सरस मेला से महिला समूह के उद्यमिता को मिलेगी व्यापक पहचान- उपमुख्यमंत्री शर्मा
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कवर्धा में चार दिवसीय संभागीय सरस मेले का किया शुभारंभ
कवर्धा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान अंतर्गत सरदार पटेल मैदान कवर्धा में आयोजित चार दिवसीय संभागीय सरस मेला का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला समूहों को विभिन्न योजनाओं के तहत 11.43 रूपये की सहायता राशि के चेक वितरण किए, जो महिला समूहों के आजीविका संवर्धन में सहायक सिद्ध होंगे।
इस दौरान पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद कवर्धा चन्द्रप्रकाश चन्द्रवंशी, कलेक्टर गोपाल वर्मा, जिला पंचायत सीईओं अभिषेक अग्रवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चन्द्रवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहें। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सभी स्टालों का निरीक्षण कर महिला समूह के सदस्यों से उनके व्यवसाय की जानकारी ली। स्टाल में दीदियों से चर्चा करते हुए व्यवसाय के लिए कच्चे माल उसके उत्पादन और विक्रय की जानकारी ली। लखपति दीदियों से बात करते हुए उन्होंने कहा की ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार का मजबूत आधार स्तंभ बनकर उभरी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि संभागीय सरस मेला के आयोजन से दुर्ग संभाग के सभी सात जिलो के महिला स्व सहायता की दीदीयां लाभान्वित हो रही हैं। समूह द्वारा बनाये गए दैनिक उपयोग के आकर्षक सामाग्री, जैविक खादय पदार्थ एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं को विक्रय के लिए उचित मंच मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर वोकल फाॅर लोकल को बढ़ावा देने के लिए यह आयोजन राज्य शासन द्वारा निर्धारित किया गया है। इस आयोजन से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक लाभ होगा जिससे वे आत्मनिर्भर होने की दिशा मे आगे बढ़ेगी। हमारा प्रयास है कि ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महिलाओं की पूरी भागीदारी हो और वे अपने लघु व्यवसाय से उद्यमी की पहचान हासिल कर सके। मेले में आए सभी स्व सहायता समूह की दीदियों को उपमुख्यमंत्री ने उनके व्यवसाय के लिए शुभकामनाएं दी और उम्मीद जताई कि इस आयोजन से क्षेत्र की जनता को लाभ होगा। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में 2 लाख 69 हजार से अधिक महिला स्व सहायता समूह संचालित हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा दीदी के गोठ कार्यक्रम का भी संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से स्व सहायता समूह की महिलाएं अपने नवाचारी कार्यों को साझा करती हैं। यह कार्यक्रम हिंदी के साथ-साथ गोंडी और हल्बी भाषा में भी संचालित किया जा रहा है, जिससे बस्तर अंचल की महिलाएं भी इसे आसानी से समझ पा रही हैं। इससे प्रदेशभर में महिलाओं द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी एक-दूसरे तक पहुंच रही है। प्रदेश में 300 महतारी सदनों का निर्माण भी किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार महिलाओं और बुजुर्गों को मिलने वाली पेंशन राशि अब उनके गांव में ही उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रही है। इसके लिए हर ग्राम पंचायत में अटल डिजिटल सेवा केंद्र खोले जा रहे हैं। उन्होंने बनासकांठा के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां सहकारी (कॉपरेटिव) मॉडल के माध्यम से महिलाएं बड़े उद्योगों से जुड़कर व्यापक स्तर पर दुग्ध उत्पादन कर रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में भी स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं छोटे बड़े उद्योगों का संचालन कर सकती हैं। उन्होंने आगे बताया कि सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म एप्लीकेशन विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इस एप के माध्यम से आम नागरिक सीधे महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित सामग्री को आसानी से खरीद सकेंगे, जिससे महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इन आवासों के निर्माण में अब महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं डीलर दीदी के रूप में जुड़कर छड़ और सीमेंट की सब-डीलर बन रही हैं। इसके साथ ही वे सेंट्रिंग प्लेट निर्माण जैसे कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि आज सरस मेला में बैंक लिंकेज के तहत 10 करोड़ रुपए की राशि का अंतरण किया जाएगा। 271 महिला स्व सहायता समूहों को 40 लाख 65 हजार रुपए की चक्रीय निधि दी जाएगी। इसी प्रकार 172 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि के तहत सीएफएल के माध्यम से 1 करोड़ 3 लाख 20 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे। जिससे महिलाएं अपने व्यवसाय को और मजबूत बना सकेंगी। जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि सरकार का प्रयास है कि महिला समूहों को अधिक से अधिक संख्या में स्व रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाए। यह सरस मेला महिला समूहों के उत्पादों के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध करा रहा है। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने सरस मेला आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इसका 23 मार्च से 26 मार्च तक होगा। मेले में सभी आयु वर्ग के लोगो के लिए महिला समूह द्वारा तैयार किये गये आकर्षक सामान उपलब्ध है। मिलेट से बने अनेकों प्रकार के बिस्कुट, आचार, पापड़, फिनायल, दोना-पत्तल, अगरबत्ती, बिरनमाला एवं हैण्डलूम के बने बैग ईत्यादी स्थानीय स्तर पर तैयार किये गये है। उल्लेखनीय है कि इस संभागीय सरस मेले में कबीरधाम जिले के साथ-साथ जिला राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, खैरागढ़-छूईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर, अंबागढ़ चौकी के महिला स्व सहायता समूह द्वारा प्रदर्शनी लगायी गई है। बिहान की दीदियों द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार की गई वस्तुओं का व्यापक प्रचार कर विक्रय के लिए मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे की आजीविका संवर्धन की गतिविधियों को बढ़ावा मिले।
जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को मिशन मोड में करें पूरा – मुख्यमंत्री साय
मार्च 2028 तक सभी जल संरचनाओं को पूर्ण करने के निर्देश, गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर
जल जीवन मिशन की जिलेवार नियमित समीक्षा करें कलेक्टर, बाधाओं का तत्काल करें समाधान
पूर्ण हो चुके कार्यों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश
कोरिया, धमतरी और राजनांदगांव सहित अन्य जिलों के बेहतर प्रदर्शन की मुख्यमंत्री ने की सराहना
रायपुर 10 सितंबर 2026। जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा विषय है। प्रदेश में जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हो और प्रत्येक परिवार को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिले, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार जल संचय और जल जीवन मिशन के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री श्री साय ने जल संचय जन भागीदारी अभियान की जिलेवार प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में काम किया जाए।
जनभागीदारी से मजबूत होगा जल संरक्षण अभियान
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल संरक्षण को केवल शासकीय कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाना चाहिए। वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अनेक जिलों ने जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य किए हैं। अब सभी जिलों को अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर बेहतर परिणाम के लिए प्रयास करना होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अभियान की जिलेवार प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कोरिया, धमतरी राजनांदगांव सहित अन्य जिलों में जल संरक्षण की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अनुभव और कार्यप्रणाली का लाभ अन्य जिलों को भी मिलना चाहिए, ताकि पूरे प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों को समान गति मिल सके।
जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश कुमार टोप्पो ने बैठक में बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के साथ उससे बेहतर प्रदर्शन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर मिली पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के प्रयास तभी दीर्घकालिक परिणाम देंगे, जब शासन के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित होगी। जनभागीदारी की इसी शक्ति के माध्यम से छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थायी रूप से स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत सभी जिलों के नोटिफाइड नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। अभियान की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की सतत मॉनिटरिंग की जाए तथा जहां भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरे हों।
हर घर तक नल से स्वच्छ जल पहुंचाना हमारा लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब जल जीवन मिशन के शेष कार्यों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए। सभी कलेक्टर अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित समीक्षा करें और जहां भी प्रशासनिक, तकनीकी अथवा क्रियान्वयन संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनका तत्काल समाधान करते हुए कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा कराएं। उन्होंने कहा कि केवल अधोसंरचना निर्माण ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि योजनाओं का वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंचे और लोगों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।
पूर्ण कार्यों के भुगतान में न हो अनावश्यक विलंब
मुख्यमंत्री श्री साय ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों के भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन कार्यों को निर्धारित मापदंड और गुणवत्ता के अनुरूप पूर्ण किया जा चुका है, उनका भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर मिशन की नियमित समीक्षा करते हुए प्रेजेंटेशन में सामने आई कमियों और समस्याओं का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। योजना से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय से शेष कार्यों को गति दी जाए।
हर जिले की प्राथमिकता बने जल सुरक्षा
मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में जल संरक्षण और हर घर तक नल से पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए तथा जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संचय जन भागीदारी अभियान और जल जीवन मिशन सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़े हैं। इन प्रयासों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां वर्तमान में लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा मिलेगी, वहीं भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा की मजबूत नींव भी तैयार होगी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत करने का अवसर है। इसके लिए शासन-प्रशासन के साथ जनभागीदारी को और मजबूत करते हुए प्रत्येक जिले को अपनी पूरी क्षमता से कार्य करना होगा। हमारा लक्ष्य ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जहां जल का बेहतर संरक्षण हो, जल स्रोत सुरक्षित और समृद्ध हों तथा प्रत्येक परिवार को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो।
बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, जल संसाधन विभाग के सचिव आर. एस. टोप्पो, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव अब्दुल कैसर हक, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
कोरबा। जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतरेगा पिकनिक स्पॉट के रिसॉर्ट में सुबह उस वक्त पर्यटनों एवं कर्मचारियों में हड़कंप मच गया, जब विद्युत मीटर बोर्ड के पीछे करीब 8 फीट लंबा किंग कोबरा छिपकर बैठा मिला। किंग कोबरा की जानकारी मिलते ही रेस्ट हाउस के मैनेजर इस्तीखार खान ने तत्काल वन विभाग एवं नोवा नेचर संस्था के सदस्य जितेंद्र सारथी को सूचना दिया, जिसके बाद सारथी ने अपने अजगर बहार के स्थानीय टीम के सदस्य कमलेश, देवेंद्र, राम, गौतम, दिल ,नरेश, देव मरावी को तत्काल सतरेगा के लिए रवाना कर साथ ही इसकी जानकारी कोरबा वनमंडलाधिकारी जितेंद्र उपाध्याय दिया एवं उनके निर्देशानुसार उपवनमण्डलाधिकारी रामसिंह राठिया उत्तर के मार्गदर्शन एवं बालकों रेंजर जयंत सरकार के नेतृत्व में जितेंद्र सारथी एवं सिद्धांत जैन कोरबा से रेस्क्यू के लिए मौके पर पहुंच कर सर्वप्रथम विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली को बंद करवाया गया, फिर पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, किंग कोबरा सर्किट बोर्ड के पीछे बेहद संकरी जगह में छिपा हुआ था, जिसके कारण उसे बाहर निकालना टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग एक घंटे की कड़ी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे किंग कोबरा को सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
रेस्क्यू के दौरान किंग कोबरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटकों की भीड़ लग गई, इतने फुर्तीले और लंबे सांप को देख कर लोग जिज्ञासा वश फोन से वीडियो बनाने से नहीं चुके, साथ ही मौजूद लोगों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया, सफल रेस्क्यू के बाद पंचनामा के पश्चात किंग कोबरा को उसके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
कोरबा जिले के लेमरू, बालको , पसरखेत , करतला, कुदमुरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों से पिछले कुछ समय से छोटे आकार के किंग कोबरा लगातार सामने आ रहे हैं, छोटे किंग कोबरा का बार-बार मिलना इस क्षेत्र में इनके प्राकृतिक प्रजनन और अनुकूल आवास की उपलब्धता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, साथ ही यह बात भी सिद्ध करता हैं कि एक ही सांप बार बार रेस्क्यु नहीं हो रहे बल्कि सभी किंग कोबरा दूसरे से भिन्न हैं। हालांकि, क्षेत्र में इनकी वास्तविक संख्या और आबादी की स्थिति निर्धारित करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब स्थानीय लोगों में भी किंग कोबरा और अन्य वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ रही है। आज किसी क्षेत्र में किंग कोबरा दिखाई देने पर लोग उसे मारने या नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देते हैं। सूचना का समय पर मिलना और सांप का सुरक्षित रेस्क्यू होकर पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाना वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है।
वन विभाग एवं नोवा नेचर ने आम लोगों से अपील की है कि किंग कोबरा या किसी भी सांप के दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखें और स्वयं पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें, तत्काल प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
कांग्रेस बोली-छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेच रही बीजेपी…:हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर सवाल,जयराम रमेश-विकास उपाध्याय ने सरकार को घेरा
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य में तारा कोल ब्लॉक की नीलामी को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर हसदेव के जंगल और खनिज संसाधन निजी कंपनियों को सौंपने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने नीलामी को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- ‘छत्तीसगढ़ की खदान कौड़ियों के भाव बेची जा रही हैं।’ कांग्रेस नेता ने वीडियो जारी कर सरकार से इस फैसले पर जवाब मांगा है।
कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी में सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड विजेता बनी है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, यह कंपनी मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
कांग्रेस सांसद ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।
विधानसभा ने नई खदानों के खिलाफ पारित किया था प्रस्ताव
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव-अरण्य में किसी नए कोल ब्लॉक के आवंटन या नीलामी पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद 16 जुलाई 2023 को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान के आवंटन या विकास की जरूरत नहीं है।
कांग्रेस का दावा है कि 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने तारा समेत 40 कोल ब्लॉक्स को नीलामी प्रक्रिया से डीनोटिफाई कर दिया था। इसके बावजूद अब तारा ब्लॉक की दोबारा नीलामी की गई है। इसका नाम बदलकर तारा (रिवाइज्ड) किया गया है।
कांग्रेस पूर्व विधायक विकास उपाध्याय।
विकास उपाध्याय का बीजेपी सरकार पर हमला
कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने बीजेपी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि लगातार छत्तीसगढ़ के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बेचने का काम बीजेपी पार्टी कर रही है। फिर से 9 ब्लॉको का आवंटन कर दिया गया और टेंडर प्रक्रिया चालू कर दी गई।
बीजेपी सरकार को छत्तीसगढ़ के लोगों से कोई लेना देना नहीं है। कौड़ियों के दाम पर जमीन को बेचा जा रहा है। कांग्रेस पार्टी पूर्व में भी विरोध किया। स्थानीय आदिवासी लगातार विरोध कर रहे है। इसके बाद भी कीमती खदानों को भारतीय जनता पार्टी को चंदा देने वालों को मामूली कीमत में दिया जा रहा है।
तारा कोल ब्लॉम में 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है।
5 हजार एकड़ में ब्लॉक, 4 हजार एकड़ से ज्यादा जंगल
तारा कोल ब्लॉक करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसमें 4 हजार एकड़ से ज्यादा घना जंगल होने का दावा किया गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक खनन शुरू होने पर 10 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई का खतरा है। उनका कहना है कि इसका असर जंगल पर निर्भर आदिवासी समुदाय और उनकी रोजमर्रा की आजीविका पर पड़ेगा।
लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन पर सवाल
कांग्रेस ने लेमरू एलीफेंट रिजर्व के आसपास खनन को लेकर भी चिंता जताई है। नेताओं का कहना है कि इससे हाथियों की आवाजाही का रास्ता प्रभावित हो सकता है। साथ ही दूसरी वन्य प्रजातियों के सामने भी खतरा बढ़ सकता है।
हसदेव के जंगलों को बचाने के लिए स्थानीय आदिवासी समुदाय करीब 15 वर्षों से ग्राम सभा प्रस्ताव, धरना, जन अभियान और विरोध मार्च के जरिए आवाज उठाता रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्राकृतिक जंगल काटकर कहीं और पौधे लगाने से पुराने जंगल की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की भरपाई नहीं की जा सकती।