छत्तीसगढ़
जशपुर : दो साल का सुशासन – जशपुर में विकास की नई पहचान
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले को मिली अभूतपूर्व सौगातें
- विशेष लेख :
- श्रीमती नूतन सिदार,सहायक संचालक (जनसंपर्क)
- सुनील त्रिपाठी,सहायक संचालक (जनसंपर्क)


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्ष जशपुर जिले के लिए विकास के स्वर्णिम अध्याय साबित हुए हैं। 13 दिसंबर को उनके कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, और इस अवधि में जशपुर जिले ने वह प्रगति हासिल की है, जिसने न सिर्फ जिले की दिशा बदली, बल्कि विकास की नई परिभाषा भी गढ़ी। राज्य की जनता से किए वायदों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन श्री साय ने दृढ़ इच्छाशक्ति, पारदर्शी प्रशासन और संवेदनशील नेतृत्व के बल पर इन चुनौतियों को विकास के अवसर में बदल दिया।

गरीबों को मिली जीवनभर की सुरक्षा पक्का मकान बना खुशियों की बुनियाद
मुख्यमंत्री बनने के साथ ही श्री साय की पहली बड़ी प्राथमिकता थी—हर गरीब को पक्का घर। कैबिनेट की पहली बैठक में 18 लाख गरीब परिवारों को घर देने के वादे को स्वीकृति मिली।
जशपुर जिले में 52,760 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए, जिससे हजारों परिवारों का वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ। आज ये परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
महिलाओं को मिली आर्थिक मजबूती – आत्मनिर्भरता की नई राह
महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपए प्रदान करने की घोषणा को श्री साय ने पूरे दृढ़ संकल्प के साथ लागू किया।
जशपुर जिले में 2 लाख से अधिक महिलाओं को 448 करोड़ 97 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। यह राशि महिलाओं के जीवन में वास्तविक सशक्तिकरण का आधार बनी है–चाहे वह बचत हो, छोटे व्यवसाय हों या परिवार की ज़रूरतें।
किसानों के जीवन में खुशियों की बहार – बोनस, खरीदी और सम्मान निधि से बढ़ा विश्वास
पिछली सरकार के बकाया दो साल के धान बोनस का भुगतान कर मुख्यमंत्री ने किसानों का भरोसा और मजबूत किया। जिले के 50 हजार से अधिक किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की गई।
इसके साथ ही 1,23,168 किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि में 308 करोड़ 30 लाख 76 हजार रुपए दिए गए। इन कदमों ने कृषि को स्थिरता, किसानों को सुरक्षा और खेती को निरंतरता प्रदान की।
स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक परिवर्तन — आधुनिक चिकित्सालय की स्वीकृति
जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नए अत्याधुनिक चिकित्सालय भवन को मंजूरी मिली है।
इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को नए उपकरण, डॉक्टर, नर्स और संसाधन उपलब्ध कराए गए। साथ ही जिले में अतिरिक्त 108 संजीवनी एक्सप्रेस व शव वाहन की व्यवस्था से आपातकालीन सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार आया है।
सड़कें बनी प्रगति का मार्ग –कनेक्टिविटी में आया व्यापक सुधार
जिले में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए करोड़ों रुपए मंजूर हुए। पहले दुर्गम माने जाने वाले क्षेत्रों में भी पक्की सड़कें पहुंचीं, जिससे व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान हुई। स्थानीय लोगों के लिए आवागमन आज पहले से कहीं अधिक सुगम है।
ऊर्जा व्यवस्था में नई शक्ति — उपकेंद्रों से मजबूत हुई बिजली आपूर्ति
जिले में अनेक नए विद्युत उपकेंद्रों की स्वीकृति से बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है।
लो-वोल्टेज की समस्या में कमी आई है और गांवों में ट्रांसफार्मर व लाइन सुधार कार्य गति से जारी हैं।
बेहतर बिजली ने उद्योग, शिक्षा और घरेलू जिंदगी को नई ऊर्जा दी है।
शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार — युवाओं के लिए बढ़े अवसर
जशपुर को शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ी सौगातें मिली हैं। जिले में दो नए महाविद्यालयों की स्वीकृति से छात्रों को अब उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
स्कूलों में भवन निर्माण, स्मार्ट क्लास, छात्रावास और अधोसंरचना उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग और मजबूत हुआ है।
पर्यटन विकास को मिली गति — जशपुर की पहचान को मिला नया आयाम
जिले की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मद में विशेष बजट स्वीकृत हुआ है। पर्यटक स्थलों के सौंदर्यीकरण, सड़क सुधार और सुविधाओं के विकास से जशपुर पर्यटन के नए मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।
सिंचाई परियोजनाओं से खेतों में लौटी हरियाली
जिले में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देकर किसानों की वर्षों पुरानी मांग पूरी की गई। नलकूप खनन, एनीकट, तालाब निर्माण और अन्य योजनाओं से किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलेगी। फसल उत्पादन बढ़ेगा और किसान आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले ने इन दो वर्षों में वह प्रगति हासिल की है, जिसकी कल्पना वर्षों से की जा रही थी। गरीबों के लिए घर, महिलाओं के लिए सम्मान, किसानों के लिए सुरक्षा, युवाओं के लिए अवसर और हर वर्ग के लिए विकास—इन्हीं उपलब्धियों ने जशपुर को नई पहचान दी है। आगे आने वाले वर्षों में यह गति और मजबूत होगी, यही विश्वास जशपुरवासियों के दिलों में है।
कोरबा
“सजग कोरबा – सदर कोरबा अभियान” के तहत कोरबा पुलिस की त्वरित कार्यवाही, लूट के मामले का खुलासा
लूट के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
कोरबा। कोरबा जिले में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक कोरबा सिद्धार्थ तिवारी द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के मार्गदर्शन में थाना/चौकी स्तर पर लगातार सघन कार्यवाही की जा रही है।
इसी क्रम में “सजग कोरबा – सदर कोरबा अभियान” के तहत थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत चौकी मानिकपुर में लूट की घटना का त्वरित खुलासा किया गया है।

प्रार्थी योगेश कुमार कंवट, निवासी तिलकेजा दरी मोहल्ला, थाना उरगा, दिनांक 25.03.2026 को अपने जीजा के घर मानिकपुर आया था। दिनांक 26.03.2026 को रात्रि लगभग 02:00 बजे वापस जाते समय मानिकपुर बाजार के पास कुछ अज्ञात आरोपियों द्वारा उसे रोककर हाथ-मुक्का से मारपीट करते हुए उसकी हीरो एचएफ डीलक्स मोटर सायकल एवं नगदी रकम 2000 रुपये लूटकर फरार हो गए।
प्रार्थी की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली चौकी मानिकपुर में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। विवेचना के दौरान संकलित साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें अभिरक्षा में लिया गया।
गिरफ्तार आरोपीगण का विवरण:–
- फैजल अहमद अंसारी उर्फ अमन, निवासी मानिकपुर, थाना कोतवाली, जिला कोरबा।
- विजय चौहान, निवासी मानिकपुर, थाना कोतवाली, जिला कोरबा।
आरोपियों से पृथक-पृथक मेमोरण्डम कथन लेकर उनके कब्जे से लूट की मशरूका, जिसमें एक पुरानी इस्तेमाल की गई मोटर सायकल (हीरो एचएफ डीलक्स), मोटर सायकल क्रमांक CG 11 AB 8037 एवं नगदी राशि बरामद की गई।
बरामद सामग्री को विधिवत गवाहों के समक्ष जप्त कर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है। प्रकरण में आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उन्हें विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है।
कोरबा पुलिस द्वारा “सजग कोरबा – सदर कोरबा अभियान” के तहत क्षेत्र में अपराध नियंत्रण हेतु निरंतर सख्त कार्यवाही जारी रहेगी एवं आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

कोरबा
“सजग कोरबा – सदर कोरबा” अभियान के तहत कोतवाली पुलिस की त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही
डीजे विवाद में चाकूबाजी की घटना का खुलासा, 03 आरोपी गिरफ्तार
कोरबा। कोरबा जिले में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) के मार्गदर्शन में थाना/चौकी स्तर पर लगातार सघन कार्यवाही की जा रही है।

इसी क्रम में दिनांक 25 मार्च 2026 को थाना कोतवाली, जिला कोरबा क्षेत्रांतर्गत डीजे को लेकर हुए विवाद में प्रार्थी संदीप भास्कर के कूल्हे पर चाकू मारने की घटना सामने आई थी। उक्त घटना को गंभीरता से लेते हुए थाना कोतवाली में आरोपीगण के विरुद्ध धारा 109(3), 296, 351(3), 115(2) भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
आरोपियों का नाम पता:—
- संतोष बाबा पिता पंचराम वैष्णव, उम्र 18 वर्ष, निवासी मोती सागर पारा।
- शिव यादव पिता छोटेलाल, उम्र 20 वर्ष, निवासी मोती सागर पारा।
- पुरुषोत्तम सोनी उर्फ पांडू पिता जयराम, उम्र 21 वर्ष, निवासी पुरानी बस्ती।
तीनों आरोपियों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान आरोपियों द्वारा घटना करना स्वीकार किया गया। उनके मेमोरेंडम के आधार पर घटना में प्रयुक्त चाकू जप्त किया गया। प्रकरण में धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट भी जोड़ी गई है।
उक्त सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है।
♦️“सजग कोरबा – सदर कोरबा” अभियान के तहत कोरबा पुलिस द्वारा अपराधियों एवं असामाजिक तत्वों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्यवाही की जा रही है तथा आगे भी यह कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी।

कोरबा
ग्रामीणों के आंदोलन के आगे झुका प्रबंधन, SECL गेवरा और PNC कंपनी का खदानबंदी समाप्त, 13 को तत्काल और 7 को 8 अप्रैल तक रोजगार का मिला लिखित आश्वासन
कोरबा/गेवरा। SECL गेवरा परियोजना के प्रभावित ग्राम नरईबोध और गेवरा क्षेत्र के ग्रामों के ग्रामीणों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज गेवरा खदान और आउटसोर्सिंग कंपनी PNC के कार्यों को पूरी तरह ठप कर दिया।पुनर्वास, मुआवजा, बसाहट और वैकल्पिक रोजगार की मांग को लेकर सुबह 9:00 बजे से शुरू हुआ, यह उग्र प्रदर्शन दोपहर 2:00 बजे तक जारी रहा, जिससे परियोजना का कार्य लगभग 4 घंटे तक बाधित रहा ।

मुख्य घटनाक्रम
- नारेबाजी और घेराव:- भारी संख्या में जुटे ग्रामीणों ने प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए मौके पर पुलिस बल और CISF के जवान मुस्तैद रहे ।
- प्रशासनिक मध्यस्थता:- आंदोलन को समाप्त कराने के लिए तहसीलदार और SECL के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों, कंपनी प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच लंबी चर्चा हुई ।
- सहमति और समाधान:- वार्ता के दौरान PNC कंपनी में 13 भू-विस्थापितों को तत्काल प्रभाव से रोजगार में बहाल करने का निर्णय लिया गया। वहीं शेष 7 भू-विस्थापितों को उनका बी-फॉर्म (B-Form) और मेडिकल प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात 8 अप्रैल 2026 तक कार्य पर रखने का लिखित आश्वासन दिया गया ।
- लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित
एसईसीएल गेवरा के अधिकारियों और नायब तहसीलदार द्वारा लिखित में आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त किया। ग्रामीणों का नेतृत्व कर रही गोमती केवट ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी 20 लोगों की जॉइनिंग और अन्य मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो भविष्य में पुनः उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी ।
इस समझौते के बाद खदान और PNC कंपनी में कार्य पुनः सुचारू रूप से शुरू हो गया है ।



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