अनिश्चितता घटने के बाद कंपनियों ने कम ब्याज दरों पर बॉन्ड बाजार से धन जुटाने की कोशिश की। ईरान-अमेरिका के बीच अंतरिम शांति समझौता होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट आई, जिससे भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल में भी तेज नरमी देखी गई। श्रीनिवासन ने कहा कि बॉन्ड बाजार में तेजी को जी-सेक में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के मजबूत निवेश, ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड सूचकांक में भारत के शामिल होने की संभावना, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, मानसून की प्रगति और ब्याज दर बढ़ोतरी पर जल्दबाजी नहीं करने संबंधी टिप्पणियों का भी समर्थन मिला। 

सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल में नरमी का असर कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार पर भी पड़ा, जिससे उच्च रेटिंग वाली कंपनियों के लिए उधारी दरें कम हुईं और उन्हें अप्रैल-मई की तुलना में सस्ती दरों पर धन जुटाने में मदद मिली। पांडेय ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के हाल के कदमों, मजबूत घरेलू मांग और बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश प्रवाह ने जून में व्यापक स्तर पर बॉन्ड बाजार में तेजी को समर्थन दिया। भविष्य के परिदृश्य पर श्रीनिवासन ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही तक प्राथमिक बाजार की गतिविधियां मजबूत रहने की उम्मीद है, हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच बॉन्ड निर्गम अवसरवादी हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक मुद्रास्फीति, अमेरिकी मौद्रिक नीति और विदेशी निवेश प्रवाह आने वाले महीनों में घरेलू बॉन्ड प्रतिफल और निर्गम गतिविधि को प्रभावित करेंगे।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677