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छत्तीसगढ़

सरेंडर से पहले नक्सली को साथियों ने गोली मारी, दफनाया:ओडिशा में 12 साथियों के साथ हथियार डालने वाला था अन्वेष, बीजापुर में 2 ढेर

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जगदलपुर/बीजापुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कंधमाल जिले में एक नक्सली को उसके ही साथियों ने गोली मारकर दफना दिया। अन्वेष 22 लाख का इनामी था। वह अपने 12 साथियों के साथ जल्द ही आत्मसमर्पण करने वाला था। उससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। वहीं छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो वर्दीधारी नक्सलियों को मार गिराया। दोनों के शव बरामद कर लिए गए हैं। मौके से SLR और इंसास समेत अन्य हथियार भी जब्त किए गए हैं। एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि की है।

जांगला थाना क्षेत्र के इंद्रावती नदी के जैगुर-डोडुम के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम सर्चिंग के लिए निकली थी। जवानों को देखते ही नक्सलियों ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी गोलियां दागी। ढेर हुए नक्सलियों में एक महिला नक्सली भी शामिल है।

इंसास राइफल, बोर बंदूके जब्त

एसपी डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि मुठभेड़ के बाद चलाए गए सर्च अभियान में दो वर्दीधारी माओवादियों के शव बरामद हुए। मौके से एक SLR, एक इंसास राइफल, एक 12 बोर राइफल, विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग के सामान भी जब्त किए गए हैं।

मुठभेड़ स्थल से राइफल, इंसास और बोर बंदूक मिला। दोनों के शव भी बरामद कर लिए गए हैं।

मुठभेड़ स्थल से राइफल, इंसास और बोर बंदूक मिला। दोनों के शव भी बरामद कर लिए गए हैं।

पड़ोसी राज्य में नक्सली की हत्या

26 फरवरी को ओडिशा के कंधमाल जिले में नक्सली को उसके ही साथियों ने मार डाला। पुलिस के मुताबिक, अन्वेष दरिंगबाड़ी थाना क्षेत्र के पाकरी रिजर्व फॉरेस्ट में केकेबीएन ग्रुप के एरिया पार्टी कमांडर था। अन्वेष समर्पण की तैयारी में था। इसी शक में उसे मारकर जंगल में दफना दिया गया।

मोस्ट वांटेड नक्सली सुकुरु और अन्य साथियों ने वारदात को अंजाम दिया है। हत्या से पहले दोनों पक्षों में विवाद भी हुआ था। कंधमाल एसपी हरीशा बीसी ने घटना को संगठन की अंदरूनी कलह बताया है। उन्होंने कहा कि, जो लोग अभी भी संगठन में हैं, वे सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन में लौटें।

22 लाख के इनामी नक्सली अन्वेष को उसके ही साथियों ने मार डाला।

22 लाख के इनामी नक्सली अन्वेष को उसके ही साथियों ने मार डाला।

कांकेर में डीवीसीएम मासे ने डाले हथियार

कांकेर के छिंदपदर गांव से माओवादी डीवीसीएम मासे बारसा ने एके 47 के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। मासे साल 2003 से दण्डकारणय, अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर में माओवाद संगठन में सक्रिय थी। 26 फरवरी को उसने जंगल के रास्ते हाथों में AK-47 लेकर कांकेर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

कांकेर में महिला नक्सली ने किया सरेंडर।

कांकेर में महिला नक्सली ने किया सरेंडर।

6 फरवरी को 7 नक्सली मारे गए थे

इससे पहले 6 फरवरी को छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र बॉर्डर पर पुलिस और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में 7 नक्सली ढेर हुए थे। इनमें 3 महिला नक्सली शामिल थे। वहीं महाराष्ट्र का एक जवान शहीद हो गया था, 1 अन्य जवान घायल था।

नक्सलियों की ओर से फायरिंग में गोली कॉन्स्टेबल दीपक चिन्ना मदावी (38 साल) को जा लगी। उन्हें तुरंत एयरलिफ्ट कर भामरागड़ के अस्पताल लाया गया था। जहां ऑपरेशन के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया था।

नारायणपुर में 26 फरवरी को जवानों ने सर्चिंग के बाद विस्फोटक के साथ नक्सली सामान बरामद किया है।

नारायणपुर में 26 फरवरी को जवानों ने सर्चिंग के बाद विस्फोटक के साथ नक्सली सामान बरामद किया है।

1 साल में 232 नक्सली मारे गए

बीजापुर एसपी डॉ जितेंद्र कुमार यादव के मुताबिक 2025 में जिले में हुए अलग-अलग मुठभेड़ों में 163 माओवादी मारे गए, वहीं, 2026 में अब तक 11 माओवादी ढेर चुके हैं।

जनवरी 2024 से अब तक जिले में 232 नक्सली मारे गए, 1163 गिरफ्तार हुए और 888 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।

बस्तर में करीब 200 नक्सली बचे

नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है।

जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है।

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रायगढ़ में 35 हाथियों के महादल :7 बेबी एलीफेंट भी शामिल, छाल रेंज में बढ़ा मूवमेंट, गांवों में अलर्ट जारी

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रायगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले में कुल 123 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इसी बीच छाल रेंज में 35 हाथियों का बड़ा दल देखा गया है, जिसका वीडियो भी सामने आया है। हाथियों का यह दल जंगल और गांव के आसपास विचरण करता नजर आया।

सोमवार शाम छाल वन परिक्षेत्र के बोजिया परिसर स्थित पेलमबांध के पास इस दल को देखा गया। इसमें 3 नर, 25 मादा और 7 शावक शामिल हैं। ग्रामीणों ने भी इस दल को देखा और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो अब वायरल हो रहा है।

हाथी को जंगल जाने की आवाज लगाने पर हाथी जंगल की ओर चले गए।

हाथी को जंगल जाने की आवाज लगाने पर हाथी जंगल की ओर चले गए।

जिले में 123 हाथियों की मौजूदगी।

जिले में 123 हाथियों की मौजूदगी।

हाथी मित्र दल अलर्ट, गांवों में मुनादी

हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए हाथी मित्र दल लगातार निगरानी कर रहा है। बोजिया से औरानारा मार्ग सहित गड़ाईनबहरी और सिंघीझाप क्षेत्र में लोगों को सतर्क रहने के लिए मुनादी कराई गई है। बताया जा रहा है कि यह दल घरघोड़ा क्षेत्र से छाल रेंज में पहुंचा है।

आवाज देने पर जंगल की ओर लौटे हाथी

छाल रेंज से एक वीडियो में देखा गया कि, सड़क पर आए हाथियों को हाथी मित्र दल के सदस्य ने आवाज देकर जंगल की ओर लौटा दिया। इससे पहले भी इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है, जब हाथियों को सुरक्षित जंगल की ओर भेजा गया था।

जिले में 123 हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अनुसार धरमजयगढ़ वन मंडल में 120 और रायगढ़ रेंज में 3 हाथी हैं। छाल रेंज में सबसे अधिक 59 हाथी, धरमजयगढ़ रेंज में 48 और लैलूंगा रेंज में 13 हाथियों की मौजूदगी है। कुल मिलाकर इनमें 36 नर, 62 मादा और 26 शावक शामिल हैं।

ड्रोन से निगरानी, विभाग सतर्क

वन विभाग द्वारा हाथियों की निगरानी ड्रोन और जमीनी टीम के माध्यम से की जा रही है। छाल रेंज अधिकारी राजेश चौहान ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार नजर रखी जा रही है और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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छत्तीसगढ़

रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र मामले में हाईकोर्ट सख्त:90 दिनों में फैसला देने के निर्देश, याचिकाकर्ता बोला- प्रशासन जानबूझकर सुनवाई टाल रहा था

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सरगुजा, एजेंसी। सरगुजा के सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फौरन सुनवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने रायगढ़ कलेक्टर और जिला स्तरीय सत्यापन समिति को 90 दिनों के भीतर इस मामले में फैसला लेने को कहा है।

याचिकाकर्ता बिहारी लाल तिर्की का आरोप है कि जिला प्रशासन जानबूझकर इस मामले की सुनवाई टाल रहा था, जिसके चलते उन्हें हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने साल 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

उन्होंने विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जो 19 सितंबर 2023 को रायगढ़ से जारी हुआ था। इस मामले में उन्होंने जिला स्तरीय छानबीन समिति के सामने भी शिकायत पेश की थी।

लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण मामले में आगे कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, जिस पर अब कोर्ट ने सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की तस्वीर।

सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की तस्वीर।

2 साल से अधिक समय से लंबित जांच

बिहारी लाल तिर्की की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पहले ही रायगढ़ की जिला स्तरीय छानबीन समिति को जाति प्रमाणपत्र की जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समिति की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया।

इस पर बिहारी लाल तिर्की ने एक बार फिर हाईकोर्ट की शरण ली, जहां उनकी याचिका पर दोबारा सुनवाई की गई। न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी की अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की जल्द से जल्द सुनवाई की जाए और 90 दिनों के भीतर अंतिम फैसला दिया जाए।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से जानबूझकर इस मामले को लंबित रखा जा रहा था, जिसके चलते उन्हें दोबारा कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

बगैर सेटलमेंट बना जाति प्रमाणपत्र

याचिकाकर्ता बिहारीलाल तिर्की ने विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह प्रमाण पत्र बिना सेटलमेंट के तैयार किया गया है, जबकि जाति प्रमाण पत्र सरलीकरण के नियमों के तहत बनाए जाते हैं, लेकिन विधायक के मामले में इन सभी नियमों की अनदेखी की गई है।

बिहारीलाल तिर्की के अनुसार रामकुमार टोप्पो के पिता गणेश राम साल 1980 में झारखंड से यहां आकर बसे थे और उनके नाम पर छत्तीसगढ़ में कोई जमीन दर्ज नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरलीकरण के नियमों का पालन नहीं किया गया है और जिला प्रशासन इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए जानबूझकर जांच में विलंब कर रहा है।

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छत्तीसगढ़

डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के ड्रेसर का 5000 रिश्वत लेते वीडियो वायरल: सस्पेंड

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जशपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला अस्पताल के ड्रेसर किशोर कुमार चौहान के रिश्वत लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वो 5 हजार रुपए लेकर गिनते नजर आ रहा है। 2 हजार और देने की बात कह रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ड्रेसर को सस्पेंड कर दिया गया है।

सरकारी कर्मचारी ने इलाज के बाद पैसा रिम्बर्समेंट के लिए आवेदन दिया था। जिसे पास करने के एवज में रिश्वत मांगी गई। वीडियो में दोनों 45 हजार रुपए इलाज में खर्च और IVF के बारे में बातचीत करते नजर आ रहे हैं।

ड्रेसर यह भी कह रहा कि, जिसके साइन से पैसा निकल रहा है, उसको पैसा नहीं देना चाह रहे हो तुम। हम चाहते तो बिल को रायपुर भेज देते। लेकिन रायपुर से पास नहीं होता, क्योंकि IVF का पैसा नहीं मिलता है। हालांकि, पैसे देने वाला शख्स सामने नहीं आया है, न ही कोई शिकायत दर्ज कराई है।

ड्रेसर किशोर कुमार चौहान के रिश्वत लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा।

ड्रेसर किशोर कुमार चौहान के रिश्वत लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा।

पैसे लेने के बाद ड्रेसर ने सामने खड़े व्यक्ति को दस्तावेज दिया।

पैसे लेने के बाद ड्रेसर ने सामने खड़े व्यक्ति को दस्तावेज दिया।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, 9 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें ड्रेसर किशोर कुमार चौहान को मेडिकल रिम्बर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) पास कराने के बदले पैसे लेते हुए देखा गया। वीडियो वायरल होने के बाद मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, जिसके बाद जांच कर कार्रवाई की गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने इस मामले को अनुचित आचरण माना है। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी हरकत छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है। सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत ड्रेसर को सस्पेंड किया गया है।

सस्पेंशन के दौरान किशोर कुमार चौहान का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पत्थलगांव निर्धारित किया गया है। नियमानुसार, उन्हें इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। इस कार्रवाई के बाद जिला चिकित्सालय सहित स्वास्थ्य विभाग में चर्चा है।

इसी व्यक्ति ने काम के एवज में रिश्वत दी है।

इसी व्यक्ति ने काम के एवज में रिश्वत दी है।

CMHO बोले- विभागीय जांच भी कराई जाएगी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने कहा कि, सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के आधार पर पहली नजर में मामला गंभीर पाया गया। शासकीय सेवक की तरफ से इस प्रकार की अवैध वसूली न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विभाग की छवि को भी धूमिल करता है।

इसलिए तत्काल प्रभाव से उन्हें सस्पेंड किया गया है। आगे विभागीय जांच भी कराई जाएगी और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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