कोलकाता/तिरुवनंतपुरम/चेन्नई,एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की कुल 294 सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। बाकी 3 सीटें सहयोगी बीजीपीएम को दी हैं।
ममता बनर्जी भबानीपुर से चुनाव लड़ेंगी। उनका मुकाबला भाजपा नेता सुवेंद्र अधिकारी से होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा कि मैं BJP से कहना चाहती हूं कि आप डर क्यों रहे हैं। अगर लड़ना है तो गैस संकट पैदा मत कीजिए। मैदान में आकर सही तरीके से मुकाबला कीजिए।
– ममता ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई। जमीनी नेता और कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा जताया। 2021 में 15 सेलिब्रिटी को टिकट दिया था। इस बार 2 सेलिब्रिटीज को टिकट मिला है। – लिस्ट में 52 महिलाएं हैं। 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। – 40 साल से कम उम्र के 42 उम्मीदवारों को टिकट मिला। – लिस्ट में 95 कैंडिटेट्स SC/ST कैंडिडेंट्स हैं।
पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री
14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं।
चुनाव आयोग ने शानदार खेल दिखाया- ममता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में कहा, “उम्मीदवारों की सूची घोषित करने से पहले, मैं बंगाल की जनता का धन्यवाद करती हूं। मैं ‘मां माटी मानुष बंग्लार संस्कृति’ सभी को समर्पित करती हूं और 294 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करती हूं। मैं भाजपा से कहना चाहती हूं – आप क्यों डर रहे हैं? अगर चुनाव लड़ना है तो गैस संकट पैदा मत कीजिए; सही तरीके से मैदान में उतरिए। चुनाव आयोग ने शानदार खेल दिखाया। भाजपा के पास कोई मौका नहीं है। इस बार आपकी सीटें पिछली बार के मुकाबले कम होंगी। यह पश्चिम बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई है। बंगाल जीतेगा। ‘दिल्ली का लड्डू’ नहीं जीतेगा।
कांग्रेस आजकल आपस में ही लड़ रही है- पद्मजा
केरल के त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए की उम्मीदवार पद्मजा वेणुगोपाल का कहना है, “कई लोग एनडीए में शामिल होंगे। कांग्रेस आजकल आपस में ही लड़ रही है…”
असम विधानसभा चुनावों से पहले काले धन पर अंकुश लगाने के लिए आयकर विभाग ने 24×7 कंट्रोल रूम बनाया
आयकर विभाग ने असम में आगामी विधानसभा चुनावों 2026 में काले धन के उपयोग की निगरानी और उस पर अंकुश लगाने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम बनाया है। यह पहल आयकर निदेशालय (जांच), उत्तर पूर्वी क्षेत्र, गुवाहाटी द्वारा 9 अप्रैल, 2026 को होने वाले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित करने में भारत निर्वाचन आयोग की मदद के प्रयासों के तहत की गई है।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला किया
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले एक और फेरबदल करते हुए, चुनाव आयोग ने मंगलवार को दो एडीजी सहित 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादलों का आदेश दिया। आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह को दक्षिण बंगाल का नया अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) नियुक्त किया गया, जबकि के जयरामन को उत्तर बंगाल का एडीजी बनाया गया। दोनों 1997 बैच के अधिकारी हैं। आसनसोल-दुर्गापुर, हावड़ा, बैरकपुर और चंदननगर के लिए नए पुलिस आयुक्तों (सीपी) की नियुक्ति की गई। प्रणव कुमार को पश्चिम बर्धमान के आसनसोल-दुर्गापुर का नया सीपी, अखिलेश कुमार चतुर्वेदी को हावड़ा का सीपी, अमित कुमार सिंह को उत्तर 24 परगना के बैरकपुर का नया सीपी और सुनील कुमार यादव को हुगली जिले के चंदननगर का सीपी नियुक्त किया गया। हालिया फेरबदल में 12 जिलों के SP भी बदले गए हैं।
चुनाव आयोग ने 1,100 से अधिक पर्यवेक्षकों की तैनाती की
चुनाव आयोग (ईसी) ने अगले महीने होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों और विधानसभा उपचुनावों के लिए 1,111 पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभाओं के चुनाव होने के साथ-साथ, कई राज्यों में विधानसभा उपचुनाव भी अप्रैल में होने हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि पर्यवेक्षक ईसी की आंख और कान के रूप में काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। ईसी ने निर्देश दिया है कि पर्यवेक्षक गुरुवार तक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच जाएं। ईसी ने कहा कि पहुंचने पर, पर्यवेक्षक अपने संपर्क विवरण सार्वजनिक करेंगे और उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों या उनके प्रतिनिधियों, या जनता के किसी भी सदस्य से चुनाव संबंधी शिकायतों को सुनने के लिए प्रतिदिन एक निश्चित समय निर्धारित करेंगे।
केरल चुनाव: NDA ने ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र को उतारा मैदान में
केरल विधानसभा चुनाव (9 अप्रैल) से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। NDA ने कोट्टायम जिले की दो ईसाई बहुल सीटों पूनजार और पालासे पिता-पुत्र की जोड़ी को उम्मीदवार बनाया है।
यह जोड़ी है वरिष्ठ नेता पी. सी. जॉर्ज और उनके बेटे शोन जॉर्ज की। पीसी जॉर्ज को पूनजार से उम्मीदवार बनाया गया है। शोन जॉर्ज को पाला सीट से मैदान में उतारा गया है।
पीसी जॉर्ज सात बार विधायक रह चुके हैं। पहले केरल जनपक्षम (सेक्युलर) पार्टी बनाई, बाद में विभिन्न केरल कांग्रेस गुटों से जुड़े रहे। उन्होंने 2016 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी जीत दर्ज की थी। उनकी पार्टी का 2024 लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA में विलय हो गया था।
रजनीकांत का टीवीके को जवाब- समय बोलता नहीं, बल्कि जवाब देता है
सुपरस्टार रजनीकांत ने मंगलवार को टीवीके के महासचिव आदव अर्जुन की उनके बारे में की गई “अपमानजनक टिप्पणियों” की निंदा की। रजनीकांत ने कहा कि समय ही जवाब देगा। X पर पोस्ट किए गए एक आधिकारिक संदेश में, अभिनेता ने अर्जुन की टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त की और उन्हें “सत्य के विपरीत” बताया।
उन्होंने उन राजनीतिक नेताओं, प्रशंसकों और मीडिया सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया जिन्होंने “अपमानजनक” टिप्पणियों की आलोचना की। “तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) पार्टी में नेतृत्व की भूमिका निभाने वाले आधव अर्जुन ने हाल ही में मेरे बारे में एक ऐसी राय व्यक्त की जो सत्य के विपरीत थी। मैं तमिलनाडु विधानसभा के माननीय विपक्ष नेता श्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, तमिलनाडु के मंत्रियों मीडिया के सदस्यों और मेरे प्रिय प्रशंसकों (जिन्हें मैं भगवान मानता हूँ) का तहे दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूं।
मैं अपने प्रियजनों को उनके अपमानजनक बयानों की निंदा करने और मेरे समर्थन में आवाज उठाने के लिए धन्यवाद देता हूं। रजनकांत ने कहा- समय बोलता नहीं, बल्कि इंतजार करता है और जवाब देता है, उन्होंने आगे कहा।
नई दिल्ली, एजेंसी। पीएम मोदी 13 साल बाद शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) पहुंचे। वे मेट्रो का सफर करके कॉलेज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेट्रो में बैठे बच्चों और लोगों से भी बातचीत की।
कॉलेज के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इसी दौरान पीएम जेन-Z को संबोधित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा- यहां के एलुमिनाई OG हैं, यानी ओरिजनल गैंगस्टर हैं। यहां के एलुमिनाई स्टूडेंट्स ने हर क्षेत्र में धूम मचाई है। वे धुरंधर भले न हों, पर धूम तो मचाई है।
समारोह की शुरुआत में पीएम ने 100 रुपए का सिक्का जारी किया। इसी साल अप्रैल में वे डाक टिकट भी जारी कर चुके हैं।
पीएम इससे पहले 2013 में श्रीराम कॉलेज का दौरा कर चुके हैं। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।
मोदी ने 13 साल पहले दी स्पीच की खास बातें दोहराईं
संबोधन के दौरान पीएम ने 2013 में दी गई अपनी स्पीच की खास बातें दोहराईं। उन्होंने कहा- “उस समय आप सब स्कूल में रहे होंगे। पर आज इंटरनेट पर जाकर उस समय की खबरें पढ़ेंगे तब आपको पता चलेगा उस समय देश में क्या हालत थी। मैं चाहूंगा कि आप इंटरनेट पर पढ़ें। मैं उस वक्त की हेडलाइन की कुछ झलक दिखाना चाहता हूं। LOC पर भारतीय सैनिकों की हत्या। वर्ल्ड बैंक ने GDP का नंबर घटाया। महंगाई दर 10% के करीब। हेलिकॉप्टर में घूसखोरी और हैदराबाद में ब्लास्ट ये उस समय की हेडलाइंस थीं।”
मोदी बोले- देश के लिए जीने का जज्बा मेरे अंदर भावविष्ट
स्पीच के दौरान पीएम ने कहा- “देश के लिए जी जान से जुटना। देश के लिए जीने का जज्बा, जो मेरे अंदर भावविष्ट है। वो 2013 में यहीं से शब्दों की माला में गढ़ता गया। मैं काफी देर बोला था। मैंने उस दिन पानी के ग्लास का एक उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि पानी के आधे भरे ग्लास को देखने के तीन नजरिए क्या होते हैं। एक जिनको ग्लास आधा खाली दिखता है। दूसरा जिन्हें ग्लास आधा भरा दिखता है। और तीसरा जिन्हें ग्लास पूरा भरा दिखता है। आधा हवा से आधा पानी से।”
पीएम बोले- कुछ दिन इस आयोजन की खूब चर्चा है
पीएम मोदी ने कहा- “कुछ दिनों से इस कार्यक्रम की खूब चर्चा है। लोग मेरे 2013 के संबोधन को याद कर रहे हैं। नई पीढ़ी के लोगों ने भी उसे रिविजिट किया है। आज भी 13-14 साल बाद भी उस सभा और संबोधन का प्रभाव बरकरार है। साथियों तब आपकी जगह आपके सीनियर थे। मैं तब सीएम तो था पर मैं विपक्षी पार्टी में था। लोग उम्मीद कर रहे थे कि मैं उस वक्त तब की केंद्र सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दूंगा। पर मैंने इस मंच का वो उपयोग नहीं किया। मैंने एक विजन रखा था। मैंने तब जो कहा था वो मेरा कनविक्शन था।”
पीएम बोले- यहां के एलुमिनाई जेन जी की भाषा में OG और धुरंधर
इस कॉलेज की यात्रा दरियागंज के एक छोटे से स्थान से शुरू हुई थी। और वही छोटा कॉलेज एक विशाल वृक्ष बन चुका है। इसने कई लोगों को छांव और शीतलता दी है।
आज भी जब कोई पूछता है कि DU में कौन सा कॉलेज, तो SRCC कहना ही अपने आप में फ्लैक्स होता है। आपकी भाषा में कहूं तो यहां के एल्युमनाई OG हैं।
जिन्होंने SRCC का नाम पूरी दुनिया में पहुंचाया। हमारे अरुण जेटली जी यहीं पढ़े थे। और मैं कह सकता हूं कि हमारी ऐसी कोई मुलाकात नहीं हुई जहां उन्होंने SRCC की बात न की हो। कभी-कभी तो मैं तंग आ जाता था।
लोग मेरे 2013 के संबोधन को याद कर रहे हैं। नई पीढ़ी के लोगों ने भी उसे रिविजिट
पीएम मोदी का संबोधन शुरू, बोले- मैं छठा खिलाड़ी हूं
पीएम मोदी ने संबोधन की शुरुआत में एलुमिनाई स्टूडेंट्स के नाम लिए और फिर बोले- मैं छठा खिलाड़ी हूं। आज का ये अवसर बहुत ऐतिहासिक है। ये देश के शिक्षा जगत के लिए भी अहम है। यहां SRCC का हिस्सा रही अनेक पीढ़ियां जुड़ी हैं।
मोदी ने कहा- मैं कॉलेज के संस्थापक सर श्री राम जी का भी धन्यवाद करता हूं। जब कोई इंसान 100 साल जीता है तो उसके अनुभवों का सागर माना जाता है। और जब कोई संस्थान ऐसा करता है तो वो उपलब्धियों का महासागर हो जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसी। पीएम मोदी 13 साल बाद शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) पहुंचे। वे मेट्रो का सफर करके कॉलेज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेट्रो में बैठे बच्चों और लोगों से भी बातचीत की।
कॉलेज के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इसी दौरान पीएम जेन-Z को संबोधित करेंगे।
समारोह की शुरुआत में पीएम ने 100 रुपए का सिक्का जारी किया। इसी साल अप्रैल में वे डाक टिकट भी जारी कर चुके हैं।
पीएम इससे पहले 2013 में श्रीराम कॉलेज का दौरा कर चुके हैं। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।
दिल्ली मेट्रो में सफर के दौरान पीएम मोदी की तस्वीरें…
मोदी ने लिखा- SRCC ने लीडर्स की पीढ़ियां तैयार कीं
इवेंट के लिए रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में लिखा- इस कॉलेज ने एकेडमिक एक्सीलेंस, संस्थान बनाने और बिजनेस, पब्लिक लाइफ और समाज में लीडर्स की पीढ़ियों को तैयार करने के मामले में सालों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
अप्रैल में डाक टिकट जारी किया गया था
इस साल अप्रैल में पीएम ने संस्थान के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया था।
1926 में हुई थी श्रीराम कॉलेज की स्थापना
दिल्ली यूनिवर्सिटी का श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स भारत के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक है और कॉमर्स, इकोनॉमिक्स और मैनेजमेंट के क्षेत्रों में सीखने का एक प्रतिष्ठित केंद्र है।
मशहूर उद्योगपति और समाजसेवी सर श्री राम ने 1926 में स्थापित इस कॉलेज ने एक सदी के दौरान विद्वानों, पेशेवरों, प्रशासकों, उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और राष्ट्र-निर्माताओं की पीढ़ियों को तैयार किया है।
नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया का नक्शा अब कुछ बदला नजर आएगा। इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है। भारत ने भी प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। अमेरिका प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने वाला अकेला देश रहा।
इस फैसले से देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बस इनका आकार पहले से थोड़ा छोटा या बड़ा दिख सकता है।
अब तक धरती पर देशों और महाद्वीपों को दिखाने के लिए मर्केटर वर्ल्ड मैप का उपयोग किया जाता था। इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल से बड़ा या छोटा दिखता था।
नए नक्शे का नाम इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन है। इसमें अफ्रीका पहले से काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्सों का आकार भी पहले से छोटा दिखेगा।
भारत: क्षेत्रफल वही, आकार बड़ा दिख सकता है
भारत की वास्तविक जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बदलाव देशों की सीमाएं बदलने वाला नहीं, बल्कि नक्शे पर पृथ्वी को दिखाने का तरीका बदलने वाला है।
भारत का नक्शा देखने में भी थोड़ा अलग दिख सकता है, लेकिन भारत के मामले में बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा।
नया नक्शा क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाता है। पुराने नक्शे में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपने आकार से छोटे और ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं।
भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए पुराने नक्शे में भी उसका आकार कुछ हद तक छोटा दिखता है।
भारत के लिए इसका मतलब
क्षेत्रफल: बिल्कुल वही रहेगा।
सीमाएं: नहीं बदलेंगी।
भारत की आकृति: थोड़ी बदली हुई/कम खिंची हुई दिखाई दे सकती है।
दूसरे देशों की तुलना में आकार: भारत कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है, खासकर जब उसकी तुलना यूरोप, रूस, कनाडा जैसे ज्यादा उत्तरी देशों से की जाए।
अफ्रीका पर असर: सबसे ज्यादा नजर आएगा, क्योंकि उसका वास्तविक आकार पुराने मर्केटर नक्शे की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देगा।
अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट दिया, जबकि 6 देश वोटिंग से दूर रहे। अमेरिका ने इस पहल की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शे को बदलने जैसी बहस पर।
उन्होंने इसे एक वैचारिक एजेंडा बताया और कहा कि ऐसी बहसों की वजह से संयुक्त राष्ट्र अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।
वहीं, अफ्रीकी संघ ने इस फैसले का स्वागत किया। उसने दुनिया के नए नक्शे को ज्यादा सटीक और बराबरी वाला बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या थी?
दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था।
इसका मकसद समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशा को समझना आसान बनाना था। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है।
जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं।
मर्केटर प्रोजेक्शन में पृथ्वी का नक्शा। (फोटो: NASA)
ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है।
ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।
फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है।
अफ्रीकी देश नक्शा बदलने की मांग क्यों कर रहे थे?
अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं।
UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है।
अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और लोगों की सोच को भी प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला।
फ्रांस भी मर्केटर मैप छोड़ने की तैयारी में
UN में मतदान से पहले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि उनका देश मर्केटर मैप की जगह ऐसे नक्शों का इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही तरीके से दिखाई दे।
फ्रांस अब एकर्ट IV प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करेगा। एकर्ट IV नक्शा 1906 में जर्मन कार्टोग्राफर मैक्स एकर्ट-ग्राइफेंडॉर्फ ने बनाया था। उन्होंने दुनिया के नक्शे के छह अलग-अलग डिजाइन तैयार किए थे। इनमें चौथा नक्शा यानी एकर्ट IV क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे सटीक माना गया।
एकर्ट IV और इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन दोनों ऐसे नक्शे हैं, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखता है।
फिर 2018 में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन की जरूरत क्यों पड़ी?
एकर्ट IV में क्षेत्रफल तो सही दिखाया गया है, लेकिन कई जगह देशों और महाद्वीपों के आकार में ज्यादा विकृति नजर आती है। इसी समस्या को कम करने के लिए इक्वल अर्थ बनाया गया,
इक्वल अर्थ बनाने का मकसद सिर्फ देशों और महाद्वीपों का सही क्षेत्रफल दिखाना नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया को ऐसे रूप में दिखाना था, जो देखने में भी ज्यादा संतुलित लगे।
क्या UN का फैसला सभी पर लागू होगा?
नहीं। संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। यानी यह देशों, स्कूलों, किताबों के प्रकाशकों या टेक कंपनियों को मर्केटर नक्शा हटाने के लिए मजबूर नहीं करता।
लेकिन इससे नक्शे बनाने और पढ़ाने में ऐसे तरीकों को बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही दिखाई दे।
मर्केटर नक्शे को पूरी तरह खत्म करने की भी बात नहीं कही गई है। समुद्री और हवाई नेविगेशन में इसका इस्तेमाल जारी रह सकता है, क्योंकि इसमें दिशाओं को सही रखने की खासियत है।
मैप: यह अंग्रेजी का शब्द है। माना जाता है कि यह लैटिन के माप्पा से आया। जिसका अर्थ कपड़ा या चादर है, जिस पर नक्शा बनाया जाता था। बाद में इसका अर्थ मानचित्र हो गया।
नक्शा: यह अरबी मूल का शब्द है। अरबी में नक्श का अर्थ है चित्र या नक्काशी। इसी से नक्शा बना और हिंदी-उर्दू में किसी जगह का चित्र/मानचित्र बताने के लिए इस्तेमाल होने लगा।
मानचित्र: संस्कृत मूल का शब्द है। मान + चित्र, यानी किसी स्थान को माप या अनुपात के साथ चित्र के रूप में दिखाना।