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कोरबा

सांसद ज्योत्सना महंत ने महिला दिवस पर महिला पत्रकारों से आत्मीय संवाद कर किया सम्मानित

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कोरबा। इंटरनेशनल वूमेंस डे के अवसर पर कोरबा लोकसभा क्षेत्र सांसद ज्योत्सना महंत ने अपने निवास पर अंचल की महिला पत्रकारों से आत्मीय मुलाकात कर उनसे संवाद किया और उनका सम्मान किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की भूमिका, चुनौतियों, राजनीति में भागीदारी और सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।
सांसद श्रीमती महंत ने महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि महिलाएँ समाज की प्रेरक शक्ति हैं और परिवार से लेकर समाज के निर्माण तक उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएँ शिक्षा, प्रशासन, राजनीति, मीडिया सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का परिचय दे रही हैं और समाज को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान निभा रही हैं।

कार्यक्रम के दौरान संसद में महिला सांसदों की कम संख्या को लेकर सवाल उठे। पूछा गया कि जब देश की आधी आबादी महिलाएँ हैं, तो संसद में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम क्यों है। इस सवाल पर सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि संख्या कम होने के बावजूद महिला सांसद अपनी बातों को मजबूती से रखती हैं और संसद में प्रभावी भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि महिलाएँ राजनीति के उच्चतम स्तर पर भी पूरी क्षमता और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभा रही हैं।
सांसद श्रीमती महंत ने आगे कहा कि महिलाओं का वास्तविक सशक्तिकरण शिक्षा और समान अवसरों से ही संभव है। इसलिए समाज और परिवार को बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर समाज में नेतृत्व की भूमिका निभा सकें।इस अवसर पर सांसद ज्योत्सना महंत ने महिला पत्रकारों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया और कहा कि मीडिया लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है तथा महिला पत्रकार समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने महिला दिवस पर सभी महिला पत्रकारों को शुभकामनाएं दी।
कार्यक्रम कोरबा प्रेस क्लब के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल, उपाध्यक्ष रामेश्वर ठाकुर, सदस्य प्रीतम जायसवाल उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ महिला पत्रकार राजश्री गुप्ते, रेणु जायसवाल, मिली, लाली, सिमरन कौर, रजनी चौहान, प्रतिमा सरकार, वर्षा चौहान, आशा, निर्मला, कृतिका और सुमन जायसवाल उपस्तित रहीं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं से जुड़े विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर सार्थक चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

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कोरबा

पीएम आवास शहरी 2.0 योजना से साकार हुआ गुंजा साहू का पक्के घर का सपना

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कोरबा। शासन की महत्वाकांक्षी पीएम आवास शहरी 2.0 योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्के आवास का सपना साकार कर रही है। इसी योजना के तहत कोरबा शहर के काशीनगर निवासी श्रीमती गुंजा साहू को आवास निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जिससे उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हो सका।

श्रीमती गुंजा साहू के पति सोनू राम साहू ठेका कर्मी के रूप में कार्यरत हैं। सीमित आय के कारण पक्का मकान बनाना परिवार के लिए कठिन था। योजना के अंतर्गत उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि तथा अपनी बचत का उपयोग कर उन्होंने अपने आवास का निर्माण पूरा किया। आज उनका परिवार अपने पक्के घर में सुरक्षित एवं सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहा है। यह आवास उनके लिए केवल एक घर नहीं, बल्कि सुरक्षा, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य का आधार बन गया है।
अपनी खुशी व्यक्त करते हुए श्रीमती गुंजा साहू ने कहा, पक्का घर बनाना हमारा सपना था, जो अब पूरा हो गया है। शासन की सहायता से हमें अपना आशियाना मिला है। इसके लिए हम प्रधानमंत्री एवं शासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।
पीएम आवास शहरी 2.0 योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आवासीय सुरक्षा प्रदान कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

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कोरबा

बिहान योजना ने दी नई पहचान – सुरेखा जायसवाल बनीं ‘लखपति दीदी’

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कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बिहान योजना के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता तथा स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल से अनेक महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। कटघोरा विकासखंड के ग्राम धंवईपुर नवापारा की निवासी श्रीमती सुरेखा जायसवाल इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं।

कक्षा दसवीं तक शिक्षित श्रीमती सुरेखा जायसवाल पहले एक सामान्य गृहिणी थीं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उनके पति पर थी, लेकिन वे भी परिवार की आय बढ़ाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की इच्छा रखती थीं। वर्ष 2019 में बिहान योजना के अंतर्गत आस्था महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय सहयोग के साथ-साथ विभिन्न प्रशिक्षण प्राप्त हुए, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास का विकास हुआ और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से उन्हें आरएफ मद से 10 हजार रुपये, सीआईएफ मद से 30 हजार रुपये तथा स्वयं सिद्धा पहल के अंतर्गत 2 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त एफएलसीआरपी के माध्यम से बैंक से 1 लाख रुपये का ऋण भी उपलब्ध कराया गया।
प्राप्त वित्तीय सहायता का सदुपयोग करते हुए श्रीमती सुरेखा ने श्रृंगार सामग्री की दुकान, किराना दुकान एवं फोटोकॉपी सेंटर की स्थापना की। उनकी मेहनत, लगन और व्यवसायिक समझ का परिणाम यह रहा कि आज उनकी वार्षिक आय लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ ही उन्होंने समाज में अपनी अलग पहचान बनाई है और आज वे लखपति दीदी  के रूप में जानी जाती हैं।
श्रीमती सुरेखा बताती हैं कि स्वरोजगार से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं तथा घर के निर्णयों में भी उनकी सक्रिय भूमिका है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई प्रदान की है।
अपनी सफलता का श्रेय वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ शासन और बिहान योजना को देते हुए कहती हैं कि शासन के सहयोग और स्व-सहायता समूह से मिले मार्गदर्शन ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। आज वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रही हैं और अपने परिवार को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं।
श्रीमती सुरेखा जायसवाल की सफलता की यह कहानी दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और दृढ़ संकल्प के बल पर महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। बिहान योजना इसी परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है।

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कोरबा

दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी सहारा,मनोज खूंटे के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव

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कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा संचालित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का सशक्त माध्यम बन रही है। योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे अंतरित की जाती है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं को भी नई दिशा मिल रही है।
कोरबा जिले के ग्राम भुलसीडीह निवासी मनोज खूंटे इस योजना के लाभान्वित हितग्राही हैं। भूमिहीन होने के कारण उनकी आजीविका का मुख्य आधार मजदूरी कार्य था। सीमित आय में चार सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्चों का प्रबंधन करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। कई बार आर्थिक तंगी के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था।

श्री खूंटे बताते हैं कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्राप्त होने वाली 10 हजार रुपये की वार्षिक सहायता राशि ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। इस राशि से वे बच्चों की पढ़ाई, घरेलू आवश्यकताओं और अन्य जरूरी खर्चों का बेहतर ढंग से प्रबंधन कर पा रहे हैं। इससे परिवार को आर्थिक राहत मिली है और जीवन में स्थिरता आई है।
वे बताते हैं कि अब उनका ध्यान केवल वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य को लेकर भी नई सोच विकसित हुई है। योजना से प्राप्त राशि का एक हिस्सा बचाकर वे छोटा व्यवसाय प्रारंभ करने की योजना बना रहे हैं, जिससे परिवार के लिए आय का स्थायी स्रोत तैयार किया जा सके और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
मनोज खूंटे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जैसे भूमिहीन मजदूर परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। इससे उन्हें आर्थिक संबल मिला है, बच्चों के भविष्य के प्रति विश्वास बढ़ा है और परिवार को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हुआ है।
’दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को आत्मविश्वास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया आधार भी उपलब्ध करा रही है। यह योजना राज्य शासन की जनकल्याणकारी सोच को साकार करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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