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पैन कार्ड का नया अलर्ट, इन 5 कामों के लिए भी जरूरी है पैन नंबर, अगर नहीं दिया तो…

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मुंबई, एजेंसी। अमूमन लोग पैन कार्ड (Permanent Account Number) को केवल इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का एक साधन मात्र समझते हैं लेकिन असलियत में यह आपके वित्तीय जीवन और आपकी जेब से जुड़ा सबसे जरूरी दस्तावेज है। अगर आप कोई बड़ी शॉपिंग करने, गाड़ी या घर खरीदने, या फिर शेयर बाजार में पैसा लगाने की सोच रहे हैं तो आपके पास पैन कार्ड होना अनिवार्य है। टैक्स नियमों के मुताबिक कुछ खास ट्रांजैक्शन ऐसे हैं जहां पैन नंबर न देने पर आपका काम तो रुकेगा ही साथ ही आप आयकर विभाग के रडार पर भी आ सकते हैं।

आइए अब आपको बतातें हैं वो कौन से 5 महत्वपूर्ण काम हैं जहां पैन कार्ड के बिना आपका पत्ता भी नहीं हिल पाएगा:

1. प्रॉपर्टी और महंगी गाड़ियों की खरीद-बिक्री

यदि आप जमीन, मकान या कोई नई सवारी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो इन लिमिट्स को हमेशा याद रखें। 20 लाख से अधिक मूल्य की किसी भी अचल संपत्ति (जैसे मकान, दुकान या प्लॉट) की खरीद-फरोख्त पर पैन कार्ड देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

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अगर आप 5 लाख से अधिक कीमत की कोई भी कार या टू-व्हीलर खरीद रहे हैं तो शोरूम में बिलिंग के वक्त पैन नंबर देना होगा।

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2. शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और डीमैट अकाउंट

निवेश की शुरुआत करने के लिए पैन कार्ड सबसे पहला और जरूरी दस्तावेज है। शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदने-बेचने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है जो बिना पैन के कभी नहीं खुल सकता।

यदि आप किसी ऐसी कंपनी के शेयर्स खरीद या बेच रहे हैं जो शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है और उस ट्रांजैक्शन की वैल्यू 1 लाख से अधिक है तो पैन अनिवार्य है।

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3. 2 लाख से अधिक की शॉपिंग

पैन कार्ड का नियम आपकी सामान्य लग्जरी खरीदारी पर भी लागू होता है। किसी भी एक लेनदेन में यदि आप 2 लाख से अधिक का सामान (जैसे सोने के गहने, महंगी घड़ियां, इलेक्ट्रॉनिक्स) या कोई सर्विस लेते हैं तो पैन कार्ड देना होगा। इस नियम का मकसद बड़े नकद लेन-देन को ट्रैक करना है।

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4. गलत पैन नंबर देने पर भारी जुर्माना

जल्दबाजी या लापरवाही में कहीं भी गलत वित्तीय जानकारी दर्ज करने से बचें क्योंकि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यदि आप किसी वित्तीय या टैक्स दस्तावेज पर जानबूझकर या गलती से कोई गलत/फर्जी पैन नंबर दर्ज करते हैं तो आयकर नियमों के तहत आप पर 10,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत नंबर की वजह से आपका TDS क्रेडिट फंस सकता है और आपका केस स्क्रूटनी (जांच) में जा सकता है।

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5. ऐसे नजर रखता है इनकम टैक्स विभाग

आज के डिजिटल दौर में टैक्स विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय कदम की पूरी कुंडली होती है। जब भी आप उपर्युक्त ट्रांजैक्शंस में अपना पैन देते हैं तो वह डेटा आपके एन्युअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (SFT) में तुरंत दर्ज हो जाता है।

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आयकर विभाग आधुनिक टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स के जरिए आपकी घोषित सालाना कमाई और आपके द्वारा किए गए बड़े खर्चों का मिलान करता है। यदि इसमें कोई बड़ा अंतर पाया जाता है तो विभाग की तरफ से स्पष्टीकरण का नोटिस आ सकता है।

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दिल्ली में 1 जुलाई से नई EV पॉलिसी होगी लागू, CM रेखा गुप्ता ने किया ऐलान

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली सरकार ने बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026-30 को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को बताया कि नई नीति 1 जुलाई से लागू होगी। सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2030 तक दिल्ली को प्रदूषण मुक्त शहर बनाना है। राजधानी के कुल वायु प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत है।

नई नीति के तहत चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और CNG वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन बंद किए जाएंगे। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का ही नया रजिस्ट्रेशन होगा। वहीं, 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और CNG दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का ही पंजीकरण किया जा सकेगा।

इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर मिलेगी भारी सब्सिडी और छूट

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कई प्रोत्साहनों की घोषणा की है। 30 लाख रुपए तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली नई इलेक्ट्रिक कारों पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में छूट मिलेगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर पहले वर्ष 30,000 रुपए, दूसरे वर्ष 20,000 रुपए और तीसरे वर्ष 10,000 रुपए की सब्सिडी दी जाएगी।

थ्री-व्हीलर और कमर्शियल गाड़ियों के लिए भी बड़े ऐलान

इसी तरह, जो लोग इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खरीदेंगे, उन्हें भी सरकार की तरफ से बढ़िया आर्थिक मदद मिलेगी। ई-थ्री-व्हीलर खरीदारों को पहले साल में 50,000 रुपए, दूसरे साल में 40,000 रुपए और तीसरे साल में 30,000 रुपए का इंसेंटिव मिलेगा। कमर्शियल सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए एन1 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक ट्रकों को खरीदने पर सरकार की तरफ से 1 लाख रुपए तक का खरीद इंसेंटिव दिया जाएगा। इसके अलावा, पुराने वाहनों को कबाड़ में बदलने के लिए भी एक बड़ा एलान किया गया है। अगर कोई व्यक्ति अपनी बीएस-4 या उससे नीचे के स्टैंडर्ड वाली चार पहिया गाड़ी को स्क्रैप यानी कबाड़ में देकर नई इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदता है, तो उसे 1 लाख रुपए का स्क्रैपिंग इंसेंटिव दिया जाएगा।

हाइब्रिड गाड़ियों को कोई मदद नहीं और इंप्लीमेंटेशन का तरीका

सरकार ने इस नीति में पूरी तरह साफ कर दिया है कि हाइब्रिड गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए किसी भी तरह की सब्सिडी नहीं दी जाएगी। सरकार का पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ पूरी तरह से बिजली से चलने वाले वाहनों पर ही रहेगा। इस पूरी पॉलिसी के सही इंप्लीमेंटेशन और सब्सिडी की प्रोसेस को आसान बनाने के लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया जाएगा। इस पोर्टल की मदद से आवेदक सब्सिडी और इंसेंटिव के लिए घर बैठे आसानी से अप्लाई कर सकेंगे। इसके साथ ही, सरकार दिल्ली में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर्स की संख्या को भी बहुत तेजी से बढ़ाने जा रही है।

अगले चार साल में होगा भारी इनवेस्टमेंट

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस नई पॉलिसी के तहत दिल्ली में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करने और गाड़ियों के प्रदूषण को कम करने के लिए अगले चार साल के दौरान लगभग 15,000 करोड़ रुपए का भारी इनवेस्टमेंट किया जाएगा। यह नई पॉलिसी दिल्ली की साल 2020 में आई पहली ईवी पॉलिसी की नींव पर बनाई गई है, जिसका तीन साल का समय अगस्त 2023 में पूरा हो गया था और तब से उसे आगे बढ़ाया जा रहा था।

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छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों की संपत्ति की गुणवत्ता में मई में सुधार

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मुंबई, एजेंसी। छोटी राशि के कर्ज देने वाले सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) की संपत्ति की गुणवत्ता में मई में सुधार हुआ है। एमएफआई ने सभी श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन किया है। कर्ज के बारे में सूचना देने वाली कंपनी क्रिफ हाई मार्क ने सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि पश्चिम बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं जो पीछे चल रहे हैं और एमएफआई के लिए अधिक दबाव पैदा कर रहे हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, मई में एक से 30 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज, कुल 3.33 लाख करोड़ रुपए के कुल ऋण का 0.6 प्रतिशत थे, जो अप्रैल में 0.8 प्रतिशत थे। वहीं, 31-180 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज का आंकड़ा 1.6 प्रतिशत रहा, जबकि पहले यह 1.7 प्रतिशत था। हालांकि, पोर्टफोलियो में यह सुधार सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है। क्रिफ ने कहा, ”पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और राजस्थान में कर्ज लौटाने में चूक का स्तर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।” 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में 30 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज का स्तर 1.4 प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय औसत 0.6 प्रतिशत है। वहीं, 31-180 दिन वाले ऋण का स्तर दो प्रतिशत था, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.6 प्रतिशत है। इसी तरह, मध्य प्रदेश के मामले में, एक से 30 दिन तक बिना भुगतान वाला कर्ज राष्ट्रीय औसत के बराबर था लेकिन 31-180 दिन वाले कर्ज का स्तर दो प्रतिशत था। राजस्थान के लिए, 31-180 दिन तक बिना भुगतान वाले कर्ज का स्तर 1.9 प्रतिशत था। 

क्रिफ के अनुसार, सकल कर्ज मासिक आधार पर 0.7 प्रतिशत बढ़कर 3.33 लाख करोड़ रुपए हो गया। वहीं औसत कर्ज आकार 61,000 रुपए पर स्थिर रहा। यह उधार लेने वालों की मांग और कर्ज देने वालों के अनुशासन को दिखाता है। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि सक्रिय खातों की संख्या में मामूली 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 10.58 करोड़ रह गई। 

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कच्चे तेल में नरमी से FMCG कंपनियों ने टाली कीमत बढ़ोतरी

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मुंबई, एजेंसी। दैनिक उपभोक्ता वस्तु (FMCG) क्षेत्र की कंपनियों ने फिलहाल उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का फैसला टाल दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से कच्चे माल की लागत पर दबाव कम हुआ है, जिससे कंपनियों को राहत मिली है। साथ ही कंपनियां बिक्री की रफ्तार बनाए रखने के लिए भी कीमतों में बढ़ोतरी से बच रही हैं। 

कंपनी अधिकारियों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव से पहले के स्तर पर बनी रहती हैं, तो अतिरिक्त मूल्य वृद्धि की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे पहले बढ़ती लागत की भरपाई के लिए कई कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई थीं।

वर्तमान में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे है। इसके अलावा सितंबर में लागू जीएसटी सुधारों का लाभ भी ग्राहकों तक पहुंचाया गया है, जिससे FMCG सेक्टर में मांग और बिक्री में सुधार देखने को मिल रहा है।

बालाजी वेफर्स के संस्थापक एवं निदेशक चंदू विरानी ने बताया कि कंपनी छोटे पैकों का वजन घटाने और बड़े पैकों के दाम बढ़ाने पर विचार कर रही थी लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद इस योजना को फिलहाल रोक दिया गया है।

वहीं, पार्ले प्रोडक्ट्स ने भी लागत बढ़ने के बावजूद ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने की योजना स्थगित कर दी है। कंपनी के उपाध्यक्ष मयंक शाह ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने के बाद फिलहाल किसी भी उत्पाद की कीमत बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया है। उनके अनुसार, अधिकांश कंपनियां भी फिलहाल मूल्य वृद्धि को लेकर जल्दबाजी नहीं कर रही हैं।

उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी का असर मई से दिखना शुरू हो गया था लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कंपनियां कीमतों में नई बढ़ोतरी से बचने की रणनीति अपना रही हैं।

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