विदिशा, एजेंसी। मध्य प्रदेश के विदिशा की रहने वाली और कनाडा के टोरंटो में रह रहीं इंजीनियर स्वाती बागरेचा कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान चीन-तिब्बत सीमा के पास से लापता हो गई हैं। 26 अगस्त की सुबह 9 बजे परिवार से संपर्क टूट गया। स्वाती के मोबाइल पर अभी भी रिंग जा रही है, लेकिन वह कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं।
परिवार का कहना- नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के दिन से ही लापता है। मोबाइल की लोकेशन चीन बॉर्डर के आसपास आ रही है। परिजन ने संबंधित एजेंसियों से मोबाइल लोकेशन तकनीकी रूप से ट्रैक कर स्वाती की सही स्थिति का पता लगाने की मांग की है।
स्वाती रिटायर्ड CMHO डॉ. केसी बागरेचा की बेटी हैं। उनके लापता होने की जानकारी मिलने के बाद विदिशा विधायक मुकेश टंडन शुक्रवार को उनके परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और स्वाती की तलाश में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
स्वाति ईशा फाउंडेशन (सदगुरु फ़ाउंडेशन) के 77 यात्रियों के एक समूह के साथ यात्रा पर गई थी।
ये तस्वीर इंजीनियर स्वाती के माता-पिता की तस्वीर है।
इंजीनियर स्वाती की मां बार-बार कॉल कर रही हैं।
77 यात्रियों के समूह के साथ 8 अगस्त को निकली थीं
परिजनों के अनुसार, स्वाती 8 अगस्त को सद्गुरु फाउंडेशन/ईशा फाउंडेशन के 77 यात्रियों के समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकली थीं। करीब दो सप्ताह की यात्रा के दौरान वह 14 अगस्त को काठमांडू पहुंचीं और वहां दो दिन रुकीं।
इसके बाद समूह चीन के क्षेत्र में दाखिल हुआ। अलग-अलग पड़ावों से होते हुए मानसरोवर पहुंचा। समूह ने मानसरोवर में दो दिन प्रवास किया। स्वाती ने मानसरोवर की परिक्रमा नहीं की थी।
अंतिम पड़ाव से करीब 100 किमी दूर मेडिटेशन के लिए पहुंचा था समूह
परिजन के मुताबिक, वापसी के दौरान यात्रियों का समूह कई स्थानों पर रुका। यात्रा का अंतिम पड़ाव सागर टाउन बताया गया है। इससे करीब 100 किलोमीटर दूर समूह मेडिटेशन के लिए पहुंचा था। इसी दौरान बुधवार सुबह करीब 9 बजे चीन-तिब्बत बॉर्डर के पास स्वाती के बारे में आखिरी जानकारी परिवार को मिली।
इसके बाद से उनका संपर्क नहीं हो पाया है। यात्रा शुरू होने के बाद से स्वाती लगातार परिवार के संपर्क में थीं। वह अलग-अलग पड़ावों से अपनी जानकारी देती रही थीं। आखिरी बार उन्होंने व्हाट्सएप मैसेज के जरिए परिवार को जानकारी दी थी।
ये तस्वीर स्वाती के परिवार की है।
मोबाइल की लोकेशन चीन बॉर्डर के आसपास
परिजन के मुताबिक, स्वाती के मोबाइल पर फोन करने पर अभी भी रिंग जा रही है, लेकिन वह कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं। परिवार को मिली जानकारी के अनुसार, मोबाइल की लोकेशन चीन बॉर्डर के आसपास आ रही है।
परिजन का कहना है कि लोकेशन में एक-दो किलोमीटर का अंतर हो सकता है। अगर संबंधित एजेंसियां मोबाइल की लोकेशन को तकनीकी रूप से ट्रैक करें तो स्वाती की सही स्थिति का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
कनाडा के साथ भारत और नेपाल की एंबेसी से संपर्क
स्वाती की तलाश के लिए परिवार ने प्रशासनिक और राजनयिक स्तर पर भी प्रयास शुरू किए हैं। कनाडा एंबेसी के साथ भारतीय और नेपाली एंबेसी से भी संपर्क किया गया है।परिवार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी बातचीत की है।
मानवाधिकार आयोग की सदस्य प्रियंक कानूनगो से संपर्क किए जाने की जानकारी भी परिजन ने दी है। रक्षाबंधन के त्योहार पर जिस परिवार में खुशियां होनी थीं, वहां अब स्वाती की सकुशल वापसी का इंतजार है।
स्वाती अपनी बेटी को परिवार के पास छोड़कर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। अब परिवार की नजर मोबाइल फोन पर टिकी है। फोन की घंटी बजते ही परिजनों को उम्मीद होती है कि शायद दूसरी तरफ स्वाती होंगी, लेकिन कॉल रिसीव नहीं होने से उनकी चिंता बढ़ जाती है।
विदिशा विधायक मुकेश टंडन बागरेचा परिवार से मिलने पहुंचे।
विधायक बोले- संबंधित एजेंसियों से लगातार संपर्क
विदिशा से बीजेपी विधायक मुकेश टंडन ने कहा- बागरेचा परिवार के साथ स्वाती के शुभचिंतक भी चिंतित हैं। संबंधित एजेंसियों से संपर्क कर स्वाती का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। परिवार भी अपने स्तर पर लगातार प्रयास कर रहा है।
विधायक ने परिजन को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। संबंधित एजेंसियां जल्द से जल्द मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर स्वाती की सही स्थिति का पता लगाएं और उनकी सकुशल वापसी सुनिश्चित करें।
नेपाल और तिब्बत में 552 लोगों की मौत
नेपाल और तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 552 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,500 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनमें करीब 178 भारतीय भी शामिल हैं। नेपाल में 547 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 977 लोग अब भी लापता हैं।
इनमें 537 विदेशी नागरिक, 45 नेपाली सेना के जवान और 41 नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं, तिब्बत में 5 लोगों की मौत हुई है और 558 लोग लापता हैं। इनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। बिहार के खगड़िया और चंपारण समेत 20 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, 1 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रह सकता है।
वहीं, नेपाल में आई बाढ़ से बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट है। गंगा और गंडक खतरे के निशान से ऊपर हैं। कोसी और बागमती नदियां भी उफान पर हैं। यहां 50 हजार से ज्यादा घर पानी में डूबे हैं।
उत्तराखंड के 11 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, गुरुवार को चमोली में लैंडस्लाइड से बद्रीनाथ हाईवे कुछ देर के लिए बाधित हुआ।
हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 31 अगस्त से 2 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। लैंडस्लाइड्स और भारी बारिश के चलते राज्य में 70 सड़कें बंद हैं।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
देशभर से मौसम की तस्वीरें
तस्वीर बिहार के वैशाली की है, जहां गंडक नदी गंगा में मिलती है। यहां देसरी, गनियारी घाट से सटे गांवों में पानी घुसने लगा है।
यूपी के महोबा में गुरुवार सुबह से शाम तक सबसे ज्यादा 131.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। सड़कें डूबने से कई जगह जाम लग गया।
मध्य प्रदेश के निवाड़ी में भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। हाईवे पर ट्रैफिक थम गया है।
राजस्थान में कोटा के नोनेरा डैम के कैचमेंट एरिया में लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते डैम के गेट खोल दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के ग्राम तेतरडीह में कृषि विभाग का बांध टूट गया। पानी खेतों में भरने से धान की फसल को नुकसान हुआ है।
ओडिशा: IMD ने 21 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ओडिशा के 19 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें 28 अगस्त को कई स्थानों पर गरज और बिजली के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान है। क्योंझर और मयूरभंज को भारी से बहुत भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट पर रखा गया है।
यह चेतावनी तब आई है जब उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके प्रभाव में, 29 अगस्त को पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तट के साथ एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे पूरे राज्य में और अधिक बारिश होगी।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में बाढ़ से सुरक्षित निकाले गए तमिलनाडु के 21 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री शुक्रवार को काठमांडू से दिल्ली पहुंच गए। इन्हें नेपाली सेना ने बाढ़ प्रभावित इलाके से रेस्क्यू किया था। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली में उनसे मुलाकात कर उनकी आपबीती सुनी।
इधर, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील फटने के बाद नेपाल में भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे बसे गांव खाली कराए जा रहे हैं। नेपाली सेना ने लोगों और सुरक्षाकर्मियों को नदी किनारे से हटकर सुरक्षित जगह जाने को कहा है।
चीन ने तिब्बत में लेवल-4 अलर्ट जारी किया है और दोबारा बाढ़ के खतरे को देखते हुए राहत-बचाव अभियान रोक दिया है।
नेपाल और तिब्बत में बाढ़-भूस्खलन से अब तक 552 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
चीन के CCTV मीडिया ने यह फुटेज जारी किया है। इसमें झील से पानी ओवरफ्लो होते दिख रहा है।
ग्लेशियल झील का बांध टूटने के बाद नुवाकोट जिल में लोग सुरक्षित जगहों की ओर जा रहे हैं।
नेपाल में
547 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 977 लोग अब भी लापता हैं।
लापता लोगों में 537 विदेशी नागरिक, 45 नेपाली सेना के जवान और 41 नेपाल पुलिसकर्मी शामिल हैं।
तिब्बत में
5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। 558 लोग अब भी लापता हैं।
लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
नेपाल में बाढ़ से जुड़ीं तस्वीरें
नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद मलबे और कीचड़ की नदी में तब्दील हुई खूबसूरत हरी-भरी घाटी।
बाढ़ के पानी और मलबे में एक घर पूरी तरफ से घिर गया। उसके दोनों तरफ से पानी बह रहा है।
काठमांडु के त्रिभुवन हॉस्पिटल में मुर्दाघर के बाहर मृतकों की पहचान के लिए लगाई गई तस्वीरों को देखते हुए परिजन।
नेपाली सेना ने रसुवा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में नेपाल-चीन सीमा का रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट। बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद पोस्ट पूरी तरह तबाह नजर आया। क्रेडिट: वैंटोर/हैंडआउट
तीन सवालों में जानिए नेपाल के हालात
सवाल 1: कितने इलाके मुख्य सड़कों और हाईवे से कट गए हैं?
जवाब: बाढ़ और लैंडस्लाइड से नेपाल-चीन सीमा को जोड़ने वाले पासांग ल्हामु हाईवे का 40 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा मलबे में दब गया है। इससे उत्तरी रसुवा जिला देश के बाकी हिस्सों से कट गया है। वहीं, ग्यिरोंग पोर्ट जाने वाला अहम इंटरेनशनल ट्रेड रूट भी बंद है।
सवाल 2: किन गांवों तक अब सिर्फ पैदल या हेलिकॉप्टर से पहुंचा जा सकता है?
जवाब: रसुवा और नुवाकोट के 18 से ज्यादा पहाड़ी गांवों में सड़क संपर्क टूट गया है। तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और थुमन जैसे इलाकों तक पहुंचने के लिए फिलहाल हेलिकॉप्टर या पैदल रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। सेना हेलिकॉप्टर से लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने में जुटी है।
सवाल 3: कौन से पुल दोबारा बनाए जा रहे हैं?
जवाब: बाढ़ में कई पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनमें रसुवागढ़ी फ्रेंडशिप ब्रिज सबसे अहम है, जो नेपाल-चीन सीमा को जोड़ता है। इसे फिर से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों पर बने छोटे सस्पेंशन ब्रिजों को भी अस्थायी तौर पर चालू करने की कोशिश हो रही है, ताकि स्थानीय लोगों की आवाजाही शुरू हो सके।
नेपाल में रेस्क्यू का प्लान: हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट, गांव खाली कराए
नेपाल सरकार के मुताबिक, रेस्क्यू और राहत अभियान में 13,295 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। इनमें 7,250 नेपाल पुलिस, 4,200 नेपाली सेना और 1,845 आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान शामिल हैं। सरकार के अनुसार, अब तक 3,253 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
नेपाली सेना के रेस्क्यू का 3-लेयर प्लान…
एयरलिफ्ट: हेलिकॉप्टरों के जरिए ऊंचे पहाड़ों और टनल में फंसे लोगों को निकालना।
इवैक्यूएशन: तटीय और निचले गांवों को खाली कराकर लोगों को सुरक्षित कैंपों में शिफ्ट करना।
फॉरेंसिक सर्च: खोजी कुत्तों और मलबे को हटाने वाली भारी मशीनों से शवों और मलबे को साफ करना।
मेडिकल सुविधा: घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
जयशंकर ने नेपाल से लौटे तीर्थयात्रियों से मुलाकात की
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नेपाल में बाढ़ से सुरक्षित बचाए गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों की आपबीती सुनकर वे भावुक हो गए।
जयशंकर ने रेस्क्यू अभियान के लिए नेपाली सेना और नेपाल सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने भारतीय दूतावास की भी सराहना की, जिसने तीर्थयात्रियों की सुरक्षित भारत वापसी में मदद की।
नेपाल बाढ़ में 320 भारतीय लापता
बाढ़ के बाद 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है या वे लापता हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें ऐसे लोग शामिल हो सकते हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे, लेकिन किसी दूसरे देश के नागरिक हैं।
जायसवाल के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से रेस्क्यू किए गए 21 भारतीय शुक्रवार को काठमांडू से दिल्ली पहुंच गए।
इससे पहले त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 63 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया था। वहीं, चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया जारी है।
नेपाल बाढ़ में 537 विदेशी नागरिक अब भी लापता
नेपाल सरकार ने बाढ़ के बाद लापता 537 विदेशी नागरिकों की सूची जारी की है। लापता लोगों में 178 भारतीय, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 33 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं।
नेपाल के 8 जिलों से 538 शव बरामद
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद 8 जिलों से अब तक 538 शव बरामद किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चितवन में 221 शव मिले हैं। जिलेवार आंकड़े;
चितवन – 221 शव
नवलपरासी पूर्व – 134 शव
गोरखा – 46 शव (मानव अंगों समेत)
नुवाकोट – 37 शव
धादिंग – 33 शव
तनहूं – 28 शव
नवलपरासी पश्चिम – 27 शव
रसुवा – 12 शव
बाढ़ के बाद 121 विदेशियों का रेस्क्यू, इनमें भारत के 85 नागरिक
नेपाल पर्यटन बोर्ड के ताजा अपडेट के मुताबिक, भोटेकोशी बाढ़ के बाद अब तक 121 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है।
इनमें 85 भारतीय, 16 चीनी, 9 दक्षिण कोरियाई, 2 अमेरिकी और 2 रूसी नागरिक शामिल हैं।
चीन बोला – नेपाल में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़
चीन ने शुक्रवार को कहा कि नेपाल में ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने से बुधवार को भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आई हो सकती है। इस बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के बड़े इलाके में तबाही मचाई।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों और सरकारी संस्थानों ने शुरुआती जांच की है। उनके मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटना इस आपदा की संभावित वजह हो सकती है।
बाढ़ की चेतावनी के बाद सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ रहे लोग
पानी का स्तर बढ़ने पर अधिकारियों ने फिर से बाढ़ की चेतावनी जारी की। इसके बाद लोग सुरक्षित जगहों की ओर जाते हुए।
बाढ़ की चेतावनी जारी होने के बाद लोग सुरक्षित जगहों की ओर जाते हुए।
एक महिला जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगह की ओर जाती हुई।
बाढ़ की चेतावनी के बाद धादिंग जिले में एक महिला जरूरी सामान लेकर सुरक्षित जगह जाती हुई।
कानपुर, एजेंसी। यूपी के कानपुर में ट्रेनिंग विमान क्रैश हो गया। हादसे में पायलट और ट्रेनी की मौत हो गई। विमान ने गुरुवार सुबह 11:30 बजे उड़ान भरी थी। 11:50 बजे यानी उड़ान के महज 20 मिनट बाद गंगा बैराज के पास 5 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल से टकराकर खेत में जा गिरा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विमान करीब 200-250 फीट ऊपर था। तभी अचानक हवा में डगमगाया और क्षतिग्रस्त हो गया। नीचे गिरते ही पूरा विमान टूटकर बिखर गया। पुर्जे दूर तक बिखर गए। हालांकि, विमान में आग नहीं लगी।
हादसे से जुड़े वीडियो सामने आए हैं। इनमें दिख रहा है कि जमीन में गिरने के बाद विमान मलबे में तब्दील हो गया। एक पायलट कॉकपिट के पास फंसा था। दूसरा गंभीर हालत में विमान से थोड़ी दूर खून से लथपथ पड़ा था। विमान की एक सीट भी टूटकर बाहर आ गई। करीब 12:15 बजे पुलिस-प्रशासन की टीम पहुंची।
खून से लथपथ गुजरात के पायलट सचिन भाटिया (29) और महाराष्ट्र के पनवेल के रहने वाले ट्रेनी अभिषेक पुजारी (28) को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, दोनों पायलट की मौत ऊंचाई से गिरने की वजह से हुई। शरीर में मल्टीपल इंजरी हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट वजह सामने आएगी।
मौके पर पहुंचे कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने कहा-
चकेरी स्थित गर्ग एविएशन ट्रेनिंग सेंटर से विमान ने उड़ान भरी थी। 20 मिनट बाद 39 किमी दूर नाथपुरवा गांव में क्रैश हो गया। पायलट के पास 3000 घंटे उड़ान का अनुभव था। डीजीसीए (DGCA) को जानकारी दे दी गई है। अब उनकी टीम जांच-पड़ताल करेगी।
हादसे की तस्वीरें –
कानपुर में ट्रेनी एयरक्राफ्ट क्रैश हो गया। हादसे के बाद एक पायलट एयरक्राफ्ट में ही फंसकर मौत हो गई।
हादसे के बाद एयरक्राफ्ट के परखच्चे उड़ गए। उसके पुर्जे करीब 20 से 30 फीट तक बिखर गए।
हादसे के बाद खून से लथपथ दूसरे पायलट को किसी तरह एयरक्राफ्ट से बाहर आया। हालांकि, थोड़ी देर बाद उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। आसपास के इलाके को सील कर दिया।
पायलट सचिन भाटिया को 3 हजार घंटे उड़ान का अनुभव था। एक्सपर्ट बताते हैं कि विमानन क्षेत्र में इतने घंटे की उड़ान को बेहद अहम जाना जाता है।
हादसा कैसे हुआ? विमान में कोई तकनीकी कमी आई या कोई मानवीय गलती हुई, इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- धमाके के साथ गिरा विमान
सर्वेश ने बताया- मेरे खेत में ही विमान गिरा। मैं सुबह 10 बजे तक यहीं था। फिर घर चला गया। बाद में फोन आया कि तुम्हारे खेत में विमान गिरा है। इसके बाद मैं भागकर आया। यहां देखा तो दोनों पायलट जमीन पर गिरे पड़े थे।
नाथपुरवा गांव के रोहित निषाद ने बताया- मैं खेत पर काम कर रहा था। ऊपर देखा तो एक एयरक्राफ्ट उड़ रहा था। अचानक वह नीचे की ओर गिरने लगा। धमाके की आवाज के साथ जमीन पर गिरा। हालांकि, आग नहीं लगी।
1 किमी. की दूरी पर है रिहायशी बस्ती
जहां हादसा हुआ, वहां से रिहायशी बस्ती करीब एक किमी दूर है। ग्रामीणों ने बताया कि विमान करीब 4-5 मिनट तक हवा में उड़ता रहा। फिर अचानक गिरा। अगर बस्ती के ऊपर विमान गिरता, तो घरों और पब्लिक को नुकसान पहुंच सकता था।
विमान कानपुर की कंपनी गर्ग एविएशन फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी का था। 1995 में इसकी स्थापना हुई थी। 100 से ज्यादा लोग पायलट की ट्रेनिंग ले रहे हैं। विमान ने फ्लाइंग एकेडमी से ही उड़ान भरी थी। 39 किमी दूर क्रैश हो गया। हादसे के बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की तीन सदस्यीय टीम को जांच के लिए रवाना किया गया है। वहीं, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने भी जांच शुरू कर दी है।