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विदेश

उ.कोरिया में जिनपिंग का ऐतिहासिक भव्य स्वागत, दुनिया की आंखें रह गई फटी, अमेरिका के लिए खतरे की घंटी

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प्योंगयांग, एजेंसी। उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) का भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया। सात वर्षों बाद हो रहे इस दुर्लभ दौरे को एशिया की राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) और उनकी पत्नी Ri Sol Ju ने प्योंगयांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शी जिनपिंग और उनकी पत्नी Peng Liyuan का गर्मजोशी से स्वागत किया।

WATCH: Warm welcome of Chinese President in North Korea as Xi arrives for rare visit to meet Kim Jong Un pic.twitter.com/MN3euCevLF

— Insider Paper (@TheInsiderPaper) June 8, 2026

हवाई अड्डे से निकलने के बाद  जिनपिंग प्योंगयांग के मुख्य चौक पहुंचे, जहां उन्हें सैन्य गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। हजारों नागरिक सड़कों और चौक पर एकत्र हुए और दोनों देशों की मित्रता के समर्थन में स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए।  पूरे इलाके को चीन और उत्तर कोरिया के राष्ट्रीय झंडों, दोनों नेताओं के विशाल चित्रों और “मित्रता एवं एकता” के संदेश देने वाले बैनरों से सजाया गया था। बच्चों ने गुब्बारे लहराकर स्वागत किया, जिससे माहौल उत्सव जैसा दिखाई दिया। 

Xi Jinping, general secretary of the Communist Party of China Central Committee and Chinese president, arrived in Pyongyang on Monday for a state visit to the Democratic People’s Republic of Korea (DPRK).

Kim Jong Un, general secretary of the Workers’ Party of Korea and… pic.twitter.com/mGjFclDX8i

— China News 中国新闻网 (@Echinanews) June 8, 2026

यह यात्रा 2019 के बाद शी जिनपिंग की पहली उत्तर कोरिया यात्रा है। पिछले सात वर्षों में वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव आए हैं। इस दौरान उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने संबंध मजबूत किए हैं, जबकि चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा और तनाव भी बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में शी का प्योंगयांग दौरा दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है। हालांकि दोनों नेताओं की बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हो सकते हैं:

  • चीन और उत्तर कोरिया के आर्थिक सहयोग को बढ़ाना
  • क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य सहयोग
  • कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति
  • अमेरिका और उसके सहयोगियों की नीतियों पर चर्चा
  • रूस, चीन और उत्तर कोरिया के उभरते रणनीतिक समीकरण
     

अमेरिका के लिए सीधा संदेश
विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। ऐसे समय में जब चीन और अमेरिका के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है, वहीं उत्तर कोरिया भी अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ टकराव की स्थिति में है। इसलिए किम और शी की मुलाकात को वॉशिंगटन के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले वर्ष बीजिंग में आयोजित सैन्य परेड के दौरान शी जिनपिंग और किम जोंग उन की मुलाकात हुई थी, जिसमें Vladimir Putin भी शामिल हुए थे। बता दें कि चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा आर्थिक और राजनीतिक सहयोगी रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में कुछ दूरी देखने को मिली थी। शी जिनपिंग की यह यात्रा इस पारंपरिक गठबंधन को फिर से मजबूत करने और नई रणनीतिक साझेदारी को आकार देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। 

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देश

रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय: ओडेसा पोर्ट पर इंडियन क्रू वाले जहाज पर हमला, 2 हिंदुस्तानी नागरिक लापता

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odesa port strike hits vessel with four indians two safe and two untraced

कीव, एजेंसी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर क्षेत्र एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। यूक्रेन के प्रमुख ओडेसा बंदरगाह पर एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले में चार भारतीय नागरिक भी सवार थे। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि दो भारतीय सुरक्षित हैं, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और बचाव अभियान पर नजर बनाए हुए है। एमवी एजीएन रैग्नर (MV AGN Ragnar) ओडेसा बंदरगाह पर हमले की चपेट में आ गया। ओडेसा काला सागर क्षेत्र में यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यह कई बार हमलों का निशाना बन चुका है।

यूक्रेन में भारतीय दूतावास के अनुसार, घटना के समय जहाज पर चार भारतीय नागरिक मौजूद थे। अब तक मिली जानकारी के अनुसार दो भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। दो अन्य भारतीयों के बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है। उनकी तलाश के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय दूतावास ने जारी बयान में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है। दूतावास संबंधित यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है ताकि लापता भारतीयों का जल्द पता लगाया जा सके और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। जहाज पर कुल कितने चालक दल के सदस्य थे, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

अधिकारियों ने अभी तक चारों भारतीयों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। साथ ही जहाज पर उनकी जिम्मेदारियों और पदों के बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काला सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगातार जोखिम भरी बनी हुई है। हाल के महीनों में कई व्यापारी जहाज मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

काठमांडू,

भारत और नेपाल के बीच यात्रा और व्यापार करने वालों के लिए अच्छी खबर है। नेपाल सरकार ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी रू.200 और रू.500 के भारतीय नोट अधिकतम रू.25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर इस संबंध में नियम स्पष्ट किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि 8 नवंबर 2016 से पहले जारी रू.500 और रू.1,000 के भारतीय नोट पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इन पुराने नोटों को नेपाल में लाने या ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

नेपाली नागरिकों के लिए विशेष नियम
नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से नेपाल ला सकेंगे। उन्हें भारतीय करेंसी नेपाल से किसी तीसरे देश में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को काफी सुविधा मिलेगी। इससे सीमा पार नकदी लेन-देन की प्रक्रिया भी सरल होगी। नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा बिना कस्टम घोषणा के नेपाल ला सकते हैं। यदि इससे अधिक राशि लाई जाती है तो कस्टम अधिकारियों के समक्ष इसकी घोषणा करना अनिवार्य होगा। एजेंसी।

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

मुंबई,

वैश्विक निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसा निकालकर विदेशी फंड अब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों के बैंकिंग, आईटी और अन्य अपेक्षाकृत स्थिर सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह बदलाव एशियाई बाजारों का निवेश परिदृश्य बदलता दिख रहा है।

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिडेलिटी इंटरनेशनल, BNP Paribas और M&G Investments जैसे निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान के AI एवं सेमीकंडक्टर शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू किया है। विश्लेषकों का कहना है कि AI पर हो रहे भारी निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में फंड मैनेजर बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और अन्य अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी बिकवाली का असर दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर भी दिखा है। निवेशकों की निकासी से दोनों बाजारों में दबाव बना हुआ है और अस्थिरता बढ़ी है।

भारत और चीन विदेशी निवेशकों का केंद्र

दूसरी ओर, भारत और चीन विदेशी निवेशकों के लिए फिर आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। जुलाई के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे आईटी सहित कई प्रमुख सेक्टरों को समर्थन मिला। वहीं, चीन में इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके अलावा इंडोनेशिया और थाईलैंड के बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल तेज जोखिम वाले AI शेयरों की तुलना में बेहतर मूल्यांकन और स्थिर रिटर्न वाले बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एजेंसी।

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