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IGKV में बीटेक रजिस्ट्रेशन की आखिरी डेट 20 जुलाई:मेरिट लिस्ट 23 जुलाई को जारी होगी, 24 से 30 जुलाई तक काउंसिलिंग और एडमिशन

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रायपुर, एजेंसी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के बीटेक कोर्स में एडमिशन लेने का यह आखिरी मौका है। विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बी टेक एग्रीकल्चर इंजनियरिंग और बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) में ऑनलाइन यूजी काउंसलिंग-2026 के पहले चरण के रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख 20 जुलाई, रात 11 बजे तय की है।

जो छात्र अब तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे तय समय के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। अंतिम समय में वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कत की संभावना को देखते हुए विश्वविद्यालय ने छात्रों से पहले ही आवेदन पूरा करने की अपील की है।

इन छात्रों को मिलेगा मौका

काउंसिलिंग में वही अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं में फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ्स और इंग्लिश सब्जेक्टस के साथ परीक्षा पास की हो। प्रवेश के लिए PET-2026, JEE मेन-2026 या 12वीं (मैथ्स ग्रुप) के अंकों के आधार पर आवेदन किया जा सकता है।

दूसरे राज्यों के छात्र भी कर सकते हैं आवेदन

छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। हालांकि, दूसरे राज्यों के छात्रों को प्रवेश केवल छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद बची हुई सीटों पर मिलेगा। इसके लिए अलग से 30 जुलाई को काउंसिलिंग आयोजित की जाएगी।

23 जुलाई को आएगी मेरिट लिस्ट

ऑनलाइन आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की प्रावीण्य (मेरिट) सूची 23 जुलाई को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी होगी। इसके बाद 24 से 30 जुलाई के बीच तय कार्यक्रम के अनुसार सीट अलॉटमेंट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

वेबसाइट पर मिलेगी पूरी जानकारी

एडमिशन से जुड़ी काउंसिलिंग शेड्यूल, सीटों का विवरण, जरूरी दिशा-निर्देश और अन्य जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। छात्रों को सलाह दी गई है कि अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : विशेष लेख : नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर

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छत्तीसगढ़ में नक्सलमुक्त क्षेत्रों में स्कूलों में बजने लगी घंटी

  •                      धनंजय राठौर
  •             संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
 विशेष लेख :  नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर
 विशेष लेख :  नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर
 विशेष लेख :  नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर

छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं। 

5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ‘शिक्षक दिवस’ की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है।

बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है।

शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण

नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा।

•    स्थानीय भाषा में अध्यापन: दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।
 

•    समुदाय से संवाद: शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं।

तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन

बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत  के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:

•    स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट: कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

•    खेलकूद और न्योता भोजन: स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है।

•    सुरक्षित माहौल: नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं।

शिक्षक दिवस पर संदेश

छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में ‘शिक्षादूत’ बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।

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कोतवाली कारागार में होगा कृष्ण जन्म, अखाड़े में उतरे मेयर:जैतुसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग लगेगा, इस्कॉन में 3 दिन महोत्सव

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर खास रौनक देखने को मिल रही है। आज शुभ संयोगों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया है। शहर के अलग-अलग मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक, भजन-कीर्तन और भोग की तैयारियां की गई हैं।

जैतुसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुआ और 1 क्विंटल पंजीरी का भोग लगेगा। समता कॉलोनी के राधाकृष्ण मंदिर में 101 लीटर दूध से भगवान का अभिषेक किया गया। इस्कॉन मंदिर में तीन दिवसीय महोत्सव हो रहा है। इसमें प्रतियोगिताओं के साथ भजन-कीर्तन, महाभिषेक और छप्पन भोग होगा।

राजनांदगांव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर महापौर मधुसूदन यादव अखाड़े में आयोजित पारंपरिक खेल में शामिल हुए। वहीं दंतेवाड़ा में दही हांडी कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

महापौर मधुसूदन यादव अखाड़े में आयोजित पारंपरिक खेल में शामिल हुए।

महापौर मधुसूदन यादव अखाड़े में आयोजित पारंपरिक खेल में शामिल हुए।

दंतेवाड़ा के सुरभी कॉलोनी में दही हांडी कार्यक्रम का आयोजन।

दंतेवाड़ा के सुरभी कॉलोनी में दही हांडी कार्यक्रम का आयोजन।

रायगढ़ में दो दिन दिखेंगी झांकियां

रायगढ़ के श्याम मंदिर और गौरी शंकर मंदिर में रात 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। सुबह से मंदिरों में अलग-अलग झांकियां सजाई जाएंगी, जो दो दिन तक रहेंगी। इन्हें देखने ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। अगले दिन सुबह जगह-जगह भंडारे होंगे।

रायपुर का जैतुसाव मठ।

रायपुर का जैतुसाव मठ।

जैतुसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुए का भोग

रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित श्री जैतुसाव मठ में ठाकुरजी के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी हो गई हैं। आज 4 सितंबर की शाम 4 बजे भजन संध्या होगी। जन्मोत्सव के मौके पर ठाकुरजी का स्वर्ण श्रृंगार किया जाएगा। रात 12 बजे मंत्रोच्चार के साथ आरती होगी।

भगवान को 11 क्विंटल मालपुआ और 1 क्विंटल पंजीरी का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद कल (5 सितंबर) की शाम 5 बजे से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाएगा।

दूधाधारी मठ में 4 दिन चलेगा उत्सव

दूधाधारी मठ और इससे जुड़े मठ-मंदिरों में जन्माष्टमी का पर्व 7 सितंबर तक मनाया जाएगा। आज सुबह 8 बजे से भजन-कीर्तन शुरू हो चुके हैं। रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की आरती होगी। 7 सितंबर को एकादशी के दिन रात 12 बजे आयोजन का समापन होगा।

राधाकृष्ण मंदिर में 101 लीटर दूध से अभिषेक

समता कॉलोनी के राधाकृष्ण मंदिर में आज सुबह 7 बजे भगवान श्रीकृष्ण का 101 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। मंदिर और प्रतिमा का विशेष श्रृंगार कोलकाता के कारीगरों ने किया है। सुबह 9 बजे से झांकी दर्शन शुरू हो चुके हैं। रात 8 बजे से भजन और भक्तिमय कार्यक्रम होंगे। मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के बाद महाआरती होगी। 5 सितंबर को राणी सती दादी का मंगल पाठ होगा।

कारागार में जन्म के बाद इस तरह निकलेंगे वासुदेव। (फाइल फोटो)

कारागार में जन्म के बाद इस तरह निकलेंगे वासुदेव। (फाइल फोटो)

कोतवाली थाने के कारागार में जन्म

शहर के सिटी कोतवाली में भी इस बार भी श्रीकृष्ण जन्म उत्सव मनाया जाएगा। यहां वासुदेव, देवकी, सैनिकों की वेशभूषा में कलाकार भगवान के जन्म का मंचन करेंगे। रात 12 बजते ही थाने की लाइट कुछ देर के लिए बंद कर दी जाएगी।

जिस प्रकार वासुदेव ने श्रीकृष्ण को टोकरी में रखा और उसे अपने सिर पर रखकर कारागार से बाहर निकले, ठीक उसी प्रकार का दृश्य यहां भी नजर आएगा। कोतवाली थाने से जयकारा लगाते हुए ठाकुर जी को सदर बाजार के गोपाल मंदिर ले जाया जाएगा।

156 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर में दुग्धाभिषेक

पेठा लाइन नयापारा के श्री बांके बिहारी मंदिर में सुबह 8 से 10 बजे तक दुग्धाभिषेक हुआ। सुबह 11:30 बजे श्रृंगार दर्शन होंगे। दोपहर और शाम को भजन कार्यक्रम होंगे। रात 12:01 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के बाद आरती होगी। मंदिर की स्थापना को करीब 156 साल हो चुके हैं।

इस्कॉन में 3 दिन महोत्सव, रात 9 बजे महाभिषेक

टाटीबंध स्थित इस्कॉन मंदिर में 5 सितंबर तक जन्माष्टमी महा-महोत्सव होगा। भक्ति नृत्य समेत कई प्रतियोगिताएं होंगी। मंगल आरती से कार्यक्रम शुरू होंगे। कृष्ण बाललीला, भजन-कीर्तन, पुष्पांजलि और कथक की प्रस्तुति होगी। रात 9 बजे महाभिषेक और मध्यरात्रि में छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। रात 12.15 बजे महाआरती होगी।

चार धाम की सामग्री से होगी गिरिराज मंदिर में पूजा

बूढ़ापारा के गिरिराज मंदिर में बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी, रामेश्वर और द्वारका धाम से लाई गई सामग्री से भगवान की आराधना की जाएगी। मंदिर में जन्माष्टमी की तैयारियां करीब एक महीने पहले से शुरू हो गई हैं।

गोपाल मंदिर में जन्म के अगले दिन नंद महोत्सव

सदर बाजार स्थित गोपाल मंदिर में आज (4 सितंबर) रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके बाद पूजा-अर्चना होगी। कल (5 सितंबर) नंद महोत्सव मनाया जाएगा। भगवान को पालने में झुलाया जाएगा और श्रद्धालु भजन गाकर जन्म की खुशियां मनाएंगे।

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छत्तीसगढ़

मंत्री बोलीं- टोलकर्मी को पीए नहीं ड्राइवर ने थप्पड़ मारे:लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा- चालक को चेतावनी दी, कर्मचारी से जल्द मिलकर जानूंगी हाल-चाल

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अंबिकापुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में लहपटरा टोल प्लाजा पर टोलकर्मी से मारपीट मामले में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मारपीट उनके PA ओम प्रकाश राजवाड़े ने नहीं, बल्कि वाहन चालक ने की थी।

मंत्री ने ड्राइवर को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि टोल बूम गिरना मानवीय या तकनीकी गलती हो सकती है, लेकिन कर्मचारी से दुर्व्यवहार करना गलत है। घटना के समय वह गाड़ी में आराम कर रही थीं और उन्हें इसकी जानकारी अगले दिन सोशल मीडिया से मिली।

दरअसल, 2 सितंबर की रात मंत्री का काफिला लहपटरा टोल प्लाजा से गुजर रहा था। पहली गाड़ी टोल पार कर गई, जबकि दूसरी गाड़ी पर टोल बूम गिर गया। इसके बाद ड्राइवर टोलकर्मी के पास पहुंचा और उसे 5 थप्पड़ जड़ दिए।

इस दौरान टोलकर्मी हाथ जोड़कर माफी मांगता रहा। पूरी घटना CCTV में रिकॉर्ड हुई थी। अगले दिन टोलकर्मी महेंद्र राजवाड़े ग्रामीणों के साथ लखनपुर थाने पहुंचा और शिकायत की थी। मंत्री ने कहा कि वह जल्द कर्मचारी से मिलकर उसका हाल-चाल जानेंगी।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की गाड़ी में टोल बैरियर का बूम गिर गया।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की गाड़ी में टोल बैरियर का बूम गिर गया।

गुस्साए मंत्री के ड्राइवर ने टोल कर्मचारी से जमकर मारपीट की।

गुस्साए मंत्री के ड्राइवर ने टोल कर्मचारी से जमकर मारपीट की।

टोल कर्मचारी को तड़ातड़ 5 थप्पड़ जड़े।

टोल कर्मचारी को तड़ातड़ 5 थप्पड़ जड़े।

मंत्री बोलीं- घटना के वक्त गाड़ी में थीं

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि घटना के वक्त वह दिनभर के सरकारी कार्यक्रमों के बाद गाड़ी में आराम कर रही थीं। गाड़ी के अंदर होने के कारण उन्हें मौके पर हुई घटना की जानकारी नहीं थी। अगले दिन सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से घटना की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी मिलने पर उन्हें काफी दुख हुआ।

PA ने नहीं, ड्राइवर ने की मारपीट

मंत्री ने कहा कि उनके PA ओम प्रकाश राजवाड़े ने टोलकर्मी से कोई मारपीट या दुर्व्यवहार नहीं किया। उन्होंने PA का नाम इस मामले में जोड़े जाने को गलत और भ्रामक बताया। मंत्री के मुताबिक, वीडियो में टोलकर्मी से मारपीट करता दिखाई दे रहा व्यक्ति वाहन चालक है। उन्होंने ड्राइवर को कड़ी चेतावनी दिए जाने की बात कही है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक, बुधवार (2 सितंबर) की रात करीब साढ़े 12 बजे मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े बिलासपुर से अंबिकापुर की ओर आ रही थीं। उनके काफिले में दो गाड़ियां थीं। सबसे आगे चल रही इनोवा ने लहपटरा टोल बैरियर पार किया। इसके तुरंत बाद मंत्री की फॉर्च्यूनर टोल बैरियर से गुजर रही थी। इसी दौरान अचानक बैरियर का बूम फॉर्च्यूनर के ऊपर गिर गया।

ड्राइवर ने जड़े थप्पड़, गार्ड ने किया बचाव

हादसे के बाद मंत्री के काफिले की दोनों गाड़ियां रुक गईं। घटना से तमतमाए मंत्री का ड्राइवर सुरक्षाकर्मियों के साथ नीचे उतरा और नाके पर पहुंचा। ड्राइवर ने टोल कर्मी महेंद्र राजवाड़े के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट कर दी।

माफी मांगता रहा टोलकर्मी

इस दौरान महेंद्र राजवाड़े माफी मांगता रहा, लेकिन मंत्री के ड्राइवर ने कई थप्पड़ जड़ दिए। सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोका और उसे वापस गाड़ी में लेकर आए। इस घटनाक्रम के दौरान मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपनी गाड़ी से नहीं उतरीं, वो अंदर ही बैठी रहीं।

टोल कर्मचारी हाथ जोड़कर माफी मंगता रहा।

टोल कर्मचारी हाथ जोड़कर माफी मंगता रहा।

मारपीट की घटना CCTV में रिकॉर्ड हुई है।

मारपीट की घटना CCTV में रिकॉर्ड हुई है।

FIR दर्ज कराने थाने पहुंचे टोलकर्मी, आंदोलन की चेतावनी

घटना के दूसरे दिन गुरुवार (3 सितंबर) को टोलकर्मी महेंद्र राजवाड़े अपने बाकी कर्मचारियों के साथ थाने पहुंचा। उसने मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने उसका एमएलसी करा लिया है।

महेंद्र राजवाड़े के साथ थाने पहुंचे लोगों ने कहा कि, अगर पुलिस FIR नहीं करती है तो लहपटरा के ग्रामीण आंदोलन करेंगे। गुरुवार शाम तक पुलिस ने मामले में FIR दर्ज नहीं की थी।

पीड़ित और ग्रामीणों ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की बात कही।

पीड़ित और ग्रामीणों ने कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की बात कही।

फॉलो वाहन नहीं था, इसलिए गिरा बूम

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की गाड़ी पर बूम गिरने का कारण फॉलो वाहन नहीं होना बताया जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बाद मंत्री ने अपना काफिला घटा दिया है और फॉलो वाहन हटा दिया गया है।

मंत्री की गाड़ी के सामने चल रही इनोवा वाहन टोल से गुजरी तो नियमानुसार टोल बूम नीचे आ गया। फॉलो वाहन होता तो कर्मी टोल बूम को उठा देते। फॉलो वाहन नहीं था तो वे यह नहीं समझ सके कि काफिला मंत्री का है।

इस कारण आगे की गाड़ी के क्रॉस होते ही टोल मैकेनिज्म ने बूम को नीचे कर दिया और मंत्री की फॉर्च्यूनर कार पर टोल बूम गिर गया। इससे मंत्री की गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। इस मामले में मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी है।

गुरुवार सुबह थाने पहुंचे थे ग्रामीण।

गुरुवार सुबह थाने पहुंचे थे ग्रामीण।

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