तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया है कि रात को की गई एयरस्ट्राइक में ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी मारे गए हैं। अगर इजराइल का यह दावा सही साबित होता है, तो वह इस युद्ध में खामेनेई के बाद मारे जाने वाले सबसे ताकतवर शख्स होंगे।
इसके साथ ही इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया कि एक अलग हमले में ईरान के बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर गुलामरजा सुलेमानी को भी मार गिराया गया। हालांकि, इन दावों पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।
वहीं, इजराइल के दावों के बीच लारीजानी के X अकाउंट पर एक हाथ से लिखा नोट पब्लिश किया है। इसमें उन्होंने हमले में मारे गए ईरानी नौसैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई है, जिनका अंतिम संस्कार आज होने की उम्मीद थी।
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…
इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम ने सोमवार रात ईरानी से आ रही एक मिसाइल को बीच में ही रोक दिया।
इजराइल पर सोमवार रात ईरानी एयरस्ट्राइक का फुटेज।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोमवार को ईरानी हथियारों पर हमले का फुटेज जारी किया।
भारत का नंदी देवी जहाज गुजरात पहुंचा
नंदा देवी जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करके आज रात 2:30 बजे गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा।
भारत का नंदा देवी जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार करके आज रात 2:30 बजे गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचा। इस जहाज में करीब 46,500 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लाई गई है।
इससे पहले भारतीय जहाज शिवालिक सोमवार को LPG लेकर ‘मुंद्रा पोर्ट’ पहुंच चुका है। इस जहाज पर करीब 46 हजार मीट्रिक टन LPG है, जो लगभग 32.4 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर है।
खामेनेई की उपाधि नहीं थी, इसलिए सुप्रीम लीडर नहीं बने लारीजानी
लारीजानी अमेरिका के साथ परमाणु बातचीत भी देख रहे थे और संभावित युद्ध की स्थिति में ईरान कैसे काम करेगा, इसकी रणनीति भी तैयार कर चुके थे।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक उनका प्रभाव इतना बढ़ गया था कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान भी कई मामलों में उनके भरोसे नजर आते थे। यहां तक कि इंटरनेट पाबंदियों जैसे फैसलों के लिए भी राष्ट्रपति को उनकी मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे उनकी असली ताकत का अंदाजा लगता है।
हालांकि, खामेनेई के बेहद करीबी होने के बावजूद लारीजानी खुद सर्वोच्च नेता नहीं बन सकते थे, क्योंकि इसके लिए वरिष्ठ शिया धर्मगुरु होना जरूरी होता है। आखिर में यह पद खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई ने संभाल लिया।
लारीजानी ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया
लारीजानी एक प्रभावशाली राजनीतिक और धार्मिक परिवार से आते थे। वे 12 साल तक संसद के स्पीकर रह चुके थे। साल 2021 में उन्होंने चीन के साथ 25 साल का बड़ा समझौता कराया, जिससे पश्चिमी प्रतिबंधों से जूझ रही ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिली।
युद्ध से पहले भी उनकी ताकत बढ़ती जा रही थी। उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए सख्त कदम उठाए और बल प्रयोग तक किया। साथ ही वे रूस, कतर और ओमान जैसे देशों के साथ संपर्क बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभा रहे थे।
इजराइल ने ईरान पर फिर हमले शुरू किए
इजराइल ने ईरान पर एक बार फिर हमले शुरू कर दिए हैं। इजराइली सेना के मुताबिक उसने राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में बड़े पैमाने पर हवाई हमलों की नई लहर शुरू की है।
इन हमलों में ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार मंगलवार सुबह से तेहरान और अन्य शहरों में जोरदार धमाके सुने गए हैं।
लारीजानी ने खामेनेई के मारे जाने के बाद देश की कमान संभाली थी
अली लारीजानी, जो ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी थे और परदे के पीछे से देश की कमान संभाल रहे थे, अब तक के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाते हैं जिन्हें इस युद्ध में निशाना बनाया गया है।
लारीजानी 67 साल के थे और खामेनेई के मारे जाने के बाद वह ईरान में सबसे ताकतवर शख्स माने जाने लगे थे। लारीजानी ने आगे आकर सरकार की कमान संभाली और लगातार अमेरिका और इजराइल की आलोचना करते रहे।
खामेनेई के करीबी माने जाने वाले लारीजानी को पहले ही यह जिम्मेदारी दी गई थी कि अगर सर्वोच्च नेता की हत्या हो जाती है तो देश को कैसे संभालना है। इसलिए उनके पास पहले से ही एक इमरजेंसी प्लान तैयार था।
ईरान बोला- सैकड़ों स्टारलिंक टर्मिनल जब्त किए
ईरान के खुफिया मंत्रालय ने कहा है कि उसने देशभर में सैकड़ों स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट टर्मिनल जब्त किए हैं। सरकारी मीडिया के मुताबिक मंत्रालय ने कहा कि इन टर्मिनलों की लोकेशन की पहचान कर उनके इस्तेमाल करने वालों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और उन्हें नियंत्रित किया गया।
मंत्रालय ने कहा कि अवैध स्टारलिंक सिस्टम का इस्तेमाल कानूनन अपराध है और युद्ध जैसे हालात में इसके लिए सख्त सजा दी जा सकती है। ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट को कई दिन हो चुके हैं। ऐसे में लोग सेंसरशिप से बचने के लिए स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में हजारों स्टारलिंक टर्मिनल गुप्त रूप से पहुंचाए गए हैं, जिनके जरिए लोग इंटरनेट तक पहुंच बना रहे हैं।
नई दिल्ली/रोम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है।
मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है।
उन्होंने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी अहम रही है। मोदी ने दोनों देशों के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई।
प्रधानमंत्री ने मेलोनी को आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
इटली गणराज्य बनने के बाद सबसे लंबा कार्यकाल
जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने शुक्रवार को लगातार 1413 दिन सत्ता में रहकर इटली में नया रिकॉर्ड बनाया। 1946 में इटली गणराज्य बनने के बाद यह किसी एक कैबिनेट का सबसे लंबा लगातार कार्यकाल है।
मेलोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार का रिकॉर्ड तोड़ा है। बर्लुस्कोनी की दूसरी कैबिनेट 2001 से 2005 तक 1412 दिन सत्ता में रही थी।
मेलोनी 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। वे दक्षिणपंथी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ की प्रमुख भी हैं।
मेलोनी ने भी मोदी को दी थी बधाई
जून 2026 में जब नरेंद्र मोदी ने 4399 दिन लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहकर जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा था, तब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी उन्हें बधाई दी थी।
मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “बधाई हो नरेंद्र मोदी। आज आप भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।”
मेलोनी ने बधाई देते हुए पीएम मोदी के साथ की यह तस्वीर भी पोस्ट की थी।
मेलोनी की पार्टी आज मनाएगी जश्न
मेलोनी की पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली (FdI) ने सरकार के रिकॉर्ड कार्यकाल के जश्न में शुक्रवार शाम दक्षिणी शहर बारी में बड़ी रैली आयोजित की है। इसमें मेलोनी भी भाषण देंगी।
रैली में हजारों समर्थकों के पहुंचने की उम्मीद है। करीब 80 बसों से समर्थकों को बारी लाया जा रहा है, जबकि कार्यक्रम स्थल पर करीब 10 हजार लोगों के बैठने की क्षमता है।
मेलोनी ने सरकार के लंबे कार्यकाल को बड़ी उपलब्धि बताया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सरकार ने लंबे समय तक सत्ता में बने रहने को ही अपनी उपलब्धि बना लिया है। यह रैली 2027 के चुनाव से पहले चुनावी ताकत दिखाने के कार्यक्रम के तौर पर भी देखी जा रही है।
इटली में सरकारें औसतन 13 महीने ही चलती हैं
इटली में पिछले कई दशकों से सरकारों के बार-बार बदलने और राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है। 80 साल पहले गणराज्य बनने के बाद से देश में 68 सरकारें बन चुकी हैं।
इन सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने रहा है। ऐसे में मेलोनी की तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाली गठबंधन सरकार का करीब 4 साल तक टिकना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इटली में सरकारें जल्दी क्यों गिरती हैं?
इटली की राजनीति में लंबे समय से कई पार्टियों का दबदबा रहा है। चुनाव के बाद अक्सर किसी एक पार्टी को इतनी सीटें नहीं मिलतीं कि वह अकेले सरकार बना सके। ऐसे में सरकार बनाने के लिए अलग-अलग पार्टियों को गठबंधन करना पड़ता है।
समस्या तब शुरू होती है, जब गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद बढ़ जाते हैं। गठबंधन की एक छोटी पार्टी भी समर्थन वापस ले ले, तो सरकार बहुमत खो सकती है। इसके बाद प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ सकता है या नई सरकार बनाने की कोशिश करनी पड़ती है। इटली में सरकार को संसद के दोनों सदनों- चैंबर ऑफ डेप्युटीज और सीनेट का समर्थन बनाए रखना जरूरी है।
मोदी ने मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी दी थी
पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की थी। यह टॉफी भारत में 1983 से बिक रही है। इसे पारले कंपनी बनाती है।
मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया था।
मेलोनी ने बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और मोदी को गिफ्ट के लिए धन्यवाद दिया था। मोदी और मेलोनी की साथ की तस्वीरों के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi काफी लोकप्रिय हुई थी।
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं।
गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा।
फ्रांस में 17 जून 2026 को G7 समिट में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प की आखिरी बार मुलाकात हुई थी।
G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव
सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है।
हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं।
अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं।
गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया।
ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं।
गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं।
240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य
गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है।
उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।
गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3 ‘A’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 2 मजदूर जिंदा निकाले गए हैं। शुक्रवार सुबह रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी पहचान संजय साह और कबीर महर्जन के रूप में हुई है।
बाढ़ के बाद सुरंग में 42 कर्मचारी और मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। दो लोगों के जिंदा मिलने के बाद बचाव अभियान में उम्मीद बढ़ी है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई देने की सूचना मिली थी। इसके बाद नेपाल सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग में दाखिल हुईं और तलाशी अभियान तेज किया।
बाढ़ से अब तक 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,282 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है।
सुरंग में रेस्क्यू से जुड़ी तस्वीरें…
चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान
नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शवों की बरामदगी का अभियान जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव मिले हैं, जबकि अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है।
प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं।
पति को जिंदा देख पत्नी बोली- दूसरी जिंदगी मिल गई
कबीर महर्जन 25 अगस्त की सुबह त्रिशूली-3A में मेंटेनेंस के काम के लिए गए थे। रेस्क्यू के बाद उनकी पत्नी ने कहा कि ऐसा लगा जैसे उनके पति को दूसरी जिंदगी मिल गई हो।
26 अगस्त को आई बाढ़ की घटना के बाद उनका फोन बंद हो गया। उस सुबह करीब 7:30 बजे पत्नी हीरा शोभा से कबीर की आखिरी बार बात हुई थी।
कई दिन तक कोई खबर नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती गई थी। अब कबीर के रेस्क्यू के बाद उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।
संजय साह बोले – सबकी जान बचाना मेरी जिम्मेदारी थी
नेपाल में आई भीषण आपदा के 9 दिन बाद सुरंग से दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकाला गया है। इनमें 30 साल के मैकेनिकल फोरमैन संजय साह भी शामिल हैं।
आपदा के समय उन्होंने सुरंग से भागने के बजाय पहले अपने साथियों को बचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि, सबकी जान बचाना उनकी जिम्मेदारी थी।
संजय साह अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन में काम करते थे। उन्होंने बताया कि हादसे के समय वह सुरंग के कंट्रोल रूम में थे। आमतौर पर वहां 4 से 6 लोग रहते थे, लेकिन उस दिन करीब 40-45 लोग मौजूद हो सकते थे।
उन्होंने बताया कि अंधेरे में उम्मीद बनाए रखने के लिए वह मंत्रों का जाप करते रहे।संजय ने यह भी कहा कि कुछ लोग सुरंग के अंदर और गहराई में फंसे हो सकते हैं।
बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत पैकेज घोषित
नेपाल सरकार ने बाढ़ से प्रभावित कारोबारियों के लिए राहत पैकेज घोषित किया है। बाढ़ में नष्ट वाहन, मशीनरी और उपकरण बिना कस्टम ड्यूटी के दोबारा आयात किए जा सकेंगे, जबकि प्रभावित लोगों के लोन की किस्तें आगे बढ़ाई या दोबारा तय की जाएंगी।
बीमा कंपनियों को तेजी से क्लेम निपटाने और शुरुआती आकलन के आधार पर 50% तक रकम एडवांस देने को कहा गया है।
बाढ़ में रसुवा, नुवाकोट और धादिंग की करीब 15 बस्तियां तबाह हुई हैं, इसलिए सरकार लोगों को बाढ़ के खतरे वाले इलाकों से हटाकर सुरक्षित जगहों पर बसाने की तैयारी कर रही है।
शुरुआती आकलन में करीब 16 लाख लोग प्रभावित और 8,317 घर तबाह हुए हैं। रेस्क्यू किए गए करीब 3,948 लोग अस्थायी केंद्रों में रह रहे हैं। रेस्क्यू कर्मियों को जोखिम भत्ता मिलेगा और ड्यूटी में मौत होने पर परिवार को 10 लाख नेपाली रुपए की मदद दी जाएगी।
नेपाल आपदा से जुड़ी तस्वीरें…
बाढ़ में अपनों को खोने वाले परिजन, शव नहीं मिलने के कारण काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार के दौरान रोते-बिलखते नजर आए
बाढ़ में 43 वर्षीय दिनेश अच्छामे की मौत हो गई। शव बरामद नहीं होने के बाद काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में अंतिम संस्कार की रस्म के दौरान परिजनों ने उनका पुतला लेकर अंतिम विदाई दी।
नेपाल के रसुवा में अपर त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर स्टेशन की सुरंग में फंसे लोगों की तलाश और शवों को निकालने में बचावकर्मियों की टीम जुटी है।
भारतीय अधिकारियों ने काठमांडू के एयरपोर्ट पर नेपाली आधिकारियों को मदद सौंपी।
नेपाल में बाढ़ के कारण फंसे 56 यात्रियों की मुंबई वापसी। गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे यात्री।
नेपाल बाढ़ में 600 बच्चे लापता, तलाश जारी
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट में फ्लैश फ्लड के बाद करीब 600 बच्चे अब भी लापता हैं। रसुवा में करीब 280, जबकि नुवाकोट में 300-350 बच्चों के लापता होने की जानकारी है। अकेले नुवाकोट की बिदुर नगरपालिका में करीब 250 बच्चे लापता बताए गए हैं।
प्रशासन और स्कूलों से बच्चों के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण सटीक संख्या जुटाने में दिक्कत आ रही है। कुछ बच्चों का पता चल चुका है, लेकिन अलग-अलग स्कूलों से नए लापता बच्चों की जानकारी भी सामने आ रही है। बाढ़ में दोनों जिलों के 22 शिक्षक और स्कूल कर्मचारी भी लापता हैं।
एनवीडिया ने नेपाल बाढ़ राहत के लिए 1 करोड़ डॉलर दिए
अमेरिकी टेक कंपनी एनवीडिया ने भोटेकोशी बाढ़ के बाद राहत और पुनर्निर्माण के लिए 10 मिलियन डॉलर यानी 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 1.5 अरब नेपाली रुपए) की सहायता दी है।
वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग को मदद के लिए धन्यवाद दिया।
वागले के मुताबिक, इस सहायता के बाद प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 10 अरब नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हो चुके हैं।
UN में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा उठाएंगे नेपाल PM
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्वतीय क्षेत्रों पर इसके असर का मुद्दा उठा सकते हैं।
रसुवा में विनाशकारी बाढ़ के बाद शाह ने महासभा में शामिल होने की इच्छा जताई है। विदेश मंत्रालय ने न्यूयॉर्क दौरे की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
शाह ने पहले महासभा में शामिल नहीं होने का फैसला किया था। इसके बाद कैबिनेट ने विदेश मंत्री शिशिर खनाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया था।
भारत की नई खेप में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण
भारत के छठे और सातवें राहत विमान गुरुवार रात काठमांडू पहुंचे। दोनों C-130J विमानों से आई 21.5 टन सहायता में फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार मंत्री महाबीर पुन को सौंपी गई।
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि यह सहायता रसुवा फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के राहत प्रयासों के लिए भारत के लगातार जारी सहयोग का हिस्सा है।
26 अगस्त से भारत भेज रहा राहत सामग्री
भारत ने बाढ़ के बाद 26 अगस्त को पहला राहत विमान भेजा था। इसमें 10 टन सामग्री थी, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।
इसके बाद 27 अगस्त को 37.5 टन, तीसरे विमान से 10 टन और 30 अगस्त को चौथे विमान से 11 टन राहत सामग्री भेजी गई। चौथी खेप में सर्च एंड रेस्क्यू उपकरण और DNA विश्लेषण के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भी शामिल थी।
2 सितंबर को भारत ने पांचवां विमान भेजा, जिसमें 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां थीं।
बाढ़ की वजहों की जांच में जुटे विशेषज्ञ
भोटेकोशी आपदा के कारणों का पता लगाने के लिए नेपाल में जलवायु वैज्ञानिक, पर्वतीय विशेषज्ञ और हिमनद विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञ अचानक आई बाढ़ के पीछे प्राकृतिक और जलवायु संबंधी कारणों की जांच कर रहे हैं।
इस बीच नेपाल सरकार ने राहत सामग्री के वितरण के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की है। राहत और सहायता के लिए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में सीधे धनराशि जमा करने की व्यवस्था भी की गई है।