रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले मामले में ईडी (Enforcement Directorate) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रही सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के मुताबिक, पिछली सरकार के दौरान राज्य में हुए कई घोटालों में पैसों के मैनेजमेंट में उनकी अहम भूमिका रही।
ईडी ने पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयान के आधार पर सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया। ED को सौम्या, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर-चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स में कई अहम सबूत भी मिले हैं।
ईडी का दावा है कि सौम्या लीकर स्कैम नेटवर्क में को-ऑर्डिनेटर की भूमिका निभा रही थीं। घोटाले से उन्हें करीब 100 करोड़ रुपए मिलने की जानकारी है। शराब घोटाले में आज सौम्या चौरसिया को ईडी ने कोर्ट में पेश किया। दोनों पक्षों में बहस पूरी हो गई है।
बचाव पक्ष के वकील हर्षवर्धन परगनिया ने कहा कि ED ने पूछताछ के लिए जोनल ऑफिस बुलाया था। शाम 5.30 बजे अवैध तरीके से गिरफ्तार किया। बिना मजिस्ट्रेट जांच, डायरी वही पर कहानी और राशि बदल गई। कोर्ट ने 2 दिन की रिमांड पर भेजा है। शुक्रवार दोपहर 3:30 बजे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
वहीं रायपुर कोर्ट में पेशी के दौरान पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि 11 महीने में पहली बार पेशी में लाया गया। मेरी तबीयत ठीक नहीं रहती। बीपी, शुगर और हार्ट की बीमारी है। विधानसभा सत्र चल रहा है, लेकिन मैं मौजूद नहीं हूं। मैं इलाज के लिए बाहर ले जाने बोला था। प्रताड़ित हो रहा हूं। अब ऊपर वाला ही जाने।
ईडी ने सौम्या को रायपुर के PMLA स्पेशल कोर्ट में पेश किया
ढाई साल जेल में रह चुकी है सौम्या
ईडी ने इससे पहले 2 दिसंबर 2022 को सौम्या चौरसिया को कोल लेवी घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। और इस मामले में वे करीब ढाई साल जेल में रही और पिछले 6 महीने से वे सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर बाहर थीं। वही 6 महीने बाद ED ने शराब घोटाले में दूसरी बार गिरफ्तार किया है।
बता दें कि सौम्या चौरसिया को कोयला घोटाले में ED और EOW (केंद्र व राज्य एजेंसियां) ने पहले ही गिरफ्तार कर चुकी थीं। इसके अलावा, डीएमएफ घोटाले में भी ईओडब्ल्यू ने उन्हें गिरफ्तार किया था। 49 करोड़ रुपए से अधिक आय के मामले में भी ईओडब्ल्यू ने कार्रवाई की। यानी सौम्या अब तक चार घोटालों में जेल जा चुकी हैं और 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में यह उनकी दूसरी गिरफ्तारी है।
सौम्या ने टुटेजा को चैट में लिखा है कि AD (अनवर ढेबर) को बोलो की कोई हिसाब नहीं देगा। जो है उतना ही बताएगा, बिट्टू बता रहा था कि बंसल उससे बहुत सारे सवाल पूछ रहा था।
सौम्या मोबाइल में अनिल टुटेजा को देती थी ऑर्डर
ED ने 15 सितंबर को पांचवीं प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट कोर्ट में दाखिल की थी। इसमें सौम्या चौरसिया की ओर से रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर और चैतन्य बघेल के साथ हुई चैट्स भी सामने आई थीं। इन चैट्स में सौम्या, अनिल टुटेजा को निर्देश देती हुई दिख रही हैं।
इसमें सौम्या ने अनवर ढेबर (एडी) को कहा था कि पप्पू बंसल (लक्ष्मी नारायण अग्रवाल) को कोई हिसाब न दे, क्योंकि पप्पू कलेक्शन को लेकर लगातार सवाल पूछ रहा था। और यह जानकारी उन्हें खुद बिट्टू से मिली थी।
ED ने चार्जशीट में खुलासा किया था कि बिग बॉस वॉट्सएप ग्रुप के चैट्स में सौम्या, ढेबर और सिंडिकेट के सदस्यों के बीच बातचीत होती थी।
शराब घोटाले के लिए बनाया था ‘बिग बॉस’ ग्रुप
सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा, कारोबारी अनवर ढेबर, चैतन्य बघेल आपस में व्यक्तिगत चैट तो करते थे ही लेकिन शराब घोटाले को ऑपरेट करने के लिए ‘बिग बॉस’ नाम का एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया था। इसमें सौम्या चौरसिया, चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और पुष्पक जैसे अहम लोग जुड़े थे।
इस ग्रुप के जरिए करोड़ों रुपए की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग की जानकारी और निर्देश साझा किए जाते थे। इसके साथ ही पैसे आने और किसको देना है? इसकी चर्चा भी ग्रुप में होती थी। वॉट्सऐप ग्रुप में चैट के कुछ स्क्रीनशॉट भी दैनिक भास्कर डिजिटल के पास मौजूद हैं।
49 करोड़ से अधिक की संपत्ति अटैच
2 महीने पहले अक्टूबर में ACB- EOW ने सौम्या चौरसिया के खिलाफ कोयला घोटाला और आय से अधिक संपत्ति मामले में 8000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। जिसमें बताया गया कि सौम्या को 17 साल की सेवा में 2.51 करोड़ रुपए वेतन मिला। जबकि उन्होंने इस दौरान 49.69 करोड़ रुपए की 45 बेनामी संपत्ति खरीदी हैं, जो उनकी आय से 1872 प्रतिशत अधिक है।
कई संपत्तियां उन्होंने अपने रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी। इनके संबंध में एजेंसी ने उनसे हिसाब मांगा, पर कोई जवाब या हिसाब नहीं दिया। एजेंसी ने इन संपत्तियों को अटैच कर लिया है। सबसे ज्यादा निवेश साल 2019 से 2022 के बीच किया गया है। अधिकारियों ने इसे EOW के इतिहास में आय से अधिक कमाई का सबसे बड़ा केस बताया है।
सक्ती। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आवास योजना को बड़ा विस्तार मिला है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ (पीएमएवाय-जी) के तहत 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की मंजूरी दी है। सक्ती जिले में आयोजित ‘प्रधानमंत्री आवास गृह प्रवेश’ और ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा की और स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा।
इस अवसर पर प्रदेश भर में नवनिर्मित 2 लाख आवासों में हितग्राहियों का एक साथ गृह प्रवेश कराया गया और उन्हें चाबियां सौंपी गईं। चौहान ने सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने तथा बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा भी की।
चौहान ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक पीएम आवास बनकर तैयार हो रहेहैं। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास के साथ सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।
गरीब का पक्का घर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।
कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे: शर्मा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य हो रहा है।
कका और कांग्रेस ने राज्य को तबाह किया: चौहान
केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और ‘कक्का’(कका) ने मिलकर छत्तीसगढ़ को तबाह कर दिया। उन्होंने सक्ती जिले में शामिल होने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा के दौरान यह बात कही।
चौहान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के आवास के लिए भेजी गई राशि को कांग्रेस सरकार ने दबाकर रखा और प्रदेश के जरूरतमंदों को पक्के मकानों से वंचित किया। उन्होंने याद दिलाया कि गरीबों के हक के लिए भाजपा ने ‘मोर आवास मोर अधिकार’ आंदोलन चलाया था, जिसमें कार्यकर्ताओं ने लाठियां तक खाईं।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने चेतन बोरघारिया को 6 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है।
ED ने कोर्ट में CGPSC घोटाले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के साथ चेतन बोरघारिया की वॉट्सऐप चैट मिलने की जानकारी दी। इसी आधार पर कोर्ट ने पूछताछ के लिए ED को उनकी 6 दिन की रिमांड दी है। अब ED उनसे CGPSC गड़बड़ी मामले में पूछताछ करेगी। चेतन बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में काम कर चुके हैं।
बता दें कि 6 दिन पहले ED ने घोटाले में आरोपी कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को कोर्ट में पेश किया था। ED ने आरोपी उत्कर्ष की रिमांड बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं दिया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी उत्कर्ष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 दिन पहले ही धमतरी और बलरामपुर में कार्रवाई की थी। धमतरी में एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया के अमलतास पुरम स्थित घर पर टीम ने छापा मारा गया, जबकि बलरामपुर में भी उनसे पूछताछ की गई थी।
इधर, CGPSC घोटाले की जांच में कैंडिडेट्स को परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपए लेने की बात सामने आई है। ED के वकील सौरभ पांडेय के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका अभ्यर्थियों तक प्रीलिम्स और मेन्स के पेपर पहुंचाने से जुड़ी थी।
10 दिन पहले ईडी ने एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया के ठिकानों पर रेड मारी थी।
नौकरी दिलाने का दावा, 3 करोड़ से ज्यादा वसूली
जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क तैयार किया था।
अभ्यर्थियों को परीक्षा के अलग-अलग चरणों में मदद और प्री परीक्षा से इंटरव्यू तक सफलता की गारंटी देने का दावा किए जाने की बात सामने आई है। इसके बदले कैंडिडेट्स से 3 करोड़ रुपए से अधिक रकम वसूले जाने का दावा किया गया है।
ED ने इससे पहले कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को अरेस्ट किया गया था।
पूर्व CM के PA और OSD के नाम का इस्तेमाल
जांच एजेंसी का दावा है कि, उत्कर्ष चंद्राकर ने कैंडिडेट्स से पैसे जुटाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक (PA) और अपने मामा के.के. चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे OSD के नाम और प्रभाव का भी इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को प्रभावित करने की बात सामने आई है।
जानिए क्या है CGPSC घोटाला
यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।
इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।
इस घोटाले में सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार किया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच में जुटी है।
एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट की पड़ताल के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के साथ एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम कहां से आई और किन लोगों तक पहुंचाई गई।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 3 नेता कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है। तीनों नेताओं के इंटरव्यू राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से लिए जा रहे हैं।
दिल्ली बुलाए जाने के बाद अब नजर इस बात पर है कि इनमें से किसे राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलती है। हालांकि अभी किसी नेता की नियुक्ति तय नहीं हुई है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
राहुल-प्रियंका समेत राष्ट्रीय नेतृत्व ले रहा इंटरव्यू
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय सचिवों के चयन की प्रक्रिया में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की भूमिका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत राष्ट्रीय नेतृत्व इस प्रक्रिया से जुड़ा है।
छत्तीसगढ़ से 3 नेताओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रदेश के नेताओं की राष्ट्रीय संगठन में भूमिका बढ़ने की संभावना बनी है।
कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है।
चयन हुआ तो प्रदेश से राष्ट्रीय संगठन में बढ़ेगी हिस्सेदारी
तीनों नेताओं के पास युवा कांग्रेस, प्रदेश कांग्रेस और राष्ट्रीय संगठन में काम करने का अनुभव है। ऐसे में राष्ट्रीय सचिव के लिए इंटरव्यू तक पहुंचना ही प्रदेश कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
अगर इनमें से किसी नेता का चयन होता है तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस को राष्ट्रीय संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ प्रदेश के युवा नेताओं की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका भी बढ़ सकती है। फिलहाल सभी की नजर दिल्ली में चल रही चयन प्रक्रिया और उसके नतीजे पर है।