विदेश
ईरान बोला-नेतन्याहू की मदद करने वाले अरब देश नतीजा भुगतेंगे:लेबनान में UN पोस्ट पर इजराइली हमले जारी, भारत समेत 11 देशों की आपत्ति नजरअंदाज
बेरूत,एजेंसी। इजराइल और लेबनान में जारी लड़ाई के बीच ईरान ने अरब देशों और मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगियों के लिए चेतावनी जारी की है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, ईरान ने डिप्लोमैटिक चैनल के जरिए यह धमकी दी है।
ईरान ने कहा कि अगर किसी भी देश ने इजराइल को उस पर हमला करने में मदद की या अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने दिया, तो उसे खामियाजा भुगतना होगा। दरअसल, ईरान ने 1 अक्टूबर को इजराइल पर 180 मिसाइलों से हमला कर दिया था। इसके बाद से इजराइल पलटवार की तैयारी कर रहा है।
कई मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई है कि इजराइल ईरान के तेल भंडारों या परमाणु ठिकानों को निशाना बना सकता है। इधर इजराइल ने 48 घंटे में दूसरी बार लेबनान में UN पीस कीपिंग फोर्स (UNIFIL) पर हमला किया है।
अलजजीरा के मुताबिक, शुक्रवार को UNIFIL ने हमले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इजराइल ने नाकोरा शहर में उनके हेडक्वार्टर पर धमाके किए। 2 पीसकीपर्स घायल हो गए। ये दोनों श्रीलंका के नागरिक हैं।

इजराइल ने शुक्रवार को लेबनान में UN पीस मिशन के हेडक्वार्टर पर हमला किया।
इजराइल बोला- हमले से पहले UN पीसकीपर्स को वॉर्निंग दी थी हमले के बाद इजराइल ने कहा कि सेना को इस इलाके में खतरे की जानकारी मिली थी। अटैक से पहले UN कर्मचारियों को वॉर्निंग दी गई थी। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि वे इजराइल से अपील करते हैं कि वह हिजबुल्लाह से लड़ाई के बीच UN पीसकीपर्स पर हमला करना बंद करे।
इजराइल ने गुरुवार को भी UNIFIL पर पहला हमला किया था। इसमें इंडोनेशिया के 2 पीसकीपर्स घायल हो गए थे। इजराइल के इस हमले पर भारत, कनाडा, इंडोनेशिया, अमेरिका समेत 11 देशों ने आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद इजराइल ने UN पोस्ट पर दोबारा अटैक किया।
दरअसल, लेबनान में UN पीस मिशन के तहत भारत के भी 600 सैनिक तैनात हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पीसकीपिंग फोर्स की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए। इजराइल पर ईरानी हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं। अमेरिका ने इजराइल की ‘घोस्ट फ्लीट’ पर भी पाबंदियां लगा दी हैं, जो उसके तेल को दुनिया भर में खरीददारों तक पहुंचाती है।
इजराइल में योम किप्पुर त्योहार पर हाई-अलर्ट इजराइल में आज (12 अक्टूबर) योम किप्पुर का त्योहार मनाया जा रहा है। यह यहूदियों के लिए सबसे पवित्र दिनों में से एक होता है। टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर से ही इजराइल को बंद कर दिया गया था। पूरे देश को हाई-अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा जगह-जगह खास अलर्ट सिस्टम भी लगाए हैं, जिससे हमले की स्थिति लोगों को तुरंत जानकारी दी जा सके।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, त्योहार शुरू होने के शुरुआती कुछ घंटों में इजराइल पर लेबनान से 120 रॉकेट दागे गए, जिनमें से ज्यादातर को इजराइली डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया। 1973 के बाद यह पहली बार है जब योम किप्पुर के दौरान इजराइल जंग लड़ रहा है।
दरअसल, 1973 में योम किप्पुर के दिन 6 अक्टूबर को मिस्र और सीरिया के नेतृत्व में अरब देशों ने इजराइल पर हमला कर दिया। मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद अनवर सादात और सीरियाई राष्ट्रपति हफीज अल असद उस जमीन को वापस पाना चाहते थे, जिसे इजराइल ने 1967 के सिक्स डे वॉर में कब्जा कर लिया था।
इस जंग में रूस, सीरिया और मिस्र की मदद कर रहा था। ऐसे में अमेरिका ने इजराइल का समर्थन किया और उसे हथियारों की मदद पहुंचाई। अमेरिका की इस मदद से इजराइल इस जंग में बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा था।
बिज़नस
अगर युद्ध में बुर्ज खलीफा को हुआ नुकसान तो क्या मिलेंगे 150 करोड़? जानें दुबई की सबसे ऊंची इमारत के इंश्योरेंस का सच
दुबाई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद गहराते युद्ध के बादलों ने अब दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, बुर्ज खलीफा की सुरक्षा और उसके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। saudi arabia और Dubai के आसपास बढ़ते हमलों के बीच सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक यह चर्चा आम हो गई है कि अगर इस वैश्विक पहचान को आंच आती है, तो क्या होगा? क्या रेगिस्तान के इस गौरव को हुए नुकसान की भरपाई संभव है? आइए समझते हैं Burj Khalifa के उस सुरक्षा चक्र को, जो ईंट-पत्थर से नहीं बल्कि अरबों रुपये के कागजी दांव यानी ‘Insurance’ से बना है।
बुर्ज खलीफा का अरबों का रक्षा कवच
Dubai की इस ऐतिहासिक इमारत की सुरक्षा केवल इसकी मजबूती में नहीं, बल्कि इसके भारी-भरकम बीमा कवर में भी छिपी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुर्ज खलीफा के डेवलपर ‘Emaar Properties’ ने इसका बीमा Oman Insurance Company से कराया हुआ है। यह बीमा राशि कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है, बल्कि लगभग 150 करोड़ रुपये (करीब 1.5 बिलियन) तक जाती है। हालांकि, यह राशि सुनने में विशाल लगती है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मेगा-स्ट्रक्चर परियोजना के लिए बीमा की शर्तें और कवरेज सामान्य इमारतों की तुलना में कोसों अलग और बेहद जटिल होती हैं।
हमले की सूरत में क्या मिलेगा हर्जाना?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युद्ध या मिसाइल हमले की स्थिति में बीमा कंपनी हर्जाना देगी? बुर्ज खलीफा जैसी इमारतों के लिए कराए गए इंश्योरेंस में आमतौर पर प्रॉपर्टी डैमेज, कंस्ट्रक्शन रिस्क और कई बार ‘राजनीतिक हिंसा’ जैसे विशेष क्लॉज शामिल होते हैं। यदि इमारत को किसी हमले में नुकसान पहुंचता है, तो सैद्धांतिक रूप से Insurance Company
को भुगतान करना होगा। लेकिन यहाँ एक पेंच है—बीमा कंपनियां अक्सर आतंकवादी हमलों, दंगों या ‘फुल-स्केल वॉर’ (पूर्ण युद्ध) के लिए अलग-अलग सीमाएं तय करती हैं। कई बार युद्ध से होने वाले नुकसान को स्टैंडर्ड पॉलिसी से बाहर रखा जाता है या इसके लिए बहुत ऊंचा प्रीमियम चुकाना पड़ता है।
क्या पूरी रकम मिलना संभव है?
बीमा जगत का नियम है कि क्लेम हमेशा ‘वास्तविक नुकसान’ के आधार पर मिलता है। इसका मतलब यह है कि अगर बुर्ज खलीफा के किसी एक हिस्से या सेक्शन को नुकसान पहुंचता है, तो भुगतान भी उसी अनुपात में होगा, न कि पूरी बीमा राशि एक साथ मिल जाएगी। इसके अलावा, बुर्ज खलीफा के भीतर स्थित Hotels, corporate offices और निजी अपार्टमेंट्स का बीमा उनके व्यक्तिगत मालिकों द्वारा अलग से कराया जाता है। ऐसे में किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में क्लेम का मिलना पॉलिसी की बारीकियों, जांच रिपोर्ट और ‘exclusion clause’ (किन परिस्थितियों में पैसा नहीं मिलेगा) पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक हिंसा और युद्ध के बीच का बारीक अंतर
बीमा विशेषज्ञ बताते हैं कि युद्ध की स्थिति में क्लेम मिलना सबसे कठिन होता है। अगर किसी हमले को आधिकारिक तौर पर ‘युद्ध’ घोषित कर दिया जाए, तो अधिकांश बीमा पॉलिसियां जिम्मेदारी से हाथ खींच लेती हैं, जब तक कि विशेष रूप से ‘वॉर रिस्क कवर’ न लिया गया हो। बुर्ज खलीफा जैसी ग्लोबल आइकन के लिए बीमा कंपनियां जांच के हर सूक्ष्म पहलू को देखती हैं। इसलिए, अगर कभी कोई अनहोनी होती है, तो हर्जाने की लड़ाई उतनी ही लंबी और ऊंची हो सकती है जितनी कि यह इमारत खुद है।
विदेश
जंग का तीसरा दिन : ईरान ने किया 10 जगहों पर हमला, सामने आई मरने वालों की संख्या
तेहरान,एजेंसी। अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले का तीसरा दिन भी दुनिया को दहला देने वाला रहा। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने कसम खाई कि अब वह पीछ नहीं हटने वाला है और इजरायल अमेरिका को अंतिम समय तक चुनौती देगा। इसी बात पर अटल रहते हुए सोमवार को ईरान द्वारा 11 जगहों पर भयानक हमले किए गए।
इन 11 जगहों पर किए हमले
ईरान ने गल्फ देशों निशाना बनाया, ईरान ने जोर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, सउदी अरब और ओमान पर मिसाइलें दागी। साथ ही साइपरस औऱ इजरायल पर भी अटैक किए। इन हमलों में सबसे ज्यादा मौतें इजरायल में देखने को मिली। जहां 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए, वहीं कुवैत में 1 की मौत 32 घायल, बहरीन में एक की मौत 4 घायल, यूएई में 3 की मौत 58 घायल और ओमान में 1 की मौत 5 लोग घायल हुए। वहीं 4 अमेरिकी अधिकारियों की मौत और 4 घायल हुए। वहीं जोर्डन और साइपरस में हुए हमलों में किसी तरह की मौत की खबर की पुष्टि अभी तक नहीं हुई। इसके अलावा इऱाक में 2 की मौत 5 घायल हुए है।

लेबनान में 13 की मौत
अमेरिका-इजरायल द्वारा किए गए हमले में लेबनान में अभी तक 13 की मौत हो चुकी है, जबकि 149 लोग घायल हुए हैं। वहीं, ईरान में अभी तक चल रही जंग में 155 लोगों की जान चली गई है, जबकि सैंकड़ों लोग घायल हुए हैं।
विदेश
अफगानिस्तान का पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हमला:तालिबान के मंत्री बोले- हमने डूरंड लाइन पार की, PAK का दावा- 400 अफगान लड़ाके मारे
इस्लामाबाद/ काबुल,एजेंसी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बीते चार दिनों से लगातार हवाई हमले और गोलीबारी जारी है। तालिबान सरकार का कहना है कि हमने पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील नूर खान एयरबेस पर हमला किया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में है।
इसके साथ ही तालिबान के एक मंत्री ने दावा किया कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की जमीन में घुस चुके हैं। तालिबान के मुताबिक, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं।
ये कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि अब तक 400 से ज्यादा अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।

पाकिस्तान ने 27 फरवरी को अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर हमला किया।
तालिबान के अनुसार, जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें शामिल हैं:
- नूर खान एयरबेस
- बलूचिस्तान के क्वेटा में 12वीं कोर का मुख्यालय
- खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मद क्षेत्र का एक सैन्य कैंप
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी।
पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया।
अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 415 तालिबान लड़ाके मारे
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ हमले को ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन नाम दिया है और काबुल समेत कई प्रांतों में हमले किए। ‘गजब लिल हक’ का मतलब है, अपने हक के लिए खड़े होना।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक अब तक –
- 415 तालिबान लड़ाके मारे गए
- 580 से ज्यादा घायल हुए
- 182 पोस्ट तबाह की गईं
- 31 पोस्ट पर कब्जा किया गया
- 185 टैंक और सैन्य वाहन तबाह किए गए
पाकिस्तानी वायुसेना ने दावा किया है कि उसने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया।
वहीं तालिबान का कहना है कि उसके सिर्फ 8 से 13 लड़ाके मारे गए और कुछ घायल हुए हैं। उसने दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया। तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने आगे हमला किया तो और कड़ा जवाब दिया जाएगा।
हमले के बाद की तस्वीरें…

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लड़ाई के दौरान एक मस्जिद क्षतिग्रस्त हो गई।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के एक अस्पताल में 27 फरवरी को एक घायल लड़की का इलाज करते डॉक्टर।

पाकिस्तान और अफगान सेनाओं के बीच 27 फरवरी को चली सीमा पार की झड़प में कई लोग घायल हो गए थे।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तोरखम सीमा पर 27 फरवरी को अफगान सैन्य अड्डे के पास धुआं उठता हुआ दिखाई दिया।
पाकिस्तान की संसद में निंदा प्रस्ताव पास
पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आगे किसी भी उकसावे पर कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा कर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने अफगान तालिबान सरकार को गैर-कानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीने जा रहे हैं।
दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है।
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