कोरबा/पाली। पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरका डांड में शनिवार शाम आंधी-तूफान और बारिश के दौरान हुई दर्दनाक घटना में तीन युवकों की मौत के मामले में अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि तीनों युवक बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे रुके हुए थे, तभी पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई। लेकिन मीडिया टीम के मौके पर पहुंचने पर सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
घटनास्थल पर देखा गया कि कोई डाल नहीं टूटी थी, बल्कि एक विशाल धौरा का पेड़ जड़ सहित गिरा हुआ था। वहीं ग्रामीणों, मृतक दिनेशु तिर्की के परिजनों तथा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि घटनास्थल पर वन समिति के माध्यम से सूअर पालन के लिए कोठा निर्माण का कार्य चल रहा था। उनके अनुसार दिनेशु तिर्की और कमलेश बड़ा निर्माण कार्य में लगे हुए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक तेज आंधी-तूफान शुरू हुआ। इसी दौरान धौरा वृक्ष से आवाज आई और कुछ ही क्षणों में वह घूमकर निर्माण स्थल पर गिर पड़ा। पेड़ के नीचे काम कर रहे युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में एक महिला को भी सिर और हाथ में हल्की चोटें आईं, जिसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। इसके बाद लोगों ने किसी तरह दबे हुए लोगों को बाहर निकाला और घायल युवकों को वाहन की व्यवस्था कर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां जांच उपरांत दो युवकों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल युवक को रेफर किया गया, जिसकी रास्ते में मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र होने के कारण तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया और अस्पताल पहुंचने में करीब ढाई घंटे का विलंब हुआ।
इधर जब इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य में युवकों को लगाए जाने से इनकार किया। यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में युवक शामिल नहीं थे तो वे घटनास्थल पर क्या कर रहे थे? ग्रामीण, परिजन और वहां मौजूद महिलाएं निर्माण कार्य में लगे होने की बात क्यों कह रही हैं? यदि वन समिति के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां कार्यरत लोगों की निगरानी कौन कर रहा था? निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या कार्य शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन किया गया था? यदि नाबालिग मौके पर मौजूद थे तो उनकी उपस्थिति किन परिस्थितियों में थी? क्या निर्माण कार्य के लिए मजदूरों का कोई पंजीयन या उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था? दुर्घटना के समय वहां कितने लोग काम कर रहे थे और उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया था? आखिर घटना के संबंध में सामने आ रहे अलग-अलग दावों में सच्चाई क्या है?
मृतकों में 14 वर्षीय शिवराम टेकाम और 17 वर्षीय दिनेश तिर्की भी शामिल हैं। ऐसे में नाबालिगों से कार्य कराए जाने की आशंका को लेकर मामला और गंभीर हो जाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना के समय वहां वास्तव में क्या कार्य चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।फिलहाल यह मामला केवल प्राकृतिक दुर्घटना तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
चोरकाडांड निवासी हीरा सिंह ने बताया कि वन विभाग द्वारा पशुपालन के लिए भवन निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें युवक कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार मौसम सामान्य था और केवल हल्की हवा चल रही थी। इसी दौरान अचानक एक विशाल धौरा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।
मृतक दिनेशु तिर्की की मां हीरामणि ने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन दिनों से वहां काम पर जा रहा था। घटना की जानकारी गांव के एक युवक ने आकर दी, जिसके बाद वह तत्काल घटनास्थल पहुंचीं। ग्रामीणों की मदद से वाहन की व्यवस्था कर घायल युवकों को पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत की खबर मिली।
काम करने वाली राधाबाई बाइसेम्हर ने बताया कि वह एक अन्य महिला के साथ दो दिनों से निर्माण कार्य में लगी थीं। हादसे के समय वह बालू उठा रही थीं, जबकि दूसरी महिला बालू छान रही थी। तभी कटने जैसी तेज आवाज सुनाई दी। जान बचाने के लिए भागते समय विशाल धौरा वृक्ष गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। राधाबाई ने बताया कि तीनों युवक पिछले दो दिनों से पानी ढुलाई और मसाला बनाने का काम कर रहे थे।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में तीज पर्व पर मायके जाने की तैयारी कर रही महिलाओं और दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जाएगा।
इसके चलते 13 और 14 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और इतवारी के बीच चलने वाली 10 ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं 2 मेमू ट्रेनों का परिचालन बिलासपुर तक सीमित रहेगा। रेलवे के मुताबिक यह काम उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना के तहत उरकुरा स्टेशन के यार्ड रीमॉडलिंग के लिए किया जा रहा है।
यात्रियों के लिए जरूरी बात
तीजा पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार मायके आने-जाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में 13 और 14 सितंबर को यात्रा से पहले ट्रेन नंबर जरूर चेक कर लें। रद्द ट्रेन से यात्रा की योजना है तो वैकल्पिक ट्रेन या बस की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर होगा।
कोरबा/बालको नगर। बालको में सितंबर 2008 बैच के कर्मचारियों ने 18 वर्षों की सेवा पूरी होने पर वार्षिक मिलन समारोह का आयोजन किया। समारोह में बैच के 35 कर्मियों ने हिस्सा लिया और अपने बालको में बिताए 18 साल के अनुभव साझा किए। उपलब्धियां और चुनौतियों को सामने रखा। बालको कर्मियों ने अपने सेवाकाल के कई यादगार किस्से सुनाए। पुराने साथियों से मिलकर माहौल उत्साह से भरा रहा।
इस आयोजन से कर्मियों के बीच आपसी स्नेह, सौहार्द, भाईचारा, एकजुटता मजबूत हुई। समारोह में राजशेखर साहू, गगन गुप्ता, टिकेश्वर चेलक, अमित शर्मा, कमलेश बोहरपी, ज्ञानेंद्र, सुमन यादव, देवेंद्र प्रताप, सुमित सोनी, कुंदन, आशीष शुक्ला, आशीष दुबे, मधुरेश श्रीवास्तव, संजय न नारवानी, जितेंद्र द्विवेदी, अभिषेक साहू, दुर्गेश साहू, पूर्णानंद साहू, केशव साहू, हेमंत वर्मा, अरविंद, विकास गुरुदीवान, लेखराज लोधी, प्रकाश ठाकुर, प्रकाश रघुवंशी समेत अन्य उपस्थित थे।
कोरबा/कटघोरा। पेट्रोल-डीजल से भरे टैंकर में गुरुवार को आग की लपटें उठी तो विस्फोट की आशंका पर आसपास घरों को खाली कराया गया। हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लेने से बड़ा हादसा टल गया। लेकिन कटघोरा- अंबिकापुर हाइवे पर लगभग 2 घंटे आवाजाही थमी रही।
कोरबा से तेल से भरी टैंकर कटघोरा-अंबिकापुर नेशनल हाइवे के रास्ते से वाड्रफनगर जाने रवाना हुआ। बांगो थाना क्षेत्र के गुरसिया ढाबा के पास टैंकर चालक ने खाना खाने वाहन रोका। कुछ देर बाद वहां से चालक आगे बढ़ने टैंकर स्टार्ट किया, तभी बैटरी में चिंगारी उठी और केबिन तक आग की लपटें उठने लगी। संभवत: शार्ट सर्किट से आग वाहन तक फैली होगी। टैंकर में 12 हजार लीटर तेल भरने की कैपिसिटी है। सूचना पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। हाइवे पर आवाजाही को रोकवाया। साथ ही आसपास के घरों को खाली कराया गया। इस तरह सुरक्षा के जरूरी ऐहतियात बरते गए।
सूचना पर बांगो, कटघोरा नगर पालिका, सीएसईबी कोरबा की दमकल टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद दमकल कर्मियों ने पानी और फोम से आग बुझाई। इसमें करीब दो घंटे लग गए। आग पर काबू पा लेने के बाद हाइवे पर आवाजाही सामान्य हुई। एनएएआई की टीम को सूचना देने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंची। कटघोरा-अंबिकापुर हाइवे के साथ बायपास पर दो साल के भीतर वाहनों में आग लगने की यह तीसरी घटना है। इसी महीने कटघोरा-बायपास के हुकरा क्षेत्र में एक तेज रफ्तार 407 वाहन रोड किनारे पेड़ से टकराया। इसके बाद वाहन में आग लगने की घटना सामने आई। चालक ने कूदकर अपनी जान बचाई थी। साल 2024 में 28-29 दिसंबर की रात अंबिकापुर-कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बांगो थाना क्षेत्र के चोटिया टोल प्लाजा के पास ट्रक और कार में भिड़ंत हो गई थी। इस दुर्घटना में ट्रक पलट गया, वहीं कार सवार दो युवकों की वाहन में आग लगने पर जलकर मौत हो गई।